प्रयागराज के झूंसी थाना के पीछे एक विशालकाय और जहरीले अजगर के दिखाई देने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। बरसात के इस मौसम में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा तेजी से बढ़ गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह सांप इतना विशाल और मोटा था कि तीन-तीन कुत्तों ने एक साथ उस पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन वे भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सके और आखिरकार डरकर पीछे हट गए। इस घटना के बाद काफी देर तक मौके पर हड़कंप की स्थिति बनी रही। घटना की जानकारी तुरंत झूंसी पुलिस और वन विभाग को दी गई, जिसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर सांप को पकड़ने का प्रयास शुरू किया। वन विभाग के जानकारों का कहना है कि बरसात के दिनों में जमीन के भीतर पानी भर जाने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव अपनी गहरी गुफाओं से बाहर निकल आते हैं, जिससे उनके इंसानी बस्तियों में घुसने का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस इलाके में 'विशखोपड़ा' भी दिखाई देता है जो बेहद जहरीला होता है और इसके काटने पर इंसान तुरंत बेहोश हो जाता है। बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से घनी झाड़ियों, कचरे और अंधेरी जगहों से दूर रहने तथा रात में टॉर्च लेकर ही बाहर निकलने की अपील की है। लोगों को घरों के आसपास पानी जमा न होने देने, दीवारों की दरारों को बंद रखने और सांप दिखने पर उसे मारने के बजाय तुरंत वन विभाग या 112 नंबर पर सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सीएचसी झूंसी के डॉक्टर ने सलाह दी है कि सर्पदंश की स्थिति में बिना घबराए मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल लाएं, काटे हुए हिस्से को ज्यादा न हिलाएं और किसी भी तरह के देसी इलाज से बचें। फिलहाल ग्रामीणों ने मांग की है कि बारिश के इस सीजन में मोहल्लों में फॉगिंग कराई जाए और सर्पदंश से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए।
प्रयागराज के झूंसी थाना के पीछे एक विशालकाय और जहरीले अजगर के दिखाई देने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। बरसात के इस मौसम में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा तेजी से बढ़ गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह सांप इतना विशाल और मोटा था कि तीन-तीन कुत्तों ने एक साथ उस पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन वे भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सके और आखिरकार डरकर पीछे हट गए। इस घटना के बाद काफी देर तक मौके पर हड़कंप की स्थिति बनी रही। घटना की जानकारी तुरंत झूंसी पुलिस और वन विभाग को दी गई, जिसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर सांप को पकड़ने का प्रयास शुरू किया। वन विभाग के जानकारों का कहना है कि बरसात के दिनों में जमीन के भीतर पानी भर जाने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव अपनी गहरी गुफाओं से बाहर निकल आते हैं, जिससे उनके इंसानी बस्तियों में घुसने का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस इलाके में 'विशखोपड़ा' भी दिखाई देता है जो बेहद जहरीला होता है और इसके काटने पर इंसान तुरंत बेहोश हो जाता है। बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से घनी झाड़ियों, कचरे और अंधेरी जगहों से दूर रहने तथा रात में टॉर्च लेकर ही बाहर निकलने की अपील की है। लोगों को घरों के आसपास पानी जमा न होने देने, दीवारों की दरारों को बंद रखने और सांप दिखने पर उसे मारने के बजाय तुरंत वन विभाग या 112 नंबर पर सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सीएचसी झूंसी के डॉक्टर ने सलाह दी है कि सर्पदंश की स्थिति में बिना घबराए मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल लाएं, काटे हुए हिस्से को ज्यादा न हिलाएं और किसी भी तरह के देसी इलाज से बचें। फिलहाल ग्रामीणों ने मांग की है कि बारिश के इस सीजन में मोहल्लों में फॉगिंग कराई जाए और सर्पदंश से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए।
- प्रयागराज के मेजा में पोस्टमार्टम के बाद सोमवार देर शाम जब अवधेश पटेल का शव गांव पहुंचा, तो परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों ने प्रशासन के समक्ष यह मांग रखी कि आरोपियों द्वारा कथित रूप से गलत तरीके से लिखाई गई जमीन उन्हें वापस दिलाई जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और संरक्षण प्रदान किया जाए तथा आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इस बात की सूचना मिलने पर एसीपी मेजा बृजेश पाठक और थाना प्रभारी नितेंद्र कुमार शुक्ला सहित तमाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे परिजनों को निष्पक्ष जांच, विधिक कार्रवाई और उनकी सभी मांगों पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने का ठोस आश्वासन दिया। अधिकारियों के इस भरोसे के बाद ही परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हुए। इसके बाद, मंगलवार सुबह सिरसा स्थित छतवा गंगा घाट पर बेहद गमगीन माहौल में अवधेश पटेल का अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और शुभचिंतक शामिल हुए। इस दौरान मृतक की पत्नी गीता देवी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और