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सिंगरौली में बड़े पैमाने पर हो रही कथित पेड़ कटाई के खिलाफ जन उड़ान पार्टी ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में “बीरबल खिचड़ी कार्यक्रम” के माध्यम से अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने संदेश दिया कि जिस तरह दूर की आग से बीरबल की खिचड़ी नहीं पक सकती, उसी प्रकार सिंगरौली में कटने वाले लाखों पेड़ों की भरपाई 700 किलोमीटर दूर किए जा रहे पौधारोपण से नहीं हो सकती। पार्टी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष भास्कर मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त की। जन उड़ान पार्टी का आरोप है कि Adani Group की परियोजनाओं के लिए सिंगरौली क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन प्रतिपूरक पौधारोोपण स्थानीय क्षेत्र में न होकर अन्य जिलों में कराया जा रहा है। पार्टी का तर्क है कि पर्यावरणीय क्षति केवल पेड़ों की संख्या से नहीं आंकी जा सकती, बल्कि यह वहां के तापमान, जैव विविधता, भूजल स्तर, वायु गुणवत्ता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित करती है। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों में पौधे लगाने से सिंगरौली को होने वाले नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। उल्लेखनीय है कि सिंगरौली देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचान रखता है, जहाँ कोयला खदानों, ताप विद्युत परियोजनाओं और भारी उद्योगों का व्यापक विस्तार हुआ है। विकास और औद्योगिकीकरण ने आर्थिक महत्व तो दिया है, लेकिन प्रदूषण, वन क्षरण और पर्यावरणीय असंतुलन के प्रश्न भी लगातार उठते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि सिंगरौली में काटे जा रहे पेड़ों के बदले स्थानीय स्तर पर व्यापक पौधारोपण कराया जाए, पौधारोपण की निगरानी और जीवित रहने की दर सार्वजनिक की जाए, पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र मूल्यांकन हो और स्थानीय समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाए। जन उड़ान पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि विकास परियोजनाओं में प्रतिपूरक पौधारोपण आवश्यक है, लेकिन मुख्य चुनौती लगाए गए पौधों के जीवित रहने और क्षेत्र की पारिस्थितिकी की भरपाई कर पाने में है, क्योंकि कई बार कागजों में दावे होते हैं, पर वर्षों बाद अस्तित्व नहीं मिलता। “बीरबल खिचड़ी कार्यक्रम” केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सिंगरौली के भविष्य को लेकर उठाया गया एक गंभीर प्रश्न था कि क्या ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक विकास की कीमत स्थानीय पर्यावरण को चुकानी पड़ेगी, या फिर विकास और प्रकृति के बीच कोई संतुलित रास्ता निकाला जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया इस बहस की दिशा तय करेगी।

3 hrs ago
user_Arvind Kumar Mishra
Arvind Kumar Mishra
Singrauli, Madhya Pradesh•
3 hrs ago

सिंगरौली में बड़े पैमाने पर हो रही कथित पेड़ कटाई के खिलाफ जन उड़ान पार्टी ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में “बीरबल खिचड़ी कार्यक्रम” के माध्यम से अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने संदेश दिया कि जिस तरह दूर की आग से बीरबल की खिचड़ी नहीं पक सकती, उसी प्रकार सिंगरौली में कटने वाले लाखों पेड़ों की भरपाई 700 किलोमीटर दूर किए जा रहे पौधारोपण से नहीं हो सकती। पार्टी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष भास्कर मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त की। जन उड़ान पार्टी का आरोप है कि Adani Group की परियोजनाओं के लिए सिंगरौली क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन प्रतिपूरक पौधारोोपण स्थानीय क्षेत्र में न होकर अन्य जिलों में कराया जा रहा है। पार्टी का तर्क है कि पर्यावरणीय क्षति केवल पेड़ों की संख्या से नहीं आंकी जा सकती, बल्कि यह वहां के तापमान, जैव विविधता, भूजल स्तर, वायु गुणवत्ता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित करती है। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों में पौधे लगाने से सिंगरौली को होने वाले नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। उल्लेखनीय है कि सिंगरौली देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचान रखता है, जहाँ कोयला खदानों, ताप विद्युत परियोजनाओं और भारी उद्योगों का व्यापक विस्तार हुआ है। विकास और औद्योगिकीकरण ने आर्थिक महत्व तो दिया है, लेकिन प्रदूषण, वन क्षरण और पर्यावरणीय असंतुलन के प्रश्न भी लगातार उठते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि सिंगरौली में काटे जा रहे पेड़ों के बदले स्थानीय स्तर पर व्यापक पौधारोपण कराया जाए, पौधारोपण की निगरानी और जीवित रहने की दर सार्वजनिक की जाए, पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र मूल्यांकन हो और स्थानीय समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाए। जन उड़ान पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि विकास परियोजनाओं में प्रतिपूरक पौधारोपण आवश्यक है, लेकिन मुख्य चुनौती लगाए गए पौधों के जीवित रहने और क्षेत्र की पारिस्थितिकी की भरपाई कर पाने में है, क्योंकि कई बार कागजों में दावे होते हैं, पर वर्षों बाद अस्तित्व नहीं मिलता। “बीरबल खिचड़ी कार्यक्रम” केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सिंगरौली के भविष्य को लेकर उठाया गया एक गंभीर प्रश्न था कि क्या ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक विकास की कीमत स्थानीय पर्यावरण को चुकानी पड़ेगी, या फिर विकास और प्रकृति के बीच कोई संतुलित रास्ता निकाला जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया इस बहस की दिशा तय करेगी।

