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देबी दयाल परिहार
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- कमला नेहरू अस्पताल (KNH) से गायनी ओपीडी को शिफ्ट करने के सरकार के निर्णय ने अब तूल पकड़ लिया है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (AIDWA) ने इस फैसले को महिला विरोधी करार देते हुए सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बुधवार को समिति के बैनर तले महिलाओं ने अस्पताल परिसर में जमकर प्रदर्शन किया और 24 घंटे के 'रात्रि पड़ाव' के साथ अपना विरोध दर्ज कराया। विओ: अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की महासचिव फालमा चौहान ने कहा कि गायनी और प्रसूति विभाग एक-दूसरे के पूरक हैं और इन्हें अलग-अलग करना मरीजों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि 102 साल पुराने इस ऐतिहासिक अस्पताल में ब्लड बैंक, इमरजेंसी, ओटी और लैब जैसी सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। सरकार का यह कहना कि यहाँ मशीनें पुरानी हैं, पूरी तरह तर्कहीन है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मशीनें पुरानी थीं तो उन्हें बदला जाना चाहिए था, न कि ओपीडी को ही यहाँ से शिफ्ट कर दिया जाता। फालमा चौहान ने सरकार पर आरोप लगाया कि महिलाओं पर भारी-भरकम 'यूजर चार्ज' थोप दिए गए हैं और अस्पताल में खान-पान की वस्तुओं के साथ ही अन्य दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री से भी बात की गई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।उन्होंने कहा कि सरकार जिद पर अड़ी है और आनन-फानन में इस ओपीडी को शिफ्ट किया गया है, जिससे महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फालमा चैहान ने सरकार को चेताते हुए कहा कि यदि यह जनविरोधी निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आने वाले समय में आंदोलन और उग्र होगा। वर्तमान में चल रहे 24 घंटे के धरने और रात्रि पड़ाव के बाद, समिति ने आगामी 30 अप्रैल को आईजीएमसी (IGMC) में एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर इसके बावजूद भी सरकार ने अपने आदेश वापस नहीं लिए, तो महिलाओं का यह हुजूम सचिवालय की ओर कूच करेगा और वहां का घेराव किया जाएगा। महिलाओं की मांग है कि KNH में नए भवन का निर्माण जल्द किया जाए और सभी आधुनिक सुविधाएं इसी परिसर में प्रदान की जाएं ताकि मरीजों को भटकना न पड़े। बाइट : फालमा चौहान महासचिव अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति2
- माता मंगला बनलगी मेले का भव्य समापन: दून विधायक राम कुमार चौधरी ने विजेताओं को किया सम्मानित पवन सिंघ1
- रामशहर में गंदगी के लग रहे ढेर का वीडियो सोशल मीडिया में हुआ खूब वायरल1
- जिला बिलासपुर में शहरी चुनाव के लिए 16 हजार 782 मतदाता मतदान करेंगे। शहरी निकाय चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो जाने के बाद अब प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। अधिकारियों, कर्मियों को प्रशासन की ओर से निर्देश दिए गए हैं। ताकि किसी तरह की भी कोताही सामने न आए। शहरी निकाय चुनाव के लिए गत मंगलवार को आचार संहिता लगा दी गई है। इसके बाद स्थानीय चुनाव आयोग की ओर से चुनाव करवाने को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला बिलासपुर की तीन नगर परिषद और एक नगर पंचायत के लिए चुनाव प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें बिलासपुर, घुमारवीं, नयनादेवी, नगर पंचायत शाहतलाई शामिल हैं। संबधित एसडीएम को आरओ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा अन्य कमेटियों का भी गठन किया गया है। बताया जा रहा है कि जिला बिलासपुर में शहरी निकाय चुनाव के लिए कुल 16 हजार 782 मतदाता हैं और इसमें करीब 84 सौ मतदाता पुरूष और 8381 मतदाता महिलाएं हैं। इस दफा पुरूष मतदाताओं के हाथ में सत्ता दिलाने की चाबी रहेगी। इसके अलावा प्रशासन की ओर से इस चुनाव को करवाने को लेकर पोलिंग स्टेशन चिहिन्तं कर दिए गए हैं। कुल 34 पोलिंग स्टेशन अभी तक चिहिन्तं किए गए हैं। इन पोलिंग स्टेशनों पर संबधित कर्मियों की तैनाती की जाएगी। अब चुनाव आयोग की ओर से शेष तैयारियां की जा रही हैं।1
- Post by Dev Raj Thakur1
