सिरमौर तहसील में नामांतरण प्रक्रिया पर सवाल: साइबर रजिस्ट्री निरस्त कर ऑफलाइन आवेदन की मांग से जनता परेशान सिरमौर। तहसील क्षेत्र में नामांतरण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि साइबर रजिस्ट्री के माध्यम से दर्ज नामांतरण प्रकरणों को निरस्त कर आवेदकों से ऑफलाइन आवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा जा रहा है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में हितग्राहियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है और उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई मामलों में साइबर रजिस्ट्री के आधार पर किए गए नामांतरण को बिना स्पष्ट कारण बताए खारिज कर दिया जाता है। इसके बाद संबंधित आवेदकों से ऑफलाइन आवेदन प्रस्तुत करने की मांग की जाती है। नागरिकों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से आर्थिक लेन-देन का दबाव बनाया जाता है। यदि आवेदक किसी भी प्रकार की अनुचित मांग को पूरा नहीं करते, तो उनका आवेदन पुनः निरस्त कर दिया जाता है। इस स्थिति से आमजन में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि शासन द्वारा पारदर्शिता और डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साइबर रजिस्ट्री व्यवस्था लागू की गई है, ताकि लोगों को सरल, त्वरित और पारदर्शी सेवा मिल सके। किंतु यदि ऑनलाइन प्रक्रिया को दरकिनार कर ऑफलाइन आवेदन की अनिवार्यता बनाई जाती है, तो यह शासन की मंशा के विपरीत प्रतीत होता है। कुछ नागरिक जब अपनी समस्याओं के निराकरण हेतु तहसील कार्यालय पहुंचे और इस संबंध में निवेदन प्रस्तुत करना चाहा, तो उन्हें कथित रूप से कार्यालय कक्ष से बाहर कर दिए जाने की बात भी सामने आई है। इससे आमजन में असंतोष और अधिक बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि या दस्तावेज संबंधी कमी है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी लिखित रूप में दी जानी चाहिए, न कि आवेदनों को बार-बार निरस्त कर आवेदकों को भटकाया जाए। सिरमौर तहसील की जनता ने मांग की है कि नामांतरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, साइबर रजिस्ट्री के मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। जनता का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते इस विषय पर संज्ञान नहीं लेता, तो आमजन का विश्वास राजस्व व्यवस्था से उठ सकता है। नागरिकों ने उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच और व्यवस्था सुधार की मांग की है, ताकि हितग्राहियों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल सके।
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लोगों को सरल, त्वरित और पारदर्शी सेवा मिल सके। किंतु यदि ऑनलाइन प्रक्रिया को दरकिनार कर ऑफलाइन आवेदन की अनिवार्यता बनाई जाती है, तो यह शासन की मंशा के विपरीत प्रतीत होता है। कुछ नागरिक जब अपनी समस्याओं के निराकरण हेतु तहसील कार्यालय पहुंचे और इस संबंध में निवेदन प्रस्तुत करना चाहा, तो उन्हें कथित रूप से कार्यालय कक्ष से बाहर कर दिए जाने की बात भी सामने आई है। इससे आमजन में असंतोष और अधिक बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि या दस्तावेज संबंधी कमी है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी लिखित रूप में दी जानी चाहिए, न कि आवेदनों को बार-बार निरस्त कर आवेदकों को भटकाया जाए। सिरमौर तहसील की जनता ने मांग की है कि नामांतरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, साइबर रजिस्ट्री के मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। जनता का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते इस विषय पर संज्ञान नहीं लेता, तो आमजन का विश्वास राजस्व व्यवस्था से उठ सकता है। नागरिकों ने उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच और व्यवस्था सुधार की मांग की है, ताकि हितग्राहियों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल सके।
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