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  • विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोनभद्र में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ता आम के पौधे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और पूरे जिले में 2 लाख फलदार पौधे लगाने का संकल्प लिया। मोर्चा ने तेंदुआ सफारी, कृषि वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना, खनन निधि का जनहित में उपयोग सुनिश्चित करने और जल, जंगल एवं जमीन को बचाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। यह प्रदर्शन पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के प्रति उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
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    विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोनभद्र में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ता आम के पौधे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और पूरे जिले में 2 लाख फलदार पौधे लगाने का संकल्प लिया। मोर्चा ने तेंदुआ सफारी, कृषि वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना, खनन निधि का जनहित में उपयोग सुनिश्चित करने और जल, जंगल एवं जमीन को बचाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। यह प्रदर्शन पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के प्रति उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हरित आवरण बढ़ाने की पहल के तहत शुक्रवार को सोनभद्र जनपद में वृहद स्तर पर पौधरोपण महाअभियान और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की शुरुआत हुई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत जनपद के विभिन्न स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया। इस महाअभियान के अंतर्गत जिले में कुल 1,61,69,686 (एक करोड़ इकसठ लाख उनहत्तर हज़ार छह सौ छियासी) पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 1,02,18,000 (एक करोड़ दो लाख अठारह हज़ार) पौधे वन विभाग द्वारा लगाए जाएंगे, जबकि शेष 59,51,686 (उनसठ लाख इक्यावन हज़ार छह सौ छियासी) पौधे 22 अन्य विभागों द्वारा रोपे जाएंगे। विकास खंड घोरावल के तिलौली कला में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में घोरावल विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्य, जिलाधिकारी चर्चित गौड़, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी सहित अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त, सदर विधायक भूपेश चौबे, विभिन्न ब्लॉक प्रमुखों, अन्य जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आमजन ने भी जनपद के अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण कर अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाई। 'मिशन छाया' के तहत सड़कों के दोनों ओर छायादार पौधे लगाकर उन्हें हरा-भरा बनाने का भी लक्ष्य है। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने जनपदवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से, यह वृहद वृक्षारोपण अभियान विभिन्न विभागों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से संचालित किया गया, जहाँ लोगों ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत पौधे लगाकर पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हरित आवरण बढ़ाने की पहल के तहत शुक्रवार को सोनभद्र जनपद में वृहद स्तर पर पौधरोपण महाअभियान और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की शुरुआत हुई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत जनपद के विभिन्न स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया। इस महाअभियान के अंतर्गत जिले में कुल 1,61,69,686 (एक करोड़ इकसठ लाख उनहत्तर हज़ार छह सौ छियासी) पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 1,02,18,000 (एक करोड़ दो लाख अठारह हज़ार) पौधे वन विभाग द्वारा लगाए जाएंगे, जबकि शेष 59,51,686 (उनसठ लाख इक्यावन हज़ार छह सौ छियासी) पौधे 22 अन्य विभागों द्वारा रोपे जाएंगे।

विकास खंड घोरावल के तिलौली कला में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में घोरावल विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्य, जिलाधिकारी चर्चित गौड़, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी सहित अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त, सदर विधायक भूपेश चौबे, विभिन्न ब्लॉक प्रमुखों, अन्य जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आमजन ने भी जनपद के अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण कर अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाई। 'मिशन छाया' के तहत सड़कों के दोनों ओर छायादार पौधे लगाकर उन्हें हरा-भरा बनाने का भी लक्ष्य है।

इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने जनपदवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से, यह वृहद वृक्षारोपण अभियान विभिन्न विभागों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से संचालित किया गया, जहाँ लोगों ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत पौधे लगाकर पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
    user_पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    Media company ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • सीधी जिले के कुसमी क्षेत्र में सड़क निर्माण का कार्य अच्छी तरह से पूरा नहीं हो पाया है। बताया गया है कि कुसमी के बड़वाही ग्राम में सड़कें बनने में असमर्थ दिखाई दे रही हैं, जिसके कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए, संबंधित लोगों द्वारा जल्द से जल्द सड़क निर्माण में सहायता या मदद प्रदान करने की अपील की गई है।
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    सीधी जिले के कुसमी क्षेत्र में सड़क निर्माण का कार्य अच्छी तरह से पूरा नहीं हो पाया है। बताया गया है कि कुसमी के बड़वाही ग्राम में सड़कें बनने में असमर्थ दिखाई दे रही हैं, जिसके कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए, संबंधित लोगों द्वारा जल्द से जल्द सड़क निर्माण में सहायता या मदद प्रदान करने की अपील की गई है।
    user_Rambahadur Singh
    Rambahadur Singh
    कुसमी, सीधी, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हालिया फेरबदल के बाद, सोनभद्र जिले की कमान नवनियुक्त राज्य मंत्री/MLC हंसराज विश्वकर्मा को सौंपी गई है, जिन्होंने 5 जून, 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर जिले का अपना पहला आधिकारिक दौरा किया। पूर्व प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल के स्थान पर आए विश्वकर्मा जी की कलेक्ट्रेट सभागार में हुई स्वागत सह समीक्षा बैठक में जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और ओबरा के विधायक व राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ सहित पूरा प्रशासनिक व राजनीतिक अमला उपस्थित था। हालांकि, इस प्रथम प्रवास के दौरान सत्ता पक्ष के ही मंच से खनिज संपदा को लेकर दिए गए वक्तव्यों ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय रिपोर्टिंग पर कई स्वाभाविक एवं गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। काशी क्षेत्र के वरिष्ठ सांगठनिक चेहरे और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले हंसराज विश्वकर्मा के इस पहले दौरे पर, स्वागत मंच से ही व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं पर तीखा विमर्श सामने आया। पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार कुशवाहा ने खनिज संपदा से जुड़ी समस्याओं को प्रखरता से उठाया। बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर 2004 में मिर्जापुर से सांसद रहे और फिर 2023 में भारतीय जानी पार्टी में शामिल हुए कुशवाहा ने, जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में बिना किसी विशिष्ट पट्टा धारक या खदान का नाम लिए "बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप" और "सुरक्षा के गंभीर संकट" का जिक्र किया। यह वक्तव्य तत्कालीन 'भूमिधरि नियमावली' के तहत स्थानीय किसानों को मिलने वाले छोटे पट्टों की आसान व्यवस्था से हटकर, वर्तमान ई-टेंडरिंग प्रणाली की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के चलते स्थानीय काश्तकारों को आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को रेखांकित करता है, जिसमें कानूनी रॉयल्टी दर ₹160 प्रति घन मीटर से शुरू होती है। इस पूरी प्रशासनिक बैठक का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रदेश में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन आता है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री राज्य से "माफिया राज" और "गुंडागर्दी" के खात्मे की बात करते हैं, वहीं उनके जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले, उनके करीबी प्रभारी मंत्री के सामने सार्वजनिक रूप से व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए, और इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होना कई विधिक और प्रशासनिक यक्ष प्रश्न खड़े करता है। पहला प्रश्न यह है कि यदि खनन राजस्व का महत्वपूर्ण स्तंभ है और सरकार की ई-टेंडरिंग नीति पारदर्शी है, तो बिना प्रामाणिक साक्ष्य के सार्वजनिक आरोप वैध व्यवसायियों की सुरक्षा और साख को क्यों प्रभावित कर रहे हैं? दूसरा, 15 नवंबर 2025 के उस भीषण खदान हादसे में, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन के ऑन-रिकॉर्ड आंकड़ों के अनुसार 7 मौतें दर्ज थीं, शिकायतों में मृतकों की संख्या 10-12 बताई गई, जिससे जिला प्रशासन की राहत कार्यवाहियों और विभागीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर सवाल उठे; इसी कारण जिम्मेदार आला अधिकारी (DM-SP) मौन रहे। तीसरा और सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता स्वयं सुरक्षा खतरों का जिक्र करते हैं, तो वे विशिष्ट खदानों या विसंगतियों का नाम स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रखते? निष्कर्षतः, सोनभद्र जैसे आदिवासी बहुल जिले की खनिज संपदा पूरे प्रदेश को आर्थिक मजबूती देती है, लेकिन यहां का स्थानीय समाज आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित रोजगार जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए संघर्षरत है, जिसके कारण कभी-कभी स्थानीय सामाजिक परिवेश में आक्रामकता देखने को मिलती है। प्रभारी मंत्री हंसराज विश्वकर्मा के प्रथम प्रवास में सामने आए इन सांगठनिक अंतर्विरोधों और बयानों को शासन को "जमीनी फीडबैक" के रूप में देखना चाहिए। यह आवश्यक है कि खनन से प्राप्त राजस्व का एक निश्चित हिस्सा जिला खनिज कोष (DMF) के माध्यम से सोनभद्र के मूल आदिवासियों के विकास पर पारदर्शी तरीके से खर्च किया जाए, ताकि यह समृद्ध जिला आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सामाजिक शांति भी बनाए रख सके।
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    उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हालिया फेरबदल के बाद, सोनभद्र जिले की कमान नवनियुक्त राज्य मंत्री/MLC हंसराज विश्वकर्मा को सौंपी गई है, जिन्होंने 5 जून, 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर जिले का अपना पहला आधिकारिक दौरा किया। पूर्व प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल के स्थान पर आए विश्वकर्मा जी की कलेक्ट्रेट सभागार में हुई स्वागत सह समीक्षा बैठक में जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और ओबरा के विधायक व राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ सहित पूरा प्रशासनिक व राजनीतिक अमला उपस्थित था। हालांकि, इस प्रथम प्रवास के दौरान सत्ता पक्ष के ही मंच से खनिज संपदा को लेकर दिए गए वक्तव्यों ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय रिपोर्टिंग पर कई स्वाभाविक एवं गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

