राष्ट्रीय दलों की राजनीति और आदिवासी समाज की अधूरी अपेक्षाएं:बिरसा मुंडा जल, जंगल, जमीन और अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के लिए सदियों से संघर्षरत आदिवासी समाज आज भी खुद को देश की मुख्यधारा की राजनीति में हाशिए पर पाता है। भारत की आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी, हमारे समाज की बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। चाहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हो या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस—दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने आदिवासियों का इस्तेमाल केवल एक सुरक्षित 'वोट बैंक' के रूप में किया है। दोनों दलों की नीतियों और उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण आदिवासी समाज की वास्तविक अपेक्षाएं आज भी अधूरी हैं। खरसावां विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे झारखंड और देश के आदिवासी बहुल इलाकों के जमीनी अनुभवों के आधार पर, मैं यह कहने के लिए विवश हूँ कि राष्ट्रीय दलों का एजेंडा कभी भी आदिवासियों का समग्र कल्याण नहीं रहा। कांग्रेस की नीतियां: कानून बने, लेकिन क्रियान्वयन में छलावा कांग्रेस पार्टी अक्सर यह दावा करती है कि उसने आदिवासियों को अधिकार देने के लिए पेसा कानून (PESA Act) और वन अधिकार अधिनियम (FRA) जैसे ऐतिहासिक कानून बनाए। कागजी तौर पर यह बातें सुनने में अच्छी लगती हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने इन कानूनों को धरातल पर कड़ाई से लागू करने के लिए कभी गंभीर प्रयास नहीं किए। ग्राम सभाओं को जो स्वायत्तता और शक्ति मिलनी चाहिए थी, उसे प्रशासनिक अफसरशाही की भेंट चढ़ा दिया गया। कांग्रेस की नीतियां हमेशा से 'कल्याणकारी योजनाओं' के भ्रम जाल में आदिवासियों को उलझाए रखने की रहीं, ताकि समाज कभी आत्मनिर्भर न बन सके और हमेशा उनके राजनीतिक रहम-ओ-करम पर निर्भर रहे। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के बजाय केवल लोकलुभावन वादों से आदिवासियों को छला गया। भाजपा की राजनीति: कॉर्पोरेट हित और पहचान का संकट दूसरी ओर, भाजपा की राजनीति आदिवासियों के अस्तित्व और उनकी जमीन के लिए और भी बड़ा संकट बनकर उभरी है। विकास के बड़े-बड़े दावों और 'डबल इंजन' सरकारों के दौर में हमने देखा कि किस तरह आदिवासी क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों को बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हवाले करने की नीतियां बनाई गईं। विस्थापन आज हमारे समाज की सबसे दुखद त्रासदी बन चुका है। खनन और उद्योगों के नाम पर आदिवासियों को उनकी पैतृक जमीन से बेदखल कर दिया जाता है, लेकिन उनके पुनर्वास और रोजगार के लिए कोई ठोस नीति नहीं अपनाई जाती। इसके अलावा, भाजपा आदिवासियों की मूल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी दरकिनार करने का प्रयास करती रही है। हमारे समाज की लंबे समय से चली आ रही 'सरना धर्म कोड' की मांग को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। आदिवासियों को जल-जंगल-जमीन के मालिक के बजाय केवल 'वनवासी' कहकर उनके मूल अधिकारों को संकुचित करने की वैचारिक कोशिश की जा रही है। झारखंड की जमीनी हकीकत झारखंड राज्य का निर्माण आदिवासियों की अस्मिता और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ था। झारखंड की इस ऐतिहासिक धरती ने आदिवासी अधिकारों के लिए शहादत दी है। लेकिन आज भी यहां के युवाओं के पास रोजगार नहीं है, सिंचाई की उचित व्यवस्था न होने से किसान बेहाल हैं, और हमारी माताओं-बहनों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। स्थानीय नीति और नियोजन नीति के नाम पर राष्ट्रीय दल हमेशा राजनीति करते रहे हैं, जिससे स्थानीय आदिवासी और मूलवासी युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। अब हालिया दौर में चल रही परिसीमन (Delimitation) की चर्चाओं ने आदिवासियों की राजनीतिक भागीदारी पर एक और बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। अगर सही तरीके से आदिवासियों के हितों की रक्षा नहीं की गई, तो हमारी राजनीतिक आवाज को और भी दबा दिया जाएगा। इस विषय पर भी दोनों ही राष्ट्रीय दलों का रुख आदिवासियों को आश्वस्त करने में पूरी तरह