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रिश्तों की डोर में बंधा प्रेम, भाई की कलाई पर सजा बहन का विश्वास मनेन्द्रगढ़/एमसीबी। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व पूरे क्षेत्र में हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया गया। सुबह से ही घर-घर में उत्सव का माहौल रहा। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम और विश्वास की राखी बांधी, आरती उतारी और उनके सुखी, समृद्ध एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। वहीं भाइयों ने भी बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार भेंट किए। रक्षाबंधन केवल कलाई पर बांधी जाने वाली एक डोर नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच अटूट रिश्ते, भरोसे और भावनाओं का प्रतीक है। राखी की हर गांठ में बचपन की शरारतें, साथ बिताए अनगिनत पल और एक-दूसरे के प्रति निस्वार्थ प्रेम की कहानी छिपी होती है। पर्व को लेकर बाजारों में भी खास रौनक देखने को मिली। रंग-बिरंगी राखियों, मिठाइयों और उपहारों की दुकानों पर दिनभर लोगों की भीड़ रही। दूर रहने वाले भाई-बहनों ने फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। कई बहनें अपने मायके पहुंचीं तो वर्षों बाद परिवार के साथ मिले इस अवसर ने भावनाओं को और गहरा कर दिया। भाई की कलाई पर राखी बांधते समय बहनों की आंखों में जहां स्नेह और खुशी दिखाई दी, वहीं भाइयों के चेहरों पर बहनों के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का भाव साफ नजर आया। रक्षाबंधन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि समय कितना भी बदल जाए, रिश्तों की सच्ची गर्माहट कभी कम नहीं होती। आधुनिक दौर की भागदौड़ के बीच यह पर्व परिवार को जोड़ने और भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत करने का अनमोल अवसर बनकर सामने आया।

1 hr ago
user_M.D. KASIM
M.D. KASIM
चिरमिरी, मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर, छत्तीसगढ़•
1 hr ago
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रिश्तों की डोर में बंधा प्रेम, भाई की कलाई पर सजा बहन का विश्वास मनेन्द्रगढ़/एमसीबी। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व पूरे क्षेत्र में हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया गया। सुबह से ही घर-घर में उत्सव का माहौल रहा। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम और विश्वास की राखी बांधी, आरती उतारी और उनके सुखी, समृद्ध एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। वहीं भाइयों ने भी बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार भेंट किए। रक्षाबंधन केवल कलाई पर बांधी जाने वाली एक डोर नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच अटूट रिश्ते, भरोसे और भावनाओं का प्रतीक है। राखी की हर गांठ में बचपन की शरारतें, साथ बिताए अनगिनत पल और एक-दूसरे के प्रति निस्वार्थ प्रेम की कहानी छिपी होती है। पर्व को लेकर बाजारों में भी खास रौनक देखने को मिली। रंग-बिरंगी राखियों, मिठाइयों और उपहारों की दुकानों पर दिनभर लोगों की भीड़ रही। दूर रहने वाले भाई-बहनों ने फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। कई बहनें अपने मायके पहुंचीं तो वर्षों बाद परिवार के साथ मिले इस अवसर ने भावनाओं को और गहरा कर दिया। भाई की कलाई पर राखी बांधते समय बहनों की आंखों में जहां स्नेह और खुशी दिखाई दी, वहीं भाइयों के चेहरों पर बहनों के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का भाव साफ नजर आया। रक्षाबंधन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि समय कितना भी बदल जाए, रिश्तों की सच्ची गर्माहट कभी कम नहीं होती। आधुनिक दौर की भागदौड़ के बीच यह पर्व परिवार को जोड़ने और भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत करने का अनमोल अवसर बनकर सामने आया।

