बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधियों ने सम्राट चौधरी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य में जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को 'सैटेलाइट टाउनशिप' और 'ग्रीन फील्ड' के नाम पर बंद करके तथा अब अंचल की भूमिका शामिल करके इसे और अधिक जटिल बना रही है, जिससे यह 'घूस का घोंसला' बन जाएगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार ने पहले राज्य के दर्जनों जिलों के सैकड़ों गांवों और नगर निकाय के वार्डों में जमीन रजिस्ट्री को एक साल के लिए रोक दिया था, और अब संपूर्ण बिहार में रजिस्ट्री विभाग के साथ-साथ अंचल को भी जमीन रजिस्ट्रीकरण पद्धति में शामिल करके बिहारवासियों को बड़े संकट में डाल दिया है। नेताओं के अनुसार, 'ग्रीन लैंड सैटेलाइट टाउनशिप' के अंतर्गत आने वाले गांवों और वार्डों के गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार पहले से ही अपनी बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई या गंभीर बीमारियों जैसे आवश्यक कार्यों के लिए जमीन बेचने में असमर्थ होने के कारण परेशान थे। अब रजिस्ट्री ऑफिस के साथ-साथ अंचल अधिकारी और उनके कार्यालय को जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में शामिल करने और उनसे रिपोर्ट लेने की पद्धति से लोगों को और अधिक संकट, देरी और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम किसान-मजदूरों और आमजनों को परेशान करने वाला है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जमीन रजिस्ट्री, जिसे 'विक्रय मनोबंध पत्र' कहा जाता है, वह जमीन का 'हकियत' (वास्तविक मालिकाना हक) नहीं है, न ही अंचल या म्युनिसिपल रसीदें हकियत दर्शाती हैं। ये सभी केवल रजिस्ट्रेशन और टैक्स संबंधी कागज़ात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन कागज़ातों का 'हौआ' बनाकर किसान-मजदूरों और आमजनों को तंग और तबाह करना चाहती है। नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को और जटिल बनाने के बजाय उसे आसान किया जाए, ताकि आम जनता को जमीन रजिस्ट्री के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें और पहले की तरह आसानी से कार्य संपन्न हो सकें। कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार जल्द से जल्द जमीन खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर लगी रोक को हटाती नहीं है और अंचल की भूमिका समाप्त नहीं करती है, तो पार्टी बाध्य होकर जिला रजिस्ट्रार (जिलाधिकारी कार्यालय) और उप-रजिस्ट्रार (रजिस्ट्री ऑफिस कार्यालय) का घेराव करेगी। यह बात बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि प्रो विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, दामोदर गोस्वामी, विपिन बिहारी सिन्हा, इंटक जिला महासचिव टिंकू गिरी, विशाल कुमार, मोहम्मद शामिम आलम, और मुन्ना मांझी सहित अन्य नेताओं ने कही।
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधियों ने सम्राट चौधरी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य में जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को 'सैटेलाइट टाउनशिप' और 'ग्रीन फील्ड' के नाम पर बंद करके तथा अब अंचल की भूमिका शामिल करके इसे और अधिक जटिल बना रही है, जिससे यह 'घूस का घोंसला' बन जाएगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार ने पहले राज्य के दर्जनों जिलों के सैकड़ों गांवों और नगर निकाय के वार्डों में जमीन रजिस्ट्री को एक साल के लिए रोक दिया था, और अब संपूर्ण बिहार में रजिस्ट्री विभाग के साथ-साथ अंचल को भी जमीन रजिस्ट्रीकरण पद्धति में शामिल करके बिहारवासियों को बड़े संकट में डाल दिया है। नेताओं के अनुसार, 'ग्रीन लैंड सैटेलाइट टाउनशिप' के अंतर्गत आने वाले गांवों और वार्डों के गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार पहले से ही अपनी बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई या गंभीर बीमारियों जैसे आवश्यक कार्यों के लिए जमीन बेचने में असमर्थ होने के कारण परेशान थे। अब रजिस्ट्री ऑफिस के साथ-साथ अंचल अधिकारी और उनके कार्यालय को जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में शामिल करने और उनसे रिपोर्ट लेने की पद्धति से लोगों को और अधिक संकट, देरी और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम किसान-मजदूरों और आमजनों को परेशान करने वाला है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जमीन रजिस्ट्री, जिसे 'विक्रय मनोबंध पत्र' कहा जाता है, वह जमीन का 'हकियत' (वास्तविक मालिकाना