वाराणसी के पिंडरा तहसील क्षेत्र के चनौली-मानापुर गांव में मंगलवार को एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई, जहाँ मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालय के लिए प्रस्तावित भूमि को कब्जामुक्त कराने के उद्देश्य से गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया। लगभग 200 पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और दो जेसीबी मशीनों के साथ सरकारी अमला गांव पहुँचा। जैसे ही जेसीबी खेतों की ओर बढ़ी, गांव की महिलाओं और किसानों ने विरोध करते हुए बताया कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और कार्रवाई रोकी जाए, लेकिन अधिकारियों ने स्थगन आदेश लाने पर ही कार्रवाई रोकने की बात कही। पुलिस की मौजूदगी में विरोध कर रही महिलाओं को फटकार कर हटा दिया गया और जमीन खाली कराने का काम शुरू कर दिया गया। यह वही जमीन है जहाँ सोमवार को भी सीमांकन का प्रयास किया गया था, लेकिन किसानों के विरोध के कारण प्रशासन को वापस लौटना पड़ा था। इस बार, स्थिति अलग थी, और पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। कार्रवाई के दौरान एसडीएम, एसीपी पिंडरा प्रशांत सिंह, तहसीलदार कुलवंत सिंह, नायब तहसीलदार, कानूनगो राजकुमार, नाप विभाग के राधेश्याम यादव, आधा दर्जन लेखपाल और राजस्व विभाग की पूरी टीम मौजूद रही। सुरक्षा के लिए फूलपुर, बड़ागांव, कपसेठी, जंसा और सिंधोरा थानों की पुलिस फोर्स तैनात थी, जिसने पूरे इलाके को घेरकर भूमि कब्जामुक्त कराने का काम पूरा किया। इन किसानों के पास खसरा-खतौनी थी और वे वर्षों से खेती कर रहे थे, कुछ ने झोपड़ियां भी बना ली थीं। उन्हें भरोसा था कि जमीन उनकी है। हालांकि, सरकारी जांच में दावा किया गया कि यह जमीन वन विभाग की है और धोखे से किसानों के नाम दर्ज हो गई थी, जिसे बाद में वन विभाग ने सरकार को सौंपा और अब इस पर मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालय बनाया जा रहा है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि कानून सिर्फ गरीबों के लिए ही क्यों है? वाराणसी में ऐसे कई मामले हैं जहाँ भूदान की जमीनें कथित जालसाजी से लोगों के नाम दर्ज हुईं, उन पर खरीद-फरोख्त हुई और करोड़ों की इमारतें खड़ी हो गईं, जहाँ व्यावसायिक गतिविधियाँ चल रही हैं। उन इमारतों पर बुलडोजर क्यों नहीं चलता और उन बड़े लोगों से जमीन वापस क्यों नहीं ली जाती? चनौली-मानापुर के मामले को अलग इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि यहाँ कोई बड़ा उद्योगपति, प्रभावशाली नेता या ताकतवर व्यक्ति नहीं है जो अपने कब्जे बचा सके, यहाँ सिर्फ छोटे किसान हैं जिनकी सत्ता तक पहुँच नहीं है। यह घटना सिर्फ भूमि अधिग्रहण की नहीं, बल्कि व्यवस्था में समानता पर सवाल उठाती है कि क्या कानून सबके लिए बराबर है, या बराबरी भी हैसियत देखकर तय होती है? प्रशासन और किसानों के पक्ष अलग-अलग हैं; किसान वैध कब्जे का दावा करते हैं, जबकि प्रशासन इसे वन विभाग की भूमि बताता है जो गलत तरीके से दर्ज हुई थी। ऐसे में, यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि अंतिम सत्य क्या है—क्या यह केवल प्रशासनिक भूल थी या किसी सुनियोजित जालसाजी का परिणाम? एक निष्पक्ष और गहन जांच की मांग उठ रही है ताकि किसानों की शंकाएं दूर हों और प्रशासन के दावों पर उठ रहे सवालों के जवाब मिल सकें।
वाराणसी के पिंडरा तहसील क्षेत्र के चनौली-मानापुर गांव में मंगलवार को एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई, जहाँ मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालय के लिए प्रस्तावित भूमि को कब्जामुक्त कराने के उद्देश्य से गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया। लगभग 200 पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और दो जेसीबी मशीनों के साथ सरकारी अमला गांव पहुँचा। जैसे ही जेसीबी खेतों की ओर बढ़ी, गांव की महिलाओं और किसानों ने विरोध करते हुए बताया कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और कार्रवाई रोकी जाए, लेकिन अधिकारियों ने स्थगन आदेश लाने पर ही कार्रवाई रोकने की बात कही। पुलिस की मौजूदगी में विरोध कर रही महिलाओं को फटकार कर हटा दिया गया और जमीन खाली कराने का काम शुरू कर दिया गया। यह वही जमीन है जहाँ सोमवार को भी सीमांकन का प्रयास किया
गया था, लेकिन किसानों के विरोध के कारण प्रशासन को वापस लौटना पड़ा था। इस बार, स्थिति अलग थी, और पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। कार्रवाई के दौरान एसडीएम, एसीपी पिंडरा प्रशांत सिंह, तहसीलदार कुलवंत सिंह, नायब तहसीलदार, कानूनगो राजकुमार, नाप विभाग के राधेश्याम यादव, आधा दर्जन लेखपाल और राजस्व विभाग की पूरी टीम मौजूद रही। सुरक्षा के लिए फूलपुर, बड़ागांव, कपसेठी, जंसा और सिंधोरा थानों की पुलिस फोर्स तैनात थी, जिसने पूरे इलाके को घेरकर भूमि कब्जामुक्त कराने का काम पूरा किया। इन किसानों के पास खसरा-खतौनी थी और वे वर्षों से खेती कर रहे थे, कुछ ने झोपड़ियां भी बना ली थीं। उन्हें भरोसा था कि जमीन उनकी है। हालांकि, सरकारी जांच में दावा किया गया कि यह जमीन वन विभाग की
