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नरेंद्र मोदी ने गर्मी के मौसम में पानी बचाने का नया ऐलान किया है। इसी के साथ, ऐसा लगता है कि शिव का कहर भी आने लगा है और वापस जाने लगा है।
रवि मौर्या राज वंश
नरेंद्र मोदी ने गर्मी के मौसम में पानी बचाने का नया ऐलान किया है। इसी के साथ, ऐसा लगता है कि शिव का कहर भी आने लगा है और वापस जाने लगा है।
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- आजकल सोशल मीडिया पर चंद्रमा और मंगल के एक साथ मिलने को लेकर काफी चर्चा हो रही है। इस खगोलीय घटनाक्रम को भविष्य के लिए शुभ संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे लोगों के जीवन में कुछ अच्छा होने की उम्मीद जताई जा रही है।1
- जनपद बदायूँ में गौवंशों की लगातार हो रही मौतों ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान जिलाधिकारी की गौवंशों के प्रति निष्क्रियता का खामियाजा गौशालाओं में गौवंश भुगत रहे हैं। यह मामला बदायूँ के विकास खण्ड वजीरगंज के उरैना गांव स्थित गौशाला से जुड़ा है, जहाँ गौशालाओं के नाम पर गौवंशों की भयानक दुर्दशा सामने आई है। गौशालाओं में लापरवाही चरम पर पहुँच गई है, और इसके बावजूद गौशाला संचालकों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती। गौवंशों की इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।1
- बिल्सी के गांव बेहटाजवी निवासी रामचंद्र वैध, जो पहले मोच और सामान्य शारीरिक समस्याओं का इलाज करते थे, आजकल अपने बढ़ते और गंभीर दावों के कारण चर्चा और सवालों के घेरे में हैं। सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाने के बाद, उनकी पहचान एक साधारण वैध से बदलकर "गुरु जी" के रूप में हो गई है। जिस काजल शाक्य नामक लड़की ने उन्हें वायरल किया था, उसी ने अब उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे उनके दावों की सच्चाई पर "सच या छल" का सवाल उठ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पहले केवल हाथ-पैर और गर्दन की मोच देखने वाले वैध जी अब दुआ, आशीर्वाद और कथित चमत्कारों के जरिए कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों सहित गंभीर रोगों को ठीक करने का दावा कर रहे हैं। इन दावों का कोई वैज्ञानिक या चिकित्सकीय प्रमाण सामने नहीं आया है। साथ ही, पहले निःशुल्क सेवा का दावा करने वाले वैध जी के यहां अब दान पात्र रखा जाने लगा है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सेवा है या श्रद्धा और मजबूरी का आर्थिक लाभ उठाने का माध्यम। क्षेत्र के कई जागरूक लोगों का मानना है कि बीमारी से परेशान लोग उम्मीद में ऐसे बड़े-बड़े दावों का शिकार बन सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी स्पष्ट किया है कि कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार आधुनिक चिकित्सा पद्धति से ही संभव है, और ऐसे मामलों में चमत्कारिक इलाज के दावों पर भरोसा करना मरीज की जान के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यह सवाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से भी पूछा जा रहा है कि क्या खुलेआम किए जा रहे इन गंभीर दावों की जांच होगी, या आस्था के नाम पर ये दावे ऐसे ही चलते रहेंगे। रिपोर्ट इंडिया टीवी 24 न्यूज ब्यूरो चीफ बदायूं विवेक चौहान की है, जिसमें यह भी रेखांकित किया गया है कि आस्था रखना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन आस्था के नाम पर झूठे दावे कर लोगों को गुमराह करना समाज और मरीजों दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।1
- रूदायन नगर में स्थित एक देवालय में प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न होने के उपरांत एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह देवालय, जो मूल रूप से राधा कृष्ण के नाम से जाना जाता था और अब साईं मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, का पुनर्निर्माण और मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्य नगर के समाजसेवियों रामनाथ रस्तोगी जी, प्रभु रस्तोगी जी, नारायण रस्तोगी जी और रामेश्वर रस्तोगी जी द्वारा करवाया गया। सफेद पत्थर से बना यह चमचमाता देवालय किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं लगता। विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनेक दैवीय