माता-पिता बाहर कमाने गए थे तो नाना के यहां आकर रह रह रही थीं 13 वर्ष 2 माह की ना माता-पिता बाहर कमाने गए थे तो नाना के यहां आकर रह रह रही थीं 13 वर्ष 2 माह की नाबालिक बालिका घर से हुई लापता चकरभाठा थाना में अपहरण का मामला दर्ज शुक्रवार की सुबह 11:00 बजे चकरभाठा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार चकरभाटा थाना क्षेत्र के एक 60 वर्ष के प्रार्थी ने हमारा अपनी बेटी दामाद के साथ गुरुवार को थाना उपस्थिता का कर रिपोर्ट दर्ज कराया कि मैं चकरभाठा थाना क्षेत्र के एक ग्राम पंचायत में रहता हूं घर में ही खाई खजाना का दुकान चलाता हूं मेरी लड़की विवाह होकर पोड़ी डलहा थाना अकलतरा में शादी होकर गई हुई है मेरी बेटी दामाद विगत चार माह से कमाने खाने अपने पांच बच्चों को अपने सास ससुर के साथ गांव में छोड़कर तमिलनाडु चले गए थे तो घर में उसके साथ ससुर भाई लोग आपस में लड़ाई झगड़ा कर रहे थे तब मैं अपने बेटी के पांचो बच्चों को जो छोटे-छोटे हैं अपना लड़का को भेज कर ग्राम पोड़ी दलहा से अपने घर चकरभाठा थाना क्षेत्र एक सप्ताह पूर्व लेकर आया था की बड़ी नतनीन जिसकी उम्र 13 वर्ष दो माह है जो घर से दिनांक 20.9.2026 को दोपहर 12:00 बजे बिन बताए कहीं चली गई है मेरी नाबालिक नतनीन का आसपास रिश्तेदारों में जानपहचान के लोगों में पूछताछ करने पर पता नहीं चला तो बेटी दामाद को फोन करके बुलाया हु मेरी नतनीन अपने साथ मोबाइल रखी है मुझे आशंका है कि मेरी नाबालिक नतनीन को कोई अज्ञात व्यक्ति बहलाफुसला कर अपहरण कर कर ले गया है जिसका हुलिया कद 5 फीट रंग गोरी चेहरा गोल बाल काला शरीर सामान्य है छत्तीसगढ़ी भाषा बोलता है लोअर टीशर्ट पहनी है सूचक की सूचना पर पुलिस ने गुम इंसान और अपराध धारा 173 (2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर लिया है और मामले की जांच जारी है आपके बता दे कि इन दोनों नाबालिग बालीका बालिक हो चुकी युवतियों और शादीशुदा महिलाओं के घर से भागने के मामले बहुत ज्यादा बढ़े हैं जिसका मुख्य कारण मोबाइल तो है ही लेकिन साथ-साथ कई मामलों में देखा गया है कि जिन घरों में माता या पिता नहीं रहते घर की आर्थिक स्थिति खराब होती है पिता शराबी किस्म का होता है या माता-पिता आए दिन लड़ाई झगड़ा करते हैं ऐसे घरों की नाबालिक बालिका युवतियों और शादीशुदा महिलाए बहुत जल्द किसी के बहकावे में आकर अपने जीवन को सुरक्षित करने के उद्देश्य से घर छोड़कर भाग जाती हैं जिसका परिणाम या होता है कि जब वह पकड़े जाते हैं तो उन्हें भागने वाले को जेल की हवा खानी पड़ती है और घर परिवार को बदनामी के दंश झेलने पड़ता है
माता-पिता बाहर कमाने गए थे तो नाना के यहां आकर रह रह रही थीं 13 वर्ष 2 माह की ना माता-पिता बाहर कमाने गए थे तो नाना के यहां आकर रह रह रही थीं 13 वर्ष 2 माह की नाबालिक बालिका घर से हुई लापता चकरभाठा थाना में अपहरण का मामला दर्ज शुक्रवार की सुबह 11:00 बजे चकरभाठा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार चकरभाटा थाना क्षेत्र के एक 60 वर्ष के प्रार्थी ने हमारा अपनी बेटी दामाद के साथ गुरुवार को थाना उपस्थिता का कर रिपोर्ट दर्ज कराया कि मैं चकरभाठा थाना क्षेत्र के एक ग्राम पंचायत में रहता हूं घर में ही खाई खजाना का दुकान चलाता हूं मेरी लड़की विवाह होकर पोड़ी डलहा थाना अकलतरा में शादी होकर गई हुई है मेरी बेटी दामाद विगत चार माह से कमाने खाने अपने पांच बच्चों को अपने सास ससुर के साथ गांव में छोड़कर तमिलनाडु चले गए थे तो घर में उसके साथ ससुर भाई लोग आपस में लड़ाई झगड़ा कर रहे थे तब मैं अपने बेटी के पांचो बच्चों को जो छोटे-छोटे हैं अपना लड़का को भेज कर ग्राम पोड़ी दलहा से अपने घर चकरभाठा थाना क्षेत्र एक सप्ताह पूर्व लेकर आया था की बड़ी नतनीन जिसकी उम्र 13 वर्ष दो माह है जो घर से दिनांक 20.9.2026 को दोपहर 12:00 बजे बिन बताए कहीं चली गई है मेरी नाबालिक नतनीन का आसपास रिश्तेदारों में जानपहचान के लोगों में पूछताछ करने पर पता नहीं चला तो बेटी दामाद को फोन करके बुलाया हु मेरी नतनीन अपने साथ मोबाइल रखी है मुझे आशंका है कि मेरी नाबालिक नतनीन को कोई अज्ञात व्यक्ति बहलाफुसला कर अपहरण कर कर ले गया है जिसका हुलिया कद 5 फीट रंग गोरी चेहरा गोल बाल काला शरीर सामान्य है छत्तीसगढ़ी भाषा बोलता है लोअर टीशर्ट पहनी है सूचक की सूचना पर पुलिस ने गुम इंसान और अपराध धारा 173 (2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर लिया है और मामले की जांच जारी है आपके बता दे कि इन दोनों नाबालिग बालीका बालिक हो चुकी युवतियों और शादीशुदा महिलाओं के घर से भागने के मामले बहुत ज्यादा बढ़े हैं जिसका मुख्य कारण मोबाइल तो है ही लेकिन साथ-साथ कई मामलों में देखा गया है कि जिन घरों में माता या पिता नहीं रहते घर की आर्थिक स्थिति खराब होती है पिता शराबी किस्म का होता है या माता-पिता आए दिन लड़ाई झगड़ा करते हैं ऐसे घरों की नाबालिक बालिका युवतियों और शादीशुदा महिलाए बहुत जल्द किसी के बहकावे में आकर अपने जीवन को सुरक्षित करने के उद्देश्य से घर छोड़कर भाग जाती हैं जिसका परिणाम या होता है कि जब वह पकड़े जाते हैं तो उन्हें भागने वाले को जेल की हवा खानी पड़ती है और घर परिवार को बदनामी के दंश झेलने पड़ता है
- गणेश विसर्जन में चाकूबाजी,,फिर उठे सुरक्षा पर सवाल,,,,1
- बिलासपुर में DJ पर छात्राओं का डांस, वीडियो वायरल स्कूल के प्रधान पाठक को नोटिस बिलासपुर के मस्तूरी विकासखंड के मुकुंदपुर शासकीय स्कूल में छात्राओं के DJ पर डांस का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू की है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने प्रधान पाठक को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा है। विभाग ने परीक्षा के दौरान ऐसी गतिविधि को शासन के निर्देशों के विपरीत और अनुशासनहीनता माना है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।1
- बिलासपुर स्थित माधव ट्रेडर्स में नकली सामान बेचने का आरोप! आरोप के बाद जांच अधिकारी पहुंचे और सैंपल लेकर गये जांच करने जानिए पूरा मामला क्या है.........1
- लुतरा शरीफ में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 68वां सालाना उर्स-ए-पाक लुतरा शरीफ में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 68वां सालाना उर्स-ए-पाक बिलासपुर में अकीदत के साथ मनाया जाएगा उर्स, देशभर से बड़ी संख्या में जायरीनों के पहुंचने की उम्मीद; कोरबा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी गई कार्यक्रम की जानकारी बिलासपुर/कोरबा। बिलासपुर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल लुतरा शरीफ में शहंशाह-ए-छत्तीसगढ़ हज़रत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह रहमतुल्लाहि अलैह का 68वां सालाना उर्स-ए-पाक 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक अकीदत और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। उर्स की तैयारियों, कार्यक्रमों और व्यवस्थाओं की जानकारी देने के लिए कोरबा में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें दरगाह इंतज़ामिया कमेटी की ओर से उर्स के आयोजन को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई। कमेटी के अनुसार पांच दिवसीय उर्स के दौरान विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 28 सितंबर को परचम कुशाई के साथ उर्स का आगाज होगा। इसी दिन रात में ऑल इंडिया नातिया मुशायरा आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से शायर एवं नातख्वां शामिल होंगे। 29 सितंबर को शाही संदल सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 30 सितंबर को महफिले समा और कव्वाली का आयोजन होगा। वहीं 1 अक्टूबर की रात प्रसिद्ध कव्वालों द्वारा कव्वाली की शानदार महफिल सजाई जाएगी। उर्स के अंतिम दिन 2 अक्टूबर को कुल शरीफ की फातिहा के साथ उर्स-ए-पाक का समापन होगा। दरगाह इंतज़ामिया कमेटी ने बताया कि उर्स में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से बड़ी संख्या में जायरीनों के पहुंचने की उम्मीद है। इसे देखते हुए जायरीनों की सुविधा, आवागमन, सुरक्षा, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। कमेटी ने बताया कि उर्स के दौरान आने वाले सभी जायरीनों को बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए संबंधित स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। उर्स को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। दरगाह इंतज़ामिया कमेटी के अध्यक्ष हाजी इकबाल हक साहब एवं खजांची फैज़ान अहमद शेबू ने सभी अकीदतमंदों से उर्स-ए-पाक में शामिल होकर फातिहा और दुआ में शरीक होने की अपील की है। इस अवसर पर कमेटी के सदस्य शेख अब्दुल गफ्फार, हाजी अनवर उल हक, मुशर्रफ भाई, हाजी अब्दुल करीम बेग, अब्दुल शाहनवाज मेमन, जावेद मेमन, सज्जाद कुरैशी खादिम उस्मान खान सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम की मीडिया व्यवस्था की जिम्मेदारी मीडिया प्रभारी शौकत हबीब द्वारा संभाली जा रही है। दरगाह इंतज़ामिया कमेटी4
