बाढ़ के बीच मंडलायुक्त की जमीनी पड़ताल राहत शिविर में गर्भवती महिलाओं और बच्चों का जाना हाल, ग्रामीणों की समस्या पर बोले—जल्द होगा समाधान धनघटा, संत कबीर नगर। सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों में प्रशासनिक इंतजामों की वास्तविक तस्वीर जानने के लिए सोमवार को मंडलायुक्त बस्ती वैभव श्रीवास्तव ने धनघटा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। बाढ़ के बीच प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे मंडलायुक्त ने राहत एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी प्रभावित परिवार को परेशानी न होने पाए। मंडलायुक्त ने सबसे पहले बाढ़ राहत शिविर पहुंचकर वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा शिविर में उन्हें उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने ग्रामीणों को वितरित की जा रही क्लोरीन की दवा के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन की दवा का पर्याप्त वितरण हो रहा है या नहीं और ग्रामीणों को दूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी जा रही है या नहीं। उन्होंने साफ पानी और स्वास्थ्य सुरक्षा को बाढ़ राहत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसके बाद मंडलायुक्त ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं। अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखते हुए ग्रामीणों ने बताया कि ढोल बाजा क्षेत्र में जलजमाव की समस्या गंभीर बनी हुई है। गोरखपुर लिंक रोड पर बनी एक पुलिया बंद हो जाने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है, जिससे आसपास के इलाके में जलभराव बना रहता है। ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से सुनने के बाद मंडलायुक्त वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि इस संबंध में गोरखपुर मंडल के कमिश्नर और जिलाधिकारी से वार्ता कर जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को भी जल निकासी की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर देखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान पीडब्ल्यूडी की एक सड़क के बाढ़ के पानी से कट जाने की जानकारी भी सामने आई। इस पर मंडलायुक्त ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पानी समाप्त होने के बाद सड़क की मरम्मत के लिए उचित एस्टीमेट तैयार कर कार्य को पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया जाए, ताकि भविष्य में आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। मंडलायुक्त के निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमले में भी सक्रियता देखने को मिली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, आवागमन और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखी जाए। प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका समाधान धरातल पर दिखाई देना चाहिए। मंडलायुक्त का यह दौरा महज औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविकता को करीब से समझने की एक जमीनी पहल के रूप में देखा गया। राहत शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की चिंता, क्लोरीन वितरण की समीक्षा तथा ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुनने तक मंडलायुक्त ने हर पहलू पर गंभीरता दिखाई। इस अवसर पर जिला एवं तहसील स्तर के तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंडलायुक्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों तथा उपलब्ध कराई जा रही धनघटा, संत कबीर नगर। सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों में प्रशासनिक इंतजामों की वास्तविक तस्वीर जानने के लिए को मंडलायुक्त बस्ती वैभव श्रीवास्तव ने धनघटा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। बाढ़ के बीच प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे मंडलायुक्त ने राहत एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी प्रभावित परिवार को परेशानी न होने पाए। मंडलायुक्त ने सबसे पहले बाढ़ राहत शिविर पहुंचकर वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा शिविर में उन्हें उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने ग्रामीणों को वितरित की जा रही क्लोरीन की दवा के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन की दवा का पर्याप्त वितरण हो रहा है या नहीं और ग्रामीणों को दूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी जा रही है या नहीं। उन्होंने साफ पानी और स्वास्थ्य सुरक्षा को बाढ़ राहत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसके बाद मंडलायुक्त ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं। अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखते हुए ग्रामीणों ने बताया कि ढोल बाजा क्षेत्र में जलजमाव की समस्या गंभीर बनी हुई है। गोरखपुर लिंक रोड पर बनी एक पुलिया बंद हो जाने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है, जिससे आसपास के इलाके में जलभराव बना रहता है। ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से सुनने के बाद मंडलायुक्त वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि इस संबंध में गोरखपुर मंडल के कमिश्नर और जिलाधिकारी से वार्ता कर जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को भी जल निकासी की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर देखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान पीडब्ल्यूडी की एक सड़क के बाढ़ के पानी से कट जाने की जानकारी भी सामने आई। इस पर मंडलायुक्त ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पानी समाप्त होने के बाद सड़क की मरम्मत के लिए उचित एस्टीमेट तैयार कर कार्य को पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया जाए, ताकि भविष्य में आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। मंडलायुक्त के निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमले में भी सक्रियता देखने को मिली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, आवागमन और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखी जाए। प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका समाधान धरातल पर दिखाई देना चाहिए। मंडलायुक्त का यह दौरा महज औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविकता को करीब से समझने की एक जमीनी पहल के रूप में देखा गया। राहत शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की चिंता, क्लोरीन वितरण की समीक्षा तथा ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुनने तक मंडलायुक्त ने हर पहलू पर गंभीरता दिखाई। इस अवसर पर जिला एवं तहसील स्तर के तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंडलायुक्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों तथा उपलब्ध कराई जा रही धनघटा, संत कबीर नगर। सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों में प्रशासनिक इंतजामों की वास्तविक तस्वीर जानने के लिए सोमवार को मंडलायुक्त बस्ती वैभव श्रीवास्तव ने धनघटा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। बाढ़ के बीच प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे मंडलायुक्त ने राहत एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी प्रभावित परिवार को परेशानी न होने पाए। मंडलायुक्त ने सबसे पहले बाढ़ राहत शिविर पहुंचकर वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा शिविर में उन्हें उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने ग्रामीणों को वितरित की जा रही क्लोरीन की दवा के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन की दवा का पर्याप्त वितरण हो रहा है या नहीं और ग्रामीणों को दूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी जा रही है या नहीं। उन्होंने साफ पानी और स्वास्थ्य सुरक्षा को बाढ़ राहत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसके बाद मंडलायुक्त ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं। अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखते हुए ग्रामीणों ने बताया कि ढोल बाजा क्षेत्र में जलजमाव की समस्या गंभीर बनी हुई है। गोरखपुर लिंक रोड पर बनी एक पुलिया बंद हो जाने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है, जिससे आसपास के इलाके में जलभराव बना रहता है। ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से सुनने के बाद मंडलायुक्त वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि इस संबंध में गोरखपुर मंडल के कमिश्नर और जिलाधिकारी से वार्ता कर जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को भी जल निकासी की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर देखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान पीडब्ल्यूडी की एक सड़क के बाढ़ के पानी से कट जाने की जानकारी भी सामने आई। इस पर मंडलायुक्त ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पानी समाप्त होने के बाद सड़क की मरम्मत के लिए उचित एस्टीमेट तैयार कर कार्य को पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया जाए, ताकि भविष्य में आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। मंडलायुक्त के निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमले में भी सक्रियता देखने को मिली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, आवागमन और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखी जाए। प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका समाधान धरातल पर दिखाई देना चाहिए। मंडलायुक्त का यह दौरा महज औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविकता को करीब से समझने की एक जमीनी पहल के रूप में देखा गया। राहत शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की चिंता, क्लोरीन वितरण की समीक्षा तथा ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुनने तक मंडलायुक्त ने हर पहलू पर गंभीरता दिखाई। इस अवसर पर जिला एवं तहसील स्तर के तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंडलायुक्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों तथा उपलब्ध कराई जा रही