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  • आदिवासी छात्र छात्राएं को जाति सूचक गाली देने का मामला सामने आने छात्रों का बयान
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    आदिवासी छात्र छात्राएं को जाति सूचक  गाली देने का मामला सामने आने छात्रों का बयान
    user_Santlal Urre
    Santlal Urre
    Waiter/Waitress सूरजपुर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़•
    16 hrs ago
  • नेपाल त्रासदी में फंसी अनूपपुर की दो बेटियां सुरक्षित, सरकार की मदद से पोखरा पहुंचीं पलक-पल्लवी, नेपाल त्रासदी में फंसी अनूपपुर की दो बेटियां सुरक्षित, सरकार की मदद से पोखरा पहुंचीं पलक-पल्लवी, एंकर नेपाल में हुई त्रासदी के बीच अनूपपुर जिले के कोतमा की दो बेटियां फंस गई थीं। कोतमा के मंजू माझी की बेटियां पलक माझी और पल्लवी माझी जो की ग्वालियर में रहकर पढ़ाई और नौकरी कर रहे थे जो की छुट्टी के अवसर पर नेपाल घूमने गई हुई थी वह नेपाल के जल त्रासदी में फस गई थी, नेपाल में फंसने के बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई थी। दो दिनों से पलक और पल्लवी से कोई संपर्क नहीं हो रहा था, जिसके कारण परिजन काफी परेशान थे और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे थे। हालांकि अब दोनों बेटियां सुरक्षित हैं। सरकार की मदद से दोनों को सुरक्षित निकालकर नेपाल के पोखरा पहुंचाया गया है। दोनों के कल नेपाल से अपने घर कोतमा के लिए रवाना होने की उम्मीद है। बेटियों के सुरक्षित होने की खबर मिलते ही परिवार ने राहत की सांस ली है। नेपाल में आई त्रासदी के बीच अनूपपुर जिले के कोतमा की रहने वाली मंजू माझी की दो बेटियां पलक माझी और पल्लवी माझी भी फंस गई थीं। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिवार में चिंता का माहौल था। हालांकि प्रशासन और सरकार के प्रयासों के बाद दोनों बेटियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। फिलहाल दोनों नेपाल के पोखरा में सुरक्षित हैं। परिजनों के मुताबिक, दोनों बेटियां अब सुरक्षित हैं और कल नेपाल से अपने घर कोतमा के लिए रवाना होंगी। पिता ने फोन पर दोनों बेटियों से बात की है। बेटियों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है। नेपाल में फंसी अनूपपुर की दोनों बेटियों को सुरक्षित निकालने में सरकार की मदद से परिवार को बड़ी राहत मिली है। अब परिवार को दोनों के सकुशल घर लौटने का इंतजार है। बाइट रत्नांबर शुक्ला थाना प्रभारी कोतमा। बाईट: मंजू माझी, बच्चियों के पिता। @⁨News Nation Input Sachin Ji⁩ रिपोर्ट, आदर्श दुबे अनूपपुर
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    नेपाल त्रासदी में फंसी अनूपपुर की दो बेटियां सुरक्षित, सरकार की मदद से पोखरा पहुंचीं पलक-पल्लवी, 
नेपाल त्रासदी में फंसी अनूपपुर की दो बेटियां सुरक्षित, सरकार की मदद से पोखरा पहुंचीं पलक-पल्लवी, 
