*‼️अजमेर दक्षिण में कांग्रेस की सेंध, ज़मीन तैयार।‼️*👍 _*उत्तर में भी भाजपा का किला दरका!*🫢 *‼️अजमेर दक्षिण में कांग्रेस की सेंध, ज़मीन तैयार।‼️*👍 _*उत्तर में भी भाजपा का किला दरका!*🫢 *निकाय चुनावों ने एक बार फिर राजनीति के उन सूरमाओं को आईना दिखा दिया है, जो हर चुनाव के बाद अपने-अपने दल की स्थायी सल्तनत का ऐलान करने लगते हैं।*😠 *अजमेर के नतीज़ों ने साफ़ कर दिया है कि जनता किसी दल की जागीर नहीं होती और वोटर किसी पार्टी का आजीवन बंधुआ समर्थक भी नहीं। जिस तरफ काम, संपर्क और भरोसा दिखाई देता है, उधर ही मतदाता का अंगूठा घूम जाता है।*👍 *अजमेर के दक्षिणी हिस्से के 42 वार्डों में कांग्रेस का 25 सीटों तक पहुंच जाना और भाजपा का 9 पर सिमट जाना महज आंकड़ा नहीं है। यह उस राजनीतिक ज़मीन में कांग्रेस की सेंध है, जिसे भाजपा लंबे समय से अपना मजबूत इलाका मानकर चल रही थी।*😟 *दूसरी तरफ उत्तर के 38 वार्डों में भाजपा ने 23 सीटें जीतकर अपना किला बचाया तो कांग्रेस 12 पर अटक गई। यानी शहर ने दोनों दलों को एक ही चुनाव में दो अलग-अलग आईने दिखा दिए।*😝 *दक्षिण ने कांग्रेस से कहा—तुम्हारे लिए ज़मीन तैयार हो चुकी है।*💁♂️ *उत्तर ने भाजपा से कहा—अभी तुम्हारा क़िला पूरी तरह गिरा नहीं है, लेकिन दीवारों की दरारें दिखाई देने लगी हैं।*🫢 *सबसे दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण में कांग्रेस की बढ़त केवल सीटों की संख्या नहीं है। यह उस राजनीतिक धारणा को चुनौती है कि कुछ इलाके किसी दल के लिए हमेशा सुरक्षित रहते हैं। कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों, प्रत्याशियों की स्वीकार्यता और भाजपा विरोधी माहौल को जिस तरह सीटों में बदला, उससे भाजपा के लिए आत्ममंथन की पर्याप्त सामग्री निकलती है।*🙋♂️ *भाजपा के लिए उत्तर का परिणाम राहत की ख़बर ज़रूर है, मगर इसे विजय का ऐसा प्रमाणपत्र भी नहीं बनाया जा सकता जिसे लेकर पूरी बारात निकाल दी जाए।*🥺 *कुल 38 में से 23 सीटें जीतना निश्चित रूप से मजबूत प्रदर्शन है, लेकिन सवाल उन 12 सीटों का भी है जो कांग्रेस के खाते में गईं और उन तीन सीटों का भी, जहां निर्दलीयों ने अपनी मौजूदगी दर्ज़ कराई। राजनीति में ख़तरा अक्सर विरोधी की बड़ी जीत से कम और अपने मजबूत इलाके में धीरे-धीरे खिसकती ज़मीन से ज़्यादा पैदा होता है।*💯 *दक्षिण में तो टिकट-बग़ावत ने भी भाजपा का खेल बिगाड़ा। जिन 46 सीटों पर पहले दावा किया गया था, उनमें से 24 जीतने की उम्मीद थी, लेकिन अंततः 9 पर ही सिमटना पड़ा। विधायक का कार्यकर्ताओं और आमजन के साथ रुखा व्यवहार, जनता जिसे चाहती है उसे टिकट न देकर अपने चहेतों क़ो टिकट वितरण से फैली नाराज़गी, स्थानीय नेताओं की असहमति और संगठन के भीतर पैदा हुई खींचतान का ख़ामियाज़ा मैदान में खड़े हुए उम्मीदवारों को भुगतना पड़ा।*💯 *दोस्तों! राजनीति में बग़ावत कभी अकेली नहीं आती, वह अपने साथ कुछ वोट भी ले जाती है और यही वह बिंदु है जहां दोनों दलों को नतीज़ों को केवल हार-जीत के चश्मे से देखने की बजाय राजनीतिक पोस्टमार्टम की तरह देखना चाहिए।