खलिया नदी व ग्राम समाज की भूमि पर दिन रात रोक टोक भरान अवैध खनन पर पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के आरोप, उपजाऊ खेतों से मिट्टी उठाने का सिलसिला जारी खलिया नदी व ग्राम समाज की भूमि पर दिन और रात बिना रोक टोक भराव 50 मीटर की दूरी पर पुलिस रहती है मौजूद ठाकुरद्वारा। क्षेत्र में अवैध खनन का कारोबर बेरोकटोक जारी है। नदी के किनारों और उपजाऊ खेतों से बिना किसी अनुमति के मिट्टी और रेत का उत्खनन किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन के आंखें देखते भी यह सब हो रहा है, जिससे साफ है कि अवैध खनन कारोबारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच मिलीभगत है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि दिनदहाड़े बिना नंबरों के डंपर उपजाऊ खेतों से मिट्टी उठाकर ले जा रहे हैं। आरोप है कि यह कारोबारी ना सिर्फ बिना परमिट के मिट्टी निकाल रहे हैं, बल्कि नो एंट्री जैसे नियमों का भी उल्लंघन कर रहे हैं। डंपर सड़कों पर इस तरह दौड़ रहे हैं मानो उनके खिलाफ कोई कानून ही न हो। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और खनन विभाग के अधिकारी इन कारोबारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। लोगों को आशंका है कि प्रशासनिक अधिकारी खुद इन कारोबारियों के साथ मिले हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब इन कारोबारियों से परमिट दिखाने को कहा जाता है तो वे टालमटोल करते हैं या यह कहकर लोगों को गुमराह करते हैं कि लखनऊ से मिटटी उठाने की अनुमति मिली हुई है, लेकिन कोई भी कारोबारी इसका कोई लिखित साक्ष्य पेश करने को तैयार नहीं है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि बिना राजस्व शुल्क जमा किए मिट्टी उठाना अवैध खनन की श्रेणी में आता है और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यहां इसके उलट अवैध खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि जब तक इन अवैध कारोबारियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इससे मुक्ति नहीं मिल सकती। अवैध खनन का सबसे बुरा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। उपजाऊ मिट्टी के उठने से खेत बंजर होते जा रहे हैं, वहीं डंपरों की आवाजाही से ध्वनि प्रदूषण और धूल से वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि वह अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाते हुए अवैध खनन में लिप्त लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें और क्षेत्र में शासन की सख्ती लागू करें। ठाकुरद्वारा सुरजननगर मार्ग पर खलिया नदी के किनारे एक खाली खेत में दिन के उजाले में बिना किसी अनुमति के मिटटी का भराव किया जा रहा है। जबकि यह मिटटी किसी उपजाऊ खेत से बिना राजस्व शुल्क जमा किए उठाई जा रही है । आश्चर्यचकित बात है कि दिन-रात अधिकारियों व पुलिस कर्मियों की गाड़ी इस रोड से गुजरती है । रात और दिन जसपुर मोड पर पुलिस भी तैनातरहती है ।इसके बावजूद खालिया नदी किनारे की भूमि पूर्व में ग्राम समाज कीभूमि पर अवैध रूप से भरान कर उसको कमर्शियल बनाया जा रहा है । अगर उक्त भूमि की पुराने राजस्व रिकॉर्ड से जांच कराई जाए सुबह राजस्व विभाग की भूमि है । शिकायत के बाद भी राजस्व विभाग चुप्पी साल बैठा है । बतादे कि अगर कोई किसान अपने खेत से बिना किसी अनुमति के मिटटी उठाकर अपनी जरूरत के लिए लाता तो खनन अधिकारी , स्थानीय प्रशासन उस भोले भाले किसान की ट्रैक्टर ट्राली पकड़कर कोतवाली ले आते है । उसके खिलाफ अवैध खनन के आरोप में कार्रवाई करते है। लेकिन आज तक किसी खनन कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई नही की गई। वर्जन ओवरलोडिंग आदेश खनन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है । खलिया नदी के किनारे भूमि की पैमाइश करा कर कब्जा करने वाले अवैध रूप से उसका भरान करने व कराने वालों के प्रतीक कड़ी कार्यवाहीकराई जाएगी । प्रीतिसिंह उप जिला अधिकारी ठाकुरद्वारा
खलिया नदी व ग्राम समाज की भूमि पर दिन रात रोक टोक भरान अवैध खनन पर पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के आरोप, उपजाऊ खेतों से मिट्टी उठाने का सिलसिला जारी खलिया नदी व ग्राम समाज की भूमि पर दिन और रात बिना रोक टोक भराव 50 मीटर की दूरी पर पुलिस रहती है मौजूद ठाकुरद्वारा। क्षेत्र में अवैध खनन का कारोबर बेरोकटोक जारी है। नदी के किनारों और उपजाऊ खेतों से बिना किसी अनुमति के