एंकर नेपाल में हुई त्रासदी के बीच अनूपपुर जिले के कोतमा की दो बेटियां फंस गई थीं। कोतमा के मंजू माझी की बेटियां पलक माझी और पल्लवी माझी जो की ग्वालियर में रहकर पढ़ाई और नौकरी कर रहे थे जो की छुट्टी के अवसर पर नेपाल घूमने गई हुई थी वह नेपाल के जल त्रासदी में फस गई थी, नेपाल में फंसने के बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई थी। दो दिनों से पलक और पल्लवी से कोई संपर्क नहीं हो रहा था, जिसके कारण परिजन काफी परेशान थे और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे थे। हालांकि अब दोनों बेटियां सुरक्षित हैं। सरकार की मदद से दोनों को सुरक्षित निकालकर नेपाल के पोखरा पहुंचाया गया है। दोनों के कल नेपाल से अपने घर कोतमा के लिए रवाना होने की उम्मीद है। बेटियों के सुरक्षित होने की खबर मिलते ही परिवार ने राहत की सांस ली है।
नेपाल में आई त्रासदी के बीच अनूपपुर जिले के कोतमा की रहने वाली मंजू माझी की दो बेटियां पलक माझी और पल्लवी माझी भी फंस गई थीं। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिवार में चिंता का माहौल था।
हालांकि प्रशासन और सरकार के प्रयासों के बाद दोनों बेटियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। फिलहाल दोनों नेपाल के पोखरा में सुरक्षित हैं। परिजनों के मुताबिक, दोनों बेटियां अब सुरक्षित हैं और कल नेपाल से अपने घर कोतमा के लिए रवाना होंगी। पिता ने फोन पर दोनों बेटियों से बात की है। बेटियों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है। नेपाल में फंसी अनूपपुर की दोनों बेटियों को सुरक्षित निकालने में सरकार की मदद से परिवार को बड़ी राहत मिली है। अब परिवार को दोनों के सकुशल घर लौटने का इंतजार है।
बाइट रत्नांबर शुक्ला थाना प्रभारी कोतमा।
बाईट: मंजू माझी, बच्चियों के पिता।
@⁨News Nation Input Sachin Ji⁩ 
रिपोर्ट, आदर्श दुबे अनूपपुर
    user_आदर्श दुबे
    आदर्श दुबे
    Yoga instructor अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अमरकंटक में मनाया गया श्रावणी पर्व पुरोहितों-ब्राह्मणों ने मां नर्मदा के रामघाट में लगाई पुण्य की डुबकी शास्त्रोक्त विधि से किया श्रावणी कर्म अनूपपूर/अमरकंटक - प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में श्रावण मास की पूर्णाहुति के अवसर पर शुक्रवार, 28 अगस्त 26 को श्रावण पूर्णिमा एवं शतभिषा नक्षत्र के पावन संयोग में श्रावणी पर्व श्रद्धा, आस्था और वैदिक परंपराओं के अनुरूप मनाया गया। इस अवसर पर नगर के पुरोहितों, ब्राह्मणों, पंडितों एवं विप्रजनों ने पतित पावनी पुण्य सलिला मां नर्मदा के रामघाट तट पर विधि-विधानपूर्वक श्रावणी कर्म संपन्न किया। भारतीय सनातन परंपरा में श्रावण पूर्णिमा का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह दिवस वैदिक संस्कारों, ऋषि परंपरा, स्वाध्याय, संकल्प और आत्मशुद्धि से जुड़ा हुआ है। ब्राह्मण समाज द्वारा इस अवसर पर श्रावणी कर्म एवं उपाकर्म की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। वैदिक परंपरा में श्रावण पूर्णिमा को ऋषियों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने, वेदाध्ययन की पुनर्स्मृति तथा आत्मिक शुद्धि का पावन अवसर माना गया है। मां नर्मदा के पावन तट पर वैदिक परंपरा का निर्वहन श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रातःकाल से ही रामघाट पर धार्मिक वातावरण दिखाई दिया। मां नर्मदा के तट पर पहुंचे पुरोहितों एवं ब्राह्मणों ने सर्वप्रथम पुण्य सलिला नर्मदा का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक स्नान किया। नर्मदा की पवित्र जलधारा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद शास्त्रोक्त विधि से श्रावणी कर्म प्रारंभ किया गया। मान्यता है कि नदियां भारतीय संस्कृति में केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की आधारभूमि रही हैं। वहीं अमरकंटक में मां नर्मदा का उद्गम होने के कारण नर्मदा तट का धार्मिक महत्व और भी विशिष्ट हो जाता है। यहां मां नर्मदा के तट पर किया गया स्नान, पूजन, जप, तप और धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यदायी माना जाता है। रामघाट पर मंत्रोच्चार के साथ श्रावणी कर्म का आयोजन हुआ। वैदिक ऋचाओं एवं मंत्रों की गूंज से नर्मदा तट का वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्राचीन ऋषि परंपरा और वैदिक संस्कृति स्वयं मां नर्मदा के तट पर साकार हो उठी हो। लगभग एक सैकड़ा विप्रजनों ने लिया हिस्सा स्थानीय मृत्युंजय आश्रम के पुरोहितों एवं ब्राह्मणों सहित नगर के बड़ी संख्या में विप्रजन इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। लगभग एक सैकड़ा विप्रजनों ने श्रावणी कर्म में सहभागिता की। शांति कुटी आश्रम के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज, मृत्युंजय आश्रम के पंडित योगेश दुबे, बिहारी लाल तिवारी, पंडित संदीप उपाध्याय सहित अनेक पुरोहित एवं विप्रजन उपस्थित रहे। रामघाट में श्रावणी कर्म का आयोजन पंडित रवि महाराज द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उपस्थित ब्राह्मणों ने परंपरागत विधि से संकल्प लेकर श्रावणी कर्म किया। नर्मदा उद्गम कुंड में भी गूंजे वैदिक मंत्र श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर मां नर्मदा के उद्गम स्थल परिसर स्थित पवित्र नर्मदा कुंड में भी श्रावणी कर्म का आयोजन किया गया। नर्मदा मंदिर के पुजारी कामता प्रसाद द्विवेदी (नीलू महाराज) की उपस्थिति एवं नेतृत्व में ब्राह्मणों ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया। इस अवसर पर उमेश द्विवेदी (बंटी महाराज), राजेश द्विवेदी (बल्लू महाराज), कमलेश द्विवेदी, जीतेंद्र द्विवेदी धर्मेंद्र द्विवेदी हर्ष द्विवेदी रूपेश द्विवेदी उत्तम द्विवेदी सहित अन्य विप्रजन उपस्थित रहे। नर्मदा उद्गम कुंड में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन एवं धार्मिक कर्मकांड के साथ श्रावणी पर्व की परंपरा निभाई गई। ऋषि परंपरा और वेद संस्कृति से जुड़ा है श्रावणी पर्व श्रावणी पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु, ऋषि और वेद परंपरा के प्रति कृतज्ञता का पर्व भी माना जाता है। प्राचीन काल में इसी समय ऋषि-मुनियों के आश्रमों में वेदाध्ययन एवं स्वाध्याय की परंपराओं को विशेष रूप से महत्व दिया जाता था। ब्राह्मणों के लिए यह आत्मसंस्कार, स्वाध्याय, संयम और अपने धार्मिक दायित्वों के पुनः स्मरण का अवसर रहा है। श्रावणी कर्म के माध्यम से सनातन परंपरा में यह भाव व्यक्त किया जाता है कि ज्ञान की परंपरा निरंतर चलती रहे, वेदों की वाणी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रहे और समाज में धर्म, संस्कार एवं सदाचार की भावना बनी रहे। इसी वैदिक भावभूमि के कारण श्रावणी पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ऋषि-स्मरण, वेद-संरक्षण, आत्मशुद्धि और सनातन संस्कारों के पुनर्स्मरण का अवसर मानी जाती है। अमरकंटक में जीवंत हुई सनातन संस्कृति श्रावण मास के अंतिम दिवस अमरकंटक में रामघाट से लेकर नर्मदा उद्गम कुंड तक धार्मिक आस्था और वैदिक परंपरा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। एक ओर मां नर्मदा की कल-कल बहती पावन धारा, दूसरी ओर वैदिक मंत्रों की गूंज और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान—पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना रहे थे। पवित्र नगरी अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के बीच श्रावणी पर्व का यह आयोजन सनातन संस्कृति की जीवंत विरासत का प्रतीक बना। ब्राह्मणों एवं पुरोहितों द्वारा परंपरागत रूप से किए गए श्रावणी कर्म ने नई पीढ़ी को भी वैदिक संस्कारों और ऋषि परंपरा से जोड़ने का संदेश दिया। मां नर्मदा के पावन तट पर श्रद्धा और वैदिक मंत्रों के मध्य संपन्न श्रावणी पर्व के साथ ही श्रावण मास का धार्मिक अनुष्ठानिक क्रम भी पूर्ण हुआ। पूरे आयोजन में धर्म, वेद, संस्कार, प्रकृति और मां नर्मदा के प्रति आस्था का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
