टीकमगढ़ के अस्पताल चौराहा पर आदिवासी संगठनों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने भाजपा गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले दहन का प्रयास किया। यह विरोध भाजपा गृहमंत्री द्वारा कथित तौर पर 'वनवासी' शब्द के प्रयोग को लेकर था, जिसे आदिवासी समुदाय अपनी पहचान के लिए अपमानजनक मानता है। पुलिस जवानों ने तत्काल हस्तक्षेप कर पुतले को छीन लिया और उन्हें दहन करने से रोक दिया। इस प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष मुन्ना आदिवासी ने स्पष्ट किया कि वे 'वनवासी' नहीं, बल्कि 'आदिवासी' हैं और स्वयं को इस देश का मूल निवासी बताते हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि 'आदिवासी' केवल एक नाम नहीं, बल्कि उनका इतिहास, संस्कृति, धरोहर और पहचान है। मुन्ना आदिवासी के अनुसार, 'वनवासी' शब्द का इस्तेमाल कर उनकी पहचान को खत्म करने की कोशिश की जा रही है, ठीक वैसे ही जैसे वनों को समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस 'वनवासी' कहकर आदिवासियों को सीमित करना चाहते हैं और उनके संवैधानिक इतिहास, संस्कृति और अस्तित्व को नकारना चाहते हैं। इस विरोध प्रदर्शन में जिला सचिव मालती देवी आदिवासी, श्रीराम आदिवासी, जिला उपाध्यक्ष रूप लाल गौड़, ब्लॉक अध्यक्ष बल्देवगढ़ राजेंद्र आदिवासी, और ब्लॉक अध्यक्ष खरगापुर जैसे कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी और आदिवासी संगठन के सदस्य शामिल थे। सभी उपस्थित कांग्रेस पदाधिकारियों और आदिवासी संगठनों ने एकजुट होकर दोहराया कि वे 'वनवासी' नहीं, बल्कि इस देश के मूल निवासी हैं, जिनकी संस्कृति, इतिहास और संवैधानिक अस्तित्व है, जिसे 'वनवासी' जैसे शब्द से सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
टीकमगढ़ के अस्पताल चौराहा पर आदिवासी संगठनों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने भाजपा गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले दहन का प्रयास किया। यह विरोध भाजपा गृहमंत्री द्वारा कथित तौर पर 'वनवासी' शब्द के प्रयोग को लेकर था, जिसे आदिवासी समुदाय अपनी पहचान के लिए अपमानजनक मानता है। पुलिस जवानों ने तत्काल हस्तक्षेप कर पुतले को छीन लिया और उन्हें दहन करने से रोक दिया। इस प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष मुन्ना आदिवासी ने स्पष्ट किया कि वे 'वनवासी' नहीं, बल्कि 'आदिवासी' हैं और स्वयं को इस देश का मूल निवासी बताते हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि 'आदिवासी' केवल एक नाम नहीं, बल्कि उनका इतिहास, संस्कृति, धरोहर और पहचान है। मुन्ना आदिवासी के अनुसार, 'वनवासी' शब्द का इस्तेमाल कर उनकी पहचान को
खत्म करने की कोशिश की जा रही है, ठीक वैसे ही जैसे वनों को समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस 'वनवासी' कहकर आदिवासियों को सीमित करना चाहते हैं और उनके संवैधानिक इतिहास, संस्कृति और अस्तित्व को नकारना चाहते हैं। इस विरोध प्रदर्शन में जिला सचिव मालती देवी आदिवासी, श्रीराम आदिवासी, जिला उपाध्यक्ष रूप लाल गौड़, ब्लॉक अध्यक्ष बल्देवगढ़ राजेंद्र आदिवासी, और ब्लॉक अध्यक्ष खरगापुर जैसे कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी और आदिवासी संगठन के सदस्य शामिल थे। सभी उपस्थित कांग्रेस पदाधिकारियों और आदिवासी संगठनों ने एकजुट होकर दोहराया कि वे 'वनवासी' नहीं, बल्कि इस देश के मूल निवासी हैं, जिनकी संस्कृति, इतिहास और संवैधानिक अस्तित्व है, जिसे 'वनवासी' जैसे शब्द से सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
- मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत 28 मई 2026 को टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन से टीकमगढ़ जिले के कुल 196 तीर्थयात्री द्वारका-सोमनाथ तीर्थदर्शन यात्रा पर रवाना हुए। रेलवे स्टेशन पर इन तीर्थयात्रियों के दस्तावेजों का विधिवत परीक्षण किया गया और उन्हें टिकिट वितरित किए गए। यात्रियों का फूल माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया, जिससे उनके बीच अत्यधिक उत्साह का वातावरण देखने को मिला। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने सभी तीर्थयात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया। इस विशेष यात्रा के लिए, यात्रियों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने हेतु नायब तहसीलदार ओ.पी. गुप्ता को विशेष पर्यवेक्षक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है, और उनके साथ अन्य अनुरक्षकों को भी भेजा गया है। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत चयनित इन वरिष्ठजनों को उनके परिवारजन टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन तक छोड़ने आए थे। द्वारका जा रहे तीर्थयात्रियों ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बुजुर्गों के लिए शुरू की गई इस मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को एक अत्यंत अच्छी और सराहनीय पहल बताया। सभी तीर्थयात्रियों ने इस योजना के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया।2
- टीकमगढ़ में यातायात पुलिस थाना के निर्माण के कारण एक कॉलोनी के अंदर जाने का रास्ता बंद हो गया है। इस समस्या को लेकर मुहल्ले के लोगों ने विधायक और कलेक्टर से शिकायत की है।1
- टीकमगढ़ में 'बधाई बजाने' को लेकर किन्नरों के दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट की स्थिति बन गई, जिसमें दीपा सहित कई किन्नर घायल हो गए। यह घटना शहर के चकरा कालारी के पास बताई जा रही है। मारपीट के बाद, दोनों पक्ष कोतवाली पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।1
- ग्राम पंचायत पैतपुरा को एक आदर्श और स्वच्छ पंचायत बनाने के संकल्प के साथ, गांव के मुख्य मार्गों और वार्डों में भूमिगत नाली (Underground Drainage System) के निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। यह आधुनिक नाली प्रणाली स्वच्छता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य पैतपुरा को साफ और विकसित बनाना है। इस भूमिगत नाली के निर्माण से सड़कों पर होने वाले जलभराव और कीचड़ से मुक्ति मिलेगी, जिससे लोगों को सुविधा होगी। साथ ही, यह मच्छरों के प्रकोप और मौसमी बीमारियों पर भी लगाम कसने में सहायक होगा। खुली नालियों के अभाव में गांव की गलियां साफ, सुंदर और सुरक्षित दिखेंगी। यह विकास कार्य पैतपुरा के प्रत्येक नागरिक के सहयोग और पंचायत के अटूट संकल्प का प्रत्यक्ष परिणाम है। समस्त ग्रामवासियों से अपने गांव को स्वच्छ, सुंदर और आत्मनिर्भर बनाने में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया गया है, ताकि 'सशक्त पंचायत, स्वच्छ पैतपुरा, सुंदर पैतपुरा' का लक्ष्य साकार हो सके।1
- कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय की सख्ती के चलते पलेरा के घुटकड़ा गांव में अवैध रेत उत्खनन पर एक बड़ी कार्रवाई की गई है।1
- टीकमगढ़ में सड़क सुरक्षा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के समापन के बाद, कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने पत्रकारों से बातचीत की और समिति की चर्चाओं से संबंधित अपनी बातें मीडिया के समक्ष रखीं।1
- बलदेवगढ़ पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 315 बोर का एक कट्टा और जिंदा कारतूस बरामद किया, जो अवैध रूप से रखे गए थे।1
- छतरपुर जिले के रहस्यमयी भीमकुंड में 28 मई को शाम करीब 5 बजे एक युवक पानी में डूबा हुआ मिला, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और घटना की जांच शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा मृतक युवक की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है। बजना से मैनेजिंग डायरेक्टर भगवत कुशवाहा द्वारा दी गई रिपोर्ट में इस घटना को भीमकुंड में डूबकर हुई युवक की मौत बताया गया है। यह घटना एक बार फिर गंभीर सवाल उठा रही है कि क्या हर साल भीमकुंड में होने वाली मौतों का कारण कोई बड़ी अनहोनी या रहस्य तो नहीं है।1