आठवीं बोर्ड परीक्षा 2026: गुमला जिले से 17,254 विद्यार्थी होंगे शामिल बालकों की तुलना में बालिकाओं की अधिक भागीदारी, जिले में बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का सकारात्मक संकेत झारखंड शिक्षा परियोजना, गुमला द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार आगामी 2 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली झारखंड अधिविद्य परिषद की कक्षा 8वीं बोर्ड परीक्षा में गुमला जिले से कुल 17,254 विद्यार्थी सम्मिलित होंगे। इनमें 8,961 बालिकाएँ (51.94%) एवं 8,293 बालक (48.06%) शामिल हैं। आठवीं बोर्ड परीक्षा में बालिकाओं की भागीदारी बालकों की तुलना में अधिक है, जो जिले में बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का सकारात्मक संकेत है। जिले में कुल 543 विद्यालयों में कक्षा 8 संचालित हो रही है, जिनमें 403 सरकारी, 46 अल्पसंख्यक तथा 94 अन्य श्रेणी के विद्यालय शामिल हैं। प्रखंडवार आंकड़ों के अनुसार गुमला प्रखंड से सर्वाधिक 3,505 विद्यार्थी परीक्षा में भाग लेंगे। इसके बाद सिसई से 2,370, घाघरा से 1,915, भरनो से 1,444 तथा बसिया से 1,581 विद्यार्थी शामिल होंगे। अन्य प्रखंडों में रायडीह से 1,246, चैनपुर से 1,109, पालकोट से 1,020, कामडारा से 912, विशुनपुर से 1,163, डुमरी से 650 तथा अल्बर्ट एक्का (जारी) प्रखंड से 339 विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के नेतृत्व में शिक्षा विभाग द्वारा परीक्षा की तैयारी को लेकर सभी विद्यालयों में विशेष अभ्यास, मॉडल प्रश्न पत्रों का वितरण तथा विषयवार पुनरावृत्ति सत्र संचालित किए जा रहे हैं। सभी विद्यालय प्रधानों, शिक्षकों एवं सीआरपी बीआरपी को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक विद्यार्थी की शत-प्रतिशत उपस्थिति एवं गुणवत्तापूर्ण तैयारी सुनिश्चित की जाए, ताकि इस वर्ष जिले का परिणाम राज्य स्तर पर बेहतर हो सके। जिला प्रशासन द्वारा विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण के साथ आठवीं बोर्ड के परीक्षार्थियों को प्रेरित एवं उत्साहित करने के निर्देश के साथ साथ अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे बच्चों को नियमित अध्ययन एवं परीक्षा में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे गुमला जिला उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त कर सके।
आठवीं बोर्ड परीक्षा 2026: गुमला जिले से 17,254 विद्यार्थी होंगे शामिल बालकों की तुलना में बालिकाओं की अधिक भागीदारी, जिले में बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का सकारात्मक संकेत झारखंड शिक्षा परियोजना, गुमला द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार आगामी 2 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली झारखंड अधिविद्य परिषद की कक्षा 8वीं बोर्ड परीक्षा में गुमला जिले से कुल 17,254 विद्यार्थी सम्मिलित होंगे। इनमें 8,961 बालिकाएँ (51.94%) एवं 8,293 बालक (48.06%) शामिल हैं। आठवीं बोर्ड परीक्षा में बालिकाओं की भागीदारी बालकों की तुलना में अधिक है, जो जिले में बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का सकारात्मक संकेत है। जिले में कुल 543 विद्यालयों में कक्षा 8 संचालित हो रही है, जिनमें 403 सरकारी, 46 अल्पसंख्यक तथा 94 अन्य श्रेणी के विद्यालय शामिल हैं। प्रखंडवार आंकड़ों के अनुसार गुमला प्रखंड से सर्वाधिक 3,505 विद्यार्थी परीक्षा में भाग लेंगे। इसके बाद सिसई से 2,370, घाघरा से 1,915, भरनो से 1,444 तथा बसिया से 1,581 विद्यार्थी शामिल होंगे। अन्य प्रखंडों में रायडीह से 1,246, चैनपुर से 1,109, पालकोट से 1,020, कामडारा से 912, विशुनपुर से 1,163, डुमरी से 650 तथा अल्बर्ट एक्का (जारी) प्रखंड से 339 विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के नेतृत्व में शिक्षा विभाग द्वारा परीक्षा की तैयारी को लेकर सभी विद्यालयों में विशेष अभ्यास, मॉडल प्रश्न पत्रों का वितरण तथा विषयवार पुनरावृत्ति सत्र संचालित किए जा रहे हैं। सभी विद्यालय प्रधानों, शिक्षकों एवं सीआरपी बीआरपी को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक विद्यार्थी की शत-प्रतिशत उपस्थिति एवं गुणवत्तापूर्ण तैयारी सुनिश्चित की जाए, ताकि इस वर्ष जिले का परिणाम राज्य स्तर पर बेहतर हो सके। जिला प्रशासन द्वारा विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण के साथ आठवीं बोर्ड के परीक्षार्थियों को प्रेरित एवं उत्साहित करने के निर्देश के साथ साथ अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे बच्चों को नियमित अध्ययन एवं परीक्षा में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे गुमला जिला उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त कर सके।
