*वनांचल क्षेत्र बोरई में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही, नाराज ग्रामीण पूरी रात अस्पताल परिसर के सामने धरने पर बैठे रहे.* आज का भारत Live25 जनता की आवाज नगरी- धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र बोरई में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है।जानकारी के अनुसार बीती रात क्षेत्र में एक सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजन और ग्रामीण उसे तत्काल इलाज के लिए बोरई सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल बंद मिला। इमरजेंसी ड्यूटी के लिए न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई मेडिकल स्टाफ। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते घायल युवक को उपचार मिल जाता, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया। नाराज ग्रामीण पूरी रात अस्पताल परिसर के सामने धरने पर बैठे रहे और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बताया जा रहा है कि बोरई क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर पहले भी आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टर और स्टाफ की अनिवार्य तैनाती की जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। अब बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल में इमरजेंसी सेवा ही उपलब्ध नहीं है, तो दूरस्थ क्षेत्रों के लोग आपात स्थिति में आखिर जाएं तो जाएं कहां? सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को समय पर उपचार नहीं मिलने से नाराज स्थानीय ग्रामीणों ने रविवार देर रात सिविल अस्पताल बोरई के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही से आक्रोशित लोगों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए 24 घंटे डॉक्टर एवं मेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करने की मांग की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 11 बजे बोरई थाना पुलिस और ग्रामीणों को सूचना मिली कि बोरई-घुटकेल मार्ग पर एक व्यक्ति मोटरसाइकिल सहित सड़क पर बेसुध अवस्था में पड़ा हुआ है। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायल को तत्काल बोरई स्थित सिविल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां कोई भी डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिला। गंभीर हालत में तड़प रहे घायल को इलाज न मिल पाने से मौके पर मौजूद लोग आक्रोशित हो उठे और अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए। पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं आदिवासी नेता मनोज साक्षी ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “हम एक इमरजेंसी मरीज को लेकर आए थे, लेकिन यहां उपचार करने वाला कोई नहीं मिला। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है और स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।” उन्होंने बताया कि इस संबंध में नगरी के बीएमओ डॉ. नेताम को फोन पर सूचना दी गई, किंतु संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मनोज साक्षी ने आगे कहा कि पूरे क्षेत्र में नगरी और बोरई को ही सिविल अस्पताल का दर्जा प्राप्त है,नगरी में पर्याप्त डॉक्टर बैठे है आखिर बोरई पर्याप्त डॉक्टर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पूर्व में भी कई बार आंदोलन और प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। उन्होंने सवाल उठाया, “यदि किसी मरीज की जान चली जाती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और चेतावनी दी कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, धरना जारी रहेगा। इस बड़ी लापरवाही को लेकर स्टेट हाईवे मैं किया गया चक्का जाम वही ग्रामीणों का कहना है कि लापरवाही अधिकारी कर्मचारियों के ऊपर में जल्द करवाई किया जाना चाहिए नहीं तो फिर इससे बड़ा उग्र आंदोलन किया जाएगा हर बार इस तरह से लापरवाही बढ़ती जाती है बार-बार आश्वासन दिया जाता है मगर अब आश्वासन से काम नहीं चलेगा इस आंदोलन के समय नगरी अनुविभागी राजस्व अधिकारी नगरी एसडीओपी पहुंच कर आंदोलन को खत्म करने का प्रयास किया गया वही आश्वासन देने के बाद आंदोलन समाप्त किया गया और कहा गया कि हमारी मांगों को अगर जल्द पूरा नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा ।
*वनांचल क्षेत्र बोरई में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही, नाराज ग्रामीण पूरी रात अस्पताल परिसर के सामने धरने पर बैठे रहे.* आज का भारत Live25 जनता की आवाज नगरी- धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र बोरई में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है।जानकारी के अनुसार बीती रात क्षेत्र में एक सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजन और ग्रामीण उसे तत्काल इलाज के लिए बोरई सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल बंद मिला। इमरजेंसी ड्यूटी के लिए न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई मेडिकल स्टाफ। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते घायल युवक को उपचार मिल जाता, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया। नाराज ग्रामीण पूरी रात अस्पताल परिसर के सामने धरने पर बैठे रहे और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बताया जा रहा है कि बोरई क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर पहले भी आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टर और स्टाफ की अनिवार्य तैनाती की जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। अब बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल में इमरजेंसी सेवा ही उपलब्ध नहीं है, तो दूरस्थ क्षेत्रों के लोग आपात स्थिति में आखिर जाएं तो जाएं कहां? सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को समय पर उपचार नहीं मिलने से नाराज स्थानीय ग्रामीणों ने रविवार देर रात सिविल अस्पताल बोरई के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही से आक्रोशित लोगों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए 24 घंटे डॉक्टर एवं मेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करने की मांग की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 11 बजे बोरई थाना पुलिस और ग्रामीणों को सूचना मिली कि बोरई-घुटकेल मार्ग
पर एक व्यक्ति मोटरसाइकिल सहित सड़क पर बेसुध अवस्था में पड़ा हुआ है। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायल को तत्काल बोरई स्थित सिविल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां कोई भी डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिला। गंभीर हालत में तड़प रहे घायल को इलाज न मिल पाने से मौके पर मौजूद लोग आक्रोशित हो उठे और अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए। पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं आदिवासी नेता मनोज साक्षी ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “हम एक इमरजेंसी मरीज को लेकर आए थे, लेकिन यहां उपचार करने वाला कोई नहीं मिला। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है और स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।” उन्होंने बताया कि इस संबंध में नगरी के बीएमओ डॉ. नेताम को फोन पर सूचना दी गई, किंतु संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मनोज साक्षी ने आगे कहा कि पूरे क्षेत्र में नगरी और बोरई को ही सिविल अस्पताल का दर्जा प्राप्त है,नगरी में पर्याप्त डॉक्टर बैठे है आखिर बोरई पर्याप्त डॉक्टर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पूर्व में भी कई बार आंदोलन और प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। उन्होंने सवाल उठाया, “यदि किसी मरीज की जान चली जाती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और चेतावनी दी कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, धरना जारी रहेगा। इस बड़ी लापरवाही को लेकर स्टेट हाईवे मैं किया गया चक्का जाम वही ग्रामीणों का कहना है कि लापरवाही अधिकारी कर्मचारियों के ऊपर में जल्द करवाई किया जाना चाहिए नहीं तो फिर इससे बड़ा उग्र आंदोलन किया जाएगा हर बार इस तरह से लापरवाही बढ़ती जाती है बार-बार आश्वासन दिया जाता है मगर अब आश्वासन से काम नहीं चलेगा इस आंदोलन के समय नगरी अनुविभागी राजस्व अधिकारी नगरी एसडीओपी पहुंच कर आंदोलन को खत्म करने का प्रयास किया गया वही आश्वासन देने के बाद आंदोलन समाप्त किया गया और कहा गया कि हमारी मांगों को अगर जल्द पूरा नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा ।
- Simant Prajapatiनगरी, धमतरी, छत्तीसगढ़*वनांचल क्षेत्र बोरई में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही, नाराज ग्रामीण पूरी रात अस्पताल परिसर के सामने धरने पर बैठे रहे.* https://aajkabharatlive25.blogspot.com/2026/02/blog-post_806.html *ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते घायल युवक को उपचार मिल जाता, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी.* *"आज का भारत Live25"* ✍️ *एन. के. प्रजापति*1 day ago
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- Post by सतभक्ति संदेश1
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- कुसमी बलरामपुर में चक्का जाम हाई अलर्ट।।1