बाढ़ के बीच मंडलायुक्त की जमीनी पड़ताल राहत शिविर में गर्भवती महिलाओं और बच्चों का जाना हाल, ग्रामीणों की समस्या पर बोले—जल्द होगा समाधान धनघटा, संत कबीर नगर। सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों में प्रशासनिक इंतजामों की वास्तविक तस्वीर जानने के लिए सोमवार को मंडलायुक्त बस्ती वैभव श्रीवास्तव ने धनघटा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। बाढ़ के बीच प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे मंडलायुक्त ने राहत एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी प्रभावित परिवार को परेशानी न होने पाए। मंडलायुक्त ने सबसे पहले बाढ़ राहत शिविर पहुंचकर वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा शिविर में उन्हें उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने ग्रामीणों को वितरित की जा रही क्लोरीन की दवा के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन की दवा का पर्याप्त वितरण हो रहा है या नहीं और ग्रामीणों को दूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी जा रही है या नहीं। उन्होंने साफ पानी और स्वास्थ्य सुरक्षा को बाढ़ राहत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसके बाद मंडलायुक्त ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं। अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखते हुए ग्रामीणों ने बताया कि ढोल बाजा क्षेत्र में जलजमाव की समस्या गंभीर बनी हुई है। गोरखपुर लिंक रोड पर बनी एक पुलिया बंद हो जाने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है, जिससे आसपास के इलाके में जलभराव बना रहता है। ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से सुनने के बाद मंडलायुक्त वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि इस संबंध में गोरखपुर मंडल के कमिश्नर और जिलाधिकारी से वार्ता कर जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को भी जल निकासी की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर देखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान पीडब्ल्यूडी की एक सड़क के बाढ़ के पानी से कट जाने की जानकारी भी सामने आई। इस पर मंडलायुक्त ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पानी समाप्त होने के बाद सड़क की मरम्मत के लिए उचित एस्टीमेट तैयार कर कार्य को पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया जाए, ताकि भविष्य में आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। मंडलायुक्त के निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमले में भी सक्रियता देखने को मिली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, आवागमन और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखी जाए। प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका समाधान धरातल पर दिखाई देना चाहिए। मंडलायुक्त का यह दौरा महज औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविकता को करीब से समझने की एक जमीनी पहल के रूप में देखा गया। राहत शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की चिंता, क्लोरीन वितरण की समीक्षा तथा ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुनने तक मंडलायुक्त ने हर पहलू पर गंभीरता दिखाई। इस अवसर पर जिला एवं तहसील स्तर के तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंडलायुक्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों तथा उपलब्ध कराई जा रही धनघटा, संत कबीर नगर। सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों में प्रशासनिक इंतजामों की वास्तविक तस्वीर जानने के लिए को मंडलायुक्त बस्ती वैभव श्रीवास्तव ने धनघटा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। बाढ़ के बीच प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे मंडलायुक्त ने राहत एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी प्रभावित परिवार को परेशानी न होने पाए। मंडलायुक्त ने सबसे पहले बाढ़ राहत शिविर पहुंचकर वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा शिविर में उन्हें उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने ग्रामीणों को वितरित की जा रही क्लोरीन की दवा के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन की दवा का पर्याप्त वितरण हो रहा है या नहीं और ग्रामीणों को दूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी जा रही है या नहीं। उन्होंने साफ पानी और स्वास्थ्य सुरक्षा को बाढ़ राहत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसके बाद मंडलायुक्त ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं। अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखते हुए ग्रामीणों ने बताया कि ढोल बाजा क्षेत्र में जलजमाव की समस्या गंभीर बनी हुई है। गोरखपुर लिंक रोड पर बनी एक पुलिया बंद हो जाने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है, जिससे आसपास के इलाके में जलभराव बना रहता है। ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से सुनने के बाद मंडलायुक्त वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि इस संबंध में गोरखपुर मंडल के कमिश्नर और जिलाधिकारी से वार्ता कर जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को भी जल निकासी की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर देखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान पीडब्ल्यूडी की एक सड़क के बाढ़ के पानी से कट जाने की जानकारी भी सामने आई। इस पर मंडलायुक्त ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पानी समाप्त होने के बाद सड़क की मरम्मत के लिए उचित एस्टीमेट तैयार कर कार्य को पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया जाए, ताकि भविष्य में आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। मंडलायुक्त के निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमले में भी सक्रियता देखने को मिली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, आवागमन और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखी जाए। प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका समाधान धरातल पर दिखाई देना चाहिए। मंडलायुक्त का यह दौरा महज औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविकता को करीब से समझने की एक जमीनी पहल के रूप में देखा गया। राहत शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की चिंता, क्लोरीन वितरण की समीक्षा तथा ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुनने तक मंडलायुक्त ने हर पहलू पर गंभीरता दिखाई। इस अवसर पर जिला एवं तहसील स्तर के तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंडलायुक्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों तथा उपलब्ध कराई जा रही धनघटा, संत कबीर नगर। सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों में प्रशासनिक इंतजामों की वास्तविक तस्वीर जानने के लिए सोमवार को मंडलायुक्त बस्ती वैभव श्रीवास्तव ने धनघटा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। बाढ़ के बीच प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे मंडलायुक्त ने राहत एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी प्रभावित परिवार को परेशानी न होने पाए। मंडलायुक्त ने सबसे पहले बाढ़ राहत शिविर पहुंचकर वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा शिविर में उन्हें उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को 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निकासी की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर देखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान पीडब्ल्यूडी की एक सड़क के बाढ़ के पानी से कट जाने की जानकारी भी सामने आई। इस पर मंडलायुक्त ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पानी समाप्त होने के बाद सड़क की मरम्मत के लिए उचित एस्टीमेट तैयार कर कार्य को पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया जाए, ताकि भविष्य में आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। मंडलायुक्त के निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमले में भी सक्रियता देखने को मिली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, आवागमन और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखी जाए। प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका समाधान धरातल पर दिखाई देना चाहिए। मंडलायुक्त का यह दौरा महज औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविकता को करीब से समझने की एक जमीनी पहल के रूप में देखा गया। राहत शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की चिंता, क्लोरीन वितरण की समीक्षा तथा ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुनने तक मंडलायुक्त ने हर पहलू पर गंभीरता दिखाई। इस अवसर पर जिला एवं तहसील स्तर के तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंडलायुक्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों तथा उपलब्ध कराई जा रही
