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सीतामढ़ी में इंजीनियरिंग की छात्रा की मौत पर प्रदर्शन:लड़कियां बोलीं- प्रिंसिपल ने अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी नहीं दी, कहा- गंदी हो जाएगी मृतक छात्रा की पहचान मेधा पराशर (22) के रूप में हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, छात्रा की मौत ब्रेन हेमरेज की वजह से हुई है।
Preety panchal
सीतामढ़ी में इंजीनियरिंग की छात्रा की मौत पर प्रदर्शन:लड़कियां बोलीं- प्रिंसिपल ने अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी नहीं दी, कहा- गंदी हो जाएगी मृतक छात्रा की पहचान मेधा पराशर (22) के रूप में हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, छात्रा की मौत ब्रेन हेमरेज की वजह से हुई है।
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- एकदिवसीय बालक-बालिका कबड्डी प्रतियोगिता का किया गया आयोजन एंकर मधेपुरा के भगवानपुर टोला में एकदिवसीय बालक-बालिका कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन, मधेपुरा व मलिया बनी विजेता मधेपुरा सदर प्रखंड अंतर्गत साहुगढ़ पंचायत-2 के भगवानपुर टोला, वार्ड संख्या 10 में युवा क्लब भगवानपुर एवं मधेपुरा जिला कबड्डी संघ के संयुक्त तत्वावधान में एकदिवसीय बालक एवं बालिका कबड्डी प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्घाटन वरीय अधिवक्ता सुदिष्ट यादव, पवन यादव तथा उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय भगवानपुर के प्रधानाध्यापक पवन कुमार ने संयुक्त रूप से खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर एवं नारियल फोड़कर किया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अधिवक्ता सुरेश यादव ने कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन की नींव रखते हैं। खेल में हार-जीत दोनों से सीख मिलती है और हार के बाद जीत की प्रेरणा मिलती है, जिससे खिलाड़ी अगले मुकाबले में और अधिक उत्साह के साथ उतरते हैं। मधेपुरा जिला कबड्डी संघ के संयोजक सह राष्ट्रीय रेफरी अरुण कुमार ने जानकारी दी कि प्रतियोगिता में बालक वर्ग की 7 टीमों तथा बालिका वर्ग की 3 टीमों ने भाग लिया। समापन समारोह में जिला कबड्डी संघ मधेपुरा के संरक्षक सह राजद जिला अध्यक्ष जयकांत यादव ने विजेता टीमों को कप व मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। वहीं राजद महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष रागिनी रानी ने उपविजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किए। प्रतियोगिता के परिणाम बालक वर्ग (फाइनल): मधेपुरा की टीम ने 61 अंक प्राप्त कर विजेता कप पर कब्जा जमाया, जबकि बिहारीगंज की टीम 43 अंकों के साथ उपविजेता रही। बालिका वर्ग (फाइनल): मलिया की टीम ने 30 अंक प्राप्त कर विजेता का खिताब जीता, जबकि भगवानपुर की टीम 09 अंकों के साथ उपविजेता रही। सेमीफाइनल मुकाबले: पहले सेमीफाइनल में मधेपुरा ने 26 अंक प्राप्त कर फाइनल में प्रवेश किया, जबकि खेले इंडिया की टीम 20 अंकों के साथ बाहर हो गई। दूसरे सेमीफाइनल में बिहारीगंज ने 33 अंक प्राप्त कर फाइनल में जगह बनाई, जबकि जगजीवन आश्रम की टीम 12 अंकों के साथ प्रतियोगिता से बाहर हो गई। कार्यक्रम का संचालन जिला कबड्डी संघ मधेपुरा के सचिव रोशन कुमार ने किया। निर्णायक की भूमिका में गौरी शंकर कुमार, राहुल कुमार, सुगंध कुमार, सौरभ कुमार, अभिलाषा कुमारी एवं नवीन कुमार रहे। इस अवसर पर जयप्रकाश कुमार, राजपुर अशोक कुमार, सुरेंद्र कुमार, पंकज कुमार, गौतम कुमार, मिथिलेश कुमार, सुजीत कुमार, अनिरुद्ध बल्लभ, सुशील कुमार, शिवम कुमार, उज्जवल कुमार, दिलबर कुमार, शुभम कुमार एवं विद्यंत कुमार सहित बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे। बाइट : रागनी रानी, स्थानीय जयकांत यादव, संरक्षक कबड्डी संघ मधेपुरा ।4
