आर एस एस के बारे में गलत प्रचार प्रसार पर लगे अंकुश-- एडवोकेट सतिंदर सिंह चंडीगढ 11/03/2026 रक्षत शर्मा अनिल शारदा हरीश शर्मा---- ऐजुकेटड सिटी चंडीगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में फैलाई भ्रामक सूचनाओं एवं दुष्प्रचार के बारे में पूर्व पार्षद एवं भाजपा नेता सतिंदर सिंह के नेतृत्व में सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र पांडेय, जयप्रकाश गुप्ता एवं राजीव पांडेय ने राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के सेक्टर 9 स्थित सचिवालय में लगाए गए साप्ताहिक दरबार में भेंट की। सतिंदर सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पंजाब के एक टीवी चैनल के एक इंटरव्यू में सुखदीप नाम के व्यक्ति द्वारा पंजाबी में दावा गया कि आरएसएस द्वारा वर्ष 1999 में एक किताब छापी गई थी जिसमें सिख धर्म एवं गुरुओं के बारे में भ्रामक एवं आपत्तिजनक जानकारी प्रकाशित की गई थी। सतिंदर सिंह ने कहा कि ये एक बेहद दुखदाई और ग़ैर जिम्मेदाराना हरकत है। इस इंटरव्यू को सोशल मीडिया में कुछ अराजकतत्वों द्वारा आगे शेयर किया जा रहा है, जबकि हकीकत में आरएसएस द्वारा ऐसी कोई पुस्तक लिखी ही नहीं गई है। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में कुछ दिन पहले एक शिकायत चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सेल को लिखित रूप में दी थी, और साथ वीडियो क्लिप भी संलग्न की गई थी, किंतु बेहद अफसोस की बात है कि आजतक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। यदि उस पर कार्यवाही हुई होती तो पंजाब यूनिवर्सिटी की घटना ना होती। उन्होंने कहा कि आरएसएस के बारे में भ्रामक दुष्प्रचार से लोग भ्रमित होकर स्वयंसेवकों के साथ दुर्व्यवहार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य बचपन से ही आरएसएस के स्वयंसेवक हैं व इससे भली भांति अवगत हैं कि आरएसएस सदैव देश और समाज के उत्थान हेतु कार्यरत्त है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा राज्यपाल से मिलकर मांग की गई की कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं युवाओं को गलत जानकारी देने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स ऑपरेटर तथा समाज को विभाजित करने वाले वक्ताओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए। पीयू में आरएसएस के विरोध में नारेबाजी करने की घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। उन्होंने इसे पंजाब एवं अन्य क्षेत्रों में आपसी भाईचारा खराब करने व द्वेष फैलाने की साजिश करार दिया। सतिंदर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में गत वर्ष सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा हमारी आराध्य माता-सीता एवं भगवान श्री राम के बारे में अपमानजनक बातें कही गई थी, जिसकी शिकायत भी उसी समय साइबर थाना, सेक्टर 17, चंडीगढ़ में दी गई थी, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि हमारे देश में कुछ विदेशी ताकते हमारे ही लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काकर एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाना चाहती है। इसमें प्रशासन एवं पुलिस को तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए तथा गुलाब चंद कटारिया से निवेदन किया है कि वह चंडीगढ़ पुलिस को उपरोक्त मामलों में उचित कार्यवाही करने का निर्देश दें ताकि विद्यार्थियों एवं युवाओं को उकसाने वाले अराजक तत्वों का पर्दाफाश हो सके। राज्यपाल एवं प्रशासक ने इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ के डीजीपी से बात करके इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एडवोकेट सतिंदर सिंह और नरेंद्र पांडेय धर्म और समाज सेवकों ने उक्त जनकारी अल्फा न्यूज इंडिया को उपलब्ध कराई है.
