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मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में अनुसूचित जाति के कल्याण कार्यों में जमीनी स्तर पर भारी कमियां देखने को मिली हैं, जिसके कारण छात्रावासों में रहने वाले बच्चे भी खुश नहीं हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सरकार ने खुद इन कमियों और धरातल की बदहाली को स्वीकार किया है।
बलवीर धाकड़
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में अनुसूचित जाति के कल्याण कार्यों में जमीनी स्तर पर भारी कमियां देखने को मिली हैं, जिसके कारण छात्रावासों में रहने वाले बच्चे भी खुश नहीं हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सरकार ने खुद इन कमियों और धरातल की बदहाली को स्वीकार किया है।
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- दिल्ली में CJP के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।1
- सोई से पैदल यात्रा कर झंडा लेकर ग्राम जाटखेड़ा स्थित माँ पार्वती माताजी के पावन धाम की ओर जा रहे सभी श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन किया गया है। श्योपुर के 'बल्लू टी स्टॉल फेमस' की ओर से इन सभी पदयात्रियों की सुविधा के लिए निःशुल्क चाय सेवा और शीतल जल सेवा की विशेष व्यवस्था की गई है। सभी श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह किया गया है कि वे यात्रा के दौरान कुछ समय विश्राम करें, चाय और ठंडे पानी का प्रसाद ग्रहण करें और अपनी यात्रा को सुरक्षित व मंगलमय बनाएं। इस पुनीत कार्य में सेवा ही धर्म की भावना साफ दिखाई देती है। सभी भक्तों पर माँ पार्वती माताजी की कृपा बनी रहे, इसी कामना के साथ 'जय माँ पार्वती' का जयकारा लगाया गया है।1
- मुरैना में एक ओवरलोड ट्रैक्टर स्टैंड करता हुआ निकल रहा है, जो सीधे तौर पर किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रहा है। सड़क पर खुलेआम की जा रही इस लापरवाही की वजह से कभी भी कोई दुखद हादसा घटित हो सकता है।1
- मुरैना जिले के सबलगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम किडनी और तहसील सूरत के पास पिछले 2 घंटे से लगातार पानी पड़ रहा है। इस लगातार हो रही बारिश की वजह से किसानों द्वारा उगाई गई फसलों के उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ा है और फसलें खराब हो गई हैं। इस गंभीर स्थिति के कारण सभी किसान भाई परेशान हैं और पूरा बाजार एक साथ दुख में डूबा हुआ है। इसी वजह से लोगों से इस चैनल को सब्सक्राइब करने की अपील भी की गई है।1
- नीट पेपर लीक, नई शिक्षा नीति को वापस लेने, एनटीए को समाप्त करने और पुलिस दमन बंद करने जैसी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर पिछले 24 दिनों से आंदोलन चल रहा है। आज छात्र-युवाओं के 'संसद मार्च' पर हुई भीषण पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज, वॉटर कैनन, आंसू गैस के इस्तेमाल और गिरफ्तारियों के विरोध में सबलगढ़ के पुरानी अदालत तिराहे पर माकपा, किसान सभा और एसएफआई (SFI) के कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार ने पूरी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने की ठान ली है। उन्होंने बताया कि हाल ही में लगभग एक सैकड़ा पेपर लीक हो चुके हैं और नीट पेपर लीक के बाद 20 से अधिक छात्र आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन सरकार जवाबदेही सुनिश्चित करने को तैयार नहीं है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा नहीं लिया जा रहा है और मोदी सरकार द्वारा इस स्थिति को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिससे देशभर में भारी आक्रोश व्याप्त है। अशोक तिवारी ने इस दमनकारी कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज करने के लिए छात्र-युवाओं और आम जनता से अपील की है। इस विरोध प्रदर्शन में माकपा के नगर सचिव अशोक राठौर, सहायक सचिव इसराइल खान, किसान सभा के जिला महासचिव नरेश गोस्वामी, तहसील अध्यक्ष भानसिंह जादौन, रामप्रकाश जादौन और एसएफआई के छात्र नेता भानु प्रताप सिंह जादौन सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। इन सभी ने मिलकर आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया है।1
- धौलपुर के सरमथुरा में जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड कार्यालय पर सोमवार को एईएन पीएस जादौन और जेईएन शिवसिंह मीणा के स्थानांतरण होने पर उन्हें भावपूर्ण विदाई दी गई। इस दौरान डिस्कॉम कर्मियों और प्रबुद्ध जनों ने दोनों अधिकारियों को विदाई दी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन और डिस्कॉम कर्मी उपस्थित रहे। विदाई के दौरान उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने एईएन पीएस जादौन और जेईएन शिवसिंह मीणा के कार्यकाल को काफी सराहनीय बताया।1
- धौलपुर जिले के सरमथुरा में आमजन द्वारा डिस्कॉम अधिकारियों को भावभीनी विदाई दी गई है। स्थानीय लोगों ने मिलकर डिस्कॉम के अधिकारियों को विदा किया।1
- पत्रकारिता के मानदंडों के अनुसार, यदि किसी वीडियो में 'पुलिस को जल्लाद बताने' या 'किसी को भी वोट नहीं देने' जैसे बयान शामिल हैं, तो उन्हें सीधे तौर पर एक स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय, वीडियो में दिखाए गए ऐसे बयानों को 'प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया' या 'प्रदर्शनकारियों ने कहा' के रूप में रिपोर्ट करना अधिक उचित और संतुलित रहता है।1