है और धोखे से किसानों के नाम दर्ज हो गई थी, जिसे बाद में वन विभाग ने सरकार को सौंपा और अब इस पर मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालय बनाया जा रहा है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि कानून सिर्फ गरीबों के लिए ही क्यों है? वाराणसी में ऐसे कई मामले हैं जहाँ भूदान की जमीनें कथित जालसाजी से लोगों के नाम दर्ज हुईं, उन पर खरीद-फरोख्त हुई और करोड़ों की इमारतें खड़ी हो गईं, जहाँ व्यावसायिक गतिविधियाँ चल रही हैं। उन इमारतों पर बुलडोजर क्यों नहीं चलता और उन बड़े लोगों से जमीन वापस क्यों नहीं ली जाती? चनौली-मानापुर के मामले को अलग इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि यहाँ कोई बड़ा उद्योगपति, प्रभावशाली नेता या ताकतवर व्यक्ति नहीं है जो अपने कब्जे
बचा सके, यहाँ सिर्फ छोटे किसान हैं जिनकी सत्ता तक पहुँच नहीं है। यह घटना सिर्फ भूमि अधिग्रहण की नहीं, बल्कि व्यवस्था में समानता पर सवाल उठाती है कि क्या कानून सबके लिए बराबर है, या बराबरी भी हैसियत देखकर तय होती है? प्रशासन और किसानों के पक्ष अलग-अलग हैं; किसान वैध कब्जे का दावा करते हैं, जबकि प्रशासन इसे वन विभाग की भूमि बताता है जो गलत तरीके से दर्ज हुई थी। ऐसे में, यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि अंतिम सत्य क्या है—क्या यह केवल प्रशासनिक भूल थी या किसी सुनियोजित जालसाजी का परिणाम? एक निष्पक्ष और गहन जांच की मांग उठ रही है ताकि किसानों की शंकाएं दूर हों और प्रशासन के दावों पर उठ रहे सवालों के जवाब मिल सकें।
- गुरुग्राम में एक पेट्रोल पंप पर तीन युवक स्कॉर्पियो गाड़ी में ₹6,000 का डीजल भरवाकर बिना पैसे दिए फरार हो गए। पंप के सेल्समैन ने युवकों का पीछा करने की कोशिश की, लेकिन वे उनकी पकड़ में नहीं आए। इस घटना के संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।1
- जौनपुर में दूल्हा हत्याकांड के संबंध में सौम्या बिद के साथ धरने पर बैठे समाजवादी पार्टी (सपा) नेता लोटन राम निषाद ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ऊपर जमकर गंभीर आरोप लगाए हैं।1
- जौनपुर जिले के डोभी स्थित ग्राम पंचायत हरधन में रविवार को हरधन बाबा के परिसर में विशेष हवन-पूजन का आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में क्षेत्र के समस्त महिला-पुरुषों ने अपनी आस्था के साथ भाग लिया और बाबा के स्थान पर करहिया हलवा चढ़ाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।2
- वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित पनैसिया हॉस्पिटल पर चिकित्सीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी माता के किडनी स्टोन के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने जो DJ स्टेंट लगाया था, उसे समय पर नहीं निकाला गया और वह मरीज के शरीर में ही रह गया, जिसके कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद मरीज को लगातार दर्द, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होती रहीं, जिसके बाद एक अन्य चिकित्सा जांच में शरीर में DJ स्टेंट होने का पता चला। परिवार ने संबंधित अस्पताल और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं मिली। इसके बजाय, परिवार ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस मामले को उठाया और जवाब मांगा, तो उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया और दबाव बनाने की कोशिश की गई। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने, एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित करने और दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इस संबंध में पीड़ित परिवार द्वारा आज अपने निवास पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की जा रही है, जिसमें वे चिकित्सा दस्तावेज, शिकायत पत्र और अन्य साक्ष्य मीडिया के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।2
- गाँव में आयोजित गुरुजी के अमृत वाणी प्रवचन एवं भंडारा प्रसाद कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। गुरुजी ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों में सत्य, प्रेम, सेवा, सद्भाव, मानवता और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनकी अमृत वाणी सुनकर श्रद्धालुओं ने आत्मिक शांति और नई ऊर्जा का अनुभव किया, जिससे पूरे गाँव में आध्यात्मिक वातावरण गूंज उठा। इस अवसर पर ग्रामीणों की वर्षों पुरानी यादें भी ताज़ा हो गईं। उन्होंने एक साथ बैठकर बीते समय को याद किया और सामाजिक एकता व भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में सभी आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रवचन के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भंडारा प्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने श्रद्धा और प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। पूरे कार्यक्रम का वातावरण भक्ति, सेवा और सद्भावना से ओत-प्रोत रहा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, एकता और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश देने वाला एक प्रेरणादायी अवसर बन गया, जिसे ग्रामीण लंबे समय तक याद रखेंगे।1
- वाराणसी जिले के मिश्रपुर में खूनी संघर्ष की एक घटना सामने आई है, जिसमें एक ही परिवार के छह लोग धारदार हथियारों के हमले में घायल हो गए।1