विफल रहा है। अब समय आ गया है आत्ममंथन और एकजुटता का कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दिल्ली से संचालित होने वाले दल हैं, जिनके फैसले स्थानीय जनभावनाओं के अनुरूप नहीं, बल्कि केंद्रीय राजनीतिक लाभ-हानि को देखकर लिए जाते हैं। आदिवासियों के चेहरों को आगे करके राजनीति चमकाने का दौर अब बंद होना चाहिए। हमें अब प्रतीकात्मक राजनीति नहीं, बल्कि नीतिगत अधिकार चाहिए। एक सामाजिक कार्यकर्ता और खरसावां की जनता के प्रतिनिधि के रूप में मेरा यह स्पष्ट मानना है कि जब तक आदिवासी समाज अपनी राजनीतिक और सामाजिक चेतना को और प्रखर नहीं करेगा, तब तक ये राष्ट्रीय दल हमारा शोषण करते रहेंगे। हमें जल, जंगल, जमीन, सरना कोड और अपनी आने वाली पीढ़ियों के सुनहरे भविष्य के लिए किसी के भरोसे बैठने के बजाय खुद अपनी राजनीतिक ताकत और एकजुटता को मजबूत करना होगा। अब वक्त आ गया है कि आदिवासी समाज इन दोनों राष्ट्रीय दलों की नीतियों को खारिज कर अपने हक और अधिकार की लड़ाई खुद लड़े। बिरसा मुंडा सामाजिक कार्यकर्ता सह पूर्व प्रत्याशी खरसावां विधानसभा झारखंड
राष्ट्रीय दलों की राजनीति और आदिवासी समाज की अधूरी अपेक्षाएं:बिरसा मुंडा जल, जंगल, जमीन और अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के लिए सदियों से संघर्षरत आदिवासी समाज आज भी खुद को देश की मुख्यधारा की राजनीति में हाशिए पर पाता है। भारत की आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी, हमारे समाज की बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। चाहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हो या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस—दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने आदिवासियों का इस्तेमाल केवल एक सुरक्षित 'वोट बैंक' के रूप में किया है। दोनों दलों की नीतियों और उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण आदिवासी समाज की वास्तविक अपेक्षाएं आज भी अधूरी हैं। खरसावां विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे झारखंड और देश के आदिवासी बहुल इलाकों के जमीनी अनुभवों के आधार पर, मैं यह कहने के लिए विवश हूँ कि राष्ट्रीय दलों का एजेंडा कभी भी आदिवासियों का समग्र कल्याण नहीं रहा। कांग्रेस की नीतियां: कानून बने, लेकिन क्रियान्वयन में छलावा कांग्रेस पार्टी अक्सर यह दावा करती है कि उसने आदिवासियों को अधिकार देने के लिए पेसा कानून (PESA Act) और वन अधिकार अधिनियम (FRA) जैसे ऐतिहासिक कानून बनाए। कागजी तौर पर यह बातें सुनने में अच्छी लगती हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने इन कानूनों को धरातल पर कड़ाई से लागू करने के लिए कभी गंभीर प्रयास नहीं किए। ग्राम सभाओं को जो स्वायत्तता और शक्ति मिलनी चाहिए थी, उसे प्रशासनिक अफसरशाही की भेंट चढ़ा दिया गया। कांग्रेस की नीतियां हमेशा से 'कल्याणकारी योजनाओं' के भ्रम जाल में आदिवासियों को उलझाए रखने की रहीं, ताकि समाज कभी आत्मनिर्भर न बन सके और हमेशा उनके राजनीतिक रहम-ओ-करम पर निर्भर रहे। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के बजाय केवल लोकलुभावन वादों से आदिवासियों को छला गया। भाजपा की राजनीति: कॉर्पोरेट हित और पहचान का संकट दूसरी ओर, भाजपा की राजनीति आदिवासियों के अस्तित्व और उनकी जमीन के लिए और भी बड़ा संकट बनकर उभरी है। विकास के बड़े-बड़े दावों और 'डबल इंजन' सरकारों के दौर में हमने देखा कि किस तरह आदिवासी क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों को बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हवाले करने की नीतियां बनाई गईं। विस्थापन आज हमारे समाज की सबसे दुखद त्रासदी बन चुका है। खनन और उद्योगों के नाम पर आदिवासियों को उनकी पैतृक जमीन से बेदखल कर दिया जाता है, लेकिन उनके पुनर्वास और रोजगार के लिए कोई ठोस नीति नहीं अपनाई जाती। इसके अलावा, भाजपा आदिवासियों की मूल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी दरकिनार करने का प्रयास करती रही है। हमारे समाज की लंबे समय से चली आ रही 'सरना धर्म कोड' की मांग को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। आदिवासियों को जल-जंगल-जमीन के मालिक के बजाय केवल 'वनवासी' कहकर उनके मूल अधिकारों