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हसीब खान मंसूरी की कलम से - 9584871400 आज भी रायसेन के किले से चलने वाली तोप की गूंज से होती है शहरी और खुलता है रोजेदारों का रोजा। भोपाल,,, रायसेन किले पर लगभग 200 साल से रोजेदारों के लिए निभाई जा रही अनूठी परंपरा नवाबी काल में शुरू हुई। ये परंपरा आज भी लगातार जारी है। रमजान माह में तोप चलाने की अनुमति जिला प्रशासन द्वारा दी जाती है। पाक माह रमजान का ये तीसरा असरा शुरू हो चुका है। मुस्लिमजनो के द्वारा अल्लाह की इबादत में रोजे रखे जा रहे हैं। इस पूरे माह रोजेदारों के लिए सेहरी और इफ्तार का समय सबसे अहम होता है। आजकल जहां आधुनिक संसाधनों से सेहरई और इफ्तारी की सूचना देने का चलन है। वहीं मप्र का रायसेन जिला ऐसा है जहां आज भी परंपरागत और अनूठे तरीके से शहरी और इफ्तारी की सूचना पहुंचाई जाती है। जिसके तहत रायसेन के किले पर शहरी से पहले और शाम को इफ्तार के वक्त तोप दागने की परंपरा है। जो आज से नहीं करीब 200 साल से चली आ रही है। यही नहीं यहां हिंदू परिवार के सदस्य भी ढोल पीटकर रोजेदारों को जगाते हैं। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 47 किलो मीटर दूर रायसेन जिला बसा हुआ है। यहां रमजान माह में सुबह लगभग 3:30 बजे और शाम के वक्त अगर कोई बाहरी शख्स पहुंच जाए तो वह यहां गूंजने वाली तोप की आवाज से न केवल चौंक जाएगा। बल्कि किसी आशंका का अनुमान भी लगा बैठेगा। लेकिन हकीकत इससे कहीं अलग है। दरअसल यहां रमजान माह के पवित्र दिनों में इफ्तारी और शहरी की सूचना देने के लिए किले की पहाड़ी से 2 वक्त तोप चलाई जाती है।जिसकी आवाज सुनकर शहर सहित आसपास के लगभग 12 गांवों के रोजेदार रोजा खोलते हैं और इस तोप की आवाज भी लगभग 15 किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है।यह परंपरा नवाबी काल से चली आ रही है जब शहरी और इफ्तारी की सूचना देने के लिए कोई साधन नहीं हुआ करते थे। करीब 200 साल पहले रायसेन किले पर राजा और नवाबों का शासन हुआ करता था। उन दिनों से ही लोगों को सूचित करने के लिए तोप के गोले दागे जाने की शुरुआत हुई थी। इसके बाद साल 1936 में भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह ने बड़ी तोप की जगह एक छोटी तोप चलाने के लिए दी।इसके पीछे वजह यह थी कि बड़ी तोप की गूंज से किले को नुकसान पहुंच रहा था। रायसेन के किले से इस तोप को चलाने की प्रक्रिया भी कम रोचक नहीं है। दरअसल इसके लिए जिला प्रशासन बाकायदा एक माह के लिए लाइसेंस जारी करता है।तोप चलाने के लिए आधे घंटे की तैयारी करनी पड़ती है। इसके बाद तोप दागी जाती है। जब रमजान माह समाप्त होने के बाद तोप की साफ - सफाई कर सरकारी गोदाम में जमा कर दी जाती है। बताया जाता है कि पूरे महीने तोप दागने में करीब 70 हजार रुपए का खर्च आ जाता है। तोप चलाने से पहले दोनों टाइम टांके वाली मरकाज वाली मस्जिद से बल्ब जलाकर सिग्नल मिलता है सिग्नल के रूप में मस्जिद की मीनार पर लाल या हरा रंग का बल्ब जलाया जाता है।उसके बाद किले की पहाड़ी से तोप चलाई जाती है। ऐसा बताया जाता है राजस्थान में तोप चलाने की परंपरा है।उसके बाद देश में मप्र का रायसेन ऐसा दूसरा शहर है जहां पर तोप चलाकर रमजान माह में सेहरी और इफ्तारी की सूचना दी जाती है। तोप चलाने बाले शाखावत ख़ान बताते हैं कि तोप चलने की परंपरा तो राजा और नवाबी शासनकाल से चली आ रही है।