प्रतापगढ़ में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए चलाई जा रही सरकार की महत्वाकांक्षी अन्नपूर्णा रसोई योजना अब भ्रष्टाचार की भूख का शिकार होती दिख रही है। रसोइयों के संचालन में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जहाँ संचालकों ने सरकारी अनुदान हड़पने के लिए तकनीक का सहारा लेते हुए डेटा में हेरफेर किया। जाँच में पता चला है कि एक ही फोटो को बार-बार अपलोड कर लाभार्थियों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जा रही थी। सरकारी नियमों के तहत, इन रसोइयों में जरूरतमंदों को मात्र 8 रुपए में भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जबकि सरकार प्रत्येक थाली पर संचालकों को 22 रुपए का अनुदान देती है। प्रतापगढ़ आयुक्त के आदेश पर बिल जमा होने के बाद की गई जाँच में यह सामने आया कि पोर्टल पर भोजन करने वाले लोगों की अधिकांश तस्वीरें फर्जी थीं। संचालकों ने अपनी जेब भरने के लिए एक ही व्यक्ति की फोटो को कई बार अलग-अलग समय पर अपलोड किया, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में अधिक लाभार्थियों को दिखाकर ज्यादा से ज्यादा अनुदान प्राप्त किया जा सके। इस गंभीर अनियमितता पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है और सभी रसोइयों को बंद कर दिया गया है। प्रत्येक गलत एंट्री पर 2000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है, और फर्जीवाड़े में शामिल सभी 11 रसोइयों के संचालकों पर 50 हजार से लेकर 60 हजार रुपए तक का जुर्माना ठोका गया है। संचालकों को सख्त चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही या डिजिटल हेरफेर पाए जाने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस फर्जीवाड़े के सामने आने और नोटिस मिलने के बाद संचालकों ने स्वयं ही अन्नपूर्णा रसोइयों को बंद कर दिया, जिससे कम कीमत पर भोजन पर निर्भर जरूरतमंदों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन का दावा है कि नई प्रक्रिया के बाद रसोइयों को जल्द ही फिर से चालू किया जाएगा, क्योंकि पुरानी व्यवस्था को अनियमितताओं के कारण समाप्त कर दिया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी। व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जल्द ही नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि जरूरतमंदों को सुचारू रूप से भोजन मिल सके। अधिकारियों ने यह भी बताया कि यदि किसी रसोई को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया था और फिर भी उसे बंद कर दिया गया है, तो बिल का भुगतान रोक लिया जाएगा और अन्य कार्रवाई की जाएगी।
प्रतापगढ़ में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए चलाई जा रही सरकार की महत्वाकांक्षी अन्नपूर्णा रसोई योजना अब भ्रष्टाचार की भूख का शिकार होती दिख रही है। रसोइयों के संचालन में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जहाँ संचालकों ने सरकारी अनुदान हड़पने के लिए तकनीक का सहारा लेते हुए डेटा में हेरफेर किया। जाँच में पता चला है कि एक ही फोटो को बार-बार अपलोड कर लाभार्थियों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जा रही थी। सरकारी नियमों के तहत, इन रसोइयों में जरूरतमंदों को मात्र 8 रुपए में भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जबकि सरकार प्रत्येक थाली पर संचालकों को 22 रुपए का अनुदान देती है। प्रतापगढ़ आयुक्त के आदेश पर बिल जमा होने के बाद की गई जाँच में यह सामने आया कि पोर्टल पर भोजन करने वाले लोगों की अधिकांश तस्वीरें फर्जी थीं। संचालकों ने अपनी जेब भरने के लिए एक ही व्यक्ति की फोटो को कई बार अलग-अलग समय पर अपलोड किया, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में अधिक लाभार्थियों को दिखाकर ज्यादा से ज्यादा अनुदान प्राप्त किया जा सके। इस गंभीर अनियमितता पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है और सभी रसोइयों को बंद कर दिया गया है। प्रत्येक गलत एंट्री पर 2000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है, और फर्जीवाड़े में शामिल सभी 11 रसोइयों के संचालकों पर 50 हजार से लेकर 60 हजार रुपए तक का जुर्माना ठोका गया है। संचालकों को सख्त चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही या डिजिटल हेरफेर पाए जाने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस फर्जीवाड़े के सामने आने और नोटिस मिलने के बाद संचालकों ने स्वयं ही अन्नपूर्णा रसोइयों को बंद कर दिया, जिससे कम कीमत पर भोजन पर निर्भर जरूरतमंदों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन का दावा है कि नई प्रक्रिया के बाद रसोइयों को जल्द ही फिर से चालू किया जाएगा, क्योंकि पुरानी व्यवस्था को अनियमितताओं के कारण समाप्त कर दिया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी। व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जल्द ही नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि जरूरतमंदों को सुचारू रूप से भोजन मिल सके। अधिकारियों ने यह भी बताया कि यदि किसी रसोई को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया था और फिर भी उसे बंद कर दिया गया है, तो बिल का भुगतान रोक लिया जाएगा और अन्य कार्रवाई की जाएगी।
- मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की एक खास रिपोर्ट में लोगों से एक 'एकदम मस्त वीडियो' देखने का आग्रह किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, असल में बहू ही परिवार का अभिमान, स्वाभिमान और मालकिन होती है।1
- कांग्रेस ने खाद्य, डीजल और बिजली से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर एक जनहित रोष प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में एक बाइक रैली भी शामिल थी। प्रदर्शनकारियों ने मंदसौर में स्मार्ट मीटर, अत्यधिक बिजली बिलों और बहुचर्चित नीट घोटाले जैसे मामलों के विरोध में अपनी आवाज़ उठाई।1
- आज देवास जिले में बोनी का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही, जिले में अच्छी बारिश भी हुई है, जिससे किसानों के लिए स्थिति अनुकूल बनी है।1
- राष्ट्रीय अफीम किसान संघ ने अफीम किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर 23 जून को एक किसान जागरण रैली आयोजित करने की घोषणा की है। यह रैली 26 जून को चित्तौड़गढ़ में प्रस्तावित एक महापड़ाव की तैयारियों के तहत निकाली जा रही है, जिसमें डूंगला, बड़ीसादड़ी, कानोड़, भिंडर और वल्लभनगर सहित कई क्षेत्रों से हजारों किसानों के शामिल होने की संभावना है। संघ के अध्यक्ष दुर्गेश जोशी ने बताया कि रैली 23 जून को सुबह 10 बजे डूंगला से शुरू होकर बड़ीसादड़ी क्षेत्र के जरखाना मोड़ पहुंचेगी। वहाँ स्थानीय किसान इसका स्वागत करेंगे और उपखंड अधिकारी को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद रैली लूंणदा, अमरपुरा, मेनार और वल्लभनगर होते हुए आगे बढ़ेगी। हर पड़ाव पर क्षेत्रीय किसान रैली का स्वागत करेंगे और संबंधित उपखंड अधिकारियों को 8 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया जाएगा। रात्रि विश्राम इटली गांव में प्रस्तावित है। जोशी ने आगे बताया कि 24 जून को यह रैली मावली, भूपालसागर, कपासन और राशमी क्षेत्रों में पहुंचेगी, जहाँ किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। संघ का कहना है कि अफीम किसानों पर डोडा-चूरा नष्ट करने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जबकि उनका वर्षों पुराना बकाया डोडा-चूरा अभी तक लंबित है। किसानों की मुख्य मांग है कि बिना उचित मुआवजे के नष्टीकरण की कोई कार्रवाई न की जाए और उनकी अन्य लंबित मांगों का भी जल्द समाधान किया जाए। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों की 8 सूत्रीय मांगों को लेकर 26 जून को चित्तौड़गढ़ में महापड़ाव आयोजित किया जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसमें आमरण अनशन जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं, क्योंकि यह अफीम किसानों के अधिकारों की लड़ाई है और 26 जून के महापड़ाव की तैयारी तेजी से चल रही है।1
- बांसवाड़ा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उन व्यक्तियों को न्यायालय द्वारा दंडित किया गया है जो झूठे मुकदमे दर्ज करवाते हैं।1
- बिहार की सियासत में पारिवारिक संपत्तियों और वीआईपी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर महा-संग्राम छिड़ गया है। बिहार के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। सम्राट चौधरी ने लालू परिवार पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि वे जनता की हमदर्दी बटोरने के लिए 'सुरक्षा और घर-घर' का नाटक खेल रहे हैं। मीडिया के सामने आंकड़े रखते हुए, चौधरी ने दावा किया कि लालू परिवार को उनकी आवश्यकता के अनुसार पूरी सुरक्षा प्रदान की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सुरक्षा व्यवस्था में लालू यादव और राबड़ी देवी दोनों के लिए बुलेटप्रूफ गाड़ियां भी शामिल हैं।1
- मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर के शिशुकुंज स्कूल में सैकड़ों बच्चे अचानक बीमार पड़ गए हैं। इस घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावक बड़ी संख्या में स्कूल पहुँच गए।1
- मिड डे मील की गुणवत्ता में सुधार लाने की पहल के तहत, नीमच जिले के जावद क्षेत्र में रसोइया दीदियों का सम्मान किया गया। इस विशेष अवसर पर, एक ब्लॉक स्तरीय व्यंजन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें रसोइया दीदियों ने अपनी बेहतरीन पाक कला का प्रदर्शन किया। यह आयोजन मिड डे मील की गुणवत्ता बढ़ाने और रसोइया दीदियों के योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से किया गया था।1
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड स्थल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इसके अतिरिक्त, वह पीड़ितों और उनके परिवारों से मिलने के लिए केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर भी पहुंचे।1