लाखेरी में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उजागर: सड़क पर तड़पते बुजुर्ग की मौत, मददगार पत्रकार ही बना निशाना लाखेरी - बुधवार को शहर में घटी एक दर्दनाक घटना ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया। सड़क पर अचेत पड़े एक बुजुर्ग की समय पर उपचार नहीं मिलने से मौत हो गई, जबकि उन्हें अस्पताल पहुंचाने वाला पत्रकार खुद विवादों में घिर गया। यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक व्यवस्थाओं की गंभीर खामियों और संवेदनहीनता को सामने लाता है। जानकारी के अनुसार करीब 70 वर्षीय हेमराज बैरवा पुत्र मोडूलाल बाटम बाजार स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के पास सड़क पर बेसुध अवस्था में पड़े मिले। मौके पर भीड़ जुटी रही, लेकिन मदद के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती रहीं। 108 एम्बुलेंस और अन्य माध्यमों से संपर्क के प्रयास हुए, लेकिन समय पर कोई राहत नहीं मिल सकी। इसी बीच एक पत्रकार ने मानवता का परिचय देते हुए अपने स्तर पर ऑटो की व्यवस्था कर बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या अस्पताल वास्तव में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार था? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ऑटो अस्पताल पहुंचने के बाद भी तत्काल उपचार या आपातकालीन सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। पत्रकार ने अपने सहयोगियों की मदद से स्ट्रेचर की व्यवस्था की, लेकिन तब तक बुजुर्ग की सांसें थम चुकी थीं। उन्हें वार्ड में ले जाकर बेड पर लिटाया गया और चिकित्सक के आने का इंतजार किया जाता रहा। कुछ देर बाद चिकित्सक पहुंचे और औपचारिक जांच की गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस बीच जब पत्रकार ने बुजुर्ग की स्थिति के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो स्थिति ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। अस्पताल परिसर में मौजूद एक वाहन चालक ने पत्रकार को बाहर निकालने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति पूर्व में भी विवादों में रहा है, फिर भी उसे पुनः जिम्मेदारी सौंपना कई सवाल खड़े करता है। स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब उसी चालक द्वारा पत्रकार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी गई। पुलिस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर मदद करने वाला ही क्यों कटघरे में खड़ा है? चिकित्सा प्रभारी शिशुपाल मीणा ने बताया कि वे उस समय अन्य कार्यों में व्यस्त थे और उन्हें घटना की तत्काल जानकारी नहीं थी। हालांकि, यह बयान भी व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठाता है कि आपातकालीन स्थिति में प्रभारी स्तर पर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्यों नहीं दिखी। यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है— क्या अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं केवल कागजों तक सीमित हैं? क्या जरूरत के समय चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित है? और सबसे बड़ा सवाल—यदि मददगारों को ही परेशान किया जाएगा, तो मानवता कैसे जीवित रहेगी? स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और अस्पतालों की आपातकालीन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जाए। यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि यदि अब भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो आमजन का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। मानवता और व्यवस्था के बीच खड़ी यह खाई जितनी जल्दी भरी जाए, उतना ही समाज के लिए बेहतर होगा।
लाखेरी में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उजागर: सड़क पर तड़पते बुजुर्ग की मौत, मददगार पत्रकार ही बना निशाना लाखेरी - बुधवार को शहर में घटी एक दर्दनाक घटना ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया। सड़क पर अचेत पड़े एक बुजुर्ग की समय पर उपचार नहीं मिलने से मौत हो गई, जबकि उन्हें अस्पताल पहुंचाने वाला पत्रकार खुद विवादों में घिर गया। यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक व्यवस्थाओं