सनातन विवाद पर गर्माई सियासत: भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दल हमलावर; यूपी-बिहार-बंगाल में मछली-मांस की राजनीति तेज सियासी उबाल: सनातन धर्म के अपमान पर भड़का विवाद, यूपी-बंगाल और बिहार में 'खान-पान' पर नए तर्क नई दिल्ली/लखनऊ/कोलकाता/पटना: देश में सनातन धर्म को लेकर छिड़ी बयानबाज़ी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने सनातन धर्म पर की गई टिप्पणी को धर्म का सीधा अपमान करार दिया है। विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक के नेताओं ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए विरोध दर्ज कराया है, जिससे विवाद दिन-ब-दिन और तेज़ होता जा रहा है। इस राजनीतिक घमासान के बीच उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में मछली व मांस (नॉन-वेज) के सेवन को लेकर अलग-अलग सांस्कृतिक और धार्मिक तर्क सामने आ रहे हैं: उत्तर प्रदेश: यूपी में धार्मिक अवसरों और सावन के महीने में सात्विक जीवन शैली पर ज़ोर दिया जा रहा है। यहाँ कई नेताओं और धार्मिक गुरुओं का मानना है कि सनातन परंपरा में संयम और सात्विकता सर्वोपरि है, इसलिए ऐसे समय में मांस-मछली से दूरी बनाए रखनी चाहिए। पश्चिम बंगाल: बंगाल में तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहाँ दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों में मछली व मांस को 'प्रसाद' और 'भोग' के रूप में स्वीकार करने की पुरानी परंपरा का हवाला दिया जा रहा है। बंगाली संस्कृति के पैरोकारों का कहना है कि खान-पान क्षेत्रीय मान्यताओं का हिस्सा है, इसे अधर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। बिहार: बिहार में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। छठ और अन्य बड़े पर्वों पर जहां पूर्ण सात्विकता का पालन होता है, वहीं अन्य दिनों में 'मिथिलांचल' और 'अंग' क्षेत्र में मछली को शुभ और सांस्कृतिक पहचान के तौर पर देखा जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ जहाँ 'सनातन' के मुद्दे पर सभी दल लामबंद हो रहे हैं, वहीं खान-पान की विविधता और क्षेत्रीय मान्यताओं पर उठे इस नए विवाद ने इस बहस को और अधिक जटिल बना दिया
सनातन विवाद पर गर्माई सियासत: भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दल हमलावर; यूपी-बिहार-बंगाल में मछली-मांस की राजनीति तेज सियासी उबाल: सनातन धर्म के अपमान पर भड़का विवाद, यूपी-बंगाल और बिहार में 'खान-पान' पर नए तर्क नई दिल्ली/लखनऊ/कोलकाता/पटना: देश में सनातन धर्म को लेकर छिड़ी बयानबाज़ी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने सनातन धर्म पर की गई टिप्पणी को धर्म का सीधा अपमान करार दिया है। विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक के नेताओं ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए विरोध दर्ज कराया है, जिससे विवाद दिन-ब-दिन और तेज़ होता जा रहा है। इस राजनीतिक घमासान के बीच उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में मछली व मांस (नॉन-वेज) के सेवन को लेकर अलग-अलग सांस्कृतिक और धार्मिक तर्क सामने आ रहे हैं: उत्तर प्रदेश: यूपी में धार्मिक अवसरों और सावन के महीने में सात्विक जीवन शैली पर ज़ोर दिया जा रहा है। यहाँ कई नेताओं और धार्मिक गुरुओं का मानना है कि सनातन परंपरा में संयम और सात्विकता सर्वोपरि है, इसलिए ऐसे समय में मांस-मछली से दूरी बनाए रखनी चाहिए। पश्चिम बंगाल: बंगाल में तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहाँ दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों में मछली व मांस को 'प्रसाद' और 'भोग' के रूप में स्वीकार करने की पुरानी परंपरा का हवाला दिया जा रहा है। बंगाली संस्कृति के पैरोकारों का कहना है कि खान-पान क्षेत्रीय मान्यताओं का हिस्सा है, इसे अधर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। बिहार: बिहार में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। छठ और अन्य बड़े पर्वों पर जहां पूर्ण सात्विकता का पालन होता है, वहीं अन्य दिनों में 'मिथिलांचल' और 'अंग' क्षेत्र में मछली को शुभ और सांस्कृतिक पहचान के तौर पर देखा जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ जहाँ 'सनातन' के मुद्दे पर सभी दल लामबंद हो रहे हैं, वहीं खान-पान की विविधता और क्षेत्रीय मान्यताओं पर उठे इस नए विवाद ने इस बहस को और अधिक जटिल बना दिया
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- ग्राम पंचायत ढखवा मॉल में त्योहार के 1 दिन पहले हुई साफ सफाई लोगों ने प्रधान की की प्रशंसा ग्राम पंचायत ढखवा माल मलिहाबाद में 27 अगस्त 2026, गुरुवार को एक विशेष सफाई अभियान चलाया गया। ग्राम प्रधान के निर्देश पर गांव के बाहर सड़क के दोनों किनारों पर जमा कूड़ा और गोबर हटाया गया। काफी समय से ग्रामीण सड़क के किनारे गोबर डालते आ रहे थे, जिससे आवागमन में परेशानी हो रही थी। कई लोगों की शिकायत थी कि गोबर के कारण वाहन फिसलने से दुर्घटनाएं हो चुकी थीं। इन समस्याओं को देखते हुए और आगामी रक्षाबंधन त्योहार को ध्यान में रखते हुए, प्रधान ने अपने प्रतिनिधि को भेजकर यह सफाई कार्य करवाया। ट्रैक्टर की मदद से ढखवा गांव से लेकर इब्राहिमपुर की पुलिया तक सड़क की सफाई की गई। इस पहल के लिए गांव वालों ने ग्राम प्रधान की सराहना की। ग्रामीणों का मानना था कि गोबर और कूड़े के जमाव से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता था, जिसे समय रहते टाल दिया2
- चीन का हेलीकॉप्टर उस जगह पहुंचा जहां ग्लेशियर टूटा था और उससे निकले पानी ने नेपाल में भारी तबाही मचाई थी। इस घटना को GLOF कहते हैं। ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) तब आ सकता है, जब ग्लेशियर द्वारा रोकी गई झील का बांध अचानक टूट जाए। 🌊🧊 पानी के दबाव और ग्लेशियर में बनी दरारों से बाहर निकलने का रास्ता बन जाता है। इसके बाद झील में जमा भारी मात्रा में पानी और मलबा बेहद तेज़ रफ्तार से पहाड़ों से नीचे की ओर बहता है, जिससे अचानक और विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।1
- ग्राम भूलेमऊ पोस्ट चमियानी जिला उन्नाव बिजली का केबल टूटने से कुछ बच्चे सड़क पर खेल रहे थे बिजली का तार टूटने से बहे वो सरकार या प्रशासन से निवेदन है कि ग्राम भूलेमऊ के पूरे तार चेंज करवड़े जय हिंद या भारत2
- मासवासी गांव ब्लाक सिकंदरपुर कर्ण के अंतर्गत बाबा नाती के ऊपर दीवार गिरने से दबकर मौत हो गई आवास योजना नही दिया गया और कहते है की अपात्र हो उस बाबा के लड़का शारीरिक रूप से दिव्यांग है1
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