मिट्टी और रेत का उत्खनन किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन के आंखें देखते भी यह सब हो रहा है, जिससे साफ है कि अवैध खनन कारोबारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच मिलीभगत है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि दिनदहाड़े बिना नंबरों के डंपर उपजाऊ खेतों से मिट्टी उठाकर ले जा रहे हैं। आरोप है कि यह कारोबारी ना सिर्फ बिना परमिट के
मिट्टी निकाल रहे हैं, बल्कि नो एंट्री जैसे नियमों का भी उल्लंघन कर रहे हैं। डंपर सड़कों पर इस तरह दौड़ रहे हैं मानो उनके खिलाफ कोई कानून ही न हो। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और खनन विभाग के अधिकारी इन कारोबारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। लोगों को आशंका है कि प्रशासनिक अधिकारी खुद इन कारोबारियों के साथ मिले हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक,
जब इन कारोबारियों से परमिट दिखाने को कहा जाता है तो वे टालमटोल करते हैं या यह कहकर लोगों को गुमराह करते हैं कि लखनऊ से मिटटी उठाने की अनुमति मिली हुई है, लेकिन कोई भी कारोबारी इसका कोई लिखित साक्ष्य पेश करने को तैयार नहीं है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि बिना राजस्व शुल्क जमा किए मिट्टी उठाना अवैध खनन की श्रेणी में आता
है और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यहां इसके उलट अवैध खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि जब तक इन अवैध कारोबारियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इससे मुक्ति नहीं मिल सकती। अवैध खनन का सबसे बुरा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। उपजाऊ मिट्टी के उठने से खेत बंजर होते जा रहे
हैं, वहीं डंपरों की आवाजाही से ध्वनि प्रदूषण और धूल से वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि वह अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाते हुए अवैध खनन में लिप्त लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें और क्षेत्र में शासन की सख्ती लागू करें। ठाकुरद्वारा सुरजननगर मार्ग पर खलिया नदी के किनारे एक खाली खेत में दिन के उजाले में बिना
किसी अनुमति के मिटटी का भराव किया जा रहा है। जबकि यह मिटटी किसी उपजाऊ खेत से बिना राजस्व शुल्क जमा किए उठाई जा रही है । आश्चर्यचकित बात है कि दिन-रात अधिकारियों व पुलिस कर्मियों की गाड़ी इस रोड से गुजरती है । रात और दिन जसपुर मोड पर पुलिस भी तैनातरहती है ।इसके बावजूद खालिया नदी किनारे की भूमि पूर्व में ग्राम समाज कीभूमि पर अवैध रूप से
भरान कर उसको कमर्शियल बनाया जा रहा है । अगर उक्त भूमि की पुराने राजस्व रिकॉर्ड से जांच कराई जाए सुबह राजस्व विभाग की भूमि है । शिकायत के बाद भी राजस्व विभाग चुप्पी साल बैठा है । बतादे कि अगर कोई किसान अपने खेत से बिना किसी अनुमति के मिटटी उठाकर अपनी जरूरत के लिए लाता तो खनन अधिकारी , स्थानीय प्रशासन उस भोले भाले किसान की ट्रैक्टर ट्राली पकड़कर
कोतवाली ले आते है । उसके खिलाफ अवैध खनन के आरोप में कार्रवाई करते है। लेकिन आज तक किसी खनन कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई नही की गई। वर्जन ओवरलोडिंग आदेश खनन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है । खलिया नदी के किनारे भूमि की पैमाइश करा कर कब्जा करने वाले अवैध रूप से उसका भरान करने व कराने वालों के प्रतीक कड़ी कार्यवाहीकराई जाएगी । प्रीतिसिंह उप जिला अधिकारी ठाकुरद्वारा
- इन दिनों उत्तराखंड की राजनीति में भीमताल विधानसभा एक ऐसे प्रसंग का साक्षी बनती दिखाई दे रही है, जहाँ एक व्यक्ति की उपस्थिति मात्र से विमर्श की दिशा परिवर्तित होती प्रतीत हो रही है। लाखन सिंह नेगी का कांग्रेस में प्रवेश केवल राजनीतिक औपचारिकता भर नहीं, बल्कि उस अंतर्धारा का संकेत भी माना जा सकता है, जो सत्ता और प्रतिरोध के बीच निरंतर प्रवाहित होती रहती है। जिला पंचायत सदस्य अपहरण कांड ने जिस प्रकार लोकतांत्रिक संस्थाओं की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न अंकित किए, और उसके साथ-साथ जिन परिस्थितियों में नेगी के व्यक्तिगत व सामाजिक जीवन को