को संकुचित करने की वैचारिक कोशिश की जा रही है। झारखंड की जमीनी हकीकत झारखंड राज्य का निर्माण आदिवासियों की अस्मिता और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ था। झारखंड की इस ऐतिहासिक धरती ने आदिवासी अधिकारों के लिए शहादत दी है। लेकिन आज भी यहां के युवाओं के पास रोजगार नहीं है, सिंचाई की उचित व्यवस्था न होने से किसान बेहाल हैं, और हमारी माताओं-बहनों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। स्थानीय नीति और नियोजन नीति के नाम पर राष्ट्रीय दल हमेशा राजनीति करते रहे हैं, जिससे स्थानीय आदिवासी और मूलवासी युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। अब हालिया दौर में चल रही परिसीमन (Delimitation) की चर्चाओं ने आदिवासियों की राजनीतिक भागीदारी पर एक और बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। अगर सही तरीके से आदिवासियों के हितों की रक्षा नहीं की गई, तो हमारी राजनीतिक आवाज को और भी दबा दिया जाएगा। इस विषय पर भी दोनों ही राष्ट्रीय दलों का रुख आदिवासियों को आश्वस्त करने में पूरी तरह विफल रहा है। अब समय आ गया है आत्ममंथन और एकजुटता का कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दिल्ली से संचालित होने वाले दल हैं, जिनके फैसले स्थानीय जनभावनाओं के अनुरूप नहीं, बल्कि केंद्रीय राजनीतिक लाभ-हानि को देखकर लिए जाते हैं। आदिवासियों के चेहरों को आगे करके राजनीति चमकाने का दौर अब बंद होना चाहिए। हमें अब प्रतीकात्मक राजनीति नहीं, बल्कि नीतिगत अधिकार चाहिए। एक सामाजिक कार्यकर्ता और खरसावां की जनता के प्रतिनिधि के रूप में मेरा यह स्पष्ट मानना है कि जब तक आदिवासी समाज अपनी राजनीतिक और सामाजिक चेतना को और प्रखर नहीं करेगा, तब तक ये राष्ट्रीय दल हमारा शोषण करते रहेंगे। हमें जल, जंगल, जमीन, सरना कोड और अपनी आने वाली पीढ़ियों के सुनहरे भविष्य के लिए किसी के भरोसे बैठने के बजाय खुद अपनी राजनीतिक ताकत और एकजुटता को मजबूत करना होगा। अब वक्त आ गया है कि आदिवासी समाज इन दोनों राष्ट्रीय दलों की नीतियों को खारिज कर अपने हक और अधिकार की लड़ाई खुद लड़े। बिरसा मुंडा सामाजिक कार्यकर्ता सह पूर्व प्रत्याशी खरसावां विधानसभा झारखंड
- #seraikellakharswan : चांडिल डैम विस्थापितों की बैठक के बाद सदस्यता अभियान शुरू.... #viraL #seraikellakharswan : चांडिल डैम विस्थापितों की बैठक के बाद सदस्यता अभियान शुरू.... सराईकेला खरसवाँ जिला अंतर्गत चांडिल थाना क्षेत्र की चांडिल डैम रोड पर स्थित नया आईवी भवन में "चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच " की बैठक में प्रभावित परिवारों को संगठन से जोड़ने के लिए सदस्यता अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया। बैठक में ग्रामीण संवाद यात्रा की समीक्षा हुई। मंच ने पुनर्वास, मुआवजा एवं मूलभूत सुविधाओं से जुड़े लंबित मामलों के समयबद्ध समाधान की मांग की। #chandilnews #chandildam #jiladarpan1
- 🚨बासा टोंटो में अज्ञात मालवाहक वाहन की चपेट में आने से 17 वर्षीय युवक की मौत चाईबासा से सटे बासा टोंटो गांव में सोमवार की रात अज्ञात मालवाहक वाहन की चपेट में आने से 17 वर्षीय बंटी तांती की मौत हो गई। घटना में मृतक का शरीर बुरी तरह कुचल गया। घटना की सूचना मिलने पर मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर सदर अस्पताल पहुंचाया। घटना की जानकारी मिलने पर मृतक के परिजन सदर अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने मामला दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। पुलिस अज्ञात मालवाहक वाहन की तलाश में जुटी है। #Chaibasa #WestSinghbhum #RoadAccident #MufassilPolice #JharkhandNews #चाईबासा #पश्चिमीसिंहभूम #सड़कहादसा #मुफस्सिलथाना #स्थानीयसमाचार1
