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पूरे क्षेत्र में पीने के पानी को लेकर भारी त्राहिमाम मचा हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, नगरवासी गंभीर जल संकट से लगातार जूझ रहे हैं और अत्यधिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
Dwarika prasad Yadaw
पूरे क्षेत्र में पीने के पानी को लेकर भारी त्राहिमाम मचा हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, नगरवासी गंभीर जल संकट से लगातार जूझ रहे हैं और अत्यधिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
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- NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया है।1
- कोरबा के सोनालिया पुल पर हर दिन हजारों लोगों को जाम, अव्यवस्था और दुर्घटनाओं के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। इस पुल पर अंडरब्रिज के निर्माण का वादा करीब एक साल पहले प्रदेश के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सार्वजनिक रूप से किया था। मंत्री ने तब कहा था कि अंडरब्रिज के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है और काम जल्द शुरू होगा। हालांकि, समय बीतने के साथ यह घोषणा पुरानी पड़ गई है और अंडरब्रिज का काम आज भी कागजों व फाइलों में ही अटका हुआ है। जनता अब सवाल पूछ रही है कि यह वादा कब पूरा होगा, क्योंकि उन्हें लगातार असुविधाओं और खतरों का सामना करना पड़ रहा है।1
- बिलासपुर के वार्ड क्रमांक 52 लिंगियाडीह में पिछले 6 से 7 महीनों से भीषण पेयजल संकट गहराया हुआ है, जिससे क्षेत्र के हजारों नागरिक अपनी दैनिक जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में भारी मशक्कत कर रहे हैं। क्षेत्र में उपलब्ध चार से पांच बोरवेल भी पर्याप्त जलापूर्ति देने में विफल साबित हो रहे हैं, जिससे वार्डवासियों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, यह समस्या दीपावली के आसपास शुरू हुई थी, लेकिन समय बीतने के बावजूद इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। कई मोहल्लों में सुबह से ही पानी के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं, जहाँ महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे घंटों तक बर्तन, बाल्टी और डिब्बे लेकर पानी भरने का इंतजार करते नजर आते हैं; यहाँ तक कि कई परिवारों के निजी बोरवेल और मर्सिबल पंप भी अब पानी नहीं दे पा रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है। वार्डवासियों का आरोप है कि पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है और नगर निगम प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलापूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए गए होते तो आज क्षेत्र को इस गंभीर संकट का सामना नहीं करना पड़ता। इस बीच, वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार कर रहे हैं, हालांकि बढ़ती आबादी और निरंतर बने संकट के बीच यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है, जिसे नागरिक केवल अस्थायी राहत मानते हैं। क्षेत्र में एक और गंभीर चिंता का विषय पेयजल पाइपलाइनों की स्थिति है, जो कई स्थानों पर नालियों के बीच से होकर गुजर रही हैं, जिससे दूषित पानी के मिश्रण की आशंका बनी रहती है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है और लोगों में स्वास्थ्य को लेकर भय का माहौल है। वार्डवासियों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि जल संकट को आपात स्थिति मानते हुए तत्काल विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने खराब पाइपलाइनों की मरम्मत, नए जल स्रोतों के विकास, बोरवेलों की क्षमता वृद्धि और नियमित व स्वच्छ जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्रवाई की अपील की है, यह कहते हुए कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला समाधान चाहिए।4
- Post by RAKESH THAKUR1
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