राँची में झारखंड लोक भवन के समीप अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 656 दिनों से आंदोलन कर रहे दिव्यांगों का सब्र अब टूटता नजर आ रहा है। इतने लंबे समय से खुले आसमान के नीचे धरना प्रदर्शन जारी रहने के बावजूद, प्रशासन या सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि 656 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं और धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उनकी मुख्य मांगों में दिव्यांग अधिकार अधिनियम को कड़ाई से लागू करना, बैकलॉग पदों को भरना और पेंशन राशि में ससमय वृद्धि करना शामिल है। भीषण गर्मी, ठंडी और बरसात जैसे मौसम की मार झेलने के बावजूद, आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं; उनका कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह सत्याग्रह जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा है कि "656 दिन कोई छोटा समय नहीं होता। हम कोई भीख नहीं, बल्कि अपना अधिकार मांग रहे हैं। लोक भवन के इतने करीब होने के बाद भी हमारी आवाज हुक्मरानों के कानों तक नहीं पहुंच रही है।" अब यह देखना होगा कि इस ऐतिहासिक रूप से लंबे खींच चुके आंदोलन पर राज्य की हेमन्त सोरेन सरकार कब संज्ञान लेती है और इन दिव्यांग भाई-बहनों को उनका न्याय कब मिलता है।
राँची में झारखंड लोक भवन के समीप अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 656 दिनों से आंदोलन कर रहे दिव्यांगों का सब्र अब टूटता नजर आ रहा है। इतने लंबे समय से खुले आसमान के नीचे धरना प्रदर्शन जारी रहने के बावजूद, प्रशासन या सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि 656 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं और धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उनकी मुख्य मांगों में दिव्यांग अधिकार अधिनियम को कड़ाई से लागू करना, बैकलॉग पदों को भरना और पेंशन राशि में ससमय वृद्धि करना शामिल है। भीषण गर्मी, ठंडी और बरसात जैसे मौसम की मार झेलने के बावजूद, आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं; उनका कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह सत्याग्रह जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा है कि "656 दिन कोई छोटा समय नहीं होता। हम कोई भीख नहीं, बल्कि अपना अधिकार मांग रहे हैं। लोक भवन के इतने करीब होने के बाद भी हमारी आवाज हुक्मरानों के कानों तक नहीं पहुंच रही है।" अब यह देखना होगा कि इस ऐतिहासिक रूप से लंबे खींच चुके आंदोलन पर राज्य की हेमन्त सोरेन सरकार कब संज्ञान लेती है और इन दिव्यांग भाई-बहनों को उनका न्याय कब मिलता है।
- भारतीय प्रशासनिक सेवा के मोo जावेद हुसैन ने खूंटी जिले के 16वें उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने बताया कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और जिले के विकास कार्यों को गति देना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।2
- बसिया प्रखंड मुख्यालय स्थित बसिया स्टेडियम सरना मैदान में बसिया प्रीमियर क्रिकेट लीग सीजन 2 टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिला परिषद सदस्य बसंती डूंगडुंग ने मुख्य अतिथि के तौर पर टॉस करके और खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर मैच का उद्घाटन किया। इस रोमांचक फाइनल में बीएसडी लायंस और बीएसडी चैलेंजर्स के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें बीएसडी चैलेंजर्स ने जीत हासिल की। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि बसंती डूंगडुंग ने इस क्रिकेट प्रतियोगिता को क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में इन्हीं खिलाड़ियों में से कोई राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करेगा, जिससे उनके माता-पिता, बसिया सबडिवीजन क्रिकेट अकादमी के अध्यक्ष अंजनी कुमार मिश्रा, हेड कोच सह सचिव राजू राम और पूरे झारखंड का नाम रोशन होगा। डूंगडुंग ने विशेष रूप से लड़कियों द्वारा लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेलने की प्रशंसा की, इसे गौरवशाली क्षण और महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने लड़कों और लड़कियों को एक साथ खेलते देखना एक सुखद अनुभव करार दिया। इस प्रीमियम लीग में कुल चार टीमें - बीएसडी लॉयंस, बीएसडी चैलेंजर, बीएसडी सुपरकिंग और बीएसडी रॉयल्स - शामिल थीं। फाइनल मैच के दौरान नीलेश कंसारी को 'मैन ऑफ द मैच' घोषित किया गया, जबकि 'मैन ऑफ द सीरीज' का खिताब अर्णव मिश्रा ने जीता। यह टूर्नामेंट अंजनी कुमार मिश्रा और हेड कोच राजू राम के अथक प्रयासों से सफल हुआ। इस अवसर पर डीएसओ गुमला भी उपस्थित थे।3
- पंजाब के धावक गुरिंदरवीर सिंह ने रांची में फेडरेशन कप एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने यह रेस सिर्फ 10.09 सेकंड में पूरी की। गुरिंदरवीर 10.10 सेकंड की बाधा पार करने वाले पहले भारतीय स्प्रिंटर बन गए हैं।1
- झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। राज्य की दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान होगा और नतीजे भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।1
- आदिवासी महिलाएँ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली पहुँची हैं।1
- गुमला जिला के जारी थाना क्षेत्र अंतर्गत सकतार गांव निवासी लक्ष्मण चिक बड़ाइक के 20 वर्षीय पुत्र संजू चिक बड़ाइक उर्फ डेजू ने रविवार को अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उसने पंचायत भवन से लगभग 100 मीटर दूर स्थित किताम गांव के दीपक तिग्गा के बारी में एक बरगद के पेड़ पर प्लास्टिक की रस्सी से फांसी लगाकर आत्महत्या की। घटना की जानकारी ग्रामीणों ने एसआई क्रिस्टो राम को दी, जिसके बाद वे दल-बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया। पुलिस इस मामले की छानबीन में जुट गई है। मृतक के परिजन प्रेम धन चिक बड़ाइक ने बताया कि संजू का अपनी तथाकथित एक पत्नी से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उसने गुस्से में आकर रविवार को यह कदम उठाया। संजू चिक बड़ाइक पैसे से एक टेंट हाउस में मजदूर के रूप में काम करता था। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है और उन्हें बच्चों की परवरिश की चिंता सता रही है।1
- लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेन्हा से एक मामला सामने आया है, जहाँ एक चिकित्सक ने शक्ति का दुरुपयोग करते हुए सरकारी कार्य में हस्तक्षेप किया। यह घटना पुलिस हिरासत में आए एक आरोपी की उम्र और स्वास्थ्य सत्यापन को लेकर संबंधित चिकित्सक से हुई बहस से जुड़ी है। इस पूरे प्रकरण को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि सरकारी कार्यों में ही चिकित्सक इस प्रकार शक्ति का दुरुपयोग करते हैं और हस्तक्षेप करते हैं, तो आम जनता के साथ उनका व्यवहार कैसा होगा और उन्हें कैसी सुविधाएँ मिलती होंगी। यह स्थिति जांच का विषय है।1
- खुंटी के कर्रा स्थित पटेल बीएड कॉलेज में कला एवं शिल्प प्रदर्शनी का भव्य आयोजन हुआ। इसमें छात्र-छात्राओं ने अपनी आकर्षक कला और शिल्प कृतियों का प्रदर्शन किया, जिनकी खूब सराहना की गई। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सबका मन मोहा।1