श्रीकृष्ण भगवान ने कहा है कि आत्मा कभी मरती नहीं, ये बस एक शरीर से दूसरे शरीर में बदलती है। इसलिये आप अपने पूर्वजों को जब भी कुछ अर्पित करते हो तो वो उन्हें मिलता है। महाभारत की कथा के अनुसार मृत्यु के उपरांत जब दानवीर कर्ण को चित्रगुप्त ने मोक्ष देने से इंकार कर दिया था। तब कर्ण ने चित्रगुप्त से पूछा कि मैंने अपनी सारी सम्पदा सदैव दान पुण्य में ही समर्पित की है तो फिर मुझ पर यह कैसा ऋण शेष रह गया है, तब चित्रगुप्त ने बताया, राजन आपने देव ऋण और ऋषि ऋण तो चुकता कर दिया परंतु आप पर पितृ ऋण शेष है। आपने अपने काल में सम्पदा एवं सोने का दान किया है। अन्न का दान नहीं किया। जब तक आप यह ऋण नहीं उतारते आपको मोक्ष मिलना संभव नहीं। इसके उपरांत धर्मराज ने दानवीर कर्ण को व्यवस्था दी कि आप 16 दिन के लिए पृथ्वी पर जाकर अपने ज्ञात एवं अज्ञात पितरों को प्रसन्न करने के लिए विधिवत श्राद्ध-तर्पण तथा पिंड दान करके आइए तभी आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी। दानवीर कर्ण ने वैसा ही किया तभी उन्हें मोक्ष मिला। किंवदंती है कि तभी से श्राद्ध की प्रथा आरंभ हुई। पितृपक्ष में संत, गुरुजन और रोगी वृद्ध या जरूरतमंदों की जितनी सेवा हो सके करना चाहिए। साथ ही अपने परलोक सुधार के लिए भी दान-पुण्य करना चाहिए। त्योहारों पर दान करना इसलिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। श्राद्ध के दिनों में घर पर कोई भिक्षा मांगने आए तो उसे कभी खाली हाथ नहीं भेजना चाहिए। मान्यता है कि यदि पितृ प्रसन्न नहीं होते तो परिवार में बाधाएं आती हैं। अकाल मृत्यु का भय बना रहता है। पितृ पक्ष की पौराणिक कथा के अनुसार जोगे तथा भोगे दो भाई थे। दोनों अलग-अलग रहते थे। जोगे धनी था और भोगे निर्धन। दोनों में परस्पर बड़ा प्रेम था। जोगे की पत्नी को धन का अभिमान था, किंतु भोगे की पत्नी बड़ी सरल हृदय थी। पितृ पक्ष आने पर जोगे की पत्नी ने उससे पितरों का श्राद्ध करने के लिए कहा तो जोगे इसे व्यर्थ का कार्य समझकर टालने की चेष्टा करने लगा, किंतु उसकी पत्नी समझती थी कि यदि ऐसा नहीं करेंगे तो लोग बातें बनाएंगे। फिर उसे अपने मायके वालों को दावत पर बुलाने और अपनी शान दिखाने का यह उचित अवसर लगा। अतः वह बोली- 'आप शायद मेरी परेशानी की वजह से ऐसा कह रहे हैं, किंतु इसमें मुझे कोई परेशानी नहीं होगी। मैं भोगे की पत्नी को बुला लूंगी। दोनों मिलकर सारा काम कर लेंगी।' फिर उसने जोगे को अपने पीहर न्यौता देने के लिए भेज दिया। दूसरे दिन उसके बुलाने पर भोगे की पत्नी सुबह-सवेरे आकर काम में जुट गई। उसने रसोई तैयार की। अनेक पकवान बनाए फिर सभी काम निपटाकर अपने घर आ गई। आखिर उसे भी तो पितरों का श्राद्ध-तर्पण करना था। इस अवसर पर न जोगे की पत्नी ने उसे रोका, न वह रुकी। शीघ्र ही दोपहर हो गई। पितर भूमि पर उतरे। जोगे-भोगे के पितर पहले जोगे के यहां गए तो क्या देखते हैं कि उसके ससुराल वाले वहां भोजन पर जुटे हुए हैं। निराश होकर वे भोगे के यहां गए। वहां क्या था? मात्र पितरों के नाम पर 'अगियारी' दे दी गई थी। पितरों ने उसकी राख चाटी और भूखे ही नदी के तट पर जा पहुंचे। थोड़ी देर में सारे पितर इकट्ठे हो गए और अपने-अपने यहां के श्राद्धों की बढ़ाई करने लगे। जोगे-भोगे के पितरों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। फिर वे सोचने लगे- अगर भोगे समर्थ होता तो शायद उन्हें भूखा न रहना पड़ता, मगर भोगे के घर में तो दो जून की रोटी भी खाने को नहीं थी। यही सब सोचकर उन्हें भोगे पर दया आ गई। अचानक वे नाच-नाचकर गाने लगे- 'भोगे के घर धन हो जाए। भोगे के घर धन हो जाए।' सांझ होने को हुई। भोगे के बच्चों को कुछ भी खाने को नहीं मिला था। उन्होंने मां से कहा- भूख लगी है। तब उन्हें टालने की गरज से भोगे की पत्नी ने कहा- 'जाओ! आंगन में हौदी औंधी रखी है, उसे जाकर खोल लो और जो कुछ मिले, बांटकर खा लेना।' बच्चे वहां पहुंचे, तो क्या देखते हैं कि हौदी मोहरों से भरी पड़ी है। वे दौड़े-दौड़े मां के पास पहुंचे और उसे सारी बातें बताईं। आंगन में आकर भोगे की पत्नी ने यह सब कुछ देखा तो वह भी हैरान रह गई। इस प्रकार भोगे भी धनी हो गया, मगर धन पाकर वह घमंडी नहीं हुआ। दूसरे साल का पितृ पक्ष आया। श्राद्ध के दिन भोगे की स्त्री ने छप्पन प्रकार के व्यंजन बनाएं। ब्राह्मणों को बुलाकर श्राद्ध किया। भोजन कराया, दक्षिणा दी। जेठ-जेठानी को सोने-चांदी के बर्तनों में भोजन कराया। इससे पितर बड़े प्रसन्न तथा तृप्त हुए।...jai shree krishna 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
श्रीकृष्ण भगवान ने कहा है कि आत्मा कभी मरती नहीं, ये बस एक शरीर से दूसरे शरीर में बदलती है। इसलिये आप अपने पूर्वजों को जब भी कुछ अर्पित करते हो तो वो उन्हें मिलता है। महाभारत की कथा के अनुसार मृत्यु के उपरांत जब दानवीर कर्ण को चित्रगुप्त ने मोक्ष देने से इंकार कर दिया था। तब कर्ण ने चित्रगुप्त से पूछा कि मैंने अपनी सारी सम्पदा सदैव दान पुण्य में ही समर्पित की है तो फिर मुझ पर यह कैसा ऋण शेष रह गया है, तब चित्रगुप्त ने बताया, राजन आपने देव ऋण और ऋषि ऋण तो चुकता कर दिया परंतु आप पर पितृ ऋण शेष है। आपने अपने काल में सम्पदा एवं सोने का दान किया है। अन्न का दान नहीं किया। जब तक आप यह ऋण नहीं उतारते आपको मोक्ष मिलना संभव नहीं। इसके उपरांत धर्मराज ने दानवीर कर्ण को व्यवस्था दी कि आप 16 दिन के लिए पृथ्वी पर जाकर अपने ज्ञात एवं अज्ञात पितरों को प्रसन्न करने के लिए विधिवत श्राद्ध-तर्पण तथा पिंड दान करके आइए तभी आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी। दानवीर कर्ण ने वैसा ही किया तभी उन्हें मोक्ष मिला। किंवदंती है कि तभी से श्राद्ध की प्रथा आरंभ हुई। पितृपक्ष में संत, गुरुजन और रोगी वृद्ध या जरूरतमंदों की जितनी सेवा हो सके करना चाहिए। साथ ही अपने परलोक सुधार के लिए भी दान-पुण्य करना चाहिए। त्योहारों पर दान करना इसलिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। श्राद्ध के दिनों में घर पर कोई भिक्षा मांगने आए तो उसे कभी खाली हाथ नहीं भेजना चाहिए। मान्यता है कि यदि पितृ प्रसन्न नहीं होते तो परिवार में बाधाएं आती हैं। अकाल मृत्यु का भय बना रहता है। पितृ पक्ष की पौराणिक कथा के अनुसार जोगे तथा भोगे दो भाई थे। दोनों अलग-अलग रहते थे। जोगे धनी था और भोगे निर्धन। दोनों में परस्पर बड़ा प्रेम था। जोगे की पत्नी को धन का अभिमान था, किंतु भोगे की पत्नी बड़ी सरल हृदय थी। पितृ पक्ष आने पर जोगे की पत्नी ने उससे पितरों का श्राद्ध करने के लिए कहा तो जोगे इसे व्यर्थ का कार्य समझकर टालने की चेष्टा करने लगा, किंतु उसकी पत्नी समझती थी कि यदि ऐसा नहीं करेंगे तो लोग बातें बनाएंगे। फिर उसे अपने मायके वालों को