पहले बड़ी तोप चलाई जाती थी।जिसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक जाती थी, लेकिन उसकी आवाज काफी तेज गूंजती थी और उससे किले को क्षति होने की आशंका था।ऐसे में 1936 से छोटी तोप चलाई जाती है। जिसे भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह ने दी थी तब से अब तक 87 साल से यही छोटी तोप चलाई जाती रही है।बहीं शखावत ख़ान कहते है हमारे पुरखे सदियों से तोप चलाने का काम करते आ रहे है पहले हमारे पर दादा फिर दादा फिर हमारे पिताजी उसके बाद हमारे चाचा और में और मेरा छोटा भाई साहिद पिछले 27 सालों से तोप चलाकर रोजा अफसरी और सहरई की सूचना दे रहे है फिर हमारे वाद हमारे बच्चे तोप चलाने का काम करेंगे।बहीं भोपाल से तोप चलने का साक्षी बनने आए शफीक ख़ान कहते है ये बहुत अच्छा पल होता है जब हम तोप चलने के साक्षी बनते है। रायसेन के सैयद ओसाफ़ कहते है कि हमारे रायसेन के लिए गौरव की बात है कि रायसेन में तोप चलाकर सहरई और अफ्तारी की जानकारी दी जाती है।मोहम्मद सहीद कहते है की तोप चलाकर सहरई और अफ़्तारी कराई जाती है।

1 day ago
user_Haseeb Khan Mansuri Journalist
Haseeb Khan Mansuri Journalist
सीहोर नगर, सीहोर, मध्य प्रदेश•
1 day ago
7835ff11-c44b-4be5-ad5d-cbba7f04add9

हसीब खान मंसूरी की कलम से - 9584871400 आज भी रायसेन के किले से चलने वाली तोप की गूंज से होती है शहरी और खुलता है रोजेदारों का रोजा। भोपाल,,, रायसेन किले पर लगभग 200 साल से रोजेदारों के लिए निभाई जा रही अनूठी परंपरा नवाबी काल में शुरू हुई। ये परंपरा आज भी लगातार जारी है। रमजान माह में तोप चलाने की अनुमति जिला प्रशासन द्वारा दी जाती है। पाक माह रमजान का ये तीसरा असरा शुरू हो चुका है। मुस्लिमजनो के द्वारा अल्लाह की इबादत में रोजे रखे जा रहे हैं। इस पूरे माह रोजेदारों के लिए सेहरी और इफ्तार का समय सबसे अहम होता है। आजकल जहां आधुनिक संसाधनों से सेहरई और इफ्तारी की सूचना देने का चलन है। वहीं मप्र का रायसेन जिला ऐसा है जहां आज भी परंपरागत और अनूठे तरीके से शहरी और इफ्तारी की सूचना पहुंचाई जाती है। जिसके तहत रायसेन के किले पर शहरी से पहले और शाम को इफ्तार के वक्त तोप दागने की परंपरा है। जो आज से नहीं करीब 200 साल से चली आ रही है। यही नहीं यहां हिंदू परिवार के सदस्य भी ढोल पीटकर रोजेदारों को जगाते हैं। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 47 किलो मीटर दूर रायसेन जिला बसा हुआ है। यहां रमजान माह में सुबह लगभग 3:30 बजे और शाम के वक्त अगर कोई बाहरी शख्स पहुंच जाए तो वह यहां गूंजने वाली तोप की आवाज से न केवल चौंक जाएगा। बल्कि किसी आशंका का अनुमान भी लगा बैठेगा। लेकिन हकीकत इससे कहीं अलग है। दरअसल यहां रमजान माह के पवित्र दिनों में इफ्तारी और शहरी की सूचना देने के लिए किले की पहाड़ी से 2 वक्त तोप चलाई जाती है।जिसकी आवाज सुनकर शहर सहित आसपास के लगभग 12 गांवों के रोजेदार रोजा खोलते हैं और इस तोप की आवाज भी लगभग 15 किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है।यह परंपरा नवाबी काल से चली आ रही है जब शहरी और इफ्तारी की सूचना देने के लिए कोई साधन नहीं हुआ करते थे। करीब 200 साल पहले रायसेन किले पर राजा और नवाबों का शासन हुआ करता था। उन दिनों से ही लोगों को सूचित करने के लिए तोप के गोले दागे जाने की शुरुआत हुई थी। इसके बाद साल 1936 में भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह ने बड़ी तोप की जगह एक छोटी तोप चलाने के लिए दी।