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सालमगढ रामेश्वर महादेव मंदिर पर व नगर में सकल सालमगढ कि ओर से बड़े धूमधाम से होली खेली सालमगढ रामेश्वर महादेव मंदिर पर व नगर में सकल सालमगढ कि ओर से बड़े धूमधाम से होली खेली गई  सालमगढ़ होली का पावन पर्व बडे धूमधाम से मनाया शिवपंचायत के साथ खेली महिलाओं ने होली बस स्टैंड से रामेश्वर महादेव मंदिर तक ढोल कि थाप नाचते गाते गुलाल के साथ खेलते हुए सभी महिलाएं मंदिर पर पहुंच कर भगवान भोलेनाथ अपने परिवार के साथ विराजमान हैं उनको सभी महिलाओं व बालिकाओं ने अलग अलग रंगो से गुलाल लगाकर भगवान को प्रशन्न किया व भजनो पर नृत्य कर होली के पावन पर्व का आंनद लिया वही गाव मे पुरूषों के द्वारा डीजे कि धुन पर गाव मे गेंर निकाली नाचते गाते हुए गाव मे घुम घुम कर सभी को गुलाल लगाया  ग़ैर सकल सालमगढ द्वारा निकाली गयी व भूतनाथ मंदिर पर श्याम को भोजन का आयोजन किया गया

18 hrs ago
user_User3132
User3132
दलोट, प्रतापगढ़, राजस्थान•
18 hrs ago

सालमगढ रामेश्वर महादेव मंदिर पर व नगर में सकल सालमगढ कि ओर से बड़े धूमधाम से होली खेली सालमगढ रामेश्वर महादेव मंदिर पर व नगर में सकल सालमगढ कि ओर से बड़े धूमधाम से होली खेली गई  सालमगढ़ होली का पावन पर्व बडे धूमधाम से मनाया शिवपंचायत के साथ खेली महिलाओं ने होली बस स्टैंड से रामेश्वर महादेव मंदिर तक ढोल कि थाप नाचते गाते गुलाल के साथ खेलते हुए सभी महिलाएं मंदिर पर पहुंच कर भगवान भोलेनाथ अपने परिवार के साथ विराजमान हैं उनको सभी महिलाओं व बालिकाओं ने अलग अलग रंगो से गुलाल लगाकर भगवान को प्रशन्न किया व भजनो पर नृत्य कर होली के पावन पर्व का आंनद लिया वही गाव मे पुरूषों के द्वारा डीजे कि धुन पर गाव मे गेंर निकाली नाचते गाते हुए गाव मे घुम घुम कर सभी को गुलाल लगाया  ग़ैर सकल सालमगढ द्वारा निकाली गयी व भूतनाथ मंदिर पर श्याम को भोजन का आयोजन किया गया

More news from राजस्थान and nearby areas
  • Post by Rajendra Tabiyar
    1
    Post by Rajendra Tabiyar
    user_Rajendra Tabiyar
    Rajendra Tabiyar
    Actor गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    28 min ago
  • Post by Bapulal Ahari
    2
    Post by Bapulal Ahari
    user_Bapulal Ahari
    Bapulal Ahari
    Electrician गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • अपने क्षेत्र की सभी वायरल विडियोज के लिए डाउनलोड करें श
    1
    अपने क्षेत्र की सभी वायरल विडियोज के लिए डाउनलोड करें श
    user_MUNNA LAL DERAN
    MUNNA LAL DERAN
    Photographer पेटलावद, झाबुआ, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • प्रतापगढ़// चित्तौड़गढ़ लोकसभा सांसद प्रत्याशी कमल मीणा बहुजन समाज पार्टी जिलाध्यक्ष प्रतापगढ़ राजस्थान ने बताया कि वर्तमान सरकार की कई योजनाएं कागज में ज्यादा और धरातल पर कम चल रही है ऐसा एक मामला सामने है राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में आयुष विभाग एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन द्वारा निशुल्क आयुर्वेद बहिरंग एवं अंतरंग 10 दिवसीय अर्श भगंदर क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का आयोजन दिनांक 22 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक भटारक यश कीर्ति जैन बोर्डिंग एमजी रोड प्रतापगढ़ में सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 तक शिविर का समय दिया हुआ था जबकि दिनांक 2 मार्च 