- गुमला -जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने जिले के समस्त मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति नागरिकों की सक्रिय सहभागिता में निहित है। आपका एक मत आपके नगर के विकास, पारदर्शी प्रशासन और सशक्त स्थानीय स्वशासन की दिशा निर्धारित करता है।_ उन्होंने सभी मतदाताओं से आग्रह किया कि वे 23 फरवरी को प्रातः 7 बजे से सायं 5 बजे के बीच अपने निर्धारित मतदान केंद्र पर पहुँचकर निर्भीक एवं निष्पक्ष वातावरण में अपने मताधिकार का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें। उपायुक्त ने विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं एवं प्रथम बार मतदान करने वाले मतदाताओं से लोकतांत्रिक उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकाधिक मतदान ही सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।2
- मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना वर्ष 2024-25 अंतर्गत सूकर विकास योजना के तहत बुधवार को प्रखंड परिसर, चैनपुर में चयनित 7 लाभुकों के बीच सूकर इकाइयों का वितरण किया गया। प्रत्येक लाभुक को 04 मादा सूकरी एवं 01 नर सूकर की दर से एक-एक इकाई प्रदान की गई।कार्यक्रम का आयोजन दोपहर 1 बजे से प्रखंड परिसर में किया गया, जहां लाभुकों में उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी यादव बैठा एवं जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा , प्रथम पशुचिकित्सक पदाधिकारी डॉक्टर धर्मरक्षित उपस्थित रहीं। अधिकारियों ने लाभुकों को पशुपालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने एवं आय में वृद्धि करने का संदेश दिया।इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक पहल मानी जा रही है। चयनित लाभुकों में सरिता टोप्पो, गांगी देवी, फरीदा लकड़ा, तिलिना मिंस, बेसिस मिंस, जेम्स दीपक हुजूर सहित अन्य शामिल रहे।ग्रामीणों ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पशुपालन से परिवार की आमदनी बढ़ेगी और जीवन स्तर में सुधार होग।3
- गुमला:जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने जिले के समस्त मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति नागरिकों की सक्रिय सहभागिता में निहित है। आपका एक मत आपके नगर के विकास, पारदर्शी प्रशासन और सशक्त स्थानीय स्वशासन की दिशा निर्धारित करता है।उन्होंने सभी मतदाताओं से आग्रह किया कि वे 23 फरवरी को प्रातः 7 बजे से सायं 5 बजे के बीच अपने निर्धारित मतदान केंद्र पर पहुँचकर निर्भीक एवं निष्पक्ष वातावरण में अपने मताधिकार का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें।उपायुक्त ने विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं एवं प्रथम बार मतदान करने वाले मतदाताओं से लोकतांत्रिक उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकाधिक मतदान ही सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।1
- चैनपुर – बुधवार शाम करीब 4 बजे चैनपुर ब्लॉक चौक के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। बैंक का काम निपटाकर घर लौट रहा एक परिवार उस वक्त हादसे का शिकार हो गया, जब उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित एक घर के गेट से जा टकराई। इस दुर्घटना में 5 वर्षीय मासूम बच्ची सहित चार लोग घायल हो गए। घायलों की पहचान संजित असुर, कुष्मिता असुर और सरिता असुर (ग्राम लुपुंग पाठ) के रूप में हुई है। सभी घायलों को आसपास मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है।1
