नींवाडाडी स्कूल में बच्चों को मिड डे मील नहीं मिला। नींवाडाडी स्कूल में बच्चों को मिड डे मील नहीं मिला। ग्रामीणों में नाराजगी, प्रधान-प्रधानाध्यापक पर मनमानी का आरोप। बीसलपुर क्षेत्र के नींवाडाडी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को मिड डे मील न मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। बच्चों ने बताया कि उन्हें मंगलवार को खाना नहीं मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय के अध्यापक अक्सर मनमानी करते हैं और मिड डे मील की व्यवस्था में लापरवाही बरतते हैं। सूत्रों के अनुसार, ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक पर मिड डे मील के लिए आवंटित धन के दुरुपयोग का आरोप है। बच्चों को मिलने वाले दूध, फल और अन्य सामग्री में भी कथित तौर पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की है कि विद्यालय के अध्यापक अक्सर स्कूल से गायब रहते हैं और समय पर उपस्थित नहीं होते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उत्तर प्रदेश सरकार जहां शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं इस विद्यालय में शिक्षकों की अनुपस्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। प्रधानाध्यापक पर आरोप है कि वे अक्सर अपने डॉक्टरी के काम में व्यस्त रहते हैं। जानकारी के अनुसार, वे बीसलपुर में निजी तौर पर डॉक्टर का कार्य करते हैं, जिसके कारण वे विद्यालय को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी हर्षित शर्मा से फोन पर संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
नींवाडाडी स्कूल में बच्चों को मिड डे मील नहीं मिला। नींवाडाडी स्कूल में बच्चों को मिड डे मील नहीं मिला। ग्रामीणों में नाराजगी, प्रधान-प्रधानाध्यापक पर मनमानी का आरोप। बीसलपुर क्षेत्र के नींवाडाडी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को मिड डे मील न मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। बच्चों ने बताया कि उन्हें मंगलवार को खाना नहीं मिला। ग्रामीणों का
आरोप है कि विद्यालय के अध्यापक अक्सर मनमानी करते हैं और मिड डे मील की व्यवस्था में लापरवाही बरतते हैं। सूत्रों के अनुसार, ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक पर मिड डे मील के लिए आवंटित धन के दुरुपयोग का आरोप है। बच्चों को मिलने वाले दूध, फल और अन्य सामग्री में भी कथित तौर पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। ग्रामीणों ने यह
भी शिकायत की है कि विद्यालय के अध्यापक अक्सर स्कूल से गायब रहते हैं और समय पर उपस्थित नहीं होते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उत्तर प्रदेश सरकार जहां शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं इस विद्यालय में शिक्षकों की अनुपस्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। प्रधानाध्यापक पर आरोप है कि
वे अक्सर अपने डॉक्टरी के काम में व्यस्त रहते हैं। जानकारी के अनुसार, वे बीसलपुर में निजी तौर पर डॉक्टर का कार्य करते हैं, जिसके कारण वे विद्यालय को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी हर्षित शर्मा से फोन पर संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
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