- 39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त 39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का था मामला, बचाव पक्ष ने पुलिस की तलाशी-जब्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल; कसडोल थाने का CCTV फुटेज पेश नहीं होने और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में उठे महत्वपूर्ण बिंदु बिलासपुर। 39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (NDPS) से संबंधित न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मामला थाना कसडोल क्षेत्र में स्कॉर्पियो और जुपिटर वाहन से गांजा बरामद किए जाने से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष की ओर से बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को आधार बनाते हुए आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया गया, वहीं बचाव पक्ष ने तलाशी, जब्ती और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा पुलिस द्वारा अपनाई गई कार्रवाई की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार किया गया। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि केवल बरामदगी का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभियोजन को कानून के अनुरूप की गई तलाशी एवं जब्ती तथा उससे जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य को विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से स्थापित करना आवश्यक है। स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का दावा प्रकरण के अनुसार पुलिस कार्रवाई के दौरान स्कॉर्पियो तथा जुपिटर वाहन से कुल 39.770 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। बरामदगी के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों के विरुद्ध NDPS अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी। मामला न्यायालय पहुंचने के बाद अभियोजन की ओर से पुलिस अधिकारियों एवं अन्य संबंधित गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन का उद्देश्य यह साबित करना था कि बरामद मादक पदार्थ आरोपियों के कब्जे से मिला था और पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई के कई पहलुओं पर सवाल उठाए और कहा कि मामले में तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाईं। कसडोल थाना परिसर का CCTV फुटेज नहीं हो सका पेश मामले की सुनवाई के दौरान थाना कसडोल के CCTV फुटेज को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आया। बचाव पक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए CCTV फुटेज का मुद्दा उठाया गया। बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि संबंधित समय का CCTV फुटेज उपलब्ध था, तो उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, ताकि पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों और आरोपियों को थाने लाए जाने अथवा कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। लेकिन सुनवाई के दौरान संबंधित CCTV फुटेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सका। बचाव पक्ष ने इसी बिंदु को अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल NDPS मामलों में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है। इसी को आधार बनाते हुए बचाव पक्ष ने मामले में अपनाई गई तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मादक पदार्थ की बरामदगी का दावा करने के साथ-साथ अभियोजन को यह भी स्पष्ट करना होता है कि तलाशी और जब्ती किस परिस्थिति में हुई, कौन-कौन लोग मौजूद थे, बरामदगी की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई तथा जब्त सामग्री को सुरक्षित रखने और आगे भेजने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जहां अभियोजन की कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों की स्वतंत्र एवं ठोस पुष्टि नहीं हो पाती, वहां केवल पुलिस दस्तावेजों के आधार पर आरोप को संदेह से परे साबित मानना उचित नहीं होगा। अभियोजन के साक्ष्यों पर न्यायालय ने किया विचार मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए आपत्तियों पर विचार किया। आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है। इस मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुसार संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय दिया। रामनाथ पटेल को मिली जमानत प्रकरण में आरोपी रामनाथ पटेल को न्यायालय से जमानत भी मिली। न्यायालय के आदेश के बाद मामले में आरोपियों को राहत प्राप्त हुई। यह फैसला NDPS मामलों में पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है। बचाव पक्ष ने कार्रवाई की पारदर्शिता पर उठाए सवाल बचाव पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र चंद्राकर ने मामले में पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक मामले में बरामदगी की कहानी के साथ-साथ कार्रवाई की प्रत्येक महत्वपूर्ण कड़ी का विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से स्थापित होना जरूरी है। अधिवक्ता चंद्राकर के अनुसार, मामले में CCTV फुटेज पेश नहीं होने, तलाशी-जब्ती की प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं तथा अन्य परिस्थितियों के कारण अभियोजन की कहानी को संदेह से परे स्थापित करने में कठिनाई रही। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषमुक्त किया है। NDPS मामलों में प्रक्रिया का महत्व कानूनी जानकारों के अनुसार NDPS अधिनियम से जुड़े मामलों में मादक पदार्थ की बरामदगी जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी तलाशी, जब्ती, सीलिंग, सुरक्षित अभिरक्षा और साक्ष्य की निरंतरता से जुड़ी प्रक्रिया भी होती है। यदि अभियोजन किसी मामले में आरोप सिद्ध करना चाहता है तो उसे बरामदगी की परिस्थितियों के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य की विश्वसनीयता भी न्यायालय के समक्ष स्थापित करनी होती है। इस मामले में न्यायालय के समक्ष इन्हीं प्रक्रियात्मक एवं साक्ष्य संबंधी पहलुओं पर बचाव पक्ष ने जोर दिया। उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं माना जा सकता। न्यायालय के फैसले से सामने आया महत्वपूर्ण कानूनी पहलू 39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी जैसे गंभीर आरोप वाले मामले में आरोपियों का दोषमुक्त होना न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य की भूमिका को रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाया गया आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, आपराधिक न्याय व्यवस्था में दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन को निर्धारित कानूनी कसौटी पर साक्ष्य प्रस्तुत करना होता है। इस प्रकरण में न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं पाया। इसी आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त किया गया। फैसला पुलिस कार्रवाई पर भी महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया इस मामले का फैसला केवल आरोपियों को मिली राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जांच और अभियोजन की प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाता है। विशेषकर ऐसे मामलों में जहां बरामदगी को मुकदमे का मुख्य आधार बनाया जाता है, वहां तलाशी और जब्ती की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। कसडोल थाना परिसर के CCTV फुटेज का न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हो पाना भी सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तर्कों का हिस्सा बना। इसके अलावा तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर भी न्यायालय ने विचार किया। आरोप सिद्ध नहीं होने पर मिला दोषमुक्ति का लाभ अंततः न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का आदेश दिया गया। मामले में रामनाथ पटेल को जमानत मिलने से उन्हें भी न्यायिक राहत मिली है। यह खबर न्यायालय के निर्णय, उपलब्ध मामले की जानकारी और बचाव पक्ष की ओर से रखे गए तर्कों पर आधारित है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को यहां अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बाद संबंधित आरोपों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।1
- अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के तहत छात्रावृत्ति से लाभान्वित छात्राओं ने कलेक्टर -एसपी से की मुलाक़ात* *सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी हेतु मिली महत्वपूर्ण टिप्स* ताराचंद कठोत्रे।। बलौदाबाज़ार,25 अगस्त 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने राज्य शासन द्वारा प्रदेश में अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप योजना प्रारम्भ किया गया है। इस योजना के तहत विगत वर्ष छात्रावृत्ति प्राप्त डी.के.कॉलेज बलौदाबाजार के छात्राओं ने शुक्रवार को कलेक्टर कुलदीप शर्मा एवं एसपी गौरव राय से मुलाक़ात की औऱ छात्रावृत्ति शुरू करने पर राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने छात्राओं से छात्रावृत्ति के तहत मिली वित्तीय साहयता राशि का उपयोग,पढ़ाई एवं भविष्य की तैयारी के सम्बन्ध मे जानकारी ली। छात्रों ने बताया कि इस राशि से कॉलेज के फीस भरने के साथ ही कॉलेज आने -जाने मे बस के किराया का भी काम आया। इस राशि से बहुत मदद मिली है। कलेक्टर ने सभी छात्राओं से कहा कि इस छात्रावृत्ति योजना के समबंध मे अपने आस -पास के लोगों को भी बताएं ताकि अधिक से अधिक छात्रों को लाभ मिल सके। कलेक्टर श्री शर्मा ने यूपीएससी की तैयारी के सम्बन्ध मे बताया कि दृढ निश्चय लेकर लक्ष्य तय करें,इरादा मजबूत हो लेकिन किसी दबाव मे आगे न बढ़े। पढ़ाई बिलकुल मन लगाकर करें,ध्यान मे कोई भटकाव न हो।उन्होंने कहा कि असफलता से घबरायें नहीं क्योंकि यह मजबूती से आगे बढ़ने का साहस देता है। एसपी गौरव राय ने कहा कि आज डिजिटल युग का दौर है जिसमें सदुपयोग करने के फायदे है लेकिन यह ध्यान भटकाता है यह भी ध्यान रखना होगा। उन्होंने छात्राओं को भविष्य की अग्रिम बधाई औऱ शुभकामनायें दीं। उल्लेखनीय है कि अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप के तहत ज़रूरतमंद छात्राओं को कॉलेज की शिक्षा हासिल करने के लिए मदद के तौर पर वार्षिक 30,000 रुपयों की सहायता दी जाती है। यह स्कॉलरशिप छात्राओं के पहले ग्रैजुएशन के लिए डिग्री या डिप्लोमा पूरा होने तक उपलब्ध कराई जाती है जिसकी अधिकतम अवधि 5 वर्ष होगी। किसी भी सरकारी स्कूल से 10वीं और 12वीं कक्षा नियमित छात्रा के रूप में उत्तीर्ण की हो। छात्रा ने किसी मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम (अवधि 2 से 5 वर्ष) के प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया हो। यह प्रवेश भारत में किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी या विश्वसनीय एवं प्रामाणिक निजी कॉलेज या विश्वविद्यालय हो सकता है। क्रमांक /1223
- मोहभट्ठा स्थित भगवान स्यंभु शंकर जी के मंदिर परिसर में सेवा संकल्प अभियान के तहत मोहभट्ठा स्थित भगवान स्यंभु शंकर जी के मंदिर परिसर में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित “स्वच्छता ही सेवा 2026” कार्यक्रम में सम्मिलित हुवे बिल्हा विधायक गुरुवार की रात 9:00 बजे बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक जी के निज सचिव से मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार को बिल्हा विधानसभा अंतर्गत मोहभट्ठा स्थित भगवान स्यंभु शंखर जी के मंदिर परिसर में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित “स्वच्छता ही सेवा 2026” कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक सम्मिलित हुवे इस अवसर पर विधायक श्री कौशिक ने कहा की सेवा संकल्प अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाने, जनभागीदारी को बढ़ावा देने और सेवा की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास है। इसी भावना के साथ स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान में सहभागिता करने का अवसर मिला स्वच्छ एवं सुंदर वातावरण हमारे स्वास्थ्य, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचायक है। जब हम स्वयं स्वच्छता के प्रति सजग होते हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं, तब स्वच्छता एक व्यक्तिगत प्रयास से आगे बढ़कर जनअभियान का रूप लेती है। आइए, सेवा, स्वच्छता और सहभागिता के इस संकल्प को निरंतर आगे बढ़ाएं और अपने गांव, नगर एवं क्षेत्र को स्वच्छ, सुंदर, स्वस्थ एवं विकसित बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। सेवा का संकल्प, स्वच्छता का प्रण — मिलकर बनाएंगे स्वच्छ एवं सुंदर बिल्हा विधानसभा इस दौरान क्रेड़ा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी नगर पंचायत बिल्हा अध्यक्ष उपाध्यक्ष पाषर्दगढ़ एल्डर पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता और अमेजॉन उपस्थित रहे1