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    वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अमरकंटक में मनाया गया श्रावणी पर्व


पुरोहितों-ब्राह्मणों ने मां नर्मदा के रामघाट में लगाई पुण्य की डुबकी शास्त्रोक्त विधि से किया श्रावणी कर्म
अनूपपूर/अमरकंटक  -  
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में श्रावण मास की पूर्णाहुति के अवसर पर शुक्रवार, 28 अगस्त 26 को श्रावण पूर्णिमा एवं शतभिषा नक्षत्र के पावन संयोग में श्रावणी पर्व श्रद्धा, आस्था और वैदिक परंपराओं के अनुरूप मनाया गया। इस अवसर पर नगर के पुरोहितों, ब्राह्मणों, पंडितों एवं विप्रजनों ने पतित पावनी पुण्य सलिला मां नर्मदा के रामघाट तट पर विधि-विधानपूर्वक श्रावणी कर्म संपन्न किया।
भारतीय सनातन परंपरा में श्रावण पूर्णिमा का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह दिवस वैदिक संस्कारों, ऋषि परंपरा, स्वाध्याय, संकल्प और आत्मशुद्धि से जुड़ा हुआ है। ब्राह्मण समाज द्वारा इस अवसर पर श्रावणी कर्म एवं उपाकर्म की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। वैदिक परंपरा में श्रावण पूर्णिमा को ऋषियों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने, वेदाध्ययन की पुनर्स्मृति तथा आत्मिक शुद्धि का पावन अवसर माना गया है।
मां नर्मदा के पावन तट पर वैदिक परंपरा का निर्वहन श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रातःकाल से ही रामघाट पर धार्मिक वातावरण दिखाई दिया। मां नर्मदा के तट पर पहुंचे पुरोहितों एवं ब्राह्मणों ने सर्वप्रथम पुण्य सलिला नर्मदा का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक स्नान किया। नर्मदा की पवित्र जलधारा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद शास्त्रोक्त विधि से श्रावणी कर्म प्रारंभ किया गया।
मान्यता है कि नदियां भारतीय संस्कृति में केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की आधारभूमि रही हैं। वहीं अमरकंटक में मां नर्मदा का उद्गम होने के कारण नर्मदा तट का धार्मिक महत्व और भी विशिष्ट हो जाता है। यहां मां नर्मदा के तट पर किया गया स्नान, पूजन, जप, तप और धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
रामघाट पर मंत्रोच्चार के साथ श्रावणी कर्म का आयोजन हुआ। वैदिक ऋचाओं एवं मंत्रों की गूंज से नर्मदा तट का वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्राचीन ऋषि परंपरा और वैदिक संस्कृति स्वयं मां नर्मदा के तट पर साकार हो उठी हो।
लगभग एक सैकड़ा विप्रजनों ने लिया हिस्सा
स्थानीय मृत्युंजय आश्रम के पुरोहितों एवं ब्राह्मणों सहित नगर के बड़ी संख्या में विप्रजन इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। लगभग एक सैकड़ा विप्रजनों ने श्रावणी कर्म में सहभागिता की।
शांति कुटी आश्रम के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज, मृत्युंजय आश्रम के पंडित योगेश दुबे, बिहारी लाल तिवारी, पंडित संदीप उपाध्याय सहित अनेक पुरोहित एवं विप्रजन उपस्थित रहे।
रामघाट में श्रावणी कर्म का आयोजन पंडित रवि महाराज द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उपस्थित ब्राह्मणों ने परंपरागत विधि से संकल्प लेकर श्रावणी कर्म किया।
नर्मदा उद्गम कुंड में भी गूंजे वैदिक मंत्र