इसके पीछे वजह यह थी कि बड़ी तोप की गूंज से किले को नुकसान पहुंच रहा था। रायसेन के किले से इस तोप को चलाने की प्रक्रिया भी कम रोचक नहीं है। दरअसल इसके लिए जिला प्रशासन बाकायदा एक माह के लिए लाइसेंस जारी करता है।तोप चलाने के लिए आधे घंटे की तैयारी करनी पड़ती है। इसके बाद तोप दागी जाती है। जब रमजान माह समाप्त होने के बाद तोप की साफ - सफाई कर सरकारी गोदाम में जमा कर दी जाती है। बताया जाता है कि पूरे महीने तोप दागने में करीब 70 हजार रुपए का खर्च आ जाता है। तोप चलाने से पहले दोनों टाइम टांके वाली मरकाज वाली मस्जिद से बल्ब जलाकर सिग्नल मिलता है सिग्नल के रूप में मस्जिद की मीनार पर लाल या हरा रंग का बल्ब जलाया जाता है।उसके बाद किले की पहाड़ी से तोप चलाई जाती है। ऐसा बताया जाता है राजस्थान में तोप चलाने की परंपरा है।उसके बाद देश में मप्र का रायसेन ऐसा दूसरा शहर है जहां पर तोप चलाकर रमजान माह में सेहरी और इफ्तारी की सूचना दी जाती है। तोप चलाने बाले शाखावत ख़ान बताते हैं कि तोप चलने की परंपरा तो राजा और नवाबी शासनकाल से चली आ रही है।पहले बड़ी तोप चलाई जाती थी।जिसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक जाती थी, लेकिन उसकी आवाज काफी तेज गूंजती थी और उससे किले को क्षति होने की आशंका था।ऐसे में 1936 से छोटी तोप चलाई जाती है। जिसे भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह ने दी थी तब से अब तक 87 साल से यही छोटी तोप चलाई जाती रही है।बहीं शखावत ख़ान कहते है हमारे पुरखे सदियों से तोप चलाने का काम करते आ रहे है पहले हमारे पर दादा फिर दादा फिर हमारे पिताजी उसके बाद हमारे चाचा और में और मेरा छोटा भाई साहिद पिछले 27 सालों से तोप चलाकर रोजा अफसरी और सहरई की सूचना दे रहे है फिर हमारे वाद हमारे बच्चे तोप चलाने का काम करेंगे।बहीं भोपाल से तोप चलने का साक्षी बनने आए शफीक ख़ान कहते है ये बहुत अच्छा पल होता है जब हम तोप चलने के साक्षी बनते है। रायसेन के सैयद ओसाफ़ कहते है कि हमारे रायसेन के लिए गौरव की बात है कि रायसेन में तोप चलाकर सहरई और अफ्तारी की जानकारी दी जाती है।मोहम्मद सहीद कहते है की तोप चलाकर सहरई और अफ़्तारी कराई जाती है।

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  • भोपा ल के मायनिंग करोबारी दिलीप गुप्ता के घर आयकर विभाग का छापा
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    भोपा ल के मायनिंग करोबारी दिलीप गुप्ता के घर आयकर विभाग का छापा
    user_Mohammad faisal
    Mohammad faisal
    हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by Naved khan
    4
    Post by Naved khan
    user_Naved khan
    Naved khan
    रिपोर्टर हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by शाहिद खान रिपोर्टर
    1
    Post by शाहिद खान रिपोर्टर
    user_शाहिद खान रिपोर्टर
    शाहिद खान रिपोर्टर
    Journalist हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • Post by Jitendra Patidar
    1
    Post by Jitendra Patidar
    user_Jitendra Patidar
    Jitendra Patidar
