सिवनी जिले में कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ाने के उद्देश्य से जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की शासकीय भूमि पर प्राथमिकता के साथ बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। इसके साथ ही सड़क किनारे, शैक्षणिक संस्थानों, शासकीय कार्यालयों, ग्राम पंचायत परिसरों, सामुदायिक स्थलों और जल स्रोतों के पास योजनाबद्ध तरीके से पौधे लगाए जा रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत निजी भूमि पर भी वृक्षारोपण को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले के किसानों और भूमि स्वामियों को फलदार, छायादार और स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ उन्हें भविष्य में आर्थिक लाभ भी मिल सके। अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनभागीदारी बन गई है, जिसमें आम नागरिक, जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन, विद्यार्थी, महिला स्व-सहायता समूह और सरकारी कर्मचारी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। लोग केवल पौधरोपण ही नहीं कर रहे, बल्कि पौधों के संरक्षण, नियमित सिंचाई और देखभाल का संकल्प भी ले रहे हैं। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपनी माता के सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के लिए जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी जिम्मेदारी उठाने की भावुक अपील की है।
सिवनी जिले में कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ाने के उद्देश्य से जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की शासकीय भूमि पर प्राथमिकता के साथ बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। इसके साथ ही सड़क किनारे, शैक्षणिक संस्थानों, शासकीय कार्यालयों, ग्राम पंचायत परिसरों, सामुदायिक स्थलों और जल स्रोतों के पास योजनाबद्ध तरीके से पौधे लगाए जा रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत निजी भूमि पर भी वृक्षारोपण को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले के किसानों और भूमि स्वामियों को फलदार, छायादार और स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ उन्हें भविष्य में आर्थिक लाभ भी मिल सके। अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनभागीदारी बन गई है, जिसमें आम नागरिक, जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन, विद्यार्थी, महिला स्व-सहायता समूह और सरकारी कर्मचारी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। लोग केवल पौधरोपण ही नहीं कर रहे, बल्कि पौधों के संरक्षण, नियमित सिंचाई और देखभाल का संकल्प भी ले रहे हैं। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपनी माता के सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के लिए जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी जिम्मेदारी उठाने की भावुक अपील की है।
- सिवनी में बेरढाना नाला उफनाने के कारण एक घंटे तक आवागमन थम गया। इस घटना के बाद अब स्थानीय ग्रामीणों ने यहाँ पुल निर्माण कराने की मांग उठाई है।1
- सिवनी के बंडोल (कलारबाकी) में 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान के दौरान क्षेत्र के थाना प्रभारी ने लोगों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई। इस कार्यक्रम को लेकर नरेश उर्फ नीलू यादव सिवनी द्वारा जानकारी साझा की गई है।1
- छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ नगर में रविवार को जय भीम सामाजिक संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक सामुदायिक भवन में संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य बिछुआ नगर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति स्थापित करने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना था। इसके साथ ही बैठक के दौरान संगठन के विभिन्न पदों पर नियुक्तियां भी की गईं। बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहब की मूर्ति स्थापना से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ी को उनके विचारों से प्रेरणा मिलेगी। इसके साथ ही संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाने और जरूरतमंदों की मदद करने का संकल्प लिया। बैठक में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से जिला प्रमुख शिवम पहाड़े, बिछुआ ब्लॉक महामंत्री दिनेश कोंचे, ब्लॉक अध्यक्ष शंकर चिलाटे और जिला सह सचिव हर्ष सातनकर सहित संगठन के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।2
- छिंदवाड़ा के बिछुआ अंतर्गत खमारपानी सांदीपनि महाविद्यालय में 'नशे से दूरी हे जरूरी 2.0' नशा मुक्ति अभियान चलाया गया है। इस नशा मुक्ति अभियान का आयोजन पुलिस चौकी खमारपानी और थाना बिछुआ के सहयोग से सांदीपनि महाविद्यालय में किया गया। इस संबंध में चाँद से सुजीत श्रीवास ने जानकारी दी है।1
- मध्य प्रदेश के सिवनी में 'न्याय दो या मार दो' के नारे के साथ चल रहा 'चिता आंदोलन' अब बेहद उग्र रूप ले चुका है। अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों ने उफनती हुई नदी के बीचों-बीच जाकर सांकेतिक रूप से फांसी पर लटककर विरोध जताया है। इस बेहद आक्रामक प्रदर्शन के जरिए आंदोलनकारियों ने न्याय की अपनी मांग को बेहद कड़े शब्दों में सामने रखा है।1