श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर मां नर्मदा के उद्गम स्थल परिसर स्थित पवित्र नर्मदा कुंड में भी श्रावणी कर्म का आयोजन किया गया। नर्मदा मंदिर के पुजारी कामता प्रसाद द्विवेदी (नीलू महाराज) की उपस्थिति एवं नेतृत्व में ब्राह्मणों ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया।
इस अवसर पर उमेश द्विवेदी (बंटी महाराज), राजेश द्विवेदी (बल्लू महाराज), कमलेश द्विवेदी, जीतेंद्र द्विवेदी धर्मेंद्र द्विवेदी हर्ष द्विवेदी रूपेश द्विवेदी उत्तम द्विवेदी सहित अन्य विप्रजन उपस्थित रहे। नर्मदा उद्गम कुंड में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन एवं धार्मिक कर्मकांड के साथ श्रावणी पर्व की परंपरा निभाई गई।
ऋषि परंपरा और वेद संस्कृति से जुड़ा है श्रावणी पर्व
श्रावणी पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु, ऋषि और वेद परंपरा के प्रति कृतज्ञता का पर्व भी माना जाता है। प्राचीन काल में इसी समय ऋषि-मुनियों के आश्रमों में वेदाध्ययन एवं स्वाध्याय की परंपराओं को विशेष रूप से महत्व दिया जाता था। ब्राह्मणों के लिए यह आत्मसंस्कार, स्वाध्याय, संयम और अपने धार्मिक दायित्वों के पुनः स्मरण का अवसर रहा है।
श्रावणी कर्म के माध्यम से सनातन परंपरा में यह भाव व्यक्त किया जाता है कि ज्ञान की परंपरा निरंतर चलती रहे, वेदों की वाणी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रहे और समाज में धर्म, संस्कार एवं सदाचार की भावना बनी रहे।
इसी वैदिक भावभूमि के कारण श्रावणी पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ऋषि-स्मरण, वेद-संरक्षण, आत्मशुद्धि और सनातन संस्कारों के पुनर्स्मरण का अवसर मानी जाती है।
अमरकंटक में जीवंत हुई सनातन संस्कृति
श्रावण मास के अंतिम दिवस अमरकंटक में रामघाट से लेकर नर्मदा उद्गम कुंड तक धार्मिक आस्था और वैदिक परंपरा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। एक ओर मां नर्मदा की कल-कल बहती पावन धारा, दूसरी ओर वैदिक मंत्रों की गूंज और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान—पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना रहे थे।
पवित्र नगरी अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के बीच श्रावणी पर्व का यह आयोजन सनातन संस्कृति की जीवंत विरासत का प्रतीक बना। ब्राह्मणों एवं पुरोहितों द्वारा परंपरागत रूप से किए गए श्रावणी कर्म ने नई पीढ़ी को भी वैदिक संस्कारों और ऋषि परंपरा से जोड़ने का संदेश दिया।
मां नर्मदा के पावन तट पर श्रद्धा और वैदिक मंत्रों के मध्य संपन्न श्रावणी पर्व के साथ ही श्रावण मास का धार्मिक अनुष्ठानिक क्रम भी पूर्ण हुआ। पूरे आयोजन में धर्म, वेद, संस्कार, प्रकृति और मां नर्मदा के प्रति आस्था का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
    user_Anupam Singh patrkar
    Anupam Singh patrkar
    अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • नेपाल की त्रासदी में फंसीं कोतमा की दो बच्चियां, सुरक्षित स्थान पर होने की सूचना कोतमा। नेपाल में हुई त्रासदी के बीच कोतमा की दो बच्चियां पिछले 3 से 4 दिनों से वहां फंसी हुई हैं। इस खबर के बाद परिजनों में चिंता का माहौल बना हुआ है। हालांकि, कोतमा थाना प्रभारी ने बताया कि परिवार के लोगों से मिली सूचना के अनुसार दोनों बच्चियां सुरक्षित स्थान पर हैं। थाना प्रभारी के मुताबिक, बच्चियों की सुरक्षित वापसी को लेकर सरकार स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित अधिकारियों द्वारा नेपाल स्थित भारतीय दूतावास (Embassy) से लगातार संपर्क कर जानकारी ली जा रही है तथा बच्चियों को सुरक्षित वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। बच्चियों के परिजन उनकी सकुशल वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं। प्रशासन और सरकार की ओर से भी पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है।