आर एस एस के बारे में गलत प्रचार प्रसार पर लगे अंकुश-- एडवोकेट सतिंदर सिंह चंडीगढ 11/03/2026 रक्षत शर्मा अनिल शारदा हरीश शर्मा---- ऐजुकेटड सिटी चंडीगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में फैलाई भ्रामक सूचनाओं एवं दुष्प्रचार के बारे में पूर्व पार्षद एवं भाजपा नेता सतिंदर सिंह के नेतृत्व में सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र पांडेय, जयप्रकाश गुप्ता एवं राजीव पांडेय ने राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के सेक्टर 9 स्थित सचिवालय में लगाए गए साप्ताहिक दरबार में भेंट की। सतिंदर सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पंजाब के एक टीवी चैनल के एक इंटरव्यू में सुखदीप नाम के व्यक्ति द्वारा पंजाबी में दावा गया कि आरएसएस द्वारा वर्ष 1999 में एक किताब छापी गई थी जिसमें सिख धर्म एवं गुरुओं के बारे में भ्रामक एवं आपत्तिजनक जानकारी प्रकाशित की गई थी। सतिंदर सिंह ने कहा कि ये एक बेहद दुखदाई और ग़ैर जिम्मेदाराना हरकत है। इस इंटरव्यू को सोशल मीडिया में कुछ अराजकतत्वों द्वारा आगे शेयर किया जा रहा है, जबकि हकीकत में आरएसएस द्वारा ऐसी कोई पुस्तक लिखी ही नहीं गई है। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में कुछ दिन पहले एक शिकायत चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सेल को लिखित रूप में दी थी, और साथ वीडियो क्लिप भी संलग्न की गई थी, किंतु बेहद अफसोस की बात है कि आजतक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। यदि उस पर कार्यवाही हुई होती तो पंजाब यूनिवर्सिटी की घटना ना होती। उन्होंने कहा कि आरएसएस के बारे में भ्रामक दुष्प्रचार से लोग भ्रमित होकर स्वयंसेवकों के साथ दुर्व्यवहार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य बचपन से ही आरएसएस के स्वयंसेवक हैं व इससे भली भांति अवगत हैं कि आरएसएस सदैव देश और समाज के उत्थान हेतु कार्यरत्त है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा राज्यपाल से मिलकर मांग की गई की कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं युवाओं को गलत जानकारी देने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स ऑपरेटर तथा समाज को विभाजित करने वाले वक्ताओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए। पीयू में आरएसएस के विरोध में नारेबाजी करने की घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। उन्होंने इसे पंजाब एवं अन्य क्षेत्रों में आपसी भाईचारा खराब करने व द्वेष फैलाने की साजिश करार दिया। सतिंदर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में गत वर्ष सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा हमारी आराध्य माता-सीता एवं भगवान श्री राम के बारे में अपमानजनक बातें कही गई थी, जिसकी शिकायत भी उसी समय साइबर थाना, सेक्टर 17, चंडीगढ़ में दी गई थी, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि हमारे देश में कुछ विदेशी ताकते हमारे ही लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काकर एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाना चाहती है। इसमें प्रशासन एवं पुलिस को तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए तथा गुलाब चंद कटारिया से निवेदन किया है कि वह चंडीगढ़ पुलिस को उपरोक्त मामलों में उचित कार्यवाही करने का निर्देश दें ताकि विद्यार्थियों एवं युवाओं को उकसाने वाले अराजक तत्वों का पर्दाफाश हो सके। राज्यपाल एवं प्रशासक ने इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ के डीजीपी से बात करके इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एडवोकेट सतिंदर सिंह और नरेंद्र पांडेय धर्म और समाज सेवकों ने उक्त जनकारी अल्फा न्यूज इंडिया को उपलब्ध कराई है.
