वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के पावन अवसर पर, आज चित्तौड़गढ़ स्थित महाराणा प्रताप सर्कल पर उनकी भव्य प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र से आजाद समाज पार्टी के पूर्व प्रत्याशी शंकरलाल मेघवाल बिलड़ी ने देश के इस महान सपूत को कोटि-कोटि नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर, शंकरलाल मेघवाल बिलड़ी ने महाराणा प्रताप के शौर्य को याद करते हुए ये पंक्तियाँ साझा कीं: "जहाँ शौर्य का लहू बहा, वो पावन माटी याद रहे, कट गया शीश पर झुका नहीं, वो राजपूती शान याद रहे।" उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या और मातृभूमि के प्रति सर्वस्व अर्पण का अनुपम उदाहरण है। मेघवाल ने इस बात पर जोर दिया कि महाराणा प्रताप ने विषम से विषम परिस्थितियों में भी कभी विदेशी आक्रांताओं के सामने घुटने नहीं टेके, अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए घास की रोटियां खाना स्वीकार किया, लेकिन मेवाड़ की पावन धरा को झुकने नहीं दिया। उनका यह अप्रतिम संघर्ष आज भी हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम की अलख जगाता है। मेघवाल ने आगे कहा कि इस पावन दिन पर हमें केवल इतिहास को याद ही नहीं करना है, बल्कि महाराणा प्रताप द्वारा दिखाए गए स्वाभिमान, साहस और न्याय के मार्ग पर चलने का सच्चा संकल्प भी लेना है। उन्होंने बताया कि प्रताप का जीवन सिखाता है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन और विपरीत क्यों न हों, अपने सिद्धांतों, आत्मसम्मान और राष्ट्र की रक्षा के लिए हमेशा अडिग रहना चाहिए। इस महान संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए, उन्होंने आज उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर शंकरलाल मेघवाल के साथ स्थानीय प्रबुद्ध जन और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने राष्ट्रभक्ति का संकल्प लेते हुए महाराणा प्रताप के पदचिन्हों पर चलकर समाज व देश हित में निरंतर कार्य करने की बात दोहराई।
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के पावन अवसर पर, आज चित्तौड़गढ़ स्थित महाराणा प्रताप सर्कल पर उनकी भव्य प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र से आजाद समाज पार्टी के पूर्व प्रत्याशी शंकरलाल मेघवाल बिलड़ी ने देश के इस महान सपूत को कोटि-कोटि नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर, शंकरलाल मेघवाल बिलड़ी ने महाराणा प्रताप के शौर्य को याद करते हुए ये पंक्तियाँ साझा कीं: "जहाँ शौर्य का लहू बहा, वो पावन माटी याद रहे, कट गया शीश पर झुका नहीं, वो राजपूती शान याद रहे।" उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या और मातृभूमि के प्रति सर्वस्व अर्पण का अनुपम उदाहरण है। मेघवाल ने इस बात पर जोर दिया कि महाराणा प्रताप ने विषम से विषम परिस्थितियों में भी कभी विदेशी आक्रांताओं के सामने घुटने नहीं टेके, अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए घास की रोटियां खाना स्वीकार किया, लेकिन मेवाड़ की पावन धरा को झुकने नहीं दिया। उनका यह अप्रतिम संघर्ष आज भी हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम की अलख जगाता है। मेघवाल ने आगे कहा कि इस पावन दिन पर हमें केवल इतिहास को याद ही नहीं करना है, बल्कि महाराणा प्रताप द्वारा दिखाए गए स्वाभिमान, साहस और न्याय के मार्ग पर चलने का सच्चा संकल्प भी लेना है। उन्होंने बताया कि प्रताप का जीवन सिखाता है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन और विपरीत क्यों न हों, अपने सिद्धांतों, आत्मसम्मान और राष्ट्र की रक्षा के लिए हमेशा अडिग रहना चाहिए। इस महान संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए, उन्होंने आज उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर शंकरलाल मेघवाल के साथ स्थानीय प्रबुद्ध जन और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने राष्ट्रभक्ति का संकल्प लेते हुए महाराणा प्रताप के पदचिन्हों पर चलकर समाज व देश हित में निरंतर कार्य करने की बात दोहराई।