*💁♂️ *कांग्रेस को दक्षिण की जीत से यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि उसने अजमेर की राजनीतिक सल्तनत वापस हासिल कर ली है। उत्तर की 12 सीटें उसे चेतावनी दे रही हैं कि रास्ता अभी बहुत लंबा है। वहीं भाजपा को उत्तर की 23 सीटों पर ख़ुशी मनाने का पूरा अधिकार है, लेकिन दक्षिण की 9 सीटें उसके संगठनात्मक आत्मविश्वास पर सवालिया निशान भी लगा रही हैं।*😵💫 *इन चुनावों का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि अब चुनाव केवल पार्टी के नाम पर नहीं जीते जाते। प्रत्याशी कौन है, उसका जनता से रिश्ता कैसा है, उसने अपने इलाके में कितना समय दिया, संगठन उसके साथ कितना खड़ा रहा और टिकट बांटते समय स्थानीय भावनाओं को कितना समझा गया—इन सबका हिसाब मतदाता अपनी उंगली से कर देता है।*👍 *चुनाव से पहले नेता जाति, समीकरण, गुट और गणित की लंबी-लंबी जोड़-घटाव करते हैं। चुनाव के बाद ईवीएम एक ही गणित बताती है—जनता किससे ख़ुश है और किससे नाराज़।*😯 *अजमेर के इन नतीज़ों को किसी एक दल की जीत या दूसरे की हार के रूप में देखना अधूरा होगा। यह दरअसल दोनों दलों के लिए जनता का रिपोर्ट कार्ड है।*🙋♂️ *भाजपा को दक्षिण में अपने ढह चुके किले की मरम्मत करनी होगी और कांग्रेस को उत्तर में अपनी ज़मीन बनाने के लिए जश्न से बाहर निकलना होगा।क्योंकि निकाय चुनावों की यह छोटी-सी सियासी प्रयोगशाला एक बड़ा सबक दे गई है—न जनता स्थायी दुश्मन है, न कोई दल स्थायी मालिक।*🤨 *वोटर सिर्फ़ काम का साथी है। जो उसे समझेगा, वही अगली बार किले में झंडा फहराएगा।*👍
*‼️अजमेर दक्षिण में कांग्रेस की सेंध, ज़मीन तैयार।‼️*👍 _*उत्तर में भी भाजपा का किला दरका!*🫢 *‼️अजमेर दक्षिण में कांग्रेस की सेंध, ज़मीन तैयार।‼️*👍 _*उत्तर में भी भाजपा का किला दरका!*🫢 *निकाय चुनावों ने एक बार फिर राजनीति के उन सूरमाओं को आईना दिखा दिया है, जो हर चुनाव के बाद अपने-अपने दल की स्थायी सल्तनत का ऐलान करने लगते हैं।*😠 *अजमेर के नतीज़ों ने साफ़ कर दिया है कि जनता किसी दल की जागीर नहीं होती और वोटर किसी पार्टी का आजीवन बंधुआ समर्थक भी नहीं। जिस तरफ काम, संपर्क और भरोसा दिखाई देता है, उधर ही मतदाता का अंगूठा घूम जाता है।*👍 *अजमेर के दक्षिणी हिस्से के 42 वार्डों में कांग्रेस का 25 सीटों तक पहुंच जाना और भाजपा का 9 पर सिमट जाना महज आंकड़ा नहीं है। यह उस राजनीतिक ज़मीन में कांग्रेस की सेंध है, जिसे भाजपा लंबे समय से अपना मजबूत इलाका मानकर चल रही थी।*😟 *दूसरी तरफ उत्तर के 38 वार्डों में भाजपा ने 23 सीटें जीतकर अपना किला बचाया तो कांग्रेस 12 पर अटक गई। यानी शहर ने दोनों दलों को एक ही चुनाव में दो अलग-अलग आईने दिखा दिए।*😝 *दक्षिण ने कांग्रेस से कहा—तुम्हारे लिए ज़मीन तैयार हो चुकी है।*💁♂️ *उत्तर ने भाजपा से कहा—अभी तुम्हारा क़िला पूरी तरह गिरा नहीं है, लेकिन दीवारों की दरारें दिखाई देने लगी हैं।*🫢 *सबसे दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण में कांग्रेस की बढ़त केवल सीटों की संख्या नहीं है। यह उस राजनीतिक धारणा को चुनौती है कि कुछ इलाके किसी दल के लिए हमेशा सुरक्षित रहते हैं। कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों, प्रत्याशियों की स्वीकार्यता और भाजपा विरोधी माहौल को जिस तरह सीटों में बदला, उससे भाजपा के लिए आत्ममंथन की पर्याप्त सामग्री निकलती है।