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- चंडीगढ 11/03/2026 रक्षत शर्मा अनिल शारदा हरीश शर्मा---- ऐजुकेटड सिटी चंडीगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में फैलाई भ्रामक सूचनाओं एवं दुष्प्रचार के बारे में पूर्व पार्षद एवं भाजपा नेता सतिंदर सिंह के नेतृत्व में सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र पांडेय, जयप्रकाश गुप्ता एवं राजीव पांडेय ने राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के सेक्टर 9 स्थित सचिवालय में लगाए गए साप्ताहिक दरबार में भेंट की। सतिंदर सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पंजाब के एक टीवी चैनल के एक इंटरव्यू में सुखदीप नाम के व्यक्ति द्वारा पंजाबी में दावा गया कि आरएसएस द्वारा वर्ष 1999 में एक किताब छापी गई थी जिसमें सिख धर्म एवं गुरुओं के बारे में भ्रामक एवं आपत्तिजनक जानकारी प्रकाशित की गई थी। सतिंदर सिंह ने कहा कि ये एक बेहद दुखदाई और ग़ैर जिम्मेदाराना हरकत है। इस इंटरव्यू को सोशल मीडिया में कुछ अराजकतत्वों द्वारा आगे शेयर किया जा रहा है, जबकि हकीकत में आरएसएस द्वारा ऐसी कोई पुस्तक लिखी ही नहीं गई है। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में कुछ दिन पहले एक शिकायत चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सेल को लिखित रूप में दी थी, और साथ वीडियो क्लिप भी संलग्न की गई थी, किंतु बेहद अफसोस की बात है कि आजतक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। यदि उस पर कार्यवाही हुई होती तो पंजाब यूनिवर्सिटी की घटना ना होती। उन्होंने कहा कि आरएसएस के बारे में भ्रामक दुष्प्रचार से लोग भ्रमित होकर स्वयंसेवकों के साथ दुर्व्यवहार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य बचपन से ही आरएसएस के स्वयंसेवक हैं व इससे भली भांति अवगत हैं कि आरएसएस सदैव देश और समाज के उत्थान हेतु कार्यरत्त है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा राज्यपाल से मिलकर मांग की गई की कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं युवाओं को गलत जानकारी देने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स ऑपरेटर तथा समाज को विभाजित करने वाले वक्ताओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए। पीयू में आरएसएस के विरोध में नारेबाजी करने की घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। उन्होंने इसे पंजाब एवं अन्य क्षेत्रों में आपसी भाईचारा खराब करने व द्वेष फैलाने की साजिश करार दिया। सतिंदर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में गत वर्ष सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा हमारी आराध्य माता-सीता एवं भगवान श्री राम के बारे में अपमानजनक बातें कही गई थी, जिसकी शिकायत भी उसी समय साइबर थाना, सेक्टर 17, चंडीगढ़ में दी गई थी, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि हमारे देश में कुछ विदेशी ताकते हमारे ही लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काकर एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाना चाहती है। इसमें प्रशासन एवं पुलिस को तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए तथा गुलाब चंद कटारिया से निवेदन किया है कि वह चंडीगढ़ पुलिस को उपरोक्त मामलों में उचित कार्यवाही करने का निर्देश दें ताकि विद्यार्थियों एवं युवाओं को उकसाने वाले अराजक तत्वों का पर्दाफाश हो सके। राज्यपाल एवं प्रशासक ने इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ के डीजीपी से बात करके इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एडवोकेट सतिंदर सिंह और नरेंद्र पांडेय धर्म और समाज सेवकों ने उक्त जनकारी अल्फा न्यूज इंडिया को उपलब्ध कराई है.1
