मध्य प्रदेश सरकार का कृषि विभाग और बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA), जबलपुर, मिलकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 'जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम' चला रहे हैं, जिसका उद्देश्य फसलों को अनिश्चित मौसम से बचाना है। इसी कड़ी में, नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव ब्लॉक स्थित ग्राम झांसी घाट में एक मिनी कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किया गया है, जो स्थानीय किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध करा रहा है। इस खरीफ सीजन में सेंटर द्वारा प्रदान किया जा रहा रेज्ड बेड प्लांटर (मेड़ बनाकर बुवाई करने वाली मशीन) किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। क्षेत्र के कई किसान इस मशीन का उपयोग कर अपने खेतों में उठी हुई क्यारियों (बेड) पर मक्का और सोयाबीन की बुवाई कर रहे हैं, जिससे उनकी फसलें मौसम के जोखिमों से सुरक्षित रह सकें। ग्राम झांसी घाट के किसान श्री निशान सिंह राजा पटेल ने इस तकनीक से लगभग 20 एकड़ में बुवाई की है, और श्री योगेश जी जैसे अन्य किसान भी इस मशीन का लगातार लाभ उठा रहे हैं। बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA), जबलपुर के तकनीकी विशेषज्ञ श्री दीपेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि संस्थान ने इस खरीफ सीजन में नरसिंहपुर जिले में इस आधुनिक मशीन से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में बुवाई करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को इस तकनीक से जोड़कर लाभ पहुंचाना और उनकी फसलों को मौसम की अनिश्चितता से बचाना है। कृषक श्री राजा पटेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस तकनीक को जलवायु अनुकूल खेती के लिए एक 'ब्रह्मास्त्र' बताया। उन्होंने इसके कई महत्वपूर्ण लाभ गिनाए, जैसे अत्यधिक बारिश की स्थिति में बेड के दोनों ओर बनी नालियों से पानी का आसानी से निकल जाना, जिससे पौधों की जड़ें गलने से बच जाती हैं। वहीं, कम बारिश होने पर इन्हीं नालियों में पानी रुकने से जमीन में लंबे समय तक नमी बनी रहती है, जो सूखे के दौरान फसल को जीवन प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, यह विधि खाद प्रबंधन और अन्य कृषि कार्यों को भी सुविधाजनक बनाती है, क्योंकि पौधों की कतारें व्यवस्थित रहती हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर और BISA के तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से इस तकनीक का प्रसार गोटेगांव क्षेत्र के किसानों को कम लागत में सुरक्षित और आधुनिक खेती करने का एक उत्कृष्ट विकल्प प्रदान कर रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार का कृषि विभाग और बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA), जबलपुर, मिलकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 'जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम' चला रहे हैं, जिसका उद्देश्य फसलों को अनिश्चित मौसम से बचाना है। इसी कड़ी में, नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव ब्लॉक स्थित ग्राम झांसी घाट में एक मिनी कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किया गया है, जो स्थानीय किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध करा रहा है। इस खरीफ सीजन में सेंटर द्वारा प्रदान किया जा रहा रेज्ड बेड प्लांटर (मेड़ बनाकर बुवाई करने वाली मशीन) किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। क्षेत्र के कई किसान इस मशीन का उपयोग कर अपने खेतों में उठी हुई क्यारियों (बेड) पर मक्का और सोयाबीन की बुवाई कर रहे हैं, जिससे उनकी फसलें मौसम
के जोखिमों से सुरक्षित रह सकें। ग्राम झांसी घाट के किसान श्री निशान सिंह राजा पटेल ने इस तकनीक से लगभग 20 एकड़ में बुवाई की है, और श्री योगेश जी जैसे अन्य किसान भी इस मशीन का लगातार लाभ उठा रहे हैं। बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA), जबलपुर के तकनीकी विशेषज्ञ श्री दीपेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि संस्थान ने इस खरीफ सीजन में नरसिंहपुर जिले में इस आधुनिक मशीन से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में बुवाई करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को इस तकनीक से जोड़कर लाभ पहुंचाना और उनकी फसलों को मौसम की अनिश्चितता से बचाना है। कृषक श्री राजा पटेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस तकनीक को जलवायु अनुकूल खेती के लिए
एक 'ब्रह्मास्त्र' बताया। उन्होंने इसके कई महत्वपूर्ण लाभ गिनाए, जैसे अत्यधिक बारिश की स्थिति में बेड के दोनों ओर बनी नालियों से पानी का आसानी से निकल जाना, जिससे पौधों की जड़ें गलने से बच जाती हैं। वहीं, कम बारिश होने पर इन्हीं नालियों में पानी रुकने से जमीन में लंबे समय तक नमी बनी रहती है, जो सूखे के दौरान फसल को जीवन प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, यह विधि खाद प्रबंधन और अन्य कृषि कार्यों को भी सुविधाजनक बनाती है, क्योंकि पौधों की कतारें व्यवस्थित रहती हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर और BISA के तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से इस तकनीक का प्रसार गोटेगांव क्षेत्र के किसानों को कम लागत में सुरक्षित और आधुनिक खेती करने का एक उत्कृष्ट विकल्प प्रदान कर रहा है।
- करेली की होनहार छात्रा पलक सोनी को जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया है। उन्हें एम.एससी. (भौतिक शास्त्र) में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए यह गौरवपूर्ण सम्मान भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के करकमलों से प्राप्त हुआ। पलक सोनी वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस परिषद के सदस्य प्रमोद सोनी की सुपुत्री हैं। उनकी इस उपलब्धि ने शिक्षा के क्षेत्र में करेली की प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नगर का मान बढ़ाया है।1
