जिला अस्पताल में मनमानी की हद! इंजेक्शन रूम पर ताला, स्टाफ गायब—मरीज बेहाल, जिम्मेदारों के फोन भी रहे ‘मौन’ इंजेक्शन लगवाने पहुंचे मरीज और परिजन घंटों परेशान, शिकायत के लिए दिए नंबरों पर रिंग जाती रही लेकिन किसी अधिकारी ने नहीं उठाया फोन अमर रिपब्लिक सतना। जिला अस्पताल सतना में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावों के बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के इंजेक्शन रूम में ताला लगा मिला और स्टाफ मौके से गायब था। इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे मरीज और उनके परिजन काफी देर तक परेशान होते रहे, लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आया। मरीजों के इंतजार और परेशानी के बीच इंजेक्शन रूम के बाहर मौजूद एक महिला कर्मचारी द्वारा मरीजों और उनके परिजनों से कहा गया कि सीएमएचओ, अस्पताल प्रशासक और सिविल सर्जन के मोबाइल नंबर बोर्ड पर लिखे हुए हैं, आप लोग फोन लगाकर शिकायत करें। इसके बाद परेशान मरीजों और परिजनों ने बोर्ड पर लिखे अधिकारियों के नंबरों पर फोन लगाना शुरू किया। बताया जा रहा है कि कई नंबरों पर लगातार घंटी जाती रही, लेकिन किसी भी अधिकारी द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। ऐसे में मरीज और उनके परिजन अपनी समस्या लेकर इधर-उधर भटकते नजर आए। मरीजों की परेशानी पर कौन देगा जवाब? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान में यदि इंजेक्शन लगाने के लिए निर्धारित कक्ष पर ही ताला लगा हो और संबंधित स्टाफ मौजूद न हो, तो मरीजों को इलाज की सुविधा कौन देगा? वहीं, जब शिकायत के लिए अधिकारियों के नंबर उपलब्ध कराए गए हैं और उन पर भी फोन रिसीव नहीं होता, तो आम मरीज आखिर अपनी परेशानी किसके सामने रखे? जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की अव्यवस्था सीधे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ाती है। लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ मरीजों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था करनी चाहिए। व्यवस्था पर उठे सवाल, जिम्मेदारों से कार्रवाई की मांग इंजेक्शन रूम में ताला लगे होने और स्टाफ के गायब रहने की स्थिति ने अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और यदि ड्यूटी के दौरान कर्मचारी अनुपस्थित पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि मरीजों की इस परेशानी पर जिला अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी क्या जवाब देते हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। जिला अस्पताल में मनमानी की हद! इंजेक्शन रूम पर ताला, स्टाफ गायब—मरीज बेहाल, जिम्मेदारों के फोन भी रहे ‘मौन’ इंजेक्शन लगवाने पहुंचे मरीज और परिजन घंटों परेशान, शिकायत के लिए दिए नंबरों पर रिंग जाती रही लेकिन किसी अधिकारी ने नहीं उठाया फोन अमर रिपब्लिक सतना। जिला अस्पताल सतना में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावों के बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के इंजेक्शन रूम में ताला लगा मिला और स्टाफ मौके से गायब था। इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे मरीज और उनके परिजन काफी देर तक परेशान होते रहे, लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आया। मरीजों के इंतजार और परेशानी के बीच इंजेक्शन रूम के बाहर मौजूद एक महिला कर्मचारी द्वारा मरीजों और उनके परिजनों से कहा गया कि सीएमएचओ, अस्पताल प्रशासक और सिविल सर्जन के मोबाइल नंबर बोर्ड पर लिखे हुए हैं, आप लोग फोन लगाकर शिकायत करें। इसके बाद परेशान मरीजों और परिजनों ने बोर्ड पर लिखे अधिकारियों के नंबरों पर फोन लगाना शुरू किया। बताया जा रहा है कि कई नंबरों पर लगातार घंटी जाती रही, लेकिन किसी भी अधिकारी द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। ऐसे में मरीज और उनके परिजन अपनी समस्या लेकर इधर-उधर भटकते नजर आए। मरीजों की परेशानी पर कौन देगा जवाब? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान में यदि इंजेक्शन लगाने के लिए निर्धारित कक्ष पर ही ताला लगा हो और संबंधित स्टाफ मौजूद न हो, तो मरीजों को इलाज की सुविधा कौन देगा? वहीं, जब शिकायत के लिए अधिकारियों के नंबर उपलब्ध कराए गए हैं और उन पर भी फोन रिसीव नहीं होता, तो आम मरीज आखिर अपनी परेशानी किसके सामने रखे? जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की अव्यवस्था सीधे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ाती है। लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ मरीजों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था करनी चाहिए। व्यवस्था पर उठे सवाल, जिम्मेदारों से कार्रवाई की मांग इंजेक्शन रूम में ताला लगे होने और स्टाफ के गायब रहने की स्थिति ने अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और यदि ड्यूटी के दौरान कर्मचारी अनुपस्थित पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि मरीजों की इस परेशानी पर जिला अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी क्या जवाब देते हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
जिला अस्पताल में मनमानी की हद! इंजेक्शन रूम पर ताला, स्टाफ गायब—मरीज बेहाल, जिम्मेदारों के फोन भी रहे ‘मौन’ इंजेक्शन लगवाने पहुंचे मरीज और परिजन घंटों परेशान, शिकायत के लिए दिए नंबरों पर रिंग जाती रही लेकिन किसी अधिकारी ने नहीं उठाया फोन अमर रिपब्लिक सतना। जिला अस्पताल सतना में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावों के बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के इंजेक्शन रूम में ताला लगा मिला और स्टाफ मौके से गायब था। इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे मरीज और उनके परिजन काफी देर तक परेशान होते रहे, लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आया। मरीजों के इंतजार और परेशानी के बीच इंजेक्शन रूम के बाहर मौजूद एक महिला कर्मचारी द्वारा मरीजों और उनके परिजनों से कहा गया कि सीएमएचओ, अस्पताल प्रशासक और सिविल सर्जन के मोबाइल नंबर बोर्ड पर लिखे हुए हैं, आप लोग फोन लगाकर शिकायत करें। इसके बाद परेशान मरीजों और परिजनों ने बोर्ड पर लिखे अधिकारियों के नंबरों पर फोन लगाना शुरू किया। बताया जा रहा है कि कई नंबरों पर लगातार घंटी जाती रही, लेकिन किसी भी अधिकारी द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। ऐसे में मरीज और उनके परिजन अपनी समस्या लेकर इधर-उधर भटकते नजर आए। मरीजों की परेशानी पर कौन देगा जवाब? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान में यदि इंजेक्शन लगाने के लिए निर्धारित कक्ष पर ही ताला लगा हो और संबंधित स्टाफ मौजूद न हो, तो मरीजों को इलाज की सुविधा कौन देगा? वहीं, जब शिकायत के लिए अधिकारियों के नंबर उपलब्ध कराए गए हैं और उन पर भी फोन रिसीव नहीं होता, तो आम मरीज आखिर अपनी परेशानी किसके सामने रखे? जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की अव्यवस्था सीधे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ाती है। लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ मरीजों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था करनी चाहिए। व्यवस्था पर उठे सवाल, जिम्मेदारों से कार्रवाई की मांग इंजेक्शन रूम में ताला लगे होने और स्टाफ के गायब रहने की स्थिति ने अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और यदि ड्यूटी के दौरान कर्मचारी अनुपस्थित पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि मरीजों की इस परेशानी पर जिला अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी क्या जवाब देते हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। जिला अस्पताल में मनमानी की हद! इंजेक्शन रूम पर ताला, स्टाफ गायब—मरीज बेहाल, जिम्मेदारों के फोन भी रहे ‘मौन’ इंजेक्शन लगवाने पहुंचे मरीज और परिजन घंटों परेशान, शिकायत के लिए दिए नंबरों पर रिंग जाती रही लेकिन किसी अधिकारी ने नहीं उठाया फोन अमर रिपब्लिक सतना। जिला अस्पताल सतना में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावों के बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के इंजेक्शन रूम में ताला लगा मिला और स्टाफ मौके से गायब था। इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे मरीज और उनके परिजन काफी देर तक परेशान होते रहे, लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आया। मरीजों के इंतजार और परेशानी के बीच इंजेक्शन रूम के बाहर मौजूद एक महिला कर्मचारी द्वारा मरीजों और उनके परिजनों से कहा गया कि सीएमएचओ, अस्पताल प्रशासक और सिविल सर्जन के मोबाइल नंबर बोर्ड पर लिखे हुए हैं, आप लोग फोन लगाकर शिकायत करें। इसके बाद परेशान मरीजों और परिजनों ने बोर्ड पर लिखे अधिकारियों के नंबरों पर फोन लगाना शुरू किया। बताया जा रहा है कि कई नंबरों पर लगातार घंटी जाती रही, लेकिन किसी भी अधिकारी द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। ऐसे में मरीज और उनके परिजन अपनी समस्या लेकर इधर-उधर भटकते नजर आए। मरीजों की परेशानी पर कौन देगा जवाब? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान में यदि इंजेक्शन लगाने के लिए निर्धारित कक्ष पर ही ताला लगा हो और संबंधित स्टाफ मौजूद न हो, तो मरीजों को इलाज की सुविधा कौन देगा? वहीं, जब शिकायत के लिए अधिकारियों के नंबर उपलब्ध कराए गए हैं और उन पर भी फोन रिसीव नहीं होता, तो आम मरीज आखिर अपनी परेशानी किसके सामने रखे? जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की अव्यवस्था सीधे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ाती है। लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ मरीजों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था करनी चाहिए। व्यवस्था पर उठे सवाल, जिम्मेदारों से कार्रवाई की मांग इंजेक्शन रूम में ताला लगे होने और स्टाफ के गायब रहने की स्थिति ने अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और यदि ड्यूटी के दौरान कर्मचारी अनुपस्थित पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि मरीजों की इस परेशानी पर जिला अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी क्या जवाब देते हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
- *मां शारदा शक्तिपीठ मैहर🚩27 08 2026 गुरुवार को काल भैरव के दिव्य अलौकिक दर्शन एवम आरती🚩* *मां शारदा शक्तिपीठ मैहर🚩27 08 2026 गुरुवार को काल भैरव के दिव्य अलौकिक दर्शन एवम आरती🚩*1
- खबर मैहर/अमरपाटन आरक्षण के मुद्दे में पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी का बड़ा बयान कहा आरक्षण जातिगत नहीं *आरक्षण के मुद्दे में पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी का बड़ा बयान कहा आरक्षण जातिगत नहीं बल्कि बल्कि आर्थिक आधार पर तय होना चाहिए यही बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूल सोच फलीभूत होगी,सर्व समाज संभाव की परिकल्पना साकार होगी। श्री त्रिपाठी ने कहा कि जिन दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा में आए थे तब ग्वालियर चंबल क्षेत्र में तामम उपचुनाव हुए थे। इस दौरान पार्टी ने मुझे भी जिम्मेवारी सौंपी थी तब स्थानीय लोगों की मांग पर मैने तत्कालिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष सवर्ण आयोग की मांग रखी थी जिस पर उन्होंने सवर्ण आयोग के गठन की घोषणा की थी। लेकिन आजतक पता यह नहीं चला कि वह आयोग गया कहा और आज अस्तित्व में क्यों नहीं। क्या क्या कहा नारायण त्रिपाठी ने सुने वीडियो।*1