- सीलम बाईपास में पेड़ से टकराकर ट्रेलर में लगी आग, झूलसने से चालक की मौत गुमला छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित सिलम बायपास मोड में एक ट्रेलर अनियंत्रित होकर पेड़ को जोरदार टक्कर मार दिया। घटना के बाद ट्रेलर में आग लग गई, आग लगने से ट्रेलर चालक जलकर गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसकी इलाज के दौरान सदर अस्पताल में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, ट्रेलर छत्तीसगढ़ की ओर जा रहा था और ट्रेलर में जेसीबी लोड था। इसी दौरान अचानक बाईपास मोड में वाहन अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया और उसमें आग लग गई। चालक वाहन के अंदर फस गया था जिसे बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला गया।। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने तत्काल चालक को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन उसकी मौत हो गई, अभी तक मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।1
- पेशा कानून का दिया गया प्रशिक्षण चैनपुर गुमला झारखंड संवाददाता कुलदीप कुमार कि रिपोर्ट। चैनपुर मुख्यालय स्थित पुस्तकालय भवन में ग्राम प्रधान मुखिया वार्ड सदस्यों का पेशा कानून का प्रशिक्षण दिया गया जिसका प्रशिक्षण भुषण भगत बड़ाइक एवं संतोष महतो के द्वारा दिया गया। जिसपर बताया गया कि पेशा कानून 23 दिसंबर 2025 को विधानसभा में पारित हुआ और 2 जनवरी 2026 को पुरे प्रदेश में लागू किया गया। वहीं बताया गया कि ग्राम सभा को पेशा कानून लागू होने से पहले उतना मान्यता नहीं मिलता था। पर पेशा कानून लागू होने पर ग्राम सभा को और ग्राम प्रधान सहित मुखिया को गांव के रूढ़िवादी परंपरा को फिरे लागू करते हुए अपने गांव के शासन व्यवस्था को फिर से स्वतंत्र रूप से से जीवन जीने एवं कोई बाहरी आक्रांता हावी ना हो और प्राणों का बलिदान देना ना पड़े पुर्वजों ने जो जीवन जिया था जिसमें अनेकों आक्रांताओं के द्वारा हमारा जल जंगल जमीन संस्कृति धार्मिक मान्यताओं को क्षतिग्रस्त किया गया था उसे बचाने के लिए पेशा कानून लागू किया गया है। वहीं बताया गया कि झारखंड में कुल 33 जनजातियां है जिसमें पड़हा व्यवस्था झारखंड कि सबसे सर्वोच्च व्यवस्था है फिर भी भारत के संविधान कि आवश्यकता हमारी रूढ़ी व्यवस्था को बेहतर ढंग से चलने के लिए संविधान में दिया गया है। वहीं झारखंड के मुख्य पाढ़ा व्यवस्था के बारे में बताया गया जिसमें पाढ़ा मतलब तीन चार गांवो का समुह को बताया साथ ही बताया कि झारखंड में कुल चार पाढ़ा व्यवस्था है जिसमें पाढ़ा व्यवस्था उरांव बहुल के लिए,डोकला सोहर खड़िया बहुल के लिए,मानकी मुण्डा व्यवस्था मुण्डा क्षेत्र बहुल के लिए,मांझी परगनैत मांझी बहुल क्षेत्र के लिए । वहीं मुख्य रूप से बताया गया कि पेशा कानून लागू कराने के लिए 8 समिति का गठन कराना आवश्यक है जिसमें ग्राम शिक्षा समिति,वन समिति विकास समिति,शिक्षा समिति, स्वास्थ्य समिति, न्याय समिति साथ ही लघु खनिज,लघु वन,वन उपज,ग्रमिण कोष, जैसे क्षेत्रों में काम करना होगा जिससे ग्राम सभा को सिधा फायदा होगा।1
- Post by ANGAD YADAV1
- उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देशानुसार जिले की आंगनबाड़ी सेविकाओं को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में दक्ष बनाने की कवायद तेज हो गई है। जानकारी देते हुए बुधवार को शाम पाँच बजे बताया गया कि चैनपुर प्रखंड सभागार में आयोजित तीन दिवसीय प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिला स्तरीय चयन समिति के अनुमोदन पर विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसाइटी के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को और अधिक प्रभावी बनाना है। चैनपुर प्रखंड की चालीस आंगनबाड़ी सेविकाओं ने सोलह फरवरी से अठारह फरवरी तक चले इस प्रशिक्षण में भाग लिया। मुख्य प्रशिक्षक एवं जिला समन्वयक पिंटू दास, सहायक प्रशिक्षक सुमन गोस्वामी तथा प्रशांत कुमार महतो ने सत्र का संचालन किया। प्रशिक्षण के दौरान सभी सेविकाओं को “नन्हे कदम” पुस्तक एवं आवश्यक शिक्षण सामग्री किट उपलब्ध कराई गई। प्रशिक्षण का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि खेल-खेल में और रोचक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास को कैसे बढ़ावा दिया जाए। प्रशिक्षकों ने बताया कि सेविकाओं की कार्यक्षमता बढ़ने से केंद्रों पर बच्चों के लिए सीखने का एक खुशनुमा और अनुकूल वातावरण तैयार होगा। गौरतलब है कि उपायुक्त के विजन के तहत पूरे जिले की पाँच सौ आंगनबाड़ी सेविकाओं को इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि जमीनी स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य की नींव को और अधिक मजबूत किया जा सके।4