महिलाओं का कहना है कि कार्रवाई की स्थिति में उनके सामने घर और परिवार के भविष्य को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। कुछ महिलाओं ने भावुक होकर अपनी पीड़ा जाहिर की और बेहद गंभीर बातें भी कहीं। दिल्ली के सरिता विहार इलाके के अली गांव में मकानों पर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे पिछले 40 से 50 वर्षों से यहां रह रहे हैं और अब उन्हें मकान खाली करने के नोटिस दिए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें महज दो दिन का समय दिया गया है और इसके बाद बुलडोजर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। तस्वीरें दिल्ली के सरिता विहार के अली गांव की हैं, जहां मकानों पर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में भारी चिंता और आक्रोश है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले 40 से 50 वर्षों से इन मकानों में रह रहे हैं। इसी जगह उन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण किया और कई परिवारों में बच्चों की शादी-विवाह भी इसी दौरान हुए। लोगों का सवाल है कि अगर यह जमीन या मकान अवैध बताए जा रहे हैं, तो इतने वर्षों बाद कार्रवाई क्यों की जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनके मकानों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं और दो दिन के भीतर मकान खाली करने के लिए कहा गया है। महिलाओं का कहना है कि उनके सामने घर और परिवार का भविष्य बचाने का संकट खड़ा हो गया है। कुछ महिलाओं ने भावुक होकर यहां तक कहा कि वे मकान टूटते हुए नहीं देख सकतीं और अपनी जान देने जैसी बातें भी कहीं। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन पहले उनकी बात सुने, दस्तावेजों की जांच करे और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था पर स्पष्ट जानकारी दे। “हम 40-50 साल से यहां रह रहे हैं। हमारे बच्चे यहीं बड़े हुए, शादियां हुईं। अब अचानक मकान खाली करने का नोटिस दिया गया है।” “हम अपना घर नहीं टूटने देंगे। सरकार और प्रशासन हमारी बात सुने और हमें उचित समाधान दे।” फिलहाल अली गांव के लोगों में अपने आशियाने को लेकर चिंता बनी हुई है। अब देखना होगा कि प्रशासन स्थानीय लोगों की शिकायतों और दस्तावेजों की जांच के बाद क्या कदम उठाता है।
महिलाओं का कहना है कि कार्रवाई की स्थिति में उनके सामने घर और परिवार के भविष्य को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। कुछ महिलाओं ने भावुक होकर अपनी पीड़ा जाहिर की और बेहद गंभीर बातें भी कहीं। दिल्ली के सरिता विहार इलाके के अली गांव में मकानों पर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे पिछले 40 से 50 वर्षों से यहां रह रहे हैं और अब उन्हें मकान खाली करने के नोटिस दिए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें महज दो दिन का समय दिया गया है और इसके बाद बुलडोजर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। तस्वीरें दिल्ली के सरिता विहार के अली गांव की हैं, जहां मकानों पर कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में भारी चिंता और आक्रोश है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले 40 से 50 वर्षों से इन मकानों में रह रहे हैं। इसी जगह उन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण किया और कई परिवारों में बच्चों की शादी-विवाह भी इसी दौरान हुए। लोगों का सवाल है कि अगर यह जमीन या मकान अवैध बताए जा रहे हैं, तो इतने वर्षों बाद कार्रवाई क्यों की जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनके मकानों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं और दो दिन के भीतर मकान खाली करने के लिए कहा गया है। महिलाओं का कहना है कि उनके सामने घर और परिवार का भविष्य बचाने का संकट खड़ा हो गया है। कुछ महिलाओं ने भावुक होकर यहां तक कहा कि वे मकान टूटते हुए नहीं देख सकतीं और अपनी जान देने जैसी बातें भी कहीं। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन पहले उनकी बात सुने, दस्तावेजों की जांच करे और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था पर स्पष्ट जानकारी दे। “हम 40-50 साल से यहां रह रहे हैं। हमारे बच्चे यहीं बड़े हुए, शादियां हुईं। अब अचानक मकान खाली करने का नोटिस दिया गया है।” “हम अपना घर नहीं टूटने देंगे। सरकार और प्रशासन हमारी बात सुने और हमें उचित समाधान दे।” फिलहाल अली गांव के लोगों में अपने आशियाने को लेकर चिंता बनी हुई है। अब देखना होगा कि प्रशासन स्थानीय लोगों की शिकायतों और दस्तावेजों की जांच के बाद क्या कदम उठाता है।
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