काशी क्षेत्र के वरिष्ठ सांगठनिक चेहरे और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले हंसराज विश्वकर्मा के इस पहले दौरे पर, स्वागत मंच से ही व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं पर तीखा विमर्श सामने आया। पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार कुशवाहा ने खनिज संपदा से जुड़ी समस्याओं को प्रखरता से उठाया। बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर 2004 में मिर्जापुर से सांसद रहे और फिर 2023 में भारतीय जानी पार्टी में शामिल हुए कुशवाहा ने, जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में बिना किसी विशिष्ट पट्टा धारक या खदान का नाम लिए "बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप" और "सुरक्षा के गंभीर संकट" का जिक्र किया। यह वक्तव्य तत्कालीन 'भूमिधरि नियमावली' के तहत स्थानीय किसानों को मिलने वाले छोटे पट्टों की आसान व्यवस्था से हटकर, वर्तमान ई-टेंडरिंग प्रणाली की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के चलते स्थानीय काश्तकारों को आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को रेखांकित करता है, जिसमें कानूनी रॉयल्टी दर ₹160 प्रति घन मीटर से शुरू होती है।

इस पूरी प्रशासनिक बैठक का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रदेश में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन आता है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री राज्य से "माफिया राज" और "गुंडागर्दी" के खात्मे की बात करते हैं, वहीं उनके जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले, उनके करीबी प्रभारी मंत्री के सामने सार्वजनिक रूप से व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए, और इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होना कई विधिक और प्रशासनिक यक्ष प्रश्न खड़े करता है। पहला प्रश्न यह है कि यदि खनन राजस्व का महत्वपूर्ण स्तंभ है और सरकार की ई-टेंडरिंग नीति पारदर्शी है, तो बिना प्रामाणिक साक्ष्य के सार्वजनिक आरोप वैध व्यवसायियों की सुरक्षा और साख को क्यों प्रभावित कर रहे हैं? दूसरा, 15 नवंबर 2025 के उस भीषण खदान हादसे में, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन के ऑन-रिकॉर्ड आंकड़ों के अनुसार 7 मौतें दर्ज थीं, शिकायतों में मृतकों की संख्या 10-12 बताई गई, जिससे जिला प्रशासन की राहत कार्यवाहियों और विभागीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर सवाल उठे; इसी कारण जिम्मेदार आला अधिकारी (DM-SP) मौन रहे। तीसरा और सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता स्वयं सुरक्षा खतरों का जिक्र करते हैं, तो वे विशिष्ट खदानों या विसंगतियों का नाम स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रखते?