    Local News Reporter कालापीपल, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • भोपाल में माइनिंग कारोबारी दिलीप गुप्ता पर आयकर विभाग का बड़ा छापा 11 मार्च 2026, भोपाल राजधानी भोपाल में आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए माइनिंग कारोबारी दिलीप गुप्ता के ठिकानों पर छापा मारा है। बताया जा रहा है कि दिल्ली से आई आयकर विभाग की टीम ने भोपाल स्थित गुप्ता के कई ठिकानों पर सुबह-सुबह एक साथ रेड डाली। कार्रवाई में आईटी यानी इनकम टैक्स की टीम भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक छापे की कार्रवाई सुबह से लगातार जारी है और टीम दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। गौरतलब है कि इससे पहले भी भोपाल में eow ने दिलीप गुप्ता के दो ठिकानों पर छापा मारा था, जहां से टीम को भारी मात्रा में नकदी, दस्तावेज और कई महत्वपूर्ण फाइलें बरामद हुई थीं। फिलहाल आयकर विभाग की टीम जांच में जुटी हुई है और छापे के बाद बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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    भोपाल में माइनिंग कारोबारी दिलीप गुप्ता पर आयकर विभाग का बड़ा छापा
11 मार्च 2026, भोपाल 
राजधानी भोपाल में आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए माइनिंग कारोबारी दिलीप गुप्ता के ठिकानों पर छापा मारा है।
बताया जा रहा है कि दिल्ली से आई आयकर विभाग की टीम ने भोपाल स्थित गुप्ता के कई ठिकानों पर सुबह-सुबह एक साथ रेड डाली। कार्रवाई में आईटी यानी इनकम टैक्स की टीम भी शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक छापे की कार्रवाई सुबह से लगातार जारी है और टीम दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी भोपाल में eow ने दिलीप गुप्ता के दो ठिकानों पर छापा मारा था, जहां से टीम को भारी मात्रा में नकदी, दस्तावेज और कई महत्वपूर्ण फाइलें बरामद हुई थीं।
फिलहाल आयकर विभाग की टीम जांच में जुटी हुई है और छापे के बाद बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
    user_K K D NEWS MP/CG
    K K D NEWS MP/CG
    TV News Anchor हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • भोपाल.... राजधानी में एलपीजी और कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति पर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का बयान हमने गैस वितरको के साथ बैठक की है , गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी ना हो स्थिति को नियंत्रित किया जा रहा है इसको लेकर गाइडलाइन भी जारी की है ,निर्देश दिए गए हैं... शादी सीजन में गैस कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति पर कहा - अभी सिर्फ इसमें अत्यावश्यक सेवाओं हॉस्पिटल ,शैक्षणिक संस्थाओं को छूट दी गई है *बड़े तालाव से अतिक्रमणहटाने पर बोले कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह* सर्वे पूरा हो चुका है, छोटे बड़े सभी अतिक्रमण चिह्नित कर लिए गए हैं सभी अतिक्रमण हटाए जाएंगे
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    भोपाल....
राजधानी में एलपीजी और कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति पर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का बयान 
हमने  गैस वितरको के साथ बैठक की है , गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी ना हो स्थिति को नियंत्रित किया जा रहा है इसको लेकर गाइडलाइन भी जारी की है ,निर्देश दिए गए हैं...