*🙋♂️ *भाजपा के लिए उत्तर का परिणाम राहत की ख़बर ज़रूर है, मगर इसे विजय का ऐसा प्रमाणपत्र भी नहीं बनाया जा सकता जिसे लेकर पूरी बारात निकाल दी जाए।*🥺 *कुल 38 में से 23 सीटें जीतना निश्चित रूप से मजबूत प्रदर्शन है, लेकिन सवाल उन 12 सीटों का भी है जो कांग्रेस के खाते में गईं और उन तीन सीटों का भी, जहां निर्दलीयों ने अपनी मौजूदगी दर्ज़ कराई। राजनीति में ख़तरा अक्सर विरोधी की बड़ी जीत से कम और अपने मजबूत इलाके में धीरे-धीरे खिसकती ज़मीन से ज़्यादा पैदा होता है।*💯 *दक्षिण में तो टिकट-बग़ावत ने भी भाजपा का खेल बिगाड़ा। जिन 46 सीटों पर पहले दावा किया गया था, उनमें से 24 जीतने की उम्मीद थी, लेकिन अंततः 9 पर ही सिमटना पड़ा। विधायक का कार्यकर्ताओं और आमजन के साथ रुखा व्यवहार, जनता जिसे चाहती है उसे टिकट न देकर अपने चहेतों क़ो टिकट वितरण से फैली नाराज़गी, स्थानीय नेताओं की असहमति और संगठन के भीतर पैदा हुई खींचतान का ख़ामियाज़ा मैदान में खड़े हुए उम्मीदवारों को भुगतना पड़ा।*💯 *दोस्तों! राजनीति में बग़ावत कभी अकेली नहीं आती, वह अपने साथ कुछ वोट भी ले जाती है और यही वह बिंदु है जहां दोनों दलों को नतीज़ों को केवल हार-जीत के चश्मे से देखने की बजाय राजनीतिक पोस्टमार्टम की तरह देखना चाहिए।*💁♂️ *कांग्रेस को दक्षिण की जीत से यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि उसने अजमेर की राजनीतिक सल्तनत वापस हासिल कर ली है। उत्तर की 12 सीटें उसे चेतावनी दे रही हैं कि रास्ता अभी बहुत लंबा है। वहीं भाजपा को उत्तर की 23 सीटों पर ख़ुशी मनाने का पूरा अधिकार है, लेकिन दक्षिण की 9 सीटें उसके संगठनात्मक आत्मविश्वास पर सवालिया निशान भी लगा रही हैं।*😵💫 *इन चुनावों का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि अब चुनाव केवल पार्टी के नाम पर नहीं जीते जाते। प्रत्याशी कौन है, उसका जनता से रिश्ता कैसा है, उसने अपने इलाके में कितना समय दिया, संगठन उसके साथ कितना खड़ा रहा और टिकट बांटते समय स्थानीय भावनाओं को कितना समझा गया—इन सबका हिसाब मतदाता अपनी उंगली से कर देता है।*👍 *चुनाव से पहले नेता जाति, समीकरण, गुट और गणित की लंबी-लंबी जोड़-घटाव करते हैं। चुनाव के बाद ईवीएम एक ही गणित बताती है—जनता किससे ख़ुश है और किससे नाराज़।*😯 *अजमेर के इन नतीज़ों को किसी एक दल की जीत या दूसरे की हार के रूप में देखना अधूरा होगा। यह दरअसल दोनों दलों के लिए जनता का रिपोर्ट कार्ड है।*🙋♂️ *भाजपा को दक्षिण में अपने ढह चुके किले की मरम्मत करनी होगी और कांग्रेस को उत्तर में अपनी ज़मीन बनाने के लिए जश्न से बाहर निकलना होगा।क्योंकि निकाय चुनावों की यह छोटी-सी सियासी प्रयोगशाला एक बड़ा सबक दे गई है—न जनता स्थायी दुश्मन है, न कोई दल स्थायी मालिक।*🤨 *वोटर सिर्फ़ काम का साथी है। जो उसे समझेगा, वही अगली बार किले में झंडा फहराएगा।*👍
- Post by अब्दुल सत्तार3
- व्हाट्सएप स्टेटस लगाए और पैसे कमाने का मौका पाए लाइक करें सब्सक्राइब करें Ajmer दूसरे राउंड में कांग्रेस के जीते हुए पार्षद पहुंच शपथ लेने दैनिक न्यूज़ अजमेर1