2026 को जब शिविर स्तल पर बहुजन समाज पार्टी जिला अध्यक्ष कमल मीणा बीएसपी कार्यकर्ता एवं पत्रकार टीम शिविर स्थल पर दवाई लेने पहुंचे तो शिवीर पूर्ण रूप से बंद था आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में कई ऐसी योजनाएं हैं जो कागज में चल रही है पर धरातल पर असर नहीं है जॉकी 22 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक जो नि शुल्क आयुर्वेद बहिरंग एवं अंतरंग 10 दिवसीय अर्श भगंदर क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का आयोजन 3 मार्च से पूर्व ही समाप्त हो चुका था इस प्रकार से ट्राइबल क्षेत्र में चलने वाली योजनाएं दिखावे में ज्यादा होती है एवं हकीकत में कम होती है
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    प्रतापगढ़//
चित्तौड़गढ़ लोकसभा सांसद प्रत्याशी कमल मीणा बहुजन समाज पार्टी जिलाध्यक्ष प्रतापगढ़ राजस्थान ने बताया कि वर्तमान सरकार की कई योजनाएं कागज में ज्यादा और धरातल पर कम चल रही है ऐसा एक मामला सामने है राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में आयुष विभाग एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन द्वारा निशुल्क आयुर्वेद बहिरंग एवं अंतरंग 10 दिवसीय अर्श भगंदर क्षार  सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का आयोजन दिनांक 22 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक भटारक यश कीर्ति जैन बोर्डिंग एमजी रोड प्रतापगढ़  में सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 तक शिविर का समय दिया हुआ था जबकि दिनांक   2 मार्च 2026 को जब शिविर स्तल पर बहुजन समाज पार्टी जिला अध्यक्ष कमल मीणा बीएसपी कार्यकर्ता एवं पत्रकार टीम शिविर स्थल पर दवाई लेने पहुंचे तो शिवीर पूर्ण रूप से बंद था आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में कई ऐसी योजनाएं हैं जो कागज में चल रही है पर धरातल पर असर नहीं है जॉकी 22 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक जो नि शुल्क आयुर्वेद बहिरंग एवं अंतरंग 10 दिवसीय अर्श भगंदर क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का आयोजन 3 मार्च से पूर्व ही समाप्त हो चुका था इस प्रकार से ट्राइबल क्षेत्र में चलने वाली योजनाएं दिखावे में ज्यादा होती है एवं हकीकत में कम होती है
    user_न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
    न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
    छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • छोटी सादड़ी उपखंड में रंगों का त्योहार हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है धूलंडी के दिन यहां उत्साहित युवक आपस में एक दूसरे के गुलाल लगाकर धुलेंडी का पर्व मनाते देखा गया इसमें खास बात यह है कि केवल बिना केमिकल के रंगों का प्रयोग करते हैं
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    छोटी सादड़ी उपखंड में रंगों का त्योहार हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है धूलंडी के दिन यहां उत्साहित युवक आपस में एक दूसरे के गुलाल लगाकर धुलेंडी का पर्व मनाते   देखा गया इसमें खास बात यह है कि केवल बिना केमिकल के रंगों का प्रयोग करते हैं
    user_Reporter ambalal suthar
    Reporter ambalal suthar