निष्कर्षतः, सोनभद्र जैसे आदिवासी बहुल जिले की खनिज संपदा पूरे प्रदेश को आर्थिक मजबूती देती है, लेकिन यहां का स्थानीय समाज आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित रोजगार जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए संघर्षरत है, जिसके कारण कभी-कभी स्थानीय सामाजिक परिवेश में आक्रामकता देखने को मिलती है। प्रभारी मंत्री हंसराज विश्वकर्मा के प्रथम प्रवास में सामने आए इन सांगठनिक अंतर्विरोधों और बयानों को शासन को "जमीनी फीडबैक" के रूप में देखना चाहिए। यह आवश्यक है कि खनन से प्राप्त राजस्व का एक निश्चित हिस्सा जिला खनिज कोष (DMF) के माध्यम से सोनभद्र के मूल आदिवासियों के विकास पर पारदर्शी तरीके से खर्च किया जाए, ताकि यह समृद्ध जिला आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सामाजिक शांति भी बनाए रख सके।
    user_Abhishek agrahari संस्थापक सोन
    Abhishek agrahari संस्थापक सोन
    Student union ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • सोनभद्र के विंढमगंज स्थित ग्राम पंचायत बुटवेढ़वा में ग्राम समाज की भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला गरमा गया है। शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है और राजस्व विभाग ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। वार्ड सदस्य मुन्ना पासवान और आजाद समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष अमरेश भारती ने इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश के सक्षम अधिकारियों के समक्ष उठाया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विनोद अग्रवाल द्वारा ग्राम पंचायत बुटवेढ़वा की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए, संबंधित विभाग की टीम ने पक्षकारों को विंढमगंज थाने पर बुलाया और ग्राम समाज की भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी और ग्राम समाज की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा और निर्देश दिए कि यदि कब्जा पाया जाता है तो निर्धारित समय के भीतर उसे स्वयं हटा लिया जाए। अन्यथा, प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में विधिक कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया जाएगा और नियमानुसार इस कार्रवाई में होने वाले खर्च की वसूली भी संबंधित व्यक्ति से की जा सकती है। वार्ड सदस्य मुन्ना पासवान ने ग्राम समाज की भूमि को गांव की धरोहर बताते हुए इसे कब्जामुक्त कराने को प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी कहा, वहीं अमरेश भारती ने सार्वजनिक भूमि को प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप अतिक्रमण मुक्त कराने पर बल दिया ताकि आम जनता को उसका लाभ मिल सके। ग्रामीणों ने राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की तत्परता की सराहना की और उम्मीद जताई कि यदि इसी प्रकार निष्पक्ष कार्रवाई जारी रही तो सरकारी भूमि पर कब्जे की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लग सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप सरकारी भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त कार्रवाई से कानून का राज मजबूत होगा तथा आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास और बढ़ेगा।
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    सोनभद्र के विंढमगंज स्थित ग्राम पंचायत बुटवेढ़वा में ग्राम समाज की भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला गरमा गया है। शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है और राजस्व विभाग ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। वार्ड सदस्य मुन्ना पासवान और आजाद समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष अमरेश भारती ने इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश के सक्षम अधिकारियों के समक्ष उठाया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विनोद अग्रवाल द्वारा ग्राम पंचायत बुटवेढ़वा की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है।

इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए, संबंधित विभाग की टीम ने पक्षकारों को विंढमगंज थाने पर बुलाया और ग्राम समाज की भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी और ग्राम समाज की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा और निर्देश दिए कि यदि कब्जा पाया जाता है तो निर्धारित समय के भीतर उसे स्वयं हटा लिया जाए। अन्यथा, प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में विधिक कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया जाएगा और नियमानुसार इस कार्रवाई में होने वाले खर्च की वसूली भी संबंधित व्यक्ति से की जा सकती है।

