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ऐतिहासिक दस्तावेजों में आदिवासी समाज: अंग्रेजी दौर में लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तकें विशेष समाचार उदयपुर। आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं, भाषाओं और सामाजिक जीवन को समझने के लिए औपनिवेशिक काल में तैयार की गई अनेक पुस्तकों और प्रशासनिक रिपोर्टों का आज भी ऐतिहासिक महत्व है। इन ग्रंथों में भील सहित भारत के विभिन्न आदिवासी समुदायों के बारे में तत्कालीन अधिकारियों, सर्वेक्षकों और मानवशास्त्रियों द्वारा विवरण दर्ज किए गए हैं। उदयपुर और राजस्थान के संदर्भ में K. D. Erskine की A Gazetteer of the Udaipur State विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसके शीर्षक में ही “With a Chapter on the Bhils” का उल्लेख मिलता है। इसी प्रकार भील और अन्य आदिवासी समुदायों से संबंधित कई अन्य ग्रंथ भी औपनिवेशिक दौर के दस्तावेजी स्रोतों के रूप में सामने आते हैं। प्रमुख पुस्तकों की सूची जेम्स टॉड — Annals and Antiquities of Rajasthan — 1829 जॉन माल्कम — A Memoir of Central India — 1824 K. D. अर्स्किन — A Gazetteer of the Udaipur State (With a Chapter on the Bhils) — 1908 C. E. लुआर्ड — Bhil Handbook — 1909 E. T. डाल्टन — Descriptive Ethnology of Bengal — 1872 H. H. रिजले — The Tribes and Castes of Bengal — 1891 एडगर थर्स्टन — Castes and Tribes of Southern India — 1909, 7 खंड W. क्रुक — The Tribes and Castes of the North-Western Provinces and Oudh — 1896, 4 खंड W. W. हंटर — Annals of Rural Bengal — 1868 H. हेंडले — Memoir of the Bhils — 1875 जॉर्ज ग्रियर्सन — Linguistic Survey of India — भीली भाषा संबंधी सामग्री वेरियर एल्विन — The Baiga — 1939 वेरियर एल्विन — The Agaria — 1942 वेरियर एल्विन — Maria Murder and Suicide — 1950, गोंड/माड़िया समुदायों पर S. H. थॉम्पसन — Report on the Bhil Tribes of Malwa — 1890 R. V. रसेल एवं हीरालाल — The Tribes and Castes of the Central Provinces of India — 1916, 4 खंड इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत इन पुस्तकों में दर्ज सामग्री से उस समय के आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक संरचना, रीति-रिवाज, भाषा, आजीविका, प्रशासन और सांस्कृतिक जीवन के बारे में जानकारी मिलती है। हालांकि इन ग्रंथों को पढ़ते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इनमें से अनेक विवरण औपनिवेशिक प्रशासन और उस दौर की मानवशास्त्रीय दृष्टि से लिखे गए थे; इसलिए इन्हें आदिवासी समुदायों की अपनी मौखिक परंपराओं, स्थानीय इतिहास और वर्तमान शोध के साथ मिलाकर देखना अधिक उचित है। समाचार का उद्देश्य: आदिवासी इतिहास से जुड़े पुराने दस्तावेजों को सामने लाना और पाठकों को उनके अध्ययन, स्रोत-समीक्षा तथा आदिवासी दृष्टिकोण से पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रेरित करना।

1 hr ago
user_Information About Tribal Areas
Information About Tribal Areas
Farmer गिर्वा, उदयपुर, राजस्थान•
1 hr ago
2097102f-c1c0-475b-b10f-7bb05c8efe7a

ऐतिहासिक दस्तावेजों में आदिवासी समाज: अंग्रेजी दौर में लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तकें विशेष समाचार उदयपुर। आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं, भाषाओं और सामाजिक जीवन को समझने के लिए औपनिवेशिक काल में तैयार की गई अनेक पुस्तकों और प्रशासनिक रिपोर्टों का आज भी ऐतिहासिक महत्व है। इन ग्रंथों में भील सहित भारत के विभिन्न आदिवासी समुदायों के बारे में तत्कालीन अधिकारियों, सर्वेक्षकों और मानवशास्त्रियों द्वारा विवरण दर्ज किए गए हैं। उदयपुर और राजस्थान के संदर्भ में K. D. Erskine की A Gazetteer of the Udaipur State विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसके शीर्षक में ही “With a Chapter on the Bhils” का उल्लेख मिलता है। इसी प्रकार भील और अन्य आदिवासी समुदायों से संबंधित कई अन्य ग्रंथ भी औपनिवेशिक दौर के दस्तावेजी स्रोतों के रूप में सामने आते हैं। प्रमुख पुस्तकों की सूची जेम्स टॉड — Annals and Antiquities of Rajasthan — 1829 जॉन माल्कम — A Memoir of Central India — 1824 K. D. अर्स्किन — A Gazetteer of the Udaipur State (With a Chapter on the Bhils) — 1908 C. E. लुआर्ड — Bhil Handbook — 1909 E. T. डाल्टन — Descriptive Ethnology of Bengal — 1872 H. H. रिजले — The Tribes and Castes of Bengal — 1891 एडगर थर्स्टन — Castes and Tribes of Southern India — 1909, 7 खंड W. क्रुक — The Tribes and Castes of the North-Western Provinces and Oudh — 1896, 4 खंड W. W. हंटर — Annals of Rural Bengal — 1868 H. हेंडले — Memoir of the Bhils — 1875 जॉर्ज ग्रियर्सन — Linguistic Survey of India — भीली भाषा संबंधी सामग्री वेरियर एल्विन — The Baiga — 1939 वेरियर एल्विन — The Agaria — 1942 वेरियर एल्विन — Maria Murder and Suicide — 1950, गोंड/माड़िया समुदायों पर S. H. थॉम्पसन — Report on the Bhil Tribes of Malwa — 1890 R. V. रसेल एवं हीरालाल — The Tribes and Castes of the Central Provinces of India — 1916, 4 खंड इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत इन पुस्तकों में दर्ज सामग्री से उस समय के आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक संरचना, रीति-रिवाज, भाषा, आजीविका, प्रशासन और सांस्कृतिक जीवन के बारे में जानकारी मिलती है। हालांकि इन ग्रंथों को पढ़ते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इनमें से अनेक विवरण औपनिवेशिक प्रशासन और उस दौर की मानवशास्त्रीय दृष्टि से लिखे गए थे; इसलिए इन्हें आदिवासी समुदायों की अपनी मौखिक परंपराओं, स्थानीय इतिहास और वर्तमान शोध के साथ मिलाकर देखना अधिक उचित है। समाचार का उद्देश्य: आदिवासी इतिहास से जुड़े पुराने दस्तावेजों को सामने लाना और पाठकों को उनके अध्ययन, स्रोत-समीक्षा तथा आदिवासी दृष्टिकोण से पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रेरित करना।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • शुभ मुहूर्त में बहने अपने भाइयों की कलाई पर बांधेगी रक्षासूत्र वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र के भटेवर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में शुक्रवार को भाई-बहन के असीम स्नेह व अटूट विश्वास का पर्व रक्षाबंधन पारंपरिक श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस पर्व को लेकर बाजारों में रौनक छा गई है। बाजारों में राखियों एवं रंग-बिरंगी मिठाइयों की दुकानों पर महिलाओं के साथ युवतियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पंडित किशन लाल आमेटा व कानू आमेटा ने बताया की पंचांग गणना के अनुसार इस बार रक्षाबंधन बेहद खास है। इस त्योहार में पूरे दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा।
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    शुभ मुहूर्त में बहने अपने भाइयों की कलाई पर बांधेगी रक्षासूत्र
वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र के भटेवर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में शुक्रवार को भाई-बहन के असीम स्नेह व अटूट विश्वास का पर्व रक्षाबंधन पारंपरिक श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस पर्व को लेकर बाजारों में रौनक छा गई है। बाजारों में राखियों एवं रंग-बिरंगी मिठाइयों की दुकानों पर महिलाओं के साथ युवतियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पंडित किशन लाल आमेटा व कानू आमेटा ने बताया की पंचांग गणना के अनुसार इस बार रक्षाबंधन बेहद खास है। इस त्योहार में पूरे दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा।
    user_Local Tv News Channel
    Local Tv News Channel
    वल्लभनगर, उदयपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • मोलेला में जिला स्तरीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हुईं सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ एवं विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़
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    मोलेला में जिला स्तरीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हुईं सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ एवं विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़
    user_Suresh Bagora
    Suresh Bagora
    Newspaper publisher राजसमंद, राजसमंद, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • jalchaki nathdawara road par shreenath ice factory ka roj tempo khada rehta roh accident hote hai aaj subah hi ek accident hua tha प्रशासन जानते हुए भी अंजान बन रहा हैं त्रिव गति से इसका समाधान करे कृपया इसकी दुकान की कागज की जाँच करवाए और हम कुछ बोलते है गालि गलौच करता है इसके द्वारा अनधिकृत वाहन खड़े करता है और दूसरी दुकान पे ग्राहकों को वहां खड़ा करने की जगह नहीं मिलती है जिसकी वजह से चालान सही लोगों को भरना पड़ता है इसकी दुकान पे शाम 7 बजे के बाद वहां खड़े होते है जिसकी वजह से दोपहिया वाहन ओर पैदल चलने वाली को बहुत परेशानी होती है और कुछ बोलते है तो लड़ने के लिए तैयार हो जाता है
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    jalchaki nathdawara road par shreenath ice factory ka roj tempo khada rehta roh accident hote hai aaj subah hi ek accident hua tha प्रशासन जानते हुए भी अंजान बन रहा हैं त्रिव गति से इसका समाधान करे कृपया इसकी दुकान की कागज की जाँच करवाए और हम कुछ बोलते है गालि गलौच करता है इसके द्वारा अनधिकृत वाहन खड़े करता है और दूसरी दुकान पे ग्राहकों को वहां खड़ा करने की जगह नहीं मिलती है जिसकी वजह से चालान सही लोगों को भरना पड़ता है इसकी दुकान पे शाम 7 बजे के बाद वहां खड़े होते है जिसकी वजह से दोपहिया वाहन ओर पैदल चलने वाली को बहुत परेशानी होती है और कुछ बोलते है तो लड़ने के लिए तैयार हो जाता है
    user_Boss paliwal
    Boss paliwal
    राजसमंद, राजसमंद, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • नगर परिषद सभापति की सामान्य सीट घोषणा के बाद पालीवाल समाज के स्वर मुखर, तरुण जोशी राजसमंद 9414 239 644 नगर परिषद आम चुनाव 2026, सभापति की सीट ओपन होने के बाद पालीवाल समाज के भी स्वर मुखर, पालीवाल समाज ने संयुक्त बैठक कर चुनाव को लेकर की आवश्यक मांग, सामान्य सीटों पर सामान्य व्यक्ति को बनाया जाए दावेदार, सामान्य सीटों पर अन्य को दावेदार बनाने पर राजनीतिक प्रत्याशी के विरोध की चेतावनी, पालीवाल वेलफेयर सोसाइटी अध्यक्ष हरगोविंद पालीवाल की अध्यक्षता में समाज के भवन में हुई बैठक,
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    नगर परिषद सभापति की सामान्य सीट घोषणा के बाद पालीवाल समाज के स्वर मुखर,
तरुण जोशी 
राजसमंद 
9414 239 644 
नगर परिषद आम चुनाव 2026, 
सभापति की सीट ओपन होने के बाद पालीवाल समाज के भी स्वर मुखर, 
पालीवाल समाज ने संयुक्त बैठक कर चुनाव को लेकर की आवश्यक मांग, 
सामान्य सीटों पर सामान्य व्यक्ति को बनाया जाए दावेदार,
सामान्य सीटों पर अन्य को दावेदार बनाने पर राजनीतिक प्रत्याशी के विरोध की चेतावनी,
पालीवाल वेलफेयर सोसाइटी अध्यक्ष हरगोविंद पालीवाल की अध्यक्षता में समाज के भवन में हुई बैठक,
    user_Tarun Joshi, Rajsamand
    Tarun Joshi, Rajsamand
    राजसमंद, राजसमंद, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • राजसमंद नगर परिषद चुनाव में वार्ड नंबर 6 से आशा देवी पालीवाल ने पहले नामांकन उपखंड अधिकारी को सोपा
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    राजसमंद नगर परिषद चुनाव में वार्ड नंबर 6 से आशा देवी पालीवाल ने पहले नामांकन उपखंड अधिकारी को सोपा
    user_फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांद
    फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांद
    Photographer राजसमंद, राजसमंद, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • आबूरोड से खबर रीको पुलिस ने बाइक चोरी के दो आरोपियों को किया गिरफ्तार चोरी की गई दो बाइकों को किया बरामद SP पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ के निर्देशन DSP जितेन्द्रसिह राठौड के सुपर .... @SirohiPolice @RajPoliceHelp #AbuRoad #Sirohi #RajasthanNews #BreakingNews #CrimeNews
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    आबूरोड से खबर

रीको पुलिस ने बाइक चोरी के दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

चोरी की गई दो बाइकों को किया बरामद

SP पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ के निर्देशन

DSP जितेन्द्रसिह राठौड के सुपर ....
@SirohiPolice @RajPoliceHelp 
#AbuRoad #Sirohi #RajasthanNews #BreakingNews #CrimeNews
    user_SIROHI TODAY NEWS
    SIROHI TODAY NEWS
    Local News Reporter पिंडवाड़ा, सिरोही, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • नींबू में सरसों का तेल डालकर बनाएं घरेलू उपाय, मच्छरों से राहत का दावा घर में मच्छरों की बढ़ती परेशानी के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक घरेलू नुस्खा लोगों का ध्यान खींच रहा है। मच्छरों से परेशान लोग अक्सर तरह-तरह के घरेलू उपाय आजमाते हैं। इन दिनों नींबू, सरसों के तेल, कपूर, लौंग और अजवाइन से जुड़ा एक ऐसा ही नुस्खा चर्चा में है। बताया जा रहा है कि इसके लिए एक ताजा नींबू लेकर उसके ऊपरी हिस्से को काटा जाता है। इसके बाद चम्मच की मदद से नींबू के अंदर का गूदा निकालकर उसमें करीब एक चम्मच सरसों का तेल, दो कपूर की टिकिया, दो-तीन लौंग और थोड़ी अजवाइन डालने की बात कही जाती है। इसके बाद इसमें बाती लगाकर इसे ऐसे स्थान पर रखने का सुझाव दिया जाता है, जहां मच्छरों का आना-जाना ज्यादा हो। दावा है कि सरसों के तेल, कपूर, लौंग और अजवाइन की गंध से मच्छर उस जगह से दूर भाग सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस घरेलू नुस्खे से सभी मच्छरों के मरने या घर से पूरी तरह खत्म हो जाने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार मच्छरों से बचाव के लिए घर में पानी जमा न होने देना, खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाना और आवश्यकता पड़ने पर प्रमाणित मच्छर-रोधी उत्पादों का इस्तेमाल करना ज्यादा प्रभावी उपाय हो सकते हैं। सावधानी जरूरी: कपूर और सरसों का तेल ज्वलनशील हो सकते हैं। यदि बाती जलाकर यह उपाय किया जाए तो इसे पर्दे, कागज, कपड़े या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें और बच्चों तथा पालतू जानवरों की पहुंच से भी दूर रखें। इसे बिना निगरानी के जलता हुआ न छोड़ें। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले उसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता की पुष्टि करना जरूरी है।
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    नींबू में सरसों का तेल डालकर बनाएं घरेलू उपाय, मच्छरों से राहत का दावा
घर में मच्छरों की बढ़ती परेशानी के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक घरेलू नुस्खा लोगों का ध्यान खींच रहा है।
मच्छरों से परेशान लोग अक्सर तरह-तरह के घरेलू उपाय आजमाते हैं। इन दिनों नींबू, सरसों के तेल, कपूर, लौंग और अजवाइन से जुड़ा एक ऐसा ही नुस्खा चर्चा में है।
बताया जा रहा है कि इसके लिए एक ताजा नींबू लेकर उसके ऊपरी हिस्से को काटा जाता है। इसके बाद चम्मच की मदद से नींबू के अंदर का गूदा निकालकर उसमें करीब एक चम्मच सरसों का तेल, दो कपूर की टिकिया, दो-तीन लौंग और थोड़ी अजवाइन डालने की बात कही जाती है। इसके बाद इसमें बाती लगाकर इसे ऐसे स्थान पर रखने का सुझाव दिया जाता है, जहां मच्छरों का आना-जाना ज्यादा हो।
दावा है कि सरसों के तेल, कपूर, लौंग और अजवाइन की गंध से मच्छर उस जगह से दूर भाग सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस घरेलू नुस्खे से सभी मच्छरों के मरने या घर से पूरी तरह खत्म हो जाने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार मच्छरों से बचाव के लिए घर में पानी जमा न होने देना, खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाना और आवश्यकता पड़ने पर प्रमाणित मच्छर-रोधी उत्पादों का इस्तेमाल करना ज्यादा प्रभावी उपाय हो सकते हैं।
सावधानी जरूरी: कपूर और सरसों का तेल ज्वलनशील हो सकते हैं। यदि बाती जलाकर यह उपाय किया जाए तो इसे पर्दे, कागज, कपड़े या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें और बच्चों तथा पालतू जानवरों की पहुंच से भी दूर रखें। इसे बिना निगरानी के जलता हुआ न छोड़ें।
सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले उसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता की पुष्टि करना जरूरी है।
    user_PMF NEWS
    PMF NEWS
    Content Creator (YouTuber) बाली, पाली, राजस्थान•
    1 hr ago
  • भटेवर क्षेत्र में खुशहाली की कामना को लेकर चारभुजा नाथ की महाप्रसादी का आयोजन, ग्रामीणों ने की इंद्रदेव की आराधना वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र के भटेवर कस्बे में अच्छी बरसात, फसलों की वृद्धि व खुशहाली की कामना को लेकर चारभुजानाथ की महाप्रसादी का आयोजन हुआ। इस दौरान ग्रामीणों ने इंद्रदेव की आराधना की। इस धार्मिक आयोजन को लेकर के समस्त ग्रामवासी चारभुजा नाथ के मंदिर पर एकत्रित हुए। इसके बाद ढोल की थाप पर ग्रामवासी गली मोहल्ले में होते हुए बाईपास चौराहे के पास स्थित महादेवजी के मंदिर पर पहुंचे। मंदिर पर छोगालाल पटेल, प्रकाश पटेल, परसराम पटेल सहित गांव के पंच पटेलों की मौजूदगी में विशेष पूजा अर्चना की गई। पंडित किशन लाल आमेटा के वैदिक मंत्रोचार के बीच विधिवत पूजा अर्चना करके भोलेनाथ का अभिषेक किया।
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    भटेवर क्षेत्र में खुशहाली की कामना को लेकर चारभुजा नाथ की महाप्रसादी का आयोजन, ग्रामीणों ने की इंद्रदेव की आराधना
वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र के भटेवर कस्बे में अच्छी बरसात, फसलों की वृद्धि व खुशहाली की कामना को लेकर चारभुजानाथ की महाप्रसादी का आयोजन हुआ। इस दौरान ग्रामीणों ने इंद्रदेव की आराधना की। इस धार्मिक आयोजन को लेकर के समस्त ग्रामवासी चारभुजा नाथ के मंदिर पर एकत्रित हुए। इसके बाद ढोल की थाप पर ग्रामवासी गली मोहल्ले में होते हुए बाईपास चौराहे के पास स्थित महादेवजी के मंदिर पर पहुंचे। मंदिर पर छोगालाल पटेल, प्रकाश पटेल, परसराम पटेल सहित गांव के पंच पटेलों की मौजूदगी में विशेष पूजा अर्चना की गई। पंडित किशन लाल आमेटा के वैदिक मंत्रोचार के बीच विधिवत पूजा अर्चना करके भोलेनाथ का अभिषेक किया।
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    वल्लभनगर, उदयपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
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