- 59वें अभियंता दिवस पर समाहरणालय में कार्यक्रम, उपायुक्त ने गुणवत्ता और नवाचार पर दिया जोर चाईबासा। 59वें अभियंता दिवस के अवसर पर मंगलवार को जिला समाहरणालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त मनीष कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सहायक समाहर्ता ईरा जोरवार, अपर उपायुक्त क्रिस्टो कुमार बेसरा, प्रशिक्षु आईपीएस सहित जिले के विभिन्न विभागों के अभियंता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत महान अभियंता एवं भारत रत्न डॉ. एम. विश्वेश्वरैया के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उपस्थित पदाधिकारियों एवं अभियंताओं ने देश के निर्माण और विकास में उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया। इस दौरान विभिन्न विभागों के अभियंताओं ने अपने कार्यक्षेत्र के अनुभव साझा किए। उन्होंने जिले में विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों तथा उनके समाधान को लेकर अपने विचार रखे।1
- आपका बैंक अकाउंट अब और जल्दी खाली होगा थैंक्स तो मोदी सरकार!1
- *खूंटी के तोरपा में 10 फीट गहरे कुएं में गिरा हाथी का शावक, 4 घंटे रेस्क्यू के बाद निकला बाहर, सामने डटा रहा 5 हाथियों का झुंड*1
- गोला के सोसोकला में हाथियों का आतंक, दरवाजे की कुंडी तोड़कर घर में घुसने का किया प्रयास1
- इंजीनियर दिवस 2026 ! डॉ. विश्वेश्वरैया की जयंती पर 59वां Engineers Day समारोह ! Ranchi इंजीनियर दिवस 2026 ! डॉ. विश्वेश्वरैया की जयंती पर 59वां Engineers Day समारोह ! Ranchi इंजीनियर दिवस 2026 LIVE | Engineers Day Celebration 2026 | Ranchi भारत रत्न डॉ. मोक्षगुण्डम् विश्वेश्वरैया के जन्मदिवस के अवसर पर राँची में 59वाँ अभियंता दिवस समारोह 2026 आयोजित किया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर डॉ. एम. विश्वेश्वरैया के देश के निर्माण, इंजीनियरिंग और विकास के क्षेत्र में योगदान को याद किया जा रहा है। 📍 समारोह स्थल: डिप्लोमा अभियंता संघ भवन, अम्बेदकर नगर, नामकुम, राँची स्वर्णरेखा नदी पुल के पास आज का यह आयोजन Engineers Day, Engineering Community और देश के विकास में अभियंताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को समर्पित है। Ranchi Club TV के साथ देखिए कार्यक्रम की LIVE Coverage और जुड़िए इस विशेष आयोजन से। सच्ची खबर, सबसे पहले | Ranchi Club TV ⚠️ Disclaimer: This live stream is for informational and public awareness purposes only. The information presented during the live stream is intended for general awareness and does not constitute professional, legal, financial, medical, or other specialized advice. Viewers are advised to verify information from official sources wherever necessary. Engineers Day 2026, Engineers Day 2026 Live, Engineer Day 2026, Engineers Day Live Ranchi, Engineers Day Ranchi, Engineers Day Jharkhand, Visvesvaraya Jayanti 2026, Dr M Visvesvaraya, Mokshagundam Visvesvaraya, Visvesvaraya Birthday, विश्वेश्वरैया जयंती, अभियंता दिवस 2026, अभियंता दिवस समारोह, 59वां अभियंता दिवस, 59th Engineers Day, Ranchi News, Ranchi Live, Ranchi Live News, Jharkhand News, Jharkhand Live News, Ranchi Club TV, RanchiClubTV, Engineers Day Celebration, Engineering Day, Engineering Community, Diploma Engineer Association Ranchi, Namkum Ranchi, Ambedkar Nagar Ranchi, Jharkhand Engineers, Engineer Diwas, Engineer Diwas 2026 #EngineersDay2026 #EngineersDay #EngineerDay #विश्वेश्वरैया #अभियंतादिवस #Ranchi #RanchiNews #JharkhandNews #RanchiClubTV #EngineersDayLive #EngineersDayCelebration #MokshagundamVisvesvaraya1
- 🚨चाईबासा-टाटा मुख्य मार्ग पर तिरिलबूटा के पास मालवाहक वाहन की चपेट में आने से ईचा के युवक की मौत चाईबासा-टाटा मुख्य मार्ग पर मालवाहक वाहन की चपेट में आने से ईचा गांव निवासी 27 वर्षीय की मौत हो गई। घटना दोपहर करीब 2 बजे हुई। स्थानीय ग्रामीणों ने घायल आकाश को उठाकर सदर अस्पताल पहुंचाया। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि उसके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में अंदरूनी चोटें आई थीं। चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर आकाश के परिजन सदर अस्पताल पहुंचे और उसे जमशेदपुर ले जाने लगे। रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव को सदर अस्पताल वापस लाए, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस #Chaibasa #WestSinghbhum #RoadAccident #MufassilPolice #JharkhandNews #चाईबासा #सड़कहादसा #पश्चिमीसिंहभूम #मुफस्सिलथाना #स्थानीयसमाचार1