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Ruksana
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- जयपुर में नूरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले पर आदर्श नगर के विधायक रफीक खान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त भौतिक सत्यापन के सड़क को 80 फीट घोषित कर दिया गया, जिसके कारण मस्जिद सड़क चौड़ीकरण की जद में आ गई। विधायक खान ने स्पष्ट किया कि यह मस्जिद 1981 में जमीन खरीदकर बनाई गई थी और बाद में इसका डेवलपमेंट चार्ज भी विधिवत जमा कराया गया था। रफीक खान ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों से इस मुद्दे का समाधान खोजने की कोशिश की थी, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल पाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुदाय माहौल खराब नहीं करेगा, बल्कि अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगा। उनके एक वायरल वीडियो में यह बयान भी सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि "डर दिखाकर मस्जिद गिराई जाएगी तो 10 मस्जिदें बनेंगी"। विधायक खान ने आगे कहा कि समाज कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखेगा और गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखेगा। यह बयान उस समय आया है जब जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत नूरानी मस्जिद समेत कई अन्य धार्मिक ढांचों पर कार्रवाई की थी।1
- एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने अपने दर्शकों से उनके चैनल को लाइक, कमेंट और शेयर करने का आग्रह किया है। उपयोगकर्ता ने यह भी निवेदन किया है कि वे चैनल को सब्सक्राईब करें।1
- यह संदेश देश को सर्वोपरि मानने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के चयन का आह्वान करता है। इसमें कहा गया है कि बीजेपी देशहित के लिए काम करती है और देशवासियों की सुरक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार रहती है। इसी आधार पर लोगों से बीजेपी को चुनने का आग्रह किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक एंबुलेंस के भीतर मरीज को तत्काल ऑक्सीजन की आवश्यकता थी, लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर का लॉक न खुलने के कारण कर्मचारियों को उसे हथौड़े की मदद से तोड़ना पड़ा। इस पूरी घटना के दौरान मरीज एंबुलेंस में ही मौजूद था, और उसकी नाजुक हालत को देखते हुए हर एक सेकंड बेहद कीमती था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। जिस एंबुलेंस को मरीजों की जान बचाने का सबसे तेज़ साधन माना जाता है, उसी में अगर बुनियादी उपकरण भी सही स्थिति में न हों, तो आखिर मरीजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी? यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग को और भी मजबूत करती है।1
- 2014 में लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री जी ने 'यंगर' की बात की थी, और तभी से इसकी शुरुआत हो गई थी।1
- जयपुर जिले की SP नारुका कॉलोनी के निवासियों ने अपनी कॉलोनी की बेहद गंभीर स्थिति को उजागर किया है। निवासियों के अनुसार, वे इस क्षेत्र में कच्ची बस्ती जैसे हालातों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। उन्होंने शिकायत की है कि उनकी इस बदहाल स्थिति पर कोई ध्यान देने वाला नहीं है।4
- फिलीपींस में आए तेज भूकंप के कारण एक स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। भूकंप के झटके महसूस होते ही बच्चे घबराकर चीखने-चिल्लाने लगे, कई बच्चे तो डर के मारे रोने भी लगे। इस दौरान स्कूल के शिक्षक और स्टाफ तुरंत बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने और उन्हें शांत करने में जुट गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भूकंप के झटके इतने तीव्र थे कि कक्षाओं में बैठे बच्चों के बीच तुरंत दहशत फैल गई। स्थिति को देखते हुए, स्कूल प्रशासन ने तत्काल आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल लागू किया और सभी बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। स्टाफ ने इस पूरी घटना के दौरान सूझबूझ का परिचय दिया, जिससे स्थिति नियंत्रित हो सकी और किसी भी बड़ी अनहोनी को टालने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह घटना एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय बच्चों की सुरक्षा और समय पर राहत एवं बचाव व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण और आवश्यक है।1
- राइड-हेलिंग ऐप के ड्राइवरों को अक्सर ग्राहकों द्वारा बताई गई पिकअप लोकेशन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐप में दिखाई गई लोकेशन के अनुसार ड्राइवर गाड़ी लेकर ग्राहक तक पहुंचते हैं, लेकिन ग्राहक अक्सर मौखिक रूप से 'आगे चलो', 'पीछे चलो', 'इधर आओ', 'उधर आओ' जैसे निर्देश देते हैं। इस स्थिति में यह सवाल उठता है कि सही लोकेशन के बिना ड्राइवर आखिर कहां जाए, जिससे उनका समय, ईंधन और मेहनत बर्बाद होती है। इस मुद्दे पर ग्राहकों से यह प्रश्न किया गया है कि क्या उन्हें सही पिकअप लोकेशन डालनी चाहिए। इस विषय पर पाठकों से अपनी राय कमेंट में बताने का आग्रह किया गया है, साथ ही 'जस्ट जयपुर लाइव' की एक खास रिपोर्ट देखने के लिए भी कहा गया है।1