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    नेपाल की त्रासदी में फंसीं कोतमा की दो बच्चियां, सुरक्षित स्थान पर होने की सूचना
कोतमा। नेपाल में हुई त्रासदी के बीच कोतमा की दो बच्चियां पिछले 3 से 4 दिनों से वहां फंसी हुई हैं। इस खबर के बाद परिजनों में चिंता का माहौल बना हुआ है। हालांकि, कोतमा थाना प्रभारी ने बताया कि परिवार के लोगों से मिली सूचना के अनुसार दोनों बच्चियां सुरक्षित स्थान पर हैं।
थाना प्रभारी के मुताबिक, बच्चियों की सुरक्षित वापसी को लेकर सरकार स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित अधिकारियों द्वारा नेपाल स्थित भारतीय दूतावास (Embassy) से लगातार संपर्क कर जानकारी ली जा रही है तथा बच्चियों को सुरक्षित वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
बच्चियों के परिजन उनकी सकुशल वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं। प्रशासन और सरकार की ओर से भी पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है।
    user_Prince ojha
    Prince ojha
    अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • भू माफियाओं ने आधा बोल के पूरा जमीन बेच डाली प्रार्थी को पैसा भी नहीं दिया हो रहा परेशान कब्जा करने के लिए आ रहे दलाल भू माफियाओं ने आधा बोल के पूरा जमीन बेच डाली प्रार्थी को पैसा भी नहीं दिया हो रहा परेशान कब्जा करने के लिए आ रहे दलाल अनपढ़ समझ के सब जमीन को बेच डाले जमीन मालिक को पैसा भी नहीं दिए परेशान हो रहा है उसका सुनने वाला कोई नहीं रो-रो कर बता रहा दुखड़ा
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    भू माफियाओं ने आधा बोल के पूरा जमीन बेच डाली प्रार्थी को पैसा भी नहीं दिया हो रहा परेशान कब्जा करने के लिए आ रहे दलाल
भू माफियाओं ने आधा बोल के पूरा जमीन बेच डाली प्रार्थी को पैसा भी नहीं दिया हो रहा परेशान कब्जा करने के लिए आ रहे दलाल अनपढ़ समझ के सब जमीन को बेच डाले जमीन मालिक को पैसा भी नहीं दिए परेशान हो रहा है उसका सुनने वाला कोई नहीं रो-रो कर बता रहा दुखड़ा
    user_Fatafat news
    Fatafat news
    उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    23 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेताप्रतिपक्ष चरणदास महंत ने दी प्रदेश के सभी बहनों को रक्षाबंधन पर्व की बधाई
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    छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेताप्रतिपक्ष चरणदास महंत ने दी प्रदेश के सभी बहनों को रक्षाबंधन पर्व की बधाई
    user_Dwarika prasad Yadaw
    Dwarika prasad Yadaw
    Farmer हरदीबाजार, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • कोरबा: SECL गेवरा कोयला खदान में लगी आग प्रबंधन कर रहा हादसे को छुपाने का प्रयास
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    कोरबा: SECL गेवरा कोयला खदान में लगी आग प्रबंधन कर रहा हादसे को छुपाने का प्रयास
    user_Korba news
    Korba news
