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जामताड़ा ब्रेकिंग:राज्य स्तरीय अबेकस प्रतियोगिता में जामताड़ा का जलवा। जामताड़ा के विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय अबेकस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया है। देवघर के मधुपुर में आयोजित राज्य स्तरीय अबेकस गाला प्रतियोगिता में ड्रीम फिल अकादमी के 13 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिसमें छह विद्यार्थियों ने अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार हासिल किए। प्रतियोगिता में चार जिलों के कुल 168 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
यूके न्यूज जामताड़ा,(झारखंड)
जामताड़ा ब्रेकिंग:राज्य स्तरीय अबेकस प्रतियोगिता में जामताड़ा का जलवा। जामताड़ा के विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय अबेकस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया है। देवघर के मधुपुर में आयोजित राज्य स्तरीय अबेकस गाला प्रतियोगिता में ड्रीम फिल अकादमी के 13 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिसमें छह विद्यार्थियों ने अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार हासिल किए। प्रतियोगिता में चार जिलों के कुल 168 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
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- पारसनाथ पहाड़ पर जैन समुदाय के दावे का आदिवासियों ने किया विरोध, बोले—“मारांग बुरू हमारा था, हमारा है और हमारा रहेगा” पारसनाथ पहाड़ को लेकर एक बार फिर आदिवासी और जैन समुदाय के दावों के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। मारांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा ने विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन द्वारा पारसनाथ पहाड़ को लेकर दिए गए बयान और संरक्षण की मांग का कड़ा विरोध किया है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पारसनाथ पहाड़ संथाल आदिवासियों का मारांग बुरू है, जहां आदिवासी समुदाय सदियों से पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का पालन करता आ रहा है। संगठन का दावा है कि पूरे मारांग बुरू क्षेत्र में 24 से अधिक टोले हैं, जहां पारंपरिक रूप से माझी यानी प्रधान की व्यवस्था कायम है। मोर्चा ने कहा कि न्यायालय द्वारा आदिवासी संथाल समुदाय के प्रथागत और पुरखौती अधिकारों को मान्यता दी गई है। संगठन का आरोप है कि जैन समुदाय के पक्ष में किसी भी तरह की एकतरफा सरकारी व्यवस्था आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। ‘सम्मेद शिखर’ और ‘मारांग बुरू’ को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। संगठन ने कहा कि मारांग बुरू का उल्लेख सरकारी दस्तावेजों और इतिहास में मिलता है और पारसनाथ पर्वत आदिवासी समुदाय का प्राचीन धार्मिक स्थल है। मोर्चा ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि जैन समुदाय के पक्ष में जारी किसी भी एकतरफा आदेश की समीक्षा की जाए तथा पारसनाथ के मारांग बुरू क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के पारंपरिक और प्रथागत अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से इस मामले में सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आदिवासी समुदाय बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगा। प्रेस विज्ञप्ति के दौरान मारांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू, सचिव विष्णु किस्कू, सुधीर बास्के, सुरेश हेम्ब्रम, मदन हेम्ब्रम, सुशांत प्रसाद सोरेन, दिलीप मुर्मू सहित कई लोग मौजूद रहे।4
- देवघर जिला के मार्गोमुण्डा प्रखण्ड अन्तर्गत मदरसा बहरुल उलूम कानो में शनिवार रात कमेटी के सौजन्य से पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब के यौम-ए-पैदाइश ईद-उल-मिलादुन्नबी के उपलक्ष्य में मदरसा के बच्चों के बीच दीनी तालीम से संबंधित मुकाबला पर इनामी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।1
- मसलिया में एसआईआर के तहत को कठलिया व आमगाछी पंचायत के अनमैप्ड मतदाताओं की सुनवाई हुई। मसलिया में एसआईआर के तहत को कठलिया व आमगाछी पंचायत के अनमैप्ड मतदाताओं की सुनवाई हुई। आमगाछी के बूथ 282 में 139 में से 112 मतदाता दस्तावेज के साथ उपस्थित हुए। कठलिया के बूथ 192 में 66 अनमैप्ड व 185 विसंगति, 193 में 20 व 197 तथा 194 में 26 व 90 मामलों की जांच हुई। शिविर में बीडीओ अजफर हसनैन व सीओ रंजन यादव उपस्थित थे।1
- रामगढ़ प्रखंड के पथरिया पंचायत के मयुरनाथ गांव में विगत एक बर्ष पुर्व आई आंधी तुफान में आम का पेड़ गिरने से मकान क्षतिग्रस्त एक साल के बाद भी नहीं मिला आवास और न ही मुवावजा, ग्रामीण परेशान। रामगढ़ प्रखंड के पथरिया पंचायत के मयूरनाथ में बिगड़ एक साल पूर्व भरी आंधी तूफान से सड़क के किनारे विशाल आम का पेड़ एक कच्चे मकान पर गिर जाने के कारण मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया लेकिन एक साल बीतने के बावजूद भी पीड़ित ग्रामीण शंकर राय को आवास मिला न मुआवजा आज मंगलवार को पीड़ित ग्रामीण शंकर राय ने बताया कि प्रखंड से लेकर पंचायत तक इन्होंने दौड़ लगाता रहा लेकिन एक साल बीतने के बावजूद भी उन्हें आवास मिला न मुआवजा लिया जाओगे अपने परिचितों के यहां मजबूर है तथा उन्हें सर छुपाने के लिए छत तक नहीं मिला है उन्होंने तुम का डीसी से अभिलंब मुआवजे की मांग की है।1
- धनबाद स्लग - यूजीसी कानून के विरोध में स्वर्ण समाज ने निकाला विरोध मार्च । एंकर - यूजीसी कानून के विरोध में स्वर्ण समाज ने विरोध मार्च निकला । जिला परिषद मैदान से रणधीर वर्मा चौक तक सैकड़ों की संख्या में लोगों ने हाथ में यूजीसी रोल बैक लिखे तख्ते के साथ पैदल मार्च किया । विरोध मार्च में मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी के नारे भी लगे । विरोध मार्च का नेतृत्व अरुण सिंह अध्यक्ष राजपूत विचार मंच ने किया । अरुण सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की यूजीसी इक्विटी कानून जो है वो हमारे हिन्दू समाज में जाति पाती और मनमुटाव बढ़ाने का काम करेगा जिसका हम सभी कड़ा विरोध करते है । हम कभी भी आरक्षण के विरोध में नहीं है लेकिन आरक्षण जाति के आधार पे नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर मिलना चाहिए जिसे आरक्षण उन्हें ही मिले जिसे इसको जरूरत है । हम सभी लोगों को अपनी जाति भूल के एक भारतीय होने के नाते अपने देश के विकास के लिए आगे आना चाहिए और यूजीसी जैसे काले कानून का विरोध करना चाहिए । बाइट - अरुण सिंह, अध्यक्ष राजपूत विचार मंच बाइट - निहारिका सिंह, अध्यक्ष, उड़ान सेवा समिति1
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