- मुकुंदपुर पंचायत घोटाला / भ्रष्टाचार मुकुंदपुर में पंचायत राज का भ्रष्टाचार! कागजों पर स्कूल चमका, पहली ही बारिश में PCC रोड बही। न्यूज एंकर स्क्रिप्ट: मुकुंदपुर में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश—स्कूल में फर्जी निर्माण और पहली ही बरसात में बह गई करोड़ों की PCC रोड! मुकुंदपुर पंचायत घोटाला / भ्रष्टाचार गंभीर और खोजी (Investigative) मुकुंदपुर में पंचायत राज का भ्रष्टाचार! कागजों पर स्कूल चमका, पहली ही बारिश में PCC रोड बही। फुटेज: प्राथमिक स्कूल परिसर का दृश्य (जहाँ काम अधूरा है) और बह चुकी या क्षतिग्रस्त PCC रोड की लाइव तस्वीरें/वीडियो, साथ ही सरपंच, सचिव और ठेकेदार के खिलाफ ग्राफिक्स। (गंभीर और तीखे तेवर में कैमरे की ओर देखकर): "नमस्कार, मैं हूं [राजकुमार मिश्रा] और आप देख रहे हैं विशेष कवरेज। मध्य प्रदेश के मुकुंदपुर से भ्रष्टाचार की एक ऐसी बानगी सामने आई है, जो प्रशासन और विकास के दावों की धज्जियां उड़ा रही है। यहां के सरपंच, सचिव और लापरवाह ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को किस तरह पानी में बहाया जा रहा है, इसकी दास्तान मुकुंदपुर की गलियां खुद बयां कर रही हैं। सबसे पहले बात करते हैं शिक्षा के मंदिर की— मुकुंदपुर के प्राइमरी स्कूल परिसर में पेवर ब्लॉक लगवाने, बाउंड्री गेट और टॉयलेट बनवाने के नाम पर सरकारी खजाने से भारी-भरकम राशि का आहरण कर लिया गया। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि स्कूल के बच्चे आज भी इन बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। सवाल यह है कि बिना ईंट रखे लाखों के बिल कैसे पास हो गए? घोटाले की दूसरी तस्वीर और भी खतरनाक है— गांव में हाल ही में बनाई गई PCC रोड पहली ही बरसात की मार नहीं झेल पाई और देखते ही देखते पानी के साथ बह गई। घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कर सड़क बनाने वाले ठेकेदार और इस खेल में शामिल पंचायत के नुमाइंदों ने मिलकर सरकारी बजट का जमकर बंदरबांट किया है। बिना काम के भुगतान और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी इस सड़क ने सिस्टम के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में सोई हुई नींद से जागेगा? क्या इन भ्रष्ट सरपंच, सचिव और जिम्मेदार ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या जनता का पैसा यूं ही लूटता रहेगा? हमारी इस बड़ी खबर पर लगातार नजर बनी हुई है। आगे के खुलासे के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।" : मांग—मुकुंदपुर में हुए पंचायत घोटाले और घटिया सड़क निर्माण की हो उच्चस्तरीय न्यायिक जांच, दोषियों पर दर्ज हो एफआईआर।4
- 🌙 *ईद मिलादुन्नबी का पर्व कैथहा में धूमधाम से मनाया गया* कैथहा/रामनगर। ईद मिलादुन्नबी का पावन पर्व रामनगर क्षेत्र के कैथहा गांव में उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुस्लिम समाज के लोगों ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं एवं उनके संदेश को याद किया। पर्व के दौरान भाईचारे, शांति और आपसी सौहार्द का संदेश दिया गया। बड़ी संख्या में समाज के लोग आयोजन में शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला। आयोजन के दौरान लोगों ने एक-दूसरे को ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद दी और क्षेत्र में अमन, शांति एवं खुशहाली की दुआ की। कैथहा में मनाए गए पर्व के दौरान सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सौहार्द की सुंदर मिसाल देखने को मिली।1