- Manoj Kumar1
- yah Dekh Lo anubhakt log Mera Desh kab Azad hua tha kaise huaa1
- इस पर जल्दी काम किया जाए हम लोग को पानी का टाइम में बहुत दिक्कत1
- क्या नसीम का यह बयान जांच की दिशा बदल देगा या फिर यह सिर्फ खुद को बचाने की कोशिश है ?1
- 📍पटना विश्वविद्यालय वसंतोत्सव–2026 ✍️ जन-संवाददाता प्रतिनिधि, बिहार 📢1
- मठाही में NH बना ‘मौत का रास्ता’: सफेद पट्टी और रेडियम संकेतक के अभाव में रोज़ हो रहे हादसे, प्रशासन बेपरवाह एंकर ------------------------------------------------------ मधेपुरा–सहरसा राष्ट्रीय राजमार्ग 231… जिसे विकास की रफ्तार का रास्ता होना था, आज मठाही इलाके में मौत का रास्ता बन चुका है। सड़क सुरक्षा के बुनियादी इंतज़ामों की कमी ने इस एनएच को बेहद खतरनाक बना दिया है। Vo यह तस्वीरें मठाही इलाके की हैं… रात का अंधेरा… तेज रफ्तार वाहन… और अचानक सामने आ जाता है अव्यवस्थित डिवाइडर। न सड़क पर सफेद पट्टी, न डिवाइडर पर रेडियम या रिफ्लेक्टर, और न ही कोई चेतावनी संकेत। Vo.1 रात में मधेपुरा से सहरसा की ओर जा रहा 18 चक्का ट्रक मठाही स्थित मां काली धर्म कांटा के पास सड़क के बीच बने डिवाइडर से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक डिवाइडर पर चढ़ते हुए आगे जाकर पुल से जा भिड़ा और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह प्रशासनिक लापरवाही का एक और गंभीर उदाहरण है। ग्राउंड बाइट ---स्थानीय लोग स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सप्ताह में दो से तीन बार दुर्घटनाएं आम हो चुकी हैं। रात होते ही यह सड़क और ज्यादा खतरनाक हो जाती है। एम्बुलेंस और पुलिस सायरन की आवाजें अब यहां की दिनचर्या बन चुकी हैं। ग्राफिक्स सजेशन: – सफेद पट्टी नहीं – रेडियम संकेतक नहीं – चेतावनी बोर्ड नहीं – लगातार दुर्घटनाएं Vo.2 स्थानीय जनप्रतिनिधि अशोक कुमार का कहना है कि एनएच-231 पर बने डिवाइडर पर रेडियम पट्टी और संकेतक नहीं होने के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं, लेकिन NHAI और संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। उन्होंने अविलंब सड़क सुरक्षा मानकों को लागू करने की मांग की है। Vo.3 ये सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग है, लेकिन हालात किसी ग्रामीण कच्ची सड़क से भी बदतर हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी और बड़ी दुर्घटना या मौत का इंतज़ार कर रहा है? अगर समय रहते सफेद पट्टी, रेडियम रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए, तो यह एनएच यूं ही ‘मौत का रास्ता’ बना रहेगा। Vo.f अब देखना ये होगा कि प्रशासन और NHAI कब जागते हैं… और कब तक लोगों की जान यूं ही खतरे में डाली जाती रहेगी।3
- Post by Monu1
- इस लड़की का वीडियो बहुत वायरल चल रहा है अभी ट्रेनिंग में जो भी वीडियो बनाना चाहते हैं आ जाओ1