दावत पर बुलाने और अपनी शान दिखाने का यह उचित अवसर लगा। अतः वह बोली- 'आप शायद मेरी परेशानी की वजह से ऐसा कह रहे हैं, किंतु इसमें मुझे कोई परेशानी नहीं होगी। मैं भोगे की पत्नी को बुला लूंगी। दोनों मिलकर सारा काम कर लेंगी।' फिर उसने जोगे को अपने पीहर न्यौता देने के लिए भेज दिया। दूसरे दिन उसके बुलाने पर भोगे की पत्नी सुबह-सवेरे आकर काम में जुट गई। उसने रसोई तैयार की। अनेक पकवान बनाए फिर सभी काम निपटाकर अपने घर आ गई। आखिर उसे भी तो पितरों का श्राद्ध-तर्पण करना था। इस अवसर पर न जोगे की पत्नी ने उसे रोका, न वह रुकी। शीघ्र ही दोपहर हो गई। पितर भूमि पर उतरे। जोगे-भोगे के पितर पहले जोगे के यहां गए तो क्या देखते हैं कि उसके ससुराल वाले वहां भोजन पर जुटे हुए हैं। निराश होकर वे भोगे के यहां गए। वहां क्या था? मात्र पितरों के नाम पर 'अगियारी' दे दी गई थी। पितरों ने उसकी राख चाटी और भूखे ही नदी के तट पर जा पहुंचे। थोड़ी देर में सारे पितर इकट्ठे हो गए और अपने-अपने यहां के श्राद्धों की बढ़ाई करने लगे। जोगे-भोगे के पितरों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। फिर वे सोचने लगे- अगर भोगे समर्थ होता तो शायद उन्हें भूखा न रहना पड़ता, मगर भोगे के घर में तो दो जून की रोटी भी खाने को नहीं थी। यही सब सोचकर उन्हें भोगे पर दया आ गई। अचानक वे नाच-नाचकर गाने लगे- 'भोगे के घर धन हो जाए। भोगे के घर धन हो जाए।' सांझ होने को हुई। भोगे के बच्चों को कुछ भी खाने को नहीं मिला था। उन्होंने मां से कहा- भूख लगी है। तब उन्हें टालने की गरज से भोगे की पत्नी ने कहा- 'जाओ! आंगन में हौदी औंधी रखी है, उसे जाकर खोल लो और जो कुछ मिले, बांटकर खा लेना।' बच्चे वहां पहुंचे, तो क्या देखते हैं कि हौदी मोहरों से भरी पड़ी है। वे दौड़े-दौड़े मां के पास पहुंचे और उसे सारी बातें बताईं। आंगन में आकर भोगे की पत्नी ने यह सब कुछ देखा तो वह भी हैरान रह गई। इस प्रकार भोगे भी धनी हो गया, मगर धन पाकर वह घमंडी नहीं हुआ। दूसरे साल का पितृ पक्ष आया। श्राद्ध के दिन भोगे की स्त्री ने छप्पन प्रकार के व्यंजन बनाएं। ब्राह्मणों को बुलाकर श्राद्ध किया। भोजन कराया, दक्षिणा दी। जेठ-जेठानी को सोने-चांदी के बर्तनों में भोजन कराया। इससे पितर बड़े प्रसन्न तथा तृप्त हुए।...jai shree krishna 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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- चंबा स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में बीती रात मरीजों के मोबाइल फोन चोरी होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार अस्पताल में भर्ती मरीजों के करीब 8 से 10 मोबाइल फोन रात के समय चोरी हो गए। घटना का पता चलते ही मरीजों और उनके परिजनों में चिंता और नाराज़गी का माहौल बन गया। प्रभावित लोगों का कहना है कि वे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। मरीजों के परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए और चोरी की इस घटना की जल्द जांच कर दोषियों को पकड़ा जाए। लोगों को उम्मीद है कि अस्पताल प्रशासन और पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई करेंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और मरीज सुरक्षित माहौल में इलाज करवा सकें। बाइट स्थानीय निवासी। बाइट एम एस मेडिकल कॉलेज चंबा ।1