प्रभावित करने के प्रयासों की चर्चाएँ सामने आईं, उसने इस समूचे घटनाक्रम को एक व्यापक राजनीतिक आख्यान में परिवर्तित कर दिया। ऐसे समय में, जब सत्ता का प्रभाव अनेक स्तरों पर अनुभव किया जाता है, उसके प्रतिकूल खड़े रहना केवल राजनीतिक साहस का नहीं, बल्कि धैर्य और स्थिरता का भी परिचायक माना जाता है। हिमालय की भाँति अडिग रहने का रूपक यहाँ मात्र अलंकार नहीं, बल्कि उस मनोवृत्ति का संकेत है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी स्वयं को विचलित नहीं होने देती। किंतु राजनीति केवल प्रतीकों और रूपकों की भूमि नहीं होती; वह परिणामों की कसौटी पर भी परखी जाती है। अतः 2027 का चुनावी परिदृश्य यह निर्धारित करेगा कि यह संघर्षशील छवि और जन-आकांक्षाओं का यह संयोग किस दिशा में परिणत होता है क्या यह जनादेश में रूपांतरित होगा, या फिर समय की धारा कोई अन्य कथा रच देगी। फिलहाल इतना अवश्य कहा जा सकता है कि लाखन सिंह नेगी का कांग्रेस के चेहरे के तौर पर यह आगमन भीमताल ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समकालीन राजनीति में एक नए अध्याय की प्रस्तावना जैसा प्रतीत होता है, जिसकी पूर्ण कथा अभी लिखी जानी शेष है।1
- *पानी की टंकी पर लटका मिला युवक का शव, इलाके में मचा हड़कंप*1
- श्रीसत्यनारायणभगवान जी की कथा के बाद आरती...1
- जिला बिजनोर थानां स्योहारा पर है गंभीर-गंभीर आरोप, यहां की पुलिस कानून को नही मानती करती है अपनी मनमानी,1
- कालागढ़ रोड ग्राम घासी वाला थाना अफजलगढ़ तहसील धामपुर से बिरला फार्म रोड अफजलगढ़ में अवैध कॉलोनी में मिट्टी का अवैध खनन चल रहा है तहसील प्रशासन और पुलिस की मिली भगत से खनन माफिया के हौसले बुलंद है डीएम मैडम का आदेश की अवैध खनन नहीं चलेगा तहसील प्रशासन और पुलिस प्रशासन के लिए बौना साबित हो रहा है इन ट्रैक्टरों से किसी भी समय अब कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है कृपा करके इन्हें रोकने की कृपा करें और जो भी अधिकारी इसमें दोषी हैं उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की कृपा करें3
- उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ग्राम सभा मंगौली में उत्तराखंड सरकार द्वारा नई शराब की दुकान खोलने पर ग्रामीणों ने नई शराब की दुकान मंगौली में खुलने का सड़क में बैठ कर खुलकर विरोध कर नारेबाजी की ! #uttarakhandupdate #nainital #Mangoli #uttarakhand #news #Nainitalmangoli1
- कानपुर के हाता गम्मू खाँ में लावारिस एक्टिवा गाड़ी से क्षेत्र में दहशत का माहौल कानपुर। हाता गम्मू खाँ क्षेत्र के निवासियों में इन दिनों खासी दहशत फैली हुई है। विगत कई महीनों से इलाके में एक लावारिस एक्टिवा स्कूटर गाड़ी खड़ी है, जिसका कोई मालिकाना हक या सुराग नहीं मिल रहा है। क्षेत्रीय निवासी गुलाम नबी ने बताया कि गाड़ी काफी समय से वहीं खड़ी है। जब स्थानीय लोगों ने इसके बारे में पूछताछ की तो आस-पास रहने वाले शेरू ने बताया कि इस गाड़ी पर अक्सर लोफर लड़के आकर बैठते हैं। इनकी वजह से लड़कियों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। इसी इलाके के दुकानदार रजब अली ने बताया, “मेरी दुकान के ठीक पास ही यह गाड़ी खड़ी रहती है। लोफर लड़के यहां बैठकर गंदे-गंदे कमेंट करते हैं। अगर उन्हें टोका-टाकी की जाए तो वे लड़ाई-झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। हम महल्ले वाले बहुत परेशान हैं।” स्थानीय लोगों ने सामूहिक रूप से चौकी छोटे मियां का हाता, थाना कर्नलगंज से अपील की है कि पुलिस इस लावारिस गाड़ी को अपने कब्जे में ले ले। उन्होंने कहा, “न जाने किसने इस गाड़ी को यहां लाकर खड़ी कर दी है। इसके अंदर कोई बम या संदिग्ध वस्तु न हो, इस बात का हमें डर लगा रहता है। हम लोग बहुत पीड़ित हैं।” क्षेत्रवासियों की मांग है कि पुलिस तुरंत इस लावारिस वाहन को हटाकर जांच करे और लोफर तत्वों पर भी सख्त कार्रवाई करे, ताकि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।3
- जो भी फ्रॉड होते हैं उसमें सिम का उपयोग होता है और पुलिस सबसे पहले सिम धारक को पकड़ती है फिर वो रोते हुए बताता है कि साहब ये सिम तो मैं चलाता ही नहीं हूँ। फर्जी सिम का खेल-भिजवा देगा जेल। संचार साथी ऐप में जाकर अपने नाम से कितने मोबाइल कनेक्शन हैं ये ज़रूर चेक करें। फर्जी सिम के फर्जीवाड़ा से बचें।1