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • पार्षद एवं समाजसेवी पवन चीनी ने 500 से अधिक बहनों से बंधवाई राखी अनूपपुर - नगर परिषद बरगवां-अमलाई के वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद एवं समाजसेवी पवन चीनी अपने सामाजिक एवं जनसेवा के कार्यों को लेकर लगातार चर्चा में बने रहते हैं। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उन्होंने भाई-बहन के प्रेम और विश्वास के इस त्योहार को कुछ अलग अंदाज में मनाते हुए नगर परिषद के विभिन्न वार्डों की 500 से अधिक बहनों से राखी बंधवाई। पवन चीनी ने अपने वार्ड के पुरानी शंकर मंदिर, बसंतपुर दफाई सहित नगर परिषद के विभिन्न वार्डों में पहुंचकर बहनों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस दौरान उन्होंने बहनों को उपहार भेंट कर उनका सम्मान बढ़ाया। उनके इस प्रयास से रक्षाबंधन का पर्व सामाजिक सरोकार और भाईचारे की भावना से और भी खास बन गया। कार्यक्रम में उपस्थित बहनों ने पवन चीनी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बहनों का कहना था कि पवन चीनी केवल एक पार्षद नहीं, बल्कि लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले भाई के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे बिना किसी स्वार्थ के लगातार लोगों की सेवा में जुटे रहते हैं।बहनों ने कहा कि “ऐसा भाई हर किसी को मिले, जो अपनी परवाह किए बिना लोगों की सेवा में लगा रहे।” उन्होंने पवन चीनी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे इसी तरह हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें और समाजसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहें। रक्षाबंधन के अवसर पर पवन चीनी द्वारा किए गए इस आयोजन ने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ-साथ सामाजिक एकता और सेवा भावना का भी संदेश दिया।
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    पार्षद एवं समाजसेवी पवन चीनी ने 500 से अधिक बहनों से बंधवाई राखी
अनूपपुर - 
नगर परिषद बरगवां-अमलाई के वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद एवं समाजसेवी पवन चीनी अपने सामाजिक एवं जनसेवा के कार्यों को लेकर लगातार चर्चा में बने रहते हैं। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उन्होंने भाई-बहन के प्रेम और विश्वास के इस त्योहार को कुछ अलग अंदाज में मनाते हुए नगर परिषद के विभिन्न वार्डों की 500 से अधिक बहनों से राखी बंधवाई। पवन चीनी ने अपने वार्ड के पुरानी शंकर मंदिर, बसंतपुर दफाई सहित नगर परिषद के विभिन्न वार्डों में पहुंचकर बहनों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस दौरान उन्होंने बहनों को उपहार भेंट कर उनका सम्मान बढ़ाया। उनके इस प्रयास से रक्षाबंधन का पर्व सामाजिक सरोकार और भाईचारे की भावना से और भी खास बन गया। कार्यक्रम में उपस्थित बहनों ने पवन चीनी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बहनों का कहना था कि पवन चीनी केवल एक पार्षद नहीं, बल्कि लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले भाई के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे बिना किसी स्वार्थ के लगातार लोगों की सेवा में जुटे रहते हैं।बहनों ने कहा कि “ऐसा भाई हर किसी को मिले, जो अपनी परवाह किए बिना लोगों की सेवा में लगा रहे।” उन्होंने पवन चीनी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे इसी तरह हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें और समाजसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहें।
रक्षाबंधन के अवसर पर पवन चीनी द्वारा किए गए इस आयोजन ने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ-साथ सामाजिक एकता और सेवा भावना का भी संदेश दिया।
    user_Anupam Singh patrkar
    Anupam Singh patrkar
    अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
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