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- 🕉️ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਸ਼ਿਵ ਮੰਦਰ, ਪਿੰਡ ਖਮਾਣੋ ਖੁਰਦ – ਆਸਥਾ, ਇਤਿਹਾਸ ਅਤੇ ਇਨਸਾਫ਼ ਦੀ ਲੜਾਈ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਫਤਹਿਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਪਿੰਡ ਖਮਾਣੋ ਖੁਰਦ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਸ਼ਿਵ ਮੰਦਰ ਸਦੀਆਂ ਤੋਂ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਆਸਥਾ ਦਾ ਕੇਂਦਰ ਬਣਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਪਿੰਡ ਦੇ ਬਜ਼ੁਰਗਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਇਹ ਮੰਦਰ ਬਹੁਤ ਪੁਰਾਤਨ ਹੈ ਅਤੇ ਸੰਭਵ ਹੈ ਕਿ ਇਹ 17ਵੀਂ ਜਾਂ 18ਵੀਂ ਸਦੀ ਦਾ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਸ਼ਾਇਦ ਮੁਗਲ ਕਾਲ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਮੰਦਰ ਦੀ ਅਸਲ ਇਤਿਹਾਸਕ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਿਖਤੀ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦੀ, ਪਰ ਇਹ ਸਥਾਨ ਪਿਛਲੀਆਂ ਕਈ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਤੋਂ ਧਾਰਮਿਕ ਅਤੇ ਸਮਾਜਕ ਜੀਵਨ ਦਾ ਅਹਿਮ ਹਿੱਸਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਮੰਦਰ ਵਿੱਚ ਭਗਵਾਨ ਸ਼ਿਵ ਜੀ, ਮਾਤਾ ਪਾਰਵਤੀ ਜੀ, ਸ਼੍ਰੀ ਗਣੇਸ਼ ਜੀ, ਹਨੂਮਾਨ ਜੀ ਅਤੇ ਨੰਦੀ ਮਹਾਰਾਜ ਦੀਆਂ ਮੂਰਤੀਆਂ ਸਥਾਪਿਤ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਕਈ ਸ਼ਰਧਾਲੂ ਇੱਥੇ ਮੱਥਾ ਟੇਕਣ ਆਉਂਦੇ ਹਨ। ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਮੰਨਣਾ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਸਥਾਨ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਆਧਿਆਤਮਿਕ ਸ਼ਕਤੀ ਵਾਲਾ ਪਵਿੱਤਰ ਧਾਮ ਹੈ। ਪਰ ਅੱਜ ਇਹ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਮੰਦਰ ਕਈ ਗੰਭੀਰ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਮੰਦਰ ਦੇ ਅੱਗੇ ਵਾਲੀ ਜਗ੍ਹਾ ‘ਤੇ Municipal Committee Khamano ਵੱਲੋਂ ਬੈਂਚਾਂ ਲਗਾਈਆਂ ਹੋਈਆਂ ਹਨ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਕਈ ਵਾਰ ਮੰਦਰ ਵੱਲ ਜਾਣ ਵਾਲਾ ਰਸਤਾ ਵੀ ਅੰਸ਼ਿਕ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਰੁਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਕਾਰਨ ਮੰਦਰ ਵਿੱਚ ਮੱਥਾ ਟੇਕਣ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸ਼ਰਧਾਲੂਆਂ ਨੂੰ ਅਸੁਵਿਧਾ ਅਤੇ ਕਈ ਵਾਰ ਅਸਹਿਜਤਾ ਮਹਿਸੂਸ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ Municipal Committee Khamano ਵੱਲੋਂ ਕੋਰਟ ਖਮਾਣੋ ਵਿੱਚ ਕੇਸ ਦਾਇਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਦਾਅਵਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਜਗ੍ਹਾ ਮੰਦਰ ਦੀ ਨਹੀਂ ਸਗੋਂ Municipal Committee ਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਇਲਾਕਾ Red Line ਵਿੱਚ ਆਉਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਪਿੰਡ ਖਮਾਣੋ ਖੁਰਦ ਦੇ ਕੁਝ ਲੋਕਾਂ ਵੱਲੋਂ ਵੀ 2022 ਤੋਂ ਕੋਰਟ ਵਿੱਚ ਕੇਸ ਦਾਇਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ, ਜੋ ਅੱਜ ਤੱਕ ਲਗਾਤਾਰ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਲੋਕ ਨਹੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਕਿ ਮੰਦਰ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਦੀ ਜਗ੍ਹਾ ਨੂੰ ਚਾਰਦੀਵਾਰੀ ਕਰਕੇ ਮੰਦਰ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ। ਹਾਲਾਤ ਇਹ ਹਨ ਕਿ ਮੰਦਰ ਦੇ ਸੱਜੇ ਅਤੇ ਖੱਬੇ ਪਾਸੇ ਪਿੰਡ ਦਾ ਗੰਦਾ ਪਾਣੀ ਲਿਜਾਣ ਲਈ ਡਰੇਨ ਬਣਾਈ ਹੋਈ ਹੈ ਅਤੇ ਮੰਦਰ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਜਿੱਥੇ ਕਦੇ ਇੱਕ ਪੁਰਾਤਨ ਸਰੋਵਰ ਹੋਇਆ ਕਰਦਾ ਸੀ, ਉੱਥੇ ਹੁਣ ਪਿੰਡ ਦਾ ਵੇਸਟ ਵਾਟਰ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਇਸ ਕਾਰਨ ਮੰਦਰ ਦਾ ਪਵਿੱਤਰ ਮਾਹੌਲ ਅਤੇ ਢਾਂਚਾ ਦੋਵੇਂ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ। ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਸ਼ਿਵ ਮੰਦਰ ਕਮੇਟੀ ਪਿੰਡ ਖਮਾਣੋ ਖੁਰਦ 2022 ਤੋਂ ਲਗਾਤਾਰ ਇਸ ਮਸਲੇ ਲਈ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ। ਕਮੇਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕਈ ਵਾਰ DC Office, SDM Office, Municipal Committee Khamano, ਅਤੇ ਕੋਰਟ ਖਮਾਣੋ ਵਿੱਚ ਅਰਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਸ਼ਿਕਾਇਤਾਂ ਦਿੱਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਹ ਮਾਮਲਾ CM Portal ‘ਤੇ ਵੀ ਕਈ ਵਾਰ ਦਰਜ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਪਰ ਦੁੱਖ ਦੀ ਗੱਲ ਹੈ ਕਿ ਕਈ ਵਾਰ ਸ਼ਿਕਾਇਤਾਂ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਢੰਗੀ ਜਾਂਚ ਜਾਂ ਕਾਰਵਾਈ ਦੇ ਹੀ Resolved ਦਿਖਾ ਕੇ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ‘ਤੇ ਭਰੋਸਾ ਵੀ ਘਟ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਮੰਦਰ ਕਮੇਟੀ ਦੀ ਮੰਗ ਸਿਰਫ਼ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਜਿੱਥੇ ਇਸ ਵੇਲੇ ਬੈਂਚਾਂ ਲੱਗੀਆਂ ਹਨ, ਉਸ ਜਗ੍ਹਾ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਕਰਕੇ ਚਾਰਦੀਵਾਰੀ ਅਤੇ ਇੱਕ ਗੇਟ ਬਣਾਇਆ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਜੋ ਮੰਦਰ ਦੀ ਪਵਿੱਤਰਤਾ, ਸੁਰੱਖਿਆ ਅਤੇ ਮਰਯਾਦਾ ਬਣੀ ਰਹੇ। ਇਹ ਲੜਾਈ ਕਿਸੇ ਵਿਅਕਤੀ ਜਾਂ ਸੰਸਥਾ ਦੇ ਵਿਰੁੱਧ ਨਹੀਂ, ਸਗੋਂ ਆਸਥਾ, ਵਿਰਾਸਤ ਅਤੇ ਸੱਚਾਈ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਲਈ ਹੈ। ਅੱਜ ਇਸ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਮੰਦਰ ਨੂੰ ਸੰਗਤ ਦੇ ਸਾਥ, ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਅਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਦੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ। ਮੰਦਰ ਦੀ ਮੁਰੰਮਤ, ਸੰਭਾਲ ਅਤੇ ਸੁਰੱਖਿਆ ਲਈ ਦਾਨ ਅਤੇ ਸਮਾਜਿਕ ਸਹਿਯੋਗ ਵੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਇਹ ਸਿਰਫ਼ ਇੱਕ ਧਾਰਮਿਕ ਸਥਾਨ ਨਹੀਂ, ਸਗੋਂ ਸਾਡੀ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤੀ ਅਤੇ ਵਿਰਾਸਤ ਦੀ ਨਿਸ਼ਾਨੀ ਹੈ। ਜੇ ਅਸੀਂ ਅੱਜ ਇਸਦੀ ਸੰਭਾਲ ਨਹੀਂ ਕਰਾਂਗੇ ਤਾਂ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਸਾਨੂੰ ਕਦੇ ਮਾਫ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਨਗੀਆਂ। 🙏 ਸਾਰੇ ਪਿੰਡ ਵਾਸੀਆਂ, ਸ਼ਰਧਾਲੂਆਂ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਦੇ ਜਾਗਰੂਕ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਬੇਨਤੀ ਹੈ ਕਿ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਸ਼ਿਵ ਮੰਦਰ ਖਮਾਣੋ ਖੁਰਦ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਲਈ ਅੱਗੇ ਆਓ ਅਤੇ ਸਾਥ ਦਿਓ। ਜੇ ਕਿਸੇ ਕੋਲ ਮੰਦਰ ਦੇ ਪੁਰਾਣੇ ਫੋਟੋ, ਦਸਤਾਵੇਜ਼ ਜਾਂ ਇਤਿਹਾਸ ਬਾਰੇ ਕੋਈ ਜਾਣਕਾਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸਾਂਝੀ ਕਰੋ, ਤਾਂ ਜੋ ਇਸ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਧਾਰਮਿਕ ਸਥਾਨ ਦਾ ਅਸਲੀ ਇਤਿਹਾਸ ਸੰਭਾਲਿਆ ਜਾ ਸਕੇ। 🕉️ ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਸ਼ਿਵ ਮੰਦਰ – ਸਾਡੀ ਆਸਥਾ, ਸਾਡੀ ਵਿਰਾਸਤ।4
- Post by ਗੋਬਿੰਦਗੜ ਖਬਰਨਾਮਾਂ1
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