वार्ड सदस्य मुन्ना पासवान ने ग्राम समाज की भूमि को गांव की धरोहर बताते हुए इसे कब्जामुक्त कराने को प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी कहा, वहीं अमरेश भारती ने सार्वजनिक भूमि को प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप अतिक्रमण मुक्त कराने पर बल दिया ताकि आम जनता को उसका लाभ मिल सके। ग्रामीणों ने राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की तत्परता की सराहना की और उम्मीद जताई कि यदि इसी प्रकार निष्पक्ष कार्रवाई जारी रही तो सरकारी भूमि पर कब्जे की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लग सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप सरकारी भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त कार्रवाई से कानून का राज मजबूत होगा तथा आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास और बढ़ेगा।
    user_Jitendr Prshad
    Jitendr Prshad
    Court reporter दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    28 min ago
  • सोनभद्र जिले में तीन पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) का तबादला किया गया है। इन तबादलों के तहत, एक डीएसपी को सोनभद्र से चंदौली स्थानांतरित किया गया है। वहीं, एक अन्य डीएसपी को मिर्जापुर में तैनात किया गया है।
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    सोनभद्र जिले में तीन पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) का तबादला किया गया है। इन तबादलों के तहत, एक डीएसपी को सोनभद्र से चंदौली स्थानांतरित किया गया है। वहीं, एक अन्य डीएसपी को मिर्जापुर में तैनात किया गया है।
    user_Chandrma kumar Kumar
    Chandrma kumar Kumar
    Farmer Robertsganj, Sonbhadra•
    53 min ago
  • सोनभद्र पुलिस ने विंढमगंज थाना क्षेत्र के जोरूखाड़ गाँव में हुए हत्याकांड का खुलासा महज 8 घंटे के भीतर कर दिया है। यह मामला रजनीकांत गोंड की हत्या से जुड़ा था, जिसके पीछे प्रेम-प्रसंग के शक को मुख्य कारण बताया गया है। पुलिस ने इस मामले में आरोपी दिनेश को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद, हत्या में इस्तेमाल किया गया चापड़, आरोपी का मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। सोनभद्र पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है।
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    सोनभद्र पुलिस ने विंढमगंज थाना क्षेत्र के जोरूखाड़ गाँव में हुए हत्याकांड का खुलासा महज 8 घंटे के भीतर कर दिया है। यह मामला रजनीकांत गोंड की हत्या से जुड़ा था, जिसके पीछे प्रेम-प्रसंग के शक को मुख्य कारण बताया गया है।

पुलिस ने इस मामले में आरोपी दिनेश को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद, हत्या में इस्तेमाल किया गया चापड़, आरोपी का मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। सोनभद्र पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र के रजधन गांव में गुरुवार रात एक 30 वर्षीय विवाहिता रानी, पत्नी श्यामसुंदर वर्मा, ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों ने बताया कि रानी काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली, जिसके बाद संदेह होने पर उन्होंने दरवाजा तोड़कर देखा। उन्हें रानी कच्चे घर के बड़ेर से दुपट्टे के सहारे फंदे पर लटकी मिली। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पीआरबी 112 और चोपन थाना प्रभारी निरीक्षक पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे, निरीक्षण किया और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। मृतका अपने पीछे दो पुत्र छोड़ गई है, और उनके पति श्यामसुंदर वर्मा रोजी-रोटी के लिए पुणे में मजदूरी करते हैं। फिलहाल, आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है, और गाँव में घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। मामले की जाँच अभी जारी है।
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    सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र के रजधन गांव में गुरुवार रात एक 30 वर्षीय विवाहिता रानी, पत्नी श्यामसुंदर वर्मा, ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

परिजनों ने बताया कि रानी काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली, जिसके बाद संदेह होने पर उन्होंने दरवाजा तोड़कर देखा। उन्हें रानी कच्चे घर के बड़ेर से दुपट्टे के सहारे फंदे पर लटकी मिली। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पीआरबी 112 और चोपन थाना प्रभारी निरीक्षक पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे, निरीक्षण किया और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। मृतका अपने पीछे दो पुत्र छोड़ गई है, और उनके पति श्यामसुंदर वर्मा रोजी-रोटी के लिए पुणे में मजदूरी करते हैं।

फिलहाल, आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है, और गाँव में घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। मामले की जाँच अभी जारी है।
    user_पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    Media company ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • सोनभद्र जिले की बेलन नदी में नहाने गए एक लड़के को मगरमच्छ ने पानी में खींच लिया। यह घटना उस वक्त हुई जब लड़का नदी में नहा रहा था।
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    सोनभद्र जिले की बेलन नदी में नहाने गए एक लड़के को मगरमच्छ ने पानी में खींच लिया। यह घटना उस वक्त हुई जब लड़का नदी में नहा रहा था।
    user_Chandrma kumar Kumar
    Chandrma kumar Kumar
    Farmer Robertsganj, Sonbhadra•
    1 hr ago
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