- छात्रों की महारैली से गूंजा बिलासपुर, कलेक्टर को ज्ञापन देने पर अड़े छात्र बिलासपुर में CGPSC छात्रों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शुक्रवार को महारैली निकाली। बड़ी संख्या में छात्र गांधी चौक से पैदल मार्च करते हुए नेहरू चौक पहुंचे। इस दौरान छात्रों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।1
- 39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त 39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का था मामला, बचाव पक्ष ने पुलिस की तलाशी-जब्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल; कसडोल थाने का CCTV फुटेज पेश नहीं होने और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में उठे महत्वपूर्ण बिंदु बिलासपुर। 39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (NDPS) से संबंधित न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मामला थाना कसडोल क्षेत्र में स्कॉर्पियो और जुपिटर वाहन से गांजा बरामद किए जाने से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष की ओर से बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को आधार बनाते हुए आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया गया, वहीं बचाव पक्ष ने तलाशी, जब्ती और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा पुलिस द्वारा अपनाई गई कार्रवाई की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार किया गया। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि केवल बरामदगी का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभियोजन को कानून के अनुरूप की गई तलाशी एवं जब्ती तथा उससे जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य को विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से स्थापित करना आवश्यक है। स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का दावा प्रकरण के अनुसार पुलिस कार्रवाई के दौरान स्कॉर्पियो तथा जुपिटर वाहन से कुल 39.770 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। बरामदगी के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों के विरुद्ध NDPS अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी। मामला न्यायालय पहुंचने के बाद अभियोजन की ओर से पुलिस अधिकारियों एवं अन्य संबंधित गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन का उद्देश्य यह साबित करना था कि बरामद मादक पदार्थ आरोपियों के कब्जे से मिला था और पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई के कई पहलुओं पर सवाल उठाए और कहा कि मामले में तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाईं। कसडोल थाना परिसर का CCTV फुटेज नहीं हो सका पेश मामले की सुनवाई के दौरान थाना कसडोल के CCTV फुटेज को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आया। बचाव पक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए CCTV फुटेज का मुद्दा उठाया गया। बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि संबंधित समय का CCTV फुटेज उपलब्ध था, तो उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, ताकि पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों और आरोपियों को थाने लाए जाने अथवा कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। लेकिन सुनवाई के दौरान संबंधित CCTV फुटेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सका। बचाव पक्ष ने इसी बिंदु को अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल NDPS मामलों में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है। इसी को आधार बनाते हुए बचाव पक्ष ने मामले में अपनाई गई तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मादक पदार्थ की बरामदगी का दावा करने के साथ-साथ अभियोजन को यह भी स्पष्ट करना होता है कि तलाशी और जब्ती किस परिस्थिति में हुई, कौन-कौन लोग मौजूद थे, बरामदगी की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई तथा जब्त सामग्री को सुरक्षित रखने और आगे भेजने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जहां अभियोजन की कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों की स्वतंत्र एवं ठोस पुष्टि नहीं हो पाती, वहां केवल