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स्मार्ट मीटर बना जनता के लिए मुसीबत! चिश्ती नगर में फूटा गुस्सा, लोगों ने सरकार से की बड़ी मांग
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स्मार्ट मीटर बना जनता के लिए मुसीबत! चिश्ती नगर में फूटा गुस्सा, लोगों ने सरकार से की बड़ी मांग
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- Sachin Kumar1
- फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज ट्रॉमा सेंटर में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने का मामला सामने आया है। सोमवार दोपहर की भीषण गर्मी में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली बालू लेकर पहुंची, जिसमें दो नाबालिग बच्चे फावड़े से बालू उतारते हुए कैमरे में कैद हो गए। वीडियो सामने आने के बाद बालश्रम को लेकर प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।1
- Post by देवेंद्र सिंह पत्रकार1
- “ज़रा सोचिए… आपका बिजली रिचार्ज खत्म हो जाए और फिर भी घर की लाइट, पंखा और बच्चों की पढ़ाई बिना रुके चलती रहे—अब उत्तर प्रदेश में यही हकीकत बनने जा रही है! अपनी राय जरूर बताएं और जुड़े रहें MTF NEWS के साथ!”1
- Post by Gyadeen Verma1
- चंद्रपुर में सफाई कर्मियों का विरोध प्रदर्शन, वेतन बकाया पर फूटा आक्रोश चंद्रपुर, 20 अप्रैल 2026 (सोमवार) — घंटागाड़ी सफाई कर्मियों तथा डंपिंग यार्ड में घन कचरा वर्गीकरण करने वाले श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर “संत गाडगेबाबा असंघटित कामगार संघटना” के अध्यक्ष कु. रतनभाऊ गायकवाड़ के नेतृत्व में चंद्रपुर शहर महानगर पालिका के सामने एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महामानवों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में मौजूद कामगारों ने अपनी समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। संघटना के अनुसार, घंटागाड़ी सफाई कर्मियों और कचरा वर्गीकरण करने वाले कामगारों का वेतन पिछले दो महीनों से लंबित है। इस संबंध में प्रशासन को कई बार ज्ञापन देने के बावजूद अब तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया, जिससे कामगारों में भारी नाराजगी है। इसी के विरोध में यह एक दिवसीय आंदोलन आयोजित किया गया। इस मौके पर संघटना के अध्यक्ष कु. रतनभाऊ गायकवाड़ ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी 10 दिनों के भीतर कामगारों का बकाया वेतन जारी नहीं किया गया, तो संगठन और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। इस विरोध प्रदर्शन में “संत गाडगेबाबा असंघटित कामगार संघटना” के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कामगार उपस्थित रहे। चंद्रपुर से प्रणाल चिताडे की रिपोर्ट1
- आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती के दौरान परशुराम चौक पर झंडा फहराने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक दर्दनाक मौत में बदल गया है। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर कुछ लोगों के दबाव के बाद पुलिस ने चार युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, जबकि शुरुआती जांच में खुद पुलिस ने माना था कि ना कोई उपद्रव हुआ, ना किसी की आस्था को ठेस पहुंची। 👉 इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई क्यों? यही बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। ⚠️ पुलिस की दबिश और मौत का आरोप मामले में एक आरोपी युवक के घर पर पुलिस ने दबिश दी। आरोप है कि पुलिस ने घरवालों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और धमकी दी कि यदि आरोपी सामने नहीं आया तो दूसरे बेटे को जेल भेज दिया जाएगा। इसी मानसिक दबाव के चलते युवक की मां सदमे में आ गईं, खाना-पीना छोड़ दिया और आखिरकार उनकी मौत हो गई। 👉 अब सवाल उठता है: क्या पुलिस की यह कार्रवाई जरूरत से ज्यादा सख्त थी? क्या एक मामूली विवाद को इतना बढ़ाना जरूरी था? क्या इस मौत की जिम्मेदारी तय होगी? ⚖️ नाबालिग और निर्दोष का दावा परिजनों का कहना है कि जिस युवक को आरोपी बनाया गया, वह नाबालिग और निर्दोष है। फिर भी पुलिस ने इतनी सख्ती क्यों दिखाई? 🟦 भीम आर्मी की एंट्री मामला जब भीम आर्मी के संज्ञान में आया तो जिलाध्यक्ष रिंकू सेठ मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को पोस्टमार्टम के लिए राजी किया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करवाई ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। ❗ अब आगे क्या? महिला की मौत के बाद पूरा मामला और गंभीर हो गया है। अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जो तय करेगी कि: मौत का असली कारण क्या है और क्या पुलिस की भूमिका पर कार्रवाई होगी? 🔥 बड़ा सवाल क्या कानून के नाम पर की गई सख्ती एक बेगुनाह परिवार की जिंदगी छीन सकती है? और अगर हां, तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा? यह घटना पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि न्याय होता है या सिर्फ फाइलों में मामला दबकर रह जाता है।1
- Post by Gyadeen Verma1