रूपों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई। इसके बाद निकाली गई आकर्षक शोभायात्रा में पीतल बैंड की धुन पर देवी-देवताओं की मूर्ति रूप और रंग-बिरंगी पोशाक में सजे पुरुष और महिलाओं ने नगर की भलाई के लिए उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस मंगलमय अवसर पर नगर पंचायत कार्यालय की ओर से भी विशेष व्यवस्थाएं की गईं। शोभायात्रा में शामिल भक्तों के मार्ग पर साफ-सफाई, जल छिड़काव और भगवान की बारात के स्वागत में चूना डलवाया गया। इसके साथ ही, नगर के विभिन्न स्थानों पर भक्तों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई; राजपुर रोड स्थित नत्थूलाल गुप्ता ने आइसक्रीम, मुरली मनोहर गुप्ता ने हलवा, तथा मेडिकल के सामने खुले चौक के बीचों-बीच अंकित गुप्ता, मोनू गुप्ता और रमन गुप्ता आदि ने भक्तों को जलपान कराकर उनकी थकान दूर की। शोभायात्रा के दौरान नगर में जगह-जगह सामूहिक रूप से फूलों की वर्षा की गई। इस अवसर पर दीपक गुप्ता, चुनमुन गुप्ता, किसन रस्तोगी, अंकित गुप्ता, मोनू गुप्ता, मृदुल गुप्ता, नत्थू लाल गुप्ता, मा. रामप्रकाश गुप्ता सहित सैकड़ों भक्तगण मौजूद रहे।1
- आगामी त्योहारों के मद्देनजर, संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने भारी पुलिस बल के साथ मिलकर गिरफ्तार किया है।2
- संभल जनपद के बहजोई थाना क्षेत्र के पाठकपुर गाँव में आज दिनांक 16/06/2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे एक ट्रैक्टर दुर्घटना में 15 वर्षीय नितिन पुत्र रामपाल की मृत्यु हो गई। नितिन पाठकपुर गाँव का ही निवासी और जाटव जाति का था। इस घटना की सूचना बहजोई पुलिस थाने को अस्पताल से प्राप्त एक मेमो के माध्यम से मिली। पुलिस के अनुसार, यह हादसा ट्रैक्टर चालक द्वारा वाहन पर से नियंत्रण खो देने के कारण हुआ है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह प्रकरण अवैध खनन या रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली से संबंधित नहीं है, जैसा कि कुछ चैनलों द्वारा गलत तरीके से प्रसारित किया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने अस्पताल पहुंचकर मृतक बच्चे के शव का पंचायतनामा की कार्यवाही की और उसे पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवाया। मौके पर शांति व्यवस्था कायम है और मामले में अग्रिम विधिक कार्यवाही प्रचलित है। इस प्रकरण के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) संभल, श्री मनोज कुमार रावत ने भी बाइट दी है।1
- यह प्रश्न उठाया गया है कि पीयूष भैया ने जो बात कही थी, वह कितनी सही थी।1
- बिल्सी क्षेत्र के बेहटाजवी गाँव में रहने वाले रामचंद्र वैध, जिन्हें अब सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि मिलने के बाद “गुरु जी” के नाम से जाना जाता है, अपने इलाज के बढ़ते दावों को लेकर चर्चा और सवालों के घेरे में हैं। पहले केवल मोच और सामान्य शारीरिक समस्याओं को देखने वाले वैध जी पर अब ग्रामीणों द्वारा गंभीर से गंभीर बीमारियों, यहाँ तक कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को भी दुआ, आशीर्वाद और कथित चमत्कारों के ज़रिए ठीक करने का दावा करने का आरोप लगाया जा रहा है। इन दावों का कोई भी वैज्ञानिक या चिकित्सकीय प्रमाण सामने नहीं आया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो व्यक्ति पहले निःशुल्क सेवा देने का दावा करता था, उसके यहाँ अब दान पात्र क्यों रखा गया है। जागरूक लोगों का कहना है कि यह सेवा कम और श्रद्धा व मजबूरी का आर्थिक लाभ उठाने का माध्यम ज़्यादा प्रतीत होता है, जो बीमार लोगों की उम्मीदों का फायदा उठा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार केवल आधुनिक चिकित्सा पद्धति से ही संभव है, और चमत्कारिक इलाज के दावों पर भरोसा करना मरीज की जान के लिए खतरा बन सकता है। अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से यह पूछा जा रहा है कि क्या खुलेआम किए जा रहे इन गंभीर बीमारियों के इलाज के दावों की जाँच की जाएगी, या फिर आस्था के नाम पर ऐसे दावे यूँ ही चलते रहेंगे। यह रेखांकित किया गया है कि आस्था रखना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन आस्था के नाम पर झूठे दावे कर लोगों को गुमराह करना समाज और मरीजों दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।2