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विधानसभा चुनाव: 2026 प्रस्तुत है मित्रों विधानसभा चुनाव 2026 संबंधी अपडेट। 5 राज्यों का चुनाव 2026 से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी। अगर जानकारी पसंद आई है तो लाइक शेयर और कमेंट करके फॉलो करना ना भूलें।
मोरध्वज सिंह (आयुर्वैदिक सलाहकार)
विधानसभा चुनाव: 2026 प्रस्तुत है मित्रों विधानसभा चुनाव 2026 संबंधी अपडेट। 5 राज्यों का चुनाव 2026 से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी। अगर जानकारी पसंद आई है तो लाइक शेयर और कमेंट करके फॉलो करना ना भूलें।
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- Post by Rajesh Kumar1
- हिंडौन सिटी। शहर के बयाना रोड स्थित अभय भारत पेट्रोल पंप के पास चल रहे राजस्थान मेगा ट्रेड फेयर मेले का शुक्रवार रात्रि को कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग करौली के जिलाध्यक्ष व असम विधानसभा चुनाव में जिला बारपेटा के चुनाव प्रभारी एडवोकेट अब्दुल मुगनी खान ने अवलोकन किया है। जहां मेला आयोजन कमेटी के रिंकू यादव, पत्रकार कृष्ण मुरारी राजौरा, प्रकाश सिंह बेनीवाल, धीरज बिंदल आदि ने उनका और उनकी पूरी टीम का साफा माला पहनाकर जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर एडवोकेट अब्दुल मुगनी खान ने कहा कि मेला राजस्थान की मुख्य पहचान है। ऐसे आयोजन समय-समय पर होते रहने चाहिए। जिससे हमारी संस्कृति जीवित रह सके। उन्होंने मेला कमेटी के सदस्यों और व्यवस्थाओं की सराहना की। इस दौरान अल्पसंख्यक विभाग करौली के जिला महासचिव एडवोकेट इमरान, कुरैशी समाज के जिलाध्यक्ष सद्दाम कुरैशी,अल्पसंख्यक विभाग के मीडिया प्रभारी रफीक खान, कुरैशी समाज के जिला उपाध्यक्ष आमिर कुरैशी,अज़हर काजी, निक्की पठान पत्रकार राजेंद्र जांगिड़, मनोज तिवारी आदि गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।1
- Mathura RTI ने हिला दी MVDA की नींव, सामने आए चौंकाने वाले सच1
- हिंडौन भारत पेट्रोल पंप के पास चल रहे मेले में आयोजन कमेटी ने पत्रकार और असम प्रभारी का किया स्वागत सम्मान देखें वीडियो में4
- Post by RPR NEWS TV1
- भीम जयंती आज महाबन मे धूम धाम से निकाली जय भीम जय भारत4
- Post by Rajesh Kumar1
- मथुरा में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और किसान दाने-दाने को मोहताज है। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार दोपहर एक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। 'योगी-मोदी मुर्दाबाद' के नारों के साथ कांग्रेसी नेताओं ने सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा और किसानों के लिए तत्काल आर्थिक मदद की गुहार लगाई। कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन द्वारा कराया गया सर्वे भेदभावपूर्ण है और इसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने बीमा कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि कंपनियां किसानों का पैसा डकार रही हैं और सरकार खामोश है। कांग्रेस का कहना है कि जब बड़े उद्योगपतियों का कर्ज माफ किया जा सकता है, तो देश की रीढ़ कहे जाने वाले किसान के लिए खजाना क्यों खाली है1
- चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर उपखंड के धीर जी खेड़ा गांव के बेटे और भारतीय सेना के जवान पहलवान गुर्जर का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई अपने लाल के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। गांव की गलियां “भारत माता की जय” और “जय हिंद” के नारों से गूंज उठीं, लेकिन इन नारों के पीछे हर चेहरे पर गहरा दुख साफ नजर आ रहा था। भारतीय सेना के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ पहलवान गुर्जर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद मौजूद लोगों ने नम आंखों से पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और पूर्व विधायक भी पहुंचे और उन्होंने भी जवान को श्रद्धांजलि दी। माहौल इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। परिवार का दर्द देख हर कोई हो गया भावुक इस दौरान सबसे ज्यादा दिल को झकझोर देने वाला दृश्य जवान के परिवार का था। पत्नी विद्या का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था, वह अपने पति के पार्थिव शरीर को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रही थी। सेना के जवानों ने पत्नी को तिरंगा सौंपा। वहीं मां उदी बाई ने अपने आंसुओं को रोकते हुए बेटे के अंतिम दर्शन किए, लेकिन उनके चेहरे पर गहरा दुख साफ दिखाई दे रहा था। पिता रामलाल गुर्जर जब अपने बेटे को अंतिम बार देखने पहुंचे तो वह भी खुद को रोक नहीं सके और फूट-फूट कर रोने लगे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। 