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mpl सीजन 2 क्रिकेट टूर्नामेंट फाइनल मैच मुकाबला खिलचीपुर जयहिंद टीम को हराकर लोकल भगोरी टीम ने जीत हासिल की। क्षेत्रीय विधायक हजारीलाल दांगी ने फाइनल विजेता को 42000 का चेक उप विजेता को 21000 की राशि भेंट की।

13 hrs ago
user_BS Mandloi The News Today
BS Mandloi The News Today
Journalist जीरापुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
13 hrs ago

mpl सीजन 2 क्रिकेट टूर्नामेंट फाइनल मैच मुकाबला खिलचीपुर जयहिंद टीम को हराकर लोकल भगोरी टीम ने जीत हासिल की। क्षेत्रीय विधायक हजारीलाल दांगी ने फाइनल विजेता को 42000 का चेक उप विजेता को 21000 की राशि भेंट की।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • Post by Suresh Bhilala
    1
    Post by Suresh Bhilala
    user_Suresh Bhilala
    Suresh Bhilala
    आगर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • mere Rab Jane te Meri video dekhte raho
    1
    mere Rab Jane te Meri video dekhte raho
    user_Pankaj
    Pankaj
    आगर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • Post by Sumit San
    1
    Post by Sumit San
    user_Sumit San
    Sumit San
    प्लम्बर Sarangpur, Rajgarh•
    15 hrs ago
  • Post by Bheru lal Malviya
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    Post by Bheru lal Malviya
    user_Bheru lal Malviya
    Bheru lal Malviya
    मोमन बड़ोदिया, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    1 day ago
  • नर्मदा जयंती के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन महाकाल ग्रुप माकडोन अंजनी युवा वाहिनी तराना पतनेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन मनकामेश्वर मंदिर महादेव घटिया हिंगलाज माता मंदिर हरनावदा बड़ोद के तत्वाधान में नर्मदा जयंती 25 जनवरी को पंडित कमल किशोर नागर घाट ओंकारेश्वर में विशाल भंडारे का आयोजन के लिए कार्यकर्ता रवाना हुए
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    नर्मदा जयंती के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन महाकाल ग्रुप माकडोन अंजनी युवा वाहिनी तराना पतनेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन मनकामेश्वर मंदिर महादेव घटिया हिंगलाज माता मंदिर हरनावदा बड़ोद के तत्वाधान में नर्मदा जयंती 25 जनवरी को पंडित कमल किशोर नागर घाट ओंकारेश्वर में विशाल भंडारे का आयोजन के लिए कार्यकर्ता रवाना हुए
    user_Davedatt Kinshuk
    Davedatt Kinshuk
    वर्षों से पत्रकारिता कर रहा हूं। Makdon, Ujjain•
    17 hrs ago
  • चाचौड़ा के सांदीपनी विद्यालय मे करियर मेला और कैरियर गाइडेंस एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का हुआ आयोजन
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    चाचौड़ा के सांदीपनी विद्यालय मे करियर मेला और कैरियर गाइडेंस एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का हुआ आयोजन
    user_पत्रकार शिवम नामदेव चाचौड़ा
    पत्रकार शिवम नामदेव चाचौड़ा
    Journalist चाचौरा, गुना, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • हरनावदाशाहजी. हाड़ौती के खेतों में इन दिनों कुदरत का एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। 'काले सोने' के नाम से मशहूर अफीम की फसल अब अपने पूरे यौवन पर आने लगी है। सर्दी की ओस और हल्की सुनहरी धूप के बीच अफीम के खेतों में खिल रहे सफेद मनमोहक फूल हर किसी का मन मोह रहे हैं। लेकिन इन फूलों की खूबसूरती के पीछे किसान की कड़ी मेहनत और रात-भर का पहरा भी छुपा है। श्वेत फूलों की चादर और खुशहाली की उम्मीद- अफीम की फसल पर आए फूल इस बात का संकेत हैं कि अब फसल परिपक्वता की ओर बढ़ रही है। कुछ ही दिनों में इन फूलों की पंखुड़ियां गिर जाएंगी और हरे डोडे (फल) निकल आएंगे, जिनसे 'काला सोना' यानी अफीम का दूध निकाला जाएगा। काश्तकारों के लिए यह केवल एक फसल नहीं, बल्कि साल भर की वह उम्मीद है जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति तय होती है। परिंदा भी पर न मार सके, इसलिए 'चौकसी' सख्त- फसल के यौवन पर आते ही किसानों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। इसकी सुरक्षा के लिए काश्तकारों ने खेतों पर डेरा डालकर दिन-रात का पहरा शुरू कर दिया है। क्योंकि नीलगाय, आवारा पशु और खास तौर पर 'तोतों' (जो डोडों को काटकर ले जाते हैं) से फसल को बचाने के लिए किसानों ने खेतों पर ही झोपड़ियां बनाकर पडाव डाल दिए हैं। नेट का सुरक्षा कवच: कई प्रगतिशील किसानों ने पूरी फसल को ऊपर से जाली (नेट) से ढंक दिया है ताकि पक्षी फसल को नुकसान न पहुंचा सकें। कुछ इलाकों में तो किसान टॉर्च और लाठी लेकर रात-रात भर गश्त कर रहे हैं ताकि कीमती फसल सुरक्षित रहे। मौसम की मेहरबानी पर टिकी निगाहें- अफीम की खेती बेहद संवेदनशील होती है। किसानों का कहना है कि इस समय मौसम का साफ रहना बहुत जरूरी है। यदि अचानक बादल छाते हैं या बेमौसम बारिश होती है, तो डोडे में दूध की मात्रा कम हो सकती है और घटिया (अफीम की क्वालिटी) पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, खिली हुई धूप को देखकर किसानों के चेहरे पर संतोष की लकीरें दिखाई दे रही हैं। विभाग की भी रहती है पैनी नजर नारकोटिक्स विभाग के कड़े नियमों के बीच हो रही इस खेती की एक-एक इंच जमीन और एक-एक ग्राम अफीम का हिसाब सरकार के पास होता है। यही कारण है कि किसान इसे अपनी संतान की तरह पालते हैं ताकि तौल के समय विभाग के मानकों पर उनकी फसल खरी उतरे और उनका लाइसेंस बरकरार रहे। "अफीम की खेती हमारे लिए किसी तपस्या से कम नहीं है। फूल आने के बाद से जब तक अफीम घर न आ जाए, हमें चैन की नींद नहीं आती।"
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    हरनावदाशाहजी. हाड़ौती के खेतों में इन दिनों कुदरत का एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। 'काले सोने' के नाम से मशहूर अफीम की फसल अब अपने पूरे यौवन पर आने लगी है। सर्दी की ओस और हल्की सुनहरी धूप के बीच अफीम के खेतों में खिल रहे सफेद मनमोहक फूल हर किसी का मन मोह रहे हैं। लेकिन इन फूलों की खूबसूरती के पीछे किसान की कड़ी मेहनत और रात-भर का पहरा भी छुपा है।
श्वेत फूलों की चादर और खुशहाली की उम्मीद-
अफीम की फसल पर आए फूल इस बात का संकेत हैं कि अब फसल परिपक्वता की ओर बढ़ रही है। कुछ ही दिनों में इन फूलों की पंखुड़ियां गिर जाएंगी और हरे डोडे (फल) निकल आएंगे, जिनसे 'काला सोना' यानी अफीम का दूध निकाला जाएगा। काश्तकारों के लिए यह केवल एक फसल नहीं, बल्कि साल भर की वह उम्मीद है जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति तय होती है।
परिंदा भी पर न मार सके, इसलिए 'चौकसी' सख्त-
फसल के यौवन पर आते ही किसानों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। इसकी सुरक्षा के लिए काश्तकारों ने खेतों पर डेरा डालकर दिन-रात का पहरा शुरू कर दिया है।
क्योंकि नीलगाय, आवारा पशु और खास तौर पर 'तोतों' (जो डोडों को काटकर ले जाते हैं) से फसल को बचाने के लिए किसानों ने खेतों पर ही झोपड़ियां बनाकर पडाव डाल दिए हैं।
नेट का सुरक्षा कवच: कई प्रगतिशील किसानों ने पूरी फसल को ऊपर से जाली (नेट) से ढंक दिया है ताकि पक्षी फसल को नुकसान न पहुंचा सकें।
कुछ इलाकों में तो किसान टॉर्च और लाठी लेकर रात-रात भर गश्त कर रहे हैं ताकि कीमती फसल सुरक्षित रहे।
मौसम की मेहरबानी पर टिकी निगाहें-
अफीम की खेती बेहद संवेदनशील होती है। किसानों का कहना है कि इस समय मौसम का साफ रहना बहुत जरूरी है। यदि अचानक बादल छाते हैं या बेमौसम बारिश होती है, तो डोडे में दूध की मात्रा कम हो सकती है और घटिया (अफीम की क्वालिटी) पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, खिली हुई धूप को देखकर किसानों के चेहरे पर संतोष की लकीरें दिखाई दे रही हैं।
विभाग की भी रहती है पैनी नजर
नारकोटिक्स विभाग के कड़े नियमों के बीच हो रही इस खेती की एक-एक इंच जमीन और एक-एक ग्राम अफीम का हिसाब सरकार के पास होता है। यही कारण है कि किसान इसे अपनी संतान की तरह पालते हैं ताकि तौल के समय विभाग के मानकों पर उनकी फसल खरी उतरे और उनका लाइसेंस बरकरार रहे।
"अफीम की खेती हमारे लिए किसी तपस्या से कम नहीं है। फूल आने के बाद से जब तक अफीम घर न आ जाए, हमें चैन की नींद नहीं आती।"
    user_Pramod jain
    Pramod jain
    Journalist छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • गरोठ में कांग्रेस का मनरेगा बचाओ अभियान, मीनाक्षी नटराजन ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
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    गरोठ में कांग्रेस का मनरेगा बचाओ अभियान, मीनाक्षी नटराजन ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
    user_कैलाश विश्वकर्मा
    कैलाश विश्वकर्मा
    Journalist शामगढ़, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • Post by Samrth prajapat Prajapat
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    Post by Samrth prajapat Prajapat
    user_Samrth prajapat Prajapat
    Samrth prajapat Prajapat
    झरड़ा, उज्जैन, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
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