- रक्षाबंधन से पहले बड़ी कार्रवाई: बंगाली स्वीट हाउस में 200 किलो दूषित छेना नष्ट, एफआईआर के लिए तहरीर संत कबीर नगर, 25 अगस्त 2026 रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मंगलवार को विशेष अभियान चलाकर मेहदावल क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की। अभियान के दौरान दुर्गा ज्योत चौराहा स्थित बंगाली स्वीट हाउस में अस्वच्छ परिस्थितियों में रखा गया लगभग 200 किलोग्राम दूषित छेना मौके पर नष्ट कराया गया। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश तथा जिलाधिकारी के निर्देश पर सहायक आयुक्त (खाद्य) ग्रेड-2 सतीश कुमार के नेतृत्व में टीम ने प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया। जांच में छेने में मक्खियां एवं अन्य अशुद्धियां पाई गईं। लगभग 50 हजार रुपये मूल्य के 200 किलोग्राम छेने को गड्ढा खोदकर नष्ट कराया गया। निरीक्षण के दौरान टीम ने छेना के दो नमूने, खोया, मिल्क केक, सोडियम बाइकार्बोनेट तथा साइट्रिक एसिड के एक-एक नमूने संग्रहित किए। इसके अलावा लगभग 73 किलोग्राम साइट्रिक एसिड (अनुमानित मूल्य 20,300 रुपये) तथा 9.2 किलोग्राम सोडियम बाइकार्बोनेट (अनुमानित मूल्य 1,840 रुपये) को सीज कर खाद्य कारोबारकर्ता की सुरक्षित अभिरक्षा में सुपुर्द किया गया। मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए बखिरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु तहरीर भी दी गई है। कार्रवाई में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिनेश कुमार राय, खाद्य सुरक्षा अधिकारी सच्चिदानंद गुप्ता, बृजेश कुमार तथा पुलिस बल मौजूद रहा।4
- 🚨 BREAKING NEWS | अंबेडकरनगर स्कूली बस और ट्रेलर में जोरदार भिड़ंत, बाल-बाल बचे बच्चे! अंबेडकरनगर। मालीपुर थाना क्षेत्र के सुरहुर के पास मंगलवार को बच्चों से भरी स्कूली बस और ट्रेलर की जोरदार भिड़ंत हो गई। बताया जा रहा है कि सड़क पर अचानक आए टेंपो को बचाने के प्रयास में दोनों वाहन आपस में टकरा गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कूली बस सड़क किनारे झाड़ियों में जाकर रुक गई, जबकि ट्रेलर सड़क पर ही पलट गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। गनीमत रही कि बस में सवार बच्चे बाल-बाल बच गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बस में फंसे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू कर दी। हादसे में किसी के हताहत होने की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।1
- गोरखपुर: पाली क्षेत्र के रिठुआखोर गांव में वर्षों का इंतजार हुआ खत्म, RES विभाग ने बनाई सड़क, ग्रामीणों में खुशी की लहर गोरखपुर जनपद के पाली क्षेत्र अंतर्गत रिठुआखोर गांव में वर्षों से जर्जर सड़क की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (RES) विभाग द्वारा सड़क निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है। सड़क बनने के बाद गांव में खुशी का माहौल है और ग्रामीणों का कहना है कि अब उनका वर्षों पुराना इंतजार समाप्त हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय से सड़क की हालत बेहद खराब थी। जगह-जगह गड्ढे होने के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता था। बरसात के मौसम में सड़क पर पानी भर जाने से हालात और भी बदतर हो जाते थे। कीचड़ और जलभराव के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई बार दोपहिया वाहन फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते थे और लोगों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती थीं। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई थी। लगातार प्रयासों के बाद ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (RES) विभाग ने सड़क निर्माण का कार्य शुरू कराया, जिसे अब पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा कर लिया गया है। सड़क बनने से गांव के लोगों में खुशी की लहर है और लोग इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। ग्रामीण अजीत सिंह, सूरज, रंजीत, मोहन सिंह, कमल सिंह, अमन सहित अन्य लोगों ने बताया कि नई सड़क मजबूत और बेहतर गुणवत्ता के साथ बनाई गई है। अब गांव के लोगों को बाजार, विद्यालय, अस्पताल और अन्य आवश्यक स्थानों तक आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें ऐसी सड़क मिली है, जिससे उनका सफर आसान और सुरक्षित हो गया है। ग्रामीणों ने RES विभाग के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यदि इसी तरह विकास कार्य समय पर होते रहें तो क्षेत्र की अन्य समस्याओं का भी समाधान हो सकता है। लोगों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में गांव में अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार होगा, जिससे ग्रामीणों का जीवन और अधिक सुगम बन सकेगा। सड़क निर्माण पूरा होने के बाद पूरे गांव में संतोष और खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है।2