इस घटना के बाद से ही पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा किए गए एक प्रदर्शन का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे लेकर प्रदर्शनकारियों के 'शांतिपूर्ण' तरीके पर तीखा तंज कसा गया है। खुद को शांति से धरना देने वाला बताने वाले इन छात्रों ने प्रदर्शन के नाम पर जमकर बवाल काटा और बड़े 'आनंद' के साथ पत्थरबाजी की। इस प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाकर तोड़फोड़ की गई और ट्रेनों पर भी पथराव किया गया। प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ शामिल हुए उपद्रवियों ने देश का माहौल पूरी तरह खराब कर दिया और इस दौरान कई पुलिसकर्मियों को लहूलुहान कर दिया गया। वीडियो वायरल होने के बाद कथित तौर पर शांतिपूर्ण होने वाले इस धरने और हिंसा करने वालों पर कड़ा कटाक्ष किया जा रहा है।1
- प्रयागराज के मेजा थाना क्षेत्र के मेजा रोड बाजार में दुकानदारों से ऑनलाइन पेमेंट के नाम पर ठगी करने वाले एक युवक को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। यह आरोपी दुकानों से सामान लेने के बाद क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने का नाटक करता था। इसके बाद वह अपने मोबाइल में पेटीएम स्पूफ ऐप के जरिए नकली "पेमेंट सक्सेस" की स्क्रीन तैयार कर दुकानदारों को दिखाता था और उन्हें भ्रमित कर झांसे में ले लेता था। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, यह युवक कई दिनों से बाजार में आ रहा था और अलग-अलग दुकानों से सामान खरीदकर फर्जी ऑनलाइन पेमेंट का दावा करता था। बार-बार एक ही तरीके से ठगी होने पर एक दुकानदार को संदेह हुआ, जिसने निगरानी रखकर युवक को रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। आरोपी युवक एक ही दुकानदार से करीब चार-पांच बार इसी तरीके से धोखाधड़ी कर चुका था। घटना के बाद पीड़ित की सूचना पर युवक के परिजन मौके पर पहुंचे और आपसी लिख-पढ़ी करने के बाद युवक को छोड़ दिया गया।1
- प्रयागराज ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज में हुई भारी बारिश के कारण पसना बहियारी संपर्क मार्ग पर पानी भर गया है। क्षेत्र में वर्षा होने के बाद इस संपर्क मार्ग पर जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई है।1
- प्रयागराज के करछना में घोड़ेडीह भीरपुर पावर हाउस के अंतर्गत आने वाला बरम बाबा मार्केट पिछले 72 घंटों से पूरी तरह अंधेरे में डूबा हुआ है। पिछले 3 दिनों से लगातार बिजली गुल रहने के कारण स्थानीय व्यापारी, किसान और विद्यार्थी बेहद त्रस्त हैं। इस गंभीर बिजली संकट के चलते खेतों में धान का बेहन भी खराब हो रहा है।1
- प्रयागराज के मेजा में पोस्टमार्टम के बाद सोमवार देर शाम जब अवधेश पटेल का शव गांव पहुंचा, तो परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। परिजनों ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी कि आरोपियों द्वारा कथित रूप से गलत तरीके से लिखाई गई उनकी जमीन वापस दिलाई जाए, परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इस मांग को लेकर परिजन लगातार अड़े रहे। इस बात की सूचना मिलने पर एसीपी मेजा बृजेश पाठक और थाना प्रभारी नितेंद्र कुमार शुक्ला सहित अन्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच, विधिक कार्रवाई और उनकी मांगों पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद ही परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हुए। इसके बाद, मंगलवार सुबह सिरसा स्थित छतवा गंगा घाट पर गमगीन माहौल में अवधेश पटेल का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मृतक की पत्नी गीता देवी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरे गांव में शोक का माहौल पसरा रहा।1
- प्रयागराज के मेजा तहसील अंतर्गत उरूवा विकासखंड क्षेत्र में इन दिनों नीलगायों का आतंक किसानों के लिए एक गंभीर समस्या बन चुका है। नीलगायों के झुंड रात के समय खेतों में घुसकर तैयार खड़ी धान और अरहर की फसलों को बुरी तरह रौंद रहे हैं, जिससे अन्नदाताओं की कड़ी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। खासकर गंगा तटीय गांवों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहां लोहारी, उपरौंड़ा, विसेनपुर, तरवाई, बिगहनी और बिगहना जैसे कई गांवों के किसान इस संकट से बुरी तरह बेहाल हैं। किसानों का कहना है कि वे दिन-रात खेतों की रखवाली कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नीलगायों के झुंड अचानक खेतों में धमक पड़ते हैं और देखते ही देखते पूरी फसल को भारी नुकसान पहुंचा देते हैं। स्थानीय किसान अमरेश मिश्रा, धनंजय कुमार, रवि शंकर, सतीश कुमार, जयप्रकाश, श्रीकांत यादव, गोरेलाल और विवेक कुमार ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि नीलगायों के तेजी से खेतों में घुसने के कारण न केवल फसलों का उत्पादन घट रहा है, बल्कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। थक-हारकर पीड़ित किसानों ने प्रशासन से नीलगायों के इस आतंक से निजात दिलाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की पुरजोर मांग की है, ताकि उनकी मेहनत की फसल सुरक्षित बच सके।1
- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित मेजा में पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हो गया है। इसके बाद, शव को अंतिम संस्कार के लिए रवाना कर दिया गया।1