3 साल की बेटी की सलामी ने हर किसी को रुला दिया इस दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया। पहलवान गुर्जर की मात्र 3 साल की मासूम बच्ची कृतिका अपने नाना के साथ वहां पहुंची। उसने अपने पिता के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए और मासूम आवाज में “जय हिंद” बोलकर सलामी दी। यह पल इतना भावुक था कि वहां खड़े हर व्यक्ति की आंखों से आंसू बहने लगे। किसी ने भी नहीं सोचा था कि इतनी छोटी बच्ची इतनी बड़ी हिम्मत दिखाएगी। इसके बाद भारतीय सेना के जवानों ने बंदूक से सलामी देकर अपने साथी को अंतिम विदाई दी। दिल्ली से गांव तक अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इससे पहले पहलवान गुर्जर का पार्थिव शरीर दिल्ली से उदयपुर लाया गया, जहां से सड़क मार्ग के जरिए उन्हें उनके गांव तक लाया गया। रास्ते में गंगरार, चंदेरिया, रोलहेड़ा बाईपास और धीर जी का खेड़ा गांव में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे। हर कोई अपने जवान को अंतिम सलामी देना चाहता था। लोग सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प अर्पित कर रहे थे और नम आंखों से अपने गांव के बेटे को विदाई दे रहे थे। फिर धीर जी का खेड़ा से शव यात्रा को होड़ा चौराहे पर लाया गया, जहां भारी भीड़ जमा हो गई, जहां लोगों ने अपने तरीके से श्रद्धांजलि दी। अचानक आई मौत ने तोड़ दिया परिवार बताया गया कि पहलवान गुर्जर का गुरुवार सुबह दिल्ली में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। उनकी तबीयत ड्यूटी के दौरान अचानक खराब हो गई थी। यह खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, सभी सदमे में आ गए। शाम तक परिवार के लोग दिल्ली पहुंच गए थे। किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि जो बेटा कल तक ठीक था, वह अचानक इस दुनिया को छोड़कर चला जाएगा। सेना में भर्ती होने का सपना किया था पूरा पहलवान गुर्जर का सेना में जाने का सपना बचपन से ही था। उन्होंने दो बार कोशिश की थी। पहली बार चेन्नई में जाकर तैयारी की, लेकिन किसी कारण से चयन नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरी बार झुंझुनू जाकर तैयारी की, जहां उनका चयन हो गया। 20 मार्च 2017 को वह भारतीय सेना में भर्ती हुए। उनकी पोस्टिंग राजपूत रेजीमेंट की एक बटालियन में थी और वर्तमान में वह नई दिल्ली में सेवा दे रहे थे। परिवार से जुड़ा था हर दिन का रिश्ता पहलवान गुर्जर अपने परिवार से बेहद जुड़े हुए थे। उनके पिता ने बताया कि वह दिन में कभी फोन नहीं करते थे, लेकिन हर रात 8 बजे ड्यूटी से लौटकर घर जरूर फोन करते थे। वह अपने परिवार की हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखते थे। उनकी पत्नी पिछले 20-25 दिनों से दिल्ली में ही उनके साथ रह रही थी। पहलवान गुर्जर आखिरी बार करीब 5-6 महीने पहले अपने गांव आए थे। कुछ दिन पहले ही उन्होंने घरवालों को फोन कर कहा था कि दिल्ली में बारिश हो रही है, इसलिए गेहूं की फसल को सुरक्षित रख लें। हो सकता है राजस्थान में भी बारिश हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो फसल खराब हो जाएगी। इससे साफ पता चलता है कि वह दूर रहकर भी अपने घर और खेती की चिंता करते थे। बहन की बीमारी को लेकर रहते थे चिंतित पहलवान गुर्जर अपनी बड़ी बहन कंकू से भी बहुत लगाव रखते थे। उनकी बहन के पैर में बीमारी थी, जिसको लेकर वह हमेशा चिंतित रहते थे। फोन पर अक्सर बहन के इलाज और तबीयत के बारे में पूछते थे। वह चाहते थे कि उनकी बहन जल्दी ठीक हो जाए। अधूरी रह गई जिंदगी की कहानी पहलवान गुर्जर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की थी। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई भदेसर में पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए वह चित्तौड़गढ़ गए, जहां वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन दूसरे साल में ही उनका चयन सेना में हो गया और उन्होंने पढ़ाई छोड़कर देश सेवा का रास्ता चुन लिया। पंचतत्व में विलीन हुआ गांव का लाल धीरजी खेड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ पहलवान गुर्जर का अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी और पूरा गांव नम आंखों से अपने बेटे को विदाई देता रहा। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।4