- कराटे कोच चंद्र प्रकाश मौर्य द्वारा एनसीसी कैडेट्स को कराटे एवं सेल्फ डिफेंस की विशेष ट्रेनिंग देते हुए। इस प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को आत्मरक्षा के महत्वपूर्ण गुर, शारीरिक संतुलन, अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा करने की तकनीकों का अभ्यास कराया गया। 🥋💪🇮🇳 कराटे – आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वास का भी प्रशिक्षण। कराटे कोच चंद्र प्रकाश मौर्य द्वारा एनसीसी कैडेट्स को कराटे एवं सेल्फ डिफेंस की विशेष ट्रेनिंग देते हुए। इस प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को आत्मरक्षा के महत्वपूर्ण गुर, शारीरिक संतुलन, अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा करने की तकनीकों का अभ्यास कराया गया। 🥋💪🇮🇳 कराटे – आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वास का भी प्रशिक्षण।1
- सूर्यांश न्यूज़ 24 के तरफ से सभी देशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं1
- बिहार में प्रदर्शन पर दिखा 6 वर्षीय बच्चा, जो देखने में तो बहुत छोटा है, लेकिन मांग ऐसी जो स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट के बाद अब तक किसी ने नहीं मांगी. छात्रों पर बंदूक चलाने का आदेश किसने दिया, जवाब दो या बिहार के CM सम्राट चौधरी इस्तीफा दो - 6वर्षीय Gen-Alpha ने कहा. प्रदर्शन से इस बच्चे को बिहार पुलिस ने बड़े प्यार के साथ उठा ले गई...1
- # श्रावण मंगलवार पर महुली पुलिस ने धार्मिक स्थलों में चलाया वृहद स्वच्छता अभियान # श्रावण मंगलवार पर महुली पुलिस ने धार्मिक स्थलों में चलाया वृहद स्वच्छता अभियान रिपोर्ट: अश्विनी कुमार पाण्डेय महुली, संतकबीरनगर। श्रावण माह के पावन मंगलवार के अवसर पर महुली पुलिस ने कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी के साथ सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए कस्बा महुली के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर वृहद स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान चलाया। अभियान के माध्यम से पुलिस ने स्वच्छता का संदेश देते हुए लोगों से धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों को साफ-सुथरा रखने की अपील की। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देश पर क्षेत्राधिकारी धनघटा अभय नाथ मिश्र के नेतृत्व में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पाण्डेय के साथ पुलिस टीम ने हनुमान मंदिर, समय माता मंदिर तथा मड़हाराजा स्थित धार्मिक स्थलों एवं आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में साफ-सफाई की। महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों ने स्वयं झाड़ू लगाकर श्रमदान किया और परिसर को स्वच्छ बनाया। जनसेवा के साथ दिया स्वच्छता का संदेश अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जनसेवा केवल अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ, स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण में भी पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका है। धार्मिक स्थल आस्था और संस्कृति के केंद्र हैं, इसलिए उनकी स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। पुलिस ने लोगों से घरों के साथ-साथ गांव, मोहल्ले, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों को भी स्वच्छ रखने, कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालने तथा बच्चों और आसपास के लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की अपील की। अभियान में उपनिरीक्षक सोमनाथ मिश्र, सुनील सिंह, राजमंगल, जगन्नाथ यादव सहित थाना महुली के अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।4
- 🏥 महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, अम्बेडकरनगर मानसिक रोग विभाग में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ATF) विंग का शुभारंभ महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, अम्बेडकरनगर में मानसिक रोग विभाग के अंतर्गत एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ATF) विंग यानी नशामुक्ति केंद्र का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। नशामुक्ति केंद्र का शुभारंभ प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव जी के कर-कमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर नोडल ए.टी.एफ. एवं विभागाध्यक्ष, मानसिक रोग विभाग, डॉ. अमित कुमार गुप्ता जी सहित विभाग के चिकित्सक एवं अन्य स्टाफ उपस्थित रहे। यह नशामुक्ति केंद्र नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार, परामर्श एवं आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 📍 स्थान: महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, अम्बेडकरनगर, उत्तर प्रदेश #महामाया_मेडिकल_कॉलेज #अम्बेडकरनगर #नशामुक्ति_केंद्र #ATF #मानसिक_रोग_विभाग #डॉ_मुकेश_यादव #डॉ_अमित_कुमार_गुप्ता #नशामुक्ति1
- आज़मगढ़ में महंगाई के खिलाफ सपा महिला सभा का बड़ा प्रदर्शन — बबीता चौहान के नेतृत्व में राज्यपाल को भेजा ज्ञापन, चीनी व गैस के बढ़े दाम वापस लेने की मांग1