- आरक्षण के मुद्दे में पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी का बड़ा बयान कहा आरक्षण जातिगत नहीं बल्कि बल्कि आर्थिक आधार पर तय होना चाहिए । मैहर - आरक्षण के मुद्दे में पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी का बड़ा बयान कहा आरक्षण जातिगत नहीं बल्कि बल्कि आर्थिक आधार पर तय होना चाहिए यही बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूल सोच फलीभूत होगी,सर्व समाज संभाव की परिकल्पना साकार होगी। श्री त्रिपाठी ने कहा कि जिन दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा में आए थे तब ग्वालियर चंबल क्षेत्र में तामम उपचुनाव हुए थे। इस दौरान पार्टी ने मुझे भी जिम्मेवारी सौंपी थी तब स्थानीय लोगों की मांग पर मैने तत्कालिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष सवर्ण आयोग की मांग रखी थी जिस पर उन्होंने सवर्ण आयोग के गठन की घोषणा की थी। लेकिन आजतक पता यह नहीं चला कि वह आयोग गया कहा और आज अस्तित्व में क्यों नहीं। क्या क्या कहा नारायण त्रिपाठी ने सुने वीडियो।1
- मध्य प्रदेश में मानसून का कहर: टीकमगढ़ में 2.6 इंच बारिश से झांसी-छतरपुर मार्ग प्रभावित, 17 जिलों में अलर्ट जारी विशेष संवाददाता | मध्य भारत न्यूज़ भोपाल/टीकमगढ़: मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता एक बार फिर बढ़ गई है। बीते 24 घंटों के दौरान टीकमगढ़ और निवाड़ी क्षेत्र में हुई तेज बारिश (2.6 इंच) के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए हैं, जिससे झांसी-छतरपुर मार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मौसम केंद्र भोपाल द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार, राज्य के 17 पूर्वी और उत्तरी जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सागर, रीवा और शहडोल संभाग में मानसूनी सिस्टम का सबसे अधिक असर देखने को मिलेगा। मुख्य बिंदु: सड़क संपर्क प्रभावित: टीकमगढ़ में उफनते नालों का पानी सड़कों पर आने से वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट: सागर, रीवा, शहडोल सहित 17 जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश की संभावना है। प्रशासन अलर्ट मोड पर: उफनती नदियों और निचले इलाकों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे उफनते पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं और सतर्कता बरतें।1
- भोपाल के कजलीखेड़ा थाना क्षेत्र में दो बदमाशों ने की फायरिंग, इलाके में दहशत, थाना प्रभारी लाइन अटैच। फरियादी का आरोप- पुलिस ने थाने से भगाया, FIR दर्ज नहीं की, घटना रात करीब 3 बजे की, फायरिंग के बाद इलाके में दहशत का माहौल, फरियादी अजय बैरागी शिकायत लेकर कजलीखेड़ा थाने पहुंचा, फरयादी का आरोप,पुलिस ने उसकी शिकायत पर तत्काल FIR दर्ज करने के बजाय उसे थाने से वापस भेजा, फरियादी बोला थाना प्रभारी ने उससे कहा कि रात में डिस्टर्ब मत करो और दोपहर 12 बजे थाने आना, पुलिस की कार्यप्रणाली और घटना के बाद कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर उठ रहे सवाल, फायरिंग करते हुए वीडियो आया सामने। कजलीखेड़ा थाना प्रभारी पल्लवी पांडे लाइन अटैच।1
- भोपाल /मैं खाता नहीं… अच्छा है, चीनी खूब महंगी हो जाए...मंत्री कैलाश विजयवर्गीय#news#mplive#ndtvnews भोपाल/मैं खाता नहीं… अच्छा है, चीनी खूब महंगी हो जाए...मंत्री कैलाश विजयवर्गीय#news#mplive#ndtvnews1