शादी सीजन में गैस कमर्शियल गैस सिलेंडर की  आपूर्ति पर कहा - अभी सिर्फ इसमें अत्यावश्यक सेवाओं हॉस्पिटल ,शैक्षणिक संस्थाओं को छूट दी गई है
*बड़े तालाव से अतिक्रमणहटाने पर बोले कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह*
सर्वे पूरा हो चुका है, छोटे बड़े सभी अतिक्रमण चिह्नित कर लिए गए हैं सभी अतिक्रमण हटाए जाएंगे
    user_Aamir Khan
    Aamir Khan
    Local News Reporter हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • भोपाल। राजधानी के पॉश इलाके शाहपुरा स्थित डीके कॉटेज कॉलोनी में आज सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कॉलोनी की रहवासी समिति ने अचानक तोड़फोड़ शुरू कर दी। समिति के पदाधिकारियों ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए न केवल लोगों के घरों के सामने के रास्तों को 'कब्जा' बताकर ढहा दिया, बल्कि कई घरों के निर्माण को भी भारी नुकसान पहुँचाया है। न नोटिस, न सूचना: सीधे कार्रवाई पीड़ित रहवासियों का आरोप है कि समिति के अध्यक्ष और अन्य सदस्य अपनी मनमानी पर उतारू हैं। इस पूरी कार्रवाई से पहले किसी भी घर को न तो कोई कानूनी नोटिस दिया गया और न ही कोई पूर्व सूचना दी गई। सुबह अचानक मजदूरों और हथौड़ों के साथ पहुँची समिति की टीम ने तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिससे रहवासी हक्के-बक्के रह गए। भोपाल में अपनी तरह का पहला मामला जानकारों का कहना है कि भोपाल के इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है, जब किसी हाउसिंग सोसाइटी या समिति ने प्रशासन और नगर निगम के अधिकारों को अपने हाथ में लेकर इस तरह की बड़ी तोड़फोड़ की हो। आमतौर पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नगर निगम या जिला प्रशासन द्वारा कानूनी नोटिस के बाद की जाती है, लेकिन यहाँ समिति खुद ही 'जज' और 'जमीन मालिक' बन बैठी है। अध्यक्ष की मनमानी पर उठे सवाल कॉलोनी के लोगों में समिति के अध्यक्ष के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। यदि कोई अतिक्रमण था भी, तो उसके लिए विधिवत प्रक्रिया का पालन होना चाहिए था। निजी समिति को किसी का घर तोड़ने का संवैधानिक अधिकार किसने दिया, यह अब जांच का विषय है। फिलहाल, पीड़ित परिवार इस मामले में पुलिस और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस 'निजी बुलडोजर संस्कृति' पर क्या कार्रवाई करता है।
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    भोपाल। राजधानी के पॉश इलाके शाहपुरा स्थित डीके कॉटेज कॉलोनी में आज सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कॉलोनी की रहवासी समिति ने अचानक तोड़फोड़ शुरू कर दी। समिति के पदाधिकारियों ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए न केवल लोगों के घरों के सामने के रास्तों को 'कब्जा' बताकर ढहा दिया, बल्कि कई घरों के निर्माण को भी भारी नुकसान पहुँचाया है।
न नोटिस, न सूचना: सीधे कार्रवाई
पीड़ित रहवासियों का आरोप है कि समिति के अध्यक्ष और अन्य सदस्य अपनी मनमानी पर उतारू हैं। इस पूरी कार्रवाई से पहले किसी भी घर को न तो कोई कानूनी नोटिस दिया गया और न ही कोई पूर्व सूचना दी गई। सुबह अचानक मजदूरों और हथौड़ों के साथ पहुँची समिति की टीम ने तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिससे रहवासी हक्के-बक्के रह गए।
भोपाल में अपनी तरह का पहला मामला
जानकारों का कहना है कि भोपाल के इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है, जब किसी हाउसिंग सोसाइटी या समिति ने प्रशासन और नगर निगम के अधिकारों को अपने हाथ में लेकर इस तरह की बड़ी तोड़फोड़ की हो। आमतौर पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नगर निगम या जिला प्रशासन द्वारा कानूनी नोटिस के बाद की जाती है, लेकिन यहाँ समिति खुद ही 'जज' और 'जमीन मालिक' बन बैठी है।
अध्यक्ष की मनमानी पर उठे सवाल
कॉलोनी के लोगों में समिति के अध्यक्ष के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। यदि कोई अतिक्रमण था भी, तो उसके लिए विधिवत प्रक्रिया का पालन होना चाहिए था। निजी समिति को किसी का घर तोड़ने का संवैधानिक अधिकार किसने दिया, यह अब जांच का विषय है।
फिलहाल, पीड़ित परिवार इस मामले में पुलिस और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस 'निजी बुलडोजर संस्कृति' पर क्या कार्रवाई करता है।
    user_Dr.SYED KHALID QAIS
    Dr.SYED KHALID QAIS
    Association or organisation हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Post by Naved khan
    3
    Post by Naved khan
    user_Naved khan
    Naved khan
    रिपोर्टर हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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