हक) नहीं है, न ही अंचल या म्युनिसिपल रसीदें हकियत दर्शाती हैं। ये सभी केवल रजिस्ट्रेशन और टैक्स संबंधी कागज़ात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन कागज़ातों का 'हौआ' बनाकर किसान-मजदूरों और आमजनों को तंग और तबाह करना चाहती है। नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को और जटिल बनाने के बजाय उसे आसान किया जाए, ताकि आम जनता को जमीन रजिस्ट्री के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें और पहले की तरह आसानी से कार्य संपन्न हो सकें। कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार जल्द से जल्द जमीन खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर लगी रोक को हटाती नहीं है और अंचल की भूमिका समाप्त नहीं करती है, तो पार्टी बाध्य होकर जिला रजिस्ट्रार (जिलाधिकारी कार्यालय) और उप-रजिस्ट्रार (रजिस्ट्री ऑफिस कार्यालय) का घेराव करेगी। यह बात बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि प्रो विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, दामोदर गोस्वामी, विपिन बिहारी सिन्हा, इंटक जिला महासचिव टिंकू गिरी, विशाल कुमार, मोहम्मद शामिम आलम, और मुन्ना मांझी सहित अन्य नेताओं ने कही।
- गया नगर निगम का सशक्त स्थाई समिति का चुनाव आज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें कुल सात सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में थे। इस चुनाव में पांच पुराने सदस्यों ने अपनी सीट बरकरार रखी, जबकि दो नए चेहरों ने समिति में अपनी जगह बनाई। दोबारा जीत हासिल करने वाले सदस्यों में पूर्व उप महापौर ओंकारनाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव, विनोद प्रसाद यादव, चुन्नू खान, तबस्सुम परवीन और मनोज कुमार शामिल हैं। वहीं, सारिका वर्मा और उपेंद्र कुमार पहली बार समिति के सदस्य चुने गए। इस चुनाव में पुराने चेहरों का दबदबा फिर से कायम रहा, साथ ही दो नए सदस्यों की भी समिति में एंट्री हुई।1
- एक सरकारी स्कूल की मैडम पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया गया है कि उनके पति ने अपनी जमीन बेचकर उन्हें शिक्षक बनाया था, लेकिन जैसे ही मैडम को सरकारी नौकरी मिली, उन्होंने अपने पति को छोड़कर एक बॉयफ्रेंड के साथ घूमना शुरू कर दिया।1
- बिहार के गया जिले के आमस में एक शिक्षक द्वारा 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित तौर पर 'गं//दा काम' करने का मामला सामने आया है। इस शर्मनाक घटना का पता चलने पर गांव वाले सक्रिय हुए और उन्होंने आरोपी शिक्षक को तत्काल पकड़ लिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने बिना देर किए शिक्षक को पुलिस के हवाले कर दिया, जिसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।1
- नालंदा जिले के इस्लामपुर प्रखंड में, बिजली चले जाने के बाद नल-जल योजना से पानी की आपूर्ति बाधित होने के कारण स्थानीय टोला-मोहल्लों के निवासियों को पेयजल की भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार, गाँव में चापाकल (हैंडपंप) भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बिजली न होने पर पानी की समस्या और भी गंभीर हो जाती है।1
- एक मामले में, एक BPSC शिक्षिका के पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। इस घटनाक्रम के बाद, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस पूरे प्रकरण में आगे क्या कदम उठाती है और किस तरह की कार्रवाई करती है।1
- गया शहर के ब्रह्मयोनि स्थित केशव नगर में दया प्रकाश सरस्वती विद्या मंदिर के पास लगभग 8 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से रोप वे का निर्माण कार्य जोरों पर है। यह परियोजना ब्रह्मयोनि पर्वत पर श्रद्धालुओं की पहुँच को सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। वर्तमान में ब्रह्मयोनि पर्वत पर चढ़ने के लिए 440 सीढ़ियाँ मौजूद हैं, लेकिन इस रोप वे के निर्माण से मातृयोनि गुफा, ब्रह्मयोनि गुफा, गया शीशा बौद्ध स्तूप और सावित्री माता मंदिर जैसे महत्वपूर्ण दार्शनिक स्थलों तक पहुँचना श्रद्धालुओं के लिए काफी आसान हो जाएगा। इस रोप वे को गया की पहचान और ब्रह्मयोनि की शान बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।1
- लूटूआ के जंगल में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है, जहाँ झाड़ियों में छिपाकर रखे गए दो देसी कट्टे और दो जिंदा .315 बोर के कारतूस बरामद किए गए हैं। इस समय रहते की गई कार्रवाई से सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की एक बड़ी साजिश को विफल कर दिया है।1