- योग दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी स्टेडियम योगमय हो उठा, जहाँ पुलिस, होमगार्ड और आमजन एक ही मंच पर एक साथ एकत्रित हुए। इस आयोजन में पुलिस और होमगार्ड के जवानों के साथ-साथ आम जनता ने भी भागीदारी की।1
- चित्तौड़गढ़ पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने जिले की जनता से एक बड़ी अपील की है। उन्होंने सभी नागरिकों से यह महत्वपूर्ण संदेश हर व्यक्ति तक पहुँचाने का आग्रह किया है।1
- महिला T20 विश्व कप में एक रोमांचक फाइनल मुकाबले को लेकर दर्शकों से यह जानने की उत्सुकता व्यक्त की गई है कि उनकी राय में कौन सी टीम विजयी होगी। पाठकों को अपने विचार कमेंट्स में साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, साथ ही स्पोर्ट्स न्यूज़ के लिए तुरंत सब्सक्राइब कर जुड़ने का आग्रह भी किया गया है।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड के मूंगा का खेड़ा गांव में शनिवार को एक अनोखी रेस्क्यू कार्रवाई देखने को मिली। यहाँ, एक कुएं से 35 वर्षीय कालू किर का शव निकालने के दौरान, शव के पास तीन सांप मौजूद थे, जिससे सीधे तौर पर शव को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही गंगरार पुलिस और सिविल डिफेंस टीम मौके पर पहुँची। कुएं में सांपों को देखकर वन विभाग और चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति को भी बुलाया गया। पीयूष कांबले, राम कुमार साहू, मुबारिक खान और मयूर गोसावी ने रस्सी के सहारे कुएं में उतरकर तीनों सांपों को सुरक्षित रूप से ज़िंदा पकड़ा। इसके बाद सिविल डिफेंस टीम ने मृतक का शव कुएं से सफलतापूर्वक बाहर निकाला। पुलिस, सिविल डिफेंस और वन्यजीव टीम के इस संयुक्त प्रयास से यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सफल रहा।1
- एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक BPSC अध्यापिका ने अपने ही 13 साल के बेटे को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। इस दर्दनाक वारदात का मुख्य कारण बताया जा रहा है कि बेटा अपनी माँ के कथित अवैध संबंधों का लगातार विरोध करता था, जिसके बाद यह भीषण कदम उठाया गया।1
- भदेसर क्षेत्र के पीपलवास गांव और आसपास के इलाकों में किसानों ने बुधवार को हुई प्री-मानसून की तेज बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर दी है। बुधवार देर रात से सुबह तक हुई इस बारिश से उत्साहित होकर, कई किसानों ने शुक्रवार से ही जोखिम उठाते हुए बुवाई का कार्य प्रारंभ किया, जबकि कुछ अन्य गांवों में शनिवार से यह कार्य शुरू हुआ। पीपलवास निवासी प्रकाश सोलंकी के अनुसार, बारिश के बाद भूमि बुवाई के लिए उपयुक्त हो गई है। किसानों का मानना है कि यदि अगले 10-15 दिनों तक बारिश न भी हो, तो भी मिट्टी में मौजूद वर्तमान नमी अंकुरण के लिए पर्याप्त रहेगी। पीपलवास पंचायत के आसपास के किसान अच्छी बारिश की उम्मीद में यह जोखिम भरा फैसला ले रहे हैं। इसके विपरीत, मौसम पूर्वानुमान मंच और कृषि विशेषज्ञ किसानों को बुवाई में जल्दबाजी न करने की सलाह दे रहे हैं। उनका तर्क है कि प्री-मानसून बारिश पर बड़े पैमाने पर बुवाई करना जोखिमपूर्ण हो सकता है, क्योंकि आगे पर्याप्त वर्षा न होने की स्थिति में फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।1
- योग दिवस के अवसर पर बस्सी वन विभाग चित्तौड़गढ़ की टीम ने एक अनोखा 'अजगर आसन' किया। इस दौरान टीम ने 10 फीट लंबे एक इंडियन रॉक पाइथन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड स्थित मूंगा खेड़ा गांव में खेत पर काम करते समय किसान कालू कीर एक कुएं में गिर गए। इस घटना की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस, पुलिस और हिन्दुस्तान जिंक की बचाव टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। बचाव कार्य के दौरान कुएं में सांपों की मौजूदगी सामने आई, जिससे अभियान प्रभावित हुआ और उसमें बाधा उत्पन्न हुई। इसके बाद, वन विभाग की टीम को बुलाया गया, जिसने कुएं से तीन जहरीले सांपों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें जंगल में छोड़ा। सांपों का खतरा टलने के बाद, बचाव दल ने किसान कालू कीर के शव को कुएं से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए गंगरार चिकित्सालय पहुंचाया।1