- आज चंबा में मुस्लिम गुज्जर कल्याण सभा की बैठक आयोजित की गई इस बैठक में सभा के सभी प्रतिनिधि व सदस्यों ने भाग लिया इस बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की डिजास्टर के अंतर्गत स्वीकृत हुए कार्यों को शुरू करवाने को लेकर भी चर्चा की गई सरकार द्वारा ग्रामीण स्रोतों में एपीएल परिवारों से ₹100 और बीपीएल परिवारों से प्रतिमा ₹25 यूजर्स चार्ज नहीं वसूला जाना चाहिए जिला चंबा में अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम का कार्यालय खोला जाना चाहिए ताकि की अल्पसंख्यक लोगों को सुविधा मिल सके और एक मुद्दा स्मार्ट मीटर का भी रखा है जिससे कि लोग बिल्कुल खफा है स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जाना चाहिए इससे उपभोक्ताओं को काफी नुकसान होगा और हिमाचल प्रदेश सरकार से मुस्लिम गुजर कल्याण सभा चंबा द्वारा एक यह भी आग्रह किया गया है की गुजर कल्याण बोर्ड की बैठक का जल्द से जल्द आयोजन किया जाए इन सभी मुद्दों को लेकर बैठक में चर्चा की गई1
- Under #JalJeevanMission, #JalSevaAankalan details are now available on the Meri Panchayat App. Check your village’s water service assessment and share your feedback. Together, we strengthen transparency and service improvement. 💧 #HarGharJal #jkplusmedia #JalJeevanMission #JammuAndKashmir #nonfollowersviewers #vedioviralreel #narashkumar1
- सुजानपुर उपमंडल सुजानपुर में भांग की फसल लहरा रही है और इस भांग का युवा वर्ग भरपूर आनंद उठा रहे हैं सुजानपुर में एक व्यक्ति खुले में सबके सामने भांग के पत्तों को हाथों में रगड़ता मलता हुआ कमरे में कैद हुआ है यहां हम आपको बता दें कि प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का अभियान चला है मुख्यमंत्री खुद युवा वर्ग से नशे से दूर रहने की अपील कर रहे हैं स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं रैलियां निकाली जा रहे हैं वही दूसरी और लहरा रही भांग प्रदेश में नशे को बढ़ावा दे रही है सुजानपुर शहर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि भांग उखाड़ो अभियान पूरे शहर में चलाया जाए और इस नशे की खेती का खात्मा किया जाए जो लोग यह कार्य कर रहे हैं उन पर सख्त कार्रवाई की जाए1
- टाइटल: ब्लॉक परियोजना अधिकारी श्री बी. डी. चौहान की अध्यक्षता में किलाड़ में एसएमसी जागरूकता शिविर एवं अध्ययन भ्रमण आयोजित फेसबुक पोस्ट (संक्षिप्त खबर): पांगी उपमंडल के मुख्यालय किलाड़ स्थित पब्लिक लाइब्रेरी हॉल में बीआरसीसी कार्यालय द्वारा स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों के लिए एक दिवसीय जागरूकता शिविर एवं अध्ययन भ्रमण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्लॉक परियोजना अधिकारी श्री बी. डी. चौहान ने की। कार्यक्रम में एसएमसी सदस्यों को उनकी भूमिका, जिम्मेदारियों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग के प्रतिनिधियों ने भी स्वच्छता, पोषण तथा युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम के अंत में एसएमसी सदस्यों ने पांगी घाटी के विभिन्न सरकारी कार्यालयों का अध्ययन भ्रमण कर विभागों की कार्यप्रणाली और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। #PangiValley #Killar #SMC #EducationAwareness #TheVoiceOfPangwal1