पुलिस दस्तावेजों के आधार पर आरोप को संदेह से परे साबित मानना उचित नहीं होगा। अभियोजन के साक्ष्यों पर न्यायालय ने किया विचार मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए आपत्तियों पर विचार किया। आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है। इस मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुसार संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय दिया। रामनाथ पटेल को मिली जमानत प्रकरण में आरोपी रामनाथ पटेल को न्यायालय से जमानत भी मिली। न्यायालय के आदेश के बाद मामले में आरोपियों को राहत प्राप्त हुई। यह फैसला NDPS मामलों में पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है। बचाव पक्ष ने कार्रवाई की पारदर्शिता पर उठाए सवाल बचाव पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र चंद्राकर ने मामले में पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक मामले में बरामदगी की कहानी के साथ-साथ कार्रवाई की प्रत्येक महत्वपूर्ण कड़ी का विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से स्थापित होना जरूरी है। अधिवक्ता चंद्राकर के अनुसार, मामले में CCTV फुटेज पेश नहीं होने, तलाशी-जब्ती की प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं तथा अन्य परिस्थितियों के कारण अभियोजन की कहानी को संदेह से परे स्थापित करने में कठिनाई रही। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषमुक्त किया है। NDPS मामलों में प्रक्रिया का महत्व कानूनी जानकारों के अनुसार NDPS अधिनियम से जुड़े मामलों में मादक पदार्थ की बरामदगी जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी तलाशी, जब्ती, सीलिंग, सुरक्षित अभिरक्षा और साक्ष्य की निरंतरता से जुड़ी प्रक्रिया भी होती है। यदि अभियोजन किसी मामले में आरोप सिद्ध करना चाहता है तो उसे बरामदगी की परिस्थितियों के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य की विश्वसनीयता भी न्यायालय के समक्ष स्थापित करनी होती है। इस मामले में न्यायालय के समक्ष इन्हीं प्रक्रियात्मक एवं साक्ष्य संबंधी पहलुओं पर बचाव पक्ष ने जोर दिया। उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं माना जा सकता। न्यायालय के फैसले से सामने आया महत्वपूर्ण कानूनी पहलू 39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी जैसे गंभीर आरोप वाले मामले में आरोपियों का दोषमुक्त होना न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य की भूमिका को रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाया गया आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, आपराधिक न्याय व्यवस्था में दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन को निर्धारित कानूनी कसौटी पर साक्ष्य प्रस्तुत करना होता है। इस प्रकरण में न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं पाया। इसी आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त किया गया। फैसला पुलिस कार्रवाई पर भी महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया इस मामले का फैसला केवल आरोपियों को मिली राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जांच और अभियोजन की प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाता है। विशेषकर ऐसे मामलों में जहां बरामदगी को मुकदमे का मुख्य आधार बनाया जाता है, वहां तलाशी और जब्ती की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। कसडोल थाना परिसर के CCTV फुटेज का न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हो पाना भी सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तर्कों का हिस्सा बना। इसके अलावा तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर भी न्यायालय ने विचार किया। आरोप सिद्ध नहीं होने पर मिला दोषमुक्ति का लाभ अंततः न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का आदेश दिया गया। मामले में रामनाथ पटेल को जमानत मिलने से उन्हें भी न्यायिक राहत मिली है। यह खबर न्यायालय के निर्णय, उपलब्ध मामले की जानकारी और बचाव पक्ष की ओर से रखे गए तर्कों पर आधारित है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को यहां अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बाद संबंधित आरोपों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।2