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कौन हैं निधि तिवारी? बनारस की गलियों से निकलकर पीएम मोदी की सबसे करीबी अफसर बनने तक की कहानी #NidhiTiwari #NarendraModi #varanasi #pmoindia #News #UttarPradesh https://www.yugantarpravah.com/uttar-pradesh/lucknow/who-is-nidhi-tiwari-varanasi-to-pm-modi-private-secretary/article-7751
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कौन हैं निधि तिवारी? बनारस की गलियों से निकलकर पीएम मोदी की सबसे करीबी अफसर बनने तक की कहानी #NidhiTiwari #NarendraModi #varanasi #pmoindia #News #UttarPradesh https://www.yugantarpravah.com/uttar-pradesh/lucknow/who-is-nidhi-tiwari-varanasi-to-pm-modi-private-secretary/article-7751
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- नववर्ष के पहले दिन दर्दनाक हादसा, ट्रक की चपेट में आकर बाइक सवार युवक की मौत संवाददाता घाटमपुर दैनिक स्वतंत्र निवेश। कानपुर नगर के थाना सजेती क्षेत्र के अलियापुर टोल प्लाजाके पास नववर्ष के पहले दिन एक दर्दनाक हादसा हुआ। अमोली के पास एक ट्रक ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिससे बाइक चालक अमन यादव (23) निवासी कुष्मांडा नगर घाटमपुर की मौत हो गई। युवक सजेती थाना क्षेत्र के रामपुर गांव में दुकान खोले हुए था, थेरे सोम दुकान बंद कर घर वापस लौट रहा था। रास्ते में हादसा उस वक्त हुआ जब अमन यादव अपनी मोटरसाइकिल से हमीरपुर से कानपुर की तरफ आ रहे थे। ट्रक ने उनकी बाइक मे टक्कर मार दी, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। एंबुलेंस की मदद से उन्हें तुरंत सीएचसी घाटमपुर पहुंचाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ट्रक चालक मौके से फरार हो गया, लेकिन ट्रक को पुलिस ने जब्त कर लिया है। मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं साथ ही आगे की कार्रवाई की गयी हैं।2
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- Post by Raj Trivedi1
- यह चित्र भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस से संबंधित है, जो हर साल 1 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन 1818 में हुई 'कोरेगांव की लड़ाई' की याद में मनाया जाता है। इस दिन के बारे में कुछ मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि युद्ध: 1 जनवरी 1818 को पुणे के पास भीमा नदी के तट पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और मराठा साम्राज्य के पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेना के बीच युद्ध हुआ था। महार रेजिमेंट का शौर्य: ब्रिटिश सेना की ओर से मुख्य रूप से महार समुदाय के सैनिकों ने युद्ध लड़ा था। चित्र में लिखित "500 नागवंशीय योद्धाओं" का संदर्भ इन्हीं वीर सैनिकों से है, जिन्होंने संख्या में बहुत अधिक (लगभग 28,000) पेशवा सेना का डटकर मुकाबला किया और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। विजय स्तंभ (Jay Stambh) चित्र में दिख रहा स्मारक 'विजय स्तंभ' है, जिसे अंग्रेजों ने युद्ध में शहीद हुए अपने सैनिकों की याद में भीमा कोरेगांव में स्थापित किया था। इस स्तंभ पर उन महार सैनिकों के नाम अंकित हैं जिन्होंने अपनी वीरता का परिचय दिया था। सामाजिक महत्व आत्मसम्मान का प्रतीक: इस दिन को दलित समुदाय (विशेषकर महार समुदाय) जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ एक बड़ी जीत और अपने स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में देखता है। बाबासाहेब अंबेडकर: 1 जनवरी 1927 को डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इस स्थान का दौरा किया था, जिसके बाद से यह स्थान एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल और प्रेरणा का केंद्र बन गया है। क्या आप इस युद्ध के ऐतिहासिक संदर्भ या इसके सामाजिक प्रभाव के बारे में और अधिक विस्तार से जानना चाहेंगे?1
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