- टेमपर्ड नंबर प्लेट लगाकर ट्रिपल राइडिंग पड़ी भारी, डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक ने बीच सड़क रुकवाई बाइक, 25 हजार का चालान काटकर बाइक इंपाउंड की1
- करीब रात 2:30 बजे आग लगने की घटना के दस्तावेज भी जल गए1
- “पंचायती राज चुनाव को हाइजैक करने की साजिश, पंचायतों का पैसा लूटा—कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को बनाया बंधक” भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर संसद में हुए घटनाक्रम ने कांग्रेस की “एंटी-वूमेन” मानसिकता को पूरी तरह उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष संसद सत्र बुलाकर महिलाओं को सत्ता में भागीदारी देने का ऐतिहासिक प्रयास किया, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने मिलकर इस अवसर को कुचलने का काम किया। डॉ. बिंदल ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में मोदी सरकार ने महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए अनेक ठोस कदम उठाए और अब उन्हें नीति निर्धारण में भागीदारी देने का समय आया था। “यह वह क्षण था जब देश की 50 प्रतिशत आबादी को सत्ता की चाबी सौंपनी थी, लेकिन कांग्रेस ने इस ऐतिहासिक अवसर पर 70 करोड़ बहनों की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया,” उन्होंने कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 40 वर्षों तक महिला आरक्षण को लटकाया, भटकाया और जब इसे लागू करने का समय आया तो दीवार बनकर खड़ी हो गई। “बिल गिरने के बाद जश्न मनाना और मिठाइयां बांटना इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस महिलाओं के अधिकारों की विरोधी है,” बिंदल ने कहा। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस नेताओं पर भी सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं ले रहे हैं और घुमा-फिराकर बयान दे रहे हैं। “यह महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खुला समर्थन है और इसका जवाब हिमाचल की माताएं-बहनें सड़कों पर उतरकर देंगी,” उन्होंने कहा। डॉ. बिंदल ने घोषणा की कि 23 अप्रैल को शिमला में “जन आक्रोश पदयात्रा” निकाली जाएगी, जिसमें हजारों महिलाएं कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन करेंगी। “यह केवल विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की निर्णायक लड़ाई है,” उन्होंने कहा। “कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज चुनाव को हाइजैक करने का प्रयास किया” प्रेस वार्ता के दूसरे महत्वपूर्ण विषय पर बोलते हुए डॉ. बिंदल ने हिमाचल प्रदेश सरकार पर पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों को जानबूझकर प्रभावित करने और हाइजैक करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस सरकार ने चुनाव न करवाने के लिए हर संभव प्रयास किया और संवैधानिक प्रक्रिया को बाधित करने की साजिश रची।” उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग को राज्यपाल को 35 पृष्ठों का पत्र देना पड़ा, जिसमें स्पष्ट किया गया कि प्रदेश सरकार द्वारा सहयोग नहीं किया जा रहा था। “यह लोकतंत्र को बंधक बनाने का प्रयास था, जिसे न्यायालय के हस्तक्षेप से रोका गया,” उन्होंने कहा। डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने पंचायतों और नगर निकायों के लिए केंद्र से आए वित्त आयोग के धन को जबरन अपने पास मंगवा लिया। “गांवों और शहरों के विकास का पैसा छीनकर कांग्रेस सरकार ने विकास को रोक दिया—आज तक यह स्पष्ट नहीं कि वह पैसा कहां खर्च हुआ,” उन्होंने कहा। उन्होंने कहा कि इस कदम से न केवल विकास कार्य ठप हुए, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का भी हनन हुआ। “यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतंत्र के साथ सीधा खिलवाड़ है,” उन्होंने कहा। डॉ. बिंदल ने शहरी निकाय चुनावों की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि यह जनता और न्याय व्यवस्था की जीत है, जबकि कांग्रेस सरकार की नकारात्मक राजनीति की हार है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही पंचायती राज चुनाव भी घोषित होंगे और जनता कांग्रेस को इसका जवाब देगी। अंत में उन्होंने कहा कि “एक तरफ मोदी सरकार है जो महिलाओं को अधिकार देना चाहती है, और दूसरी तरफ कांग्रेस है जो अधिकार छीनने और लोकतंत्र को हाइजैक करने में लगी है—अब जनता निर्णय करेगी।”2