- नरसिंहपुर जिले के करेली नगर की प्रतिभाशाली छात्रा पलक सोनी को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती के करकमलों से दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया है। प्रेस परिषद के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद सोनी की सुपुत्री पलक सोनी को यह प्रतिष्ठित सम्मान एम.एससी. भौतिक शास्त्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिला। यह सम्मान उनकी कड़ी मेहनत, लगन और शिक्षा के प्रति समर्पण का सीधा परिणाम है। जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में एक गरिमामय समारोह के दौरान पलक सोनी को ये पदक प्रदान किए गए। इस असाधारण उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे करेली नगर और नरसिंहपुर जिले को गौरवान्वित किया है। पलक की सफलता पर उनके परिवारजनों, शिक्षकों, मित्रों और शुभचिंतकों ने हार्दिक हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक और पत्रकारिता से जुड़े लोगों ने भी पलक को बधाई दी है, और उनकी उपलब्धि को अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया है। करेली की बेटी द्वारा प्राप्त यह राष्ट्रीय सम्मान पूरे नगर के लिए गर्व का विषय है, और यह दर्शाता है कि दृढ़ संकल्प, परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से कोई भी व्यक्ति उच्चतम ऊंचाइयों को छू सकता है। इस उपलब्धि को लेकर पूरे क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल बना हुआ है।1
- नगर की प्रतिभाशाली छात्रा पलक सोनी को एम.एससी. भौतिक शास्त्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती के करकमलों से दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया है। प्रेस परिषद के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद सोनी की सुपुत्री पलक सोनी ने अपनी इस उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि से न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे करेली क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है।1
- जबलपुर जिले के चरगवा थाना क्षेत्र अंतर्गत उमरिया डुंगरिया औद्योगिक क्षेत्र फेस-2 में मंगलवार को प्लॉट नंबर 46 पर संचालित धान से चावल बनाने वाली एक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और धुएं का गुबार तथा आग की लपटें दूर-दूर तक देखी गईं, जिससे दहशत फैल गई। आग की सूचना मिलते ही शाहपुरा फायर स्टेशन से दमकल वाहन तत्काल मौके पर भेजे गए, जहाँ दमकलकर्मियों ने आग बुझाने का काम शुरू कर दिया। मिल में रखे सूखे धान, भूसे और लकड़ी के सामान के कारण आग तेजी से फैल गई। फायर ब्रिगेड के अधिकारियों के अनुसार, आग की तीव्रता इतनी अधिक है कि अब तक दो टैंकर पानी खर्च हो चुका है, फिर भी आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। दमकलकर्मी लगातार पानी की बौछार कर आग को और फैलने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त टैंकर भी मंगाए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और मिलकर्मियों ने बताया कि आग लगने का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन मशीनों में शॉर्ट सर्किट या ओवरहीटिंग से चिंगारी निकलने की आशंका जताई जा रही है। इस आग की चपेट में आने से मिल परिसर में रखा बड़ी मात्रा में कच्चा धान और प्रोसेस किया हुआ चावल स्टॉक, मशीनरी, कन्वेयर बेल्ट और इलेक्ट्रिकल पैनल जलकर खाक हो गए हैं। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इसमें लाखों रुपये का नुकसान होने की संभावना है। राहत की बात यह रही कि आग लगने के समय मिल में मौजूद मजदूर और कर्मचारी समय रहते सुरक्षित बाहर निकल गए, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि, आग और धुएं को देखकर आसपास की फैक्ट्रियों और प्लॉटों में काम कर रहे लोगों में दहशत फैल गई, जिसके बाद प्रशासन ने सभी औद्योगिक इकाइयों को सतर्क कर फायर सेफ्टी उपकरण जांचने के निर्देश दिए हैं। सूचना पाकर चरगवा थाना पुलिस, राजस्व और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास बैरिकेडिंग कर आवागमन को नियंत्रित किया, ताकि दमकल वाहनों को कोई परेशानी न हो। फायर ब्रिगेड के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आग पूरी तरह बुझने के बाद ही नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा, जिसके बाद फॉरेंसिक टीम आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच करेगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और उद्योगपतियों ने मांग की है कि औद्योगिक क्षेत्रों में फायर सेफ्टी के मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। आग बुझाने का काम अभी भी जारी है।1
- बरेला स्थित मंगलयातन यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। यूनिवर्सिटी प्रशासन पर यह गंभीर आरोप लगा है कि उन्होंने छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) के नाम पर बड़ी संख्या में छात्रों के दाखिले तो ले लिए हैं, लेकिन अब इन छात्रों पर 'ब्लैंक चेक' (खाली चेक) जमा करने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें सीधे तौर पर धमकी दी जा रही है कि यदि वे मांगे गए चेक जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें आगामी परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।1
- नर्मदा नदी के केरपानी घाट पर एक युवक डूब गया है। घटना के बाद से युवक की खोजबीन लगातार जारी है।1
- राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को जबलपुर के डुमना विमानतल पर भावभीनी विदाई दी गई। उन्होंने संस्कारधानी जबलपुर में दो दिन का प्रवास किया था, जिसके बाद उन्हें विदा किया गया।1
- केरपानी स्थित नर्मदा घाट में एक युवक के डूब जाने के बाद, उसे खोजने के लिए दूसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चलाया गया। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद अभी तक डूबे हुए युवक का पता नहीं चल पाया है।1
- नरसिंहपुर जिले में एक महिला के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। यह घटना तब हुई जब महिला ने अवैध शराब की बिक्री का विरोध किया। इसके बाद आरोपियों ने महिला को निशाना बनाते हुए उसके साथ मारपीट की।1