    Video Creator छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • रंगों के उत्सव होली के रंग में सभी रंगे हुए हैं. अलग अलग जगहों पर अलग अलग मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार होली मनाई जाती है. लेकिन मेवाड़ में एक ऐसी जगह है जहां पर रंगों के साथ बारूद की होली खेली जाती है. उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ हाईवे पर स्थिति मेनार में होली के तीसरे दिन चैत्र कृष्ण द्वितीया को यह होली खेली जाती है. जहां देर रात तक बंदूके बारूद उगलती है और तोपों की गर्जन से पूरा मेनार धधक उठता है. यह होली 4 मार्च को जमरा बीज को मनाई जाएगी. यह परंपरा मेनार के लोग 500 साल से निभाते आ रहे हैं. शाम होते ही बजता है युद्ध का बिगुल जमारबिज की सुबह तलवारों की गेर से पहले गांव के ओंकारेश्वर चबूतरे पर लाल जाजम बिछाई जाती और इसके साथ ही ग्रामीणों अमल कसूंबे की रस्म अदा की जाती है. फिर दिनभर गांव में अन्य जगहों से आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है और होली के पहले बना विशेष खाना खिलाया जाता है. शाम होते ही युवा युद्ध की तैयारी में जुट जाते हैं. युद्ध का बिगुल बजता है. इसमें मशालचियों की अगुवाई में सफेद धोती-कुर्ता और कसूमल पाग पहने ग्रामीणों के पांच दल पांच रास्तों से गांव के चारभुजा मंदिर के सामने चौराहा पहुंचते और फेरावत के इशारे पर एक साथ सभी रणबांकुर बंदूको से हवाई फायर करते हैं. चारों तरह आग की लपटे दिखाई देती है. साथ में पटाखे भी छूटते रहते हैं. एक सैकंड ऐसा नहीं होता कि कही से बंदूकों, तोपों या पटाखों की आवाजें ना आए. यह भी कुछ देर तक नहीं शाम को शुरू होने के बाद आधी रात के आगे भी चलता रहता है. मेनार के लोगों ने बताया कि बात तब की है जब मेवाड़ पर महाराणा अमर सिंह का राज था. उस समय मेवाड़ की पावन धरा पर जगह जगह मुगलों की छावनिया पड़ी हुई थी. इसी तरह मेनार में भी गाँव के पूर्व दिशा में मुगलों ने अपनी छावनी बना रखी थी. इन छावनियो के आतंक से नर नारी दुखी हो उठे थे. इस पर मेनारवासी मेनारिया ब्राह्मण भी मुग़ल छावनी के आतंक से त्रस्त हो चुके. जब मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर विजय का समाचार मिला तो गाँव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर इकट्ठे हुए और युद्ध की योजना बनाई गई. उस समय गांव छोटा और छावनी बड़ी थी. समय की नजाकत को ध्यान में रखते हुए कूटनीति से काम लिया. इस कूटनीति के तहत होली का त्यौहार छावनी वालो के साथ मनाना तय हुआ. होली और धुलंडी साथ साथ मनाई गई. विक्रम संवंत 1657 किया गया था आयोजन चेत्र माघ कृष्ण पक्ष द्वितीय विक्रम संवंत 1657 की रात्रि को राजवादी गैर का आयोजन किया गया. गैर देखने के लिए छावनी वालो को आमंत्रित किया गया. ढोल ओंकारेश्वर चबूतरे पर बजाया गया. नंगी तलवारों, ढालो तथा हेनियो की सहायता से गैर खेलनी शुरू हुई. अचानक ढोल की आवाज ने रणभेरी का रूप ले लिया. गाँव के वीर छावनी के सैनिको पर टूट पड़े. रात भर भयंकर युद्ध चला. ओंकार माराज के चबूतरे से शुरु हुई लड़ाई छावनी तक पहुँच गई और मुगलों को मार गिराया और मेवाड़ को मुगलो के आतंक से बचाया. मेनार के इस ऐतिहासिक जमराबिज के पर्व पर ग्रामीण स्वयं व्यवस्था को बनाये रखते है और हर कार्य को बखूबी अपने घर का समझ कर करते है. इसलिए इस दिन पुलिस जाप्ते की भी आवश्यकता नहीं रहती है और ना ही प्रशासन का कोई कार्य रहता है. ग्रामीण युवा अपने स्तर पर ही सारी जिम्मेदारियां निभाते है और खास बात यह रहती है कि जमराबिज के दिन इतना बारूद बंदूकों से दागा जाता है और तलवारों से गैर नृत्य किया जाता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई आंच तक नहीं आती है.
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    रंगों के उत्सव होली के रंग में सभी रंगे हुए हैं. अलग अलग जगहों पर अलग अलग मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार होली मनाई जाती है. लेकिन मेवाड़ में एक ऐसी जगह है जहां पर रंगों के  साथ बारूद की होली खेली जाती है. उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ हाईवे पर स्थिति मेनार में होली के तीसरे दिन चैत्र कृष्ण द्वितीया को यह होली खेली जाती है. जहां देर रात तक बंदूके बारूद उगलती है और तोपों की गर्जन से पूरा मेनार धधक उठता है. यह होली 4 मार्च को जमरा बीज को मनाई जाएगी. यह परंपरा मेनार के लोग 500 साल से निभाते आ रहे हैं.
शाम होते ही बजता है युद्ध का बिगुल
जमारबिज की सुबह तलवारों की गेर से पहले गांव के ओंकारेश्वर चबूतरे पर लाल जाजम बिछाई जाती और इसके साथ ही ग्रामीणों अमल कसूंबे की रस्म अदा की जाती है. फिर दिनभर गांव में अन्य जगहों से आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है और होली के पहले बना विशेष खाना खिलाया जाता है. शाम होते ही युवा युद्ध की तैयारी में जुट जाते हैं. युद्ध का बिगुल बजता है. इसमें मशालचियों की अगुवाई में सफेद धोती-कुर्ता और कसूमल पाग पहने ग्रामीणों के पांच दल पांच रास्तों से गांव के चारभुजा मंदिर के सामने चौराहा पहुंचते और फेरावत के इशारे पर एक साथ सभी रणबांकुर बंदूको से हवाई फायर करते हैं. चारों तरह आग की लपटे दिखाई देती है. साथ में पटाखे भी छूटते रहते हैं. एक सैकंड ऐसा नहीं होता कि कही से बंदूकों, तोपों या पटाखों की आवाजें ना आए. यह भी कुछ देर तक नहीं शाम को शुरू होने के बाद आधी रात के आगे भी चलता रहता है.
मेनार के लोगों ने बताया कि बात तब की है जब मेवाड़ पर महाराणा अमर सिंह का राज था. उस समय मेवाड़ की पावन धरा पर जगह जगह मुगलों की छावनिया पड़ी हुई थी. इसी तरह मेनार में भी गाँव के पूर्व दिशा में मुगलों ने अपनी छावनी बना रखी थी. इन छावनियो के आतंक से नर नारी दुखी हो उठे थे. इस पर मेनारवासी मेनारिया ब्राह्मण भी मुग़ल छावनी के आतंक से त्रस्त हो चुके. जब मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर विजय का समाचार मिला तो गाँव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर इकट्ठे हुए और युद्ध की योजना बनाई गई. उस समय गांव छोटा और छावनी बड़ी थी. समय की नजाकत को ध्यान में रखते हुए कूटनीति से काम लिया. इस कूटनीति के तहत होली का त्यौहार छावनी वालो के साथ मनाना तय हुआ. होली और धुलंडी साथ साथ मनाई गई. 
विक्रम संवंत 1657 किया गया था आयोजन
चेत्र माघ कृष्ण पक्ष द्वितीय विक्रम संवंत 1657 की रात्रि को राजवादी गैर का आयोजन किया गया. गैर देखने के लिए छावनी वालो को आमंत्रित किया गया. ढोल ओंकारेश्वर चबूतरे पर बजाया गया. नंगी तलवारों, ढालो तथा हेनियो की सहायता से गैर खेलनी शुरू हुई. अचानक ढोल की आवाज ने रणभेरी का रूप ले लिया. गाँव के वीर छावनी के सैनिको पर टूट पड़े. रात भर भयंकर युद्ध चला. ओंकार माराज के चबूतरे से शुरु हुई लड़ाई छावनी तक पहुँच गई और मुगलों को मार गिराया और मेवाड़ को मुगलो के आतंक से बचाया.
मेनार के इस ऐतिहासिक जमराबिज के पर्व पर ग्रामीण स्वयं व्यवस्था को बनाये रखते है और हर कार्य को बखूबी अपने घर का समझ कर करते है. इसलिए इस दिन पुलिस जाप्ते की भी आवश्यकता नहीं रहती है और ना ही प्रशासन का कोई कार्य रहता है. ग्रामीण युवा अपने स्तर पर ही सारी जिम्मेदारियां निभाते है और खास बात यह रहती है कि जमराबिज के दिन इतना बारूद बंदूकों से दागा जाता है और तलवारों से गैर नृत्य किया जाता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई आंच तक नहीं आती है.
    user_VAGAD news24
    VAGAD news24
    Farmer आसपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • और आयुष विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि योजनाएं कागज़ों में ज्यादा और धरातल पर कम दिखाई दे रही हैं। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय आयुष मिशन एवं आयुष विभाग द्वारा 22 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक भटारक यश कीर्ति जैन बोर्डिंग, एमजी रोड, प्रतापगढ़ में निःशुल्क 10 दिवसीय आयुर्वेद बहिरंग एवं अंतरंग अर्श-भगंदर क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर आयोजित किया जाना था। शिविर का समय प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक निर्धारित किया गया था। लेकिन 2 मार्च 2026 को जब कमल मीणा, बीएसपी कार्यकर्ता एवं पत्रकार टीम शिविर स्थल पर पहुंचे तो शिविर पूर्ण रूप से बंद मिला। आरोप है कि निर्धारित तिथि 3 मार्च से पूर्व ही शिविर समाप्त कर दिया गया, जिससे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। कमल मीणा ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य प्रतापगढ़ जिले में कई योजनाएं केवल कागज़ों में संचालित होती दिखाई देती हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर उनका प्रभाव नगण्य है। उन्होंने इसे ट्राइबल क्षेत्र के साथ अन्याय बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है कि: शिविर निर्धारित अवधि से पहले क्यों बंद किया गया? क्या मरीजों को इसकी पूर्व सूचना दी गई थी? क्या संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी? मामले ने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है। इसी के साथ आप देख रहे हो ज़ी टीवी राजस्थान प्रतापगढ़ से स्टेट रिपोर्टर परमेश्वर रेदास की रिपोर्ट
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    और आयुष विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि योजनाएं कागज़ों में ज्यादा और धरातल पर कम दिखाई दे रही हैं।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय आयुष मिशन एवं आयुष विभाग द्वारा 22 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक भटारक यश कीर्ति जैन बोर्डिंग, एमजी रोड, प्रतापगढ़ में निःशुल्क 10 दिवसीय आयुर्वेद बहिरंग एवं अंतरंग अर्श-भगंदर क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा शिविर आयोजित किया जाना था। शिविर का समय प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक निर्धारित किया गया था।
लेकिन 2 मार्च 2026 को जब कमल मीणा, बीएसपी कार्यकर्ता एवं पत्रकार टीम शिविर स्थल पर पहुंचे तो शिविर पूर्ण रूप से बंद मिला। आरोप है कि निर्धारित तिथि 3 मार्च से पूर्व ही शिविर समाप्त कर दिया गया, जिससे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा।
कमल मीणा ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य प्रतापगढ़ जिले में कई योजनाएं केवल कागज़ों में संचालित होती दिखाई देती हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर उनका प्रभाव नगण्य है। उन्होंने इसे ट्राइबल क्षेत्र के साथ अन्याय बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है कि:
शिविर निर्धारित अवधि से पहले क्यों बंद किया गया?
क्या मरीजों को इसकी पूर्व सूचना दी गई थी?
क्या संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी?
मामले ने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है।
इसी के साथ आप देख रहे हो ज़ी टीवी राजस्थान प्रतापगढ़ से स्टेट रिपोर्टर परमेश्वर रेदास की रिपोर्ट
    user_Parmeshvar redash
    Parmeshvar redash
    Photographer प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • Post by Rajendra Tabiyar
    1
    Post by Rajendra Tabiyar
    user_Rajendra Tabiyar
    Rajendra Tabiyar
    Actor गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    35 min ago
  • Post by Bapulal Ahari
    1
    Post by Bapulal Ahari
    user_Bapulal Ahari
    Bapulal Ahari
    Electrician गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    10 hrs ago
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