- अजमेर में दुकान का ताला तोड़कर चोरी! ₹70 हजार तक की नकदी पार, CCTV में कैद हुआ चोर अजमेर के कृष्ण गंज थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर में एक दुकान में चोरी की वारदात सामने आई है। 14 सितंबर की सुबह करीब 3 से 4 बजे अज्ञात चोरों ने दुकान का ताला तोड़कर गल्ले में रखे ₹1600 नकद और मिट्टी के गुल्लक में जमा करीब ₹60 से ₹70 हजार की रकम चोरी कर ली। वारदात दुकान में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई। पीड़ित की शिकायत पर कृष्ण गंज थाना पुलिस ने BNS की धारा 305(a) के तहत मामला दर्ज कर CCTV फुटेज के आधार पर जांच और चोरों की तलाश शुरू कर दी है।1
- राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में भाजपा को मिला जनादेश जनसेवा, विकास और सुशासन के संकल्प पर जनता की मुहर है। हमारी सरकार शहरी विकास, बेहतर नागरिक सुविधाओं, सुदृढ़ आधारभूत ढांचे और पारदर्शी सुशासन के माध्यम से शहरों के सर्वांगीण विकास को नई गति दे रही है। इस ऐतिहासिक जनादेश के लिए प्रदेश की देवतुल्य जनता का हृदय से धन्यवाद एवं आभार! भाजपा के सभी कर्मठ कार्यकर्ताओं को उनके अथक परिश्रम और समर्पण के लिए हार्दिक बधाई! #सशक्त_शहर_समृद्ध_राजस्थान #कोने_कोने_में_भाजपा1
- 🌧️ अजमेर में मूसलाधार बारिश, गर्मी से मिली राहत 🌧️ अजमेर शहर और आसपास के क्षेत्रों में आज मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में छाए घने बादलों के बाद हुई मूसलाधार बारिश से सड़कों पर पानी बह निकला और मौसम सुहावना हो गया। कई दिनों से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बारिश ने बड़ी राहत दी। 🌧️☔ 🌧️ अजमेर में मूसलाधार बारिश, गर्मी से मिली राहत 🌧️ अजमेर शहर और आसपास के क्षेत्रों में आज मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में छाए घने बादलों के बाद हुई मूसलाधार बारिश से सड़कों पर पानी बह निकला और मौसम सुहावना हो गया। कई दिनों से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बारिश ने बड़ी राहत दी। 🌧️☔ अजमेर में बरसे मेघ, गर्मी से मिली राहत। #Ajmer #AjmerNews #Rain #बारिश #मूसलाधारबारिश #मौसम #Rajasthan1
- नसीराबाद के लोहरवाड़ा में गूंजे गणपति के जयकारे, श्री सिद्धिविनायक महाराज का विशाल मेला धूमधाम से भरा नसीराबाद के लोहरवाड़ा में गूंजे गणपति के जयकारे, श्री सिद्धिविनायक महाराज का विशाल मेला धूमधाम से भरा1
- पीसांगन :नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए आज जीरो नामांकन,कल नामांकन की आखिरी तारीख... पीसांगन नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव के पहले दिन आज एक भी पर्चा दाखिल नहीं हुआ। रिटर्निंग अधिकारी मोहन चौधरी के अनुसार नामांकन 15-16 सितंबर तक होना है। कल 16 सितंबर आखिरी तारीख है। 17 को जांच, आवश्यक हुआ तो 21 को होगा मतदान।2
- ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना’ के ऐतिहासिक MoA पर हस्ताक्षर के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी एवं माननीय केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल जी का हार्दिक आभार! राजस्थान सहित 6 राज्यों के लिए यह परियोजना जल को विकास की नई धारा से जोड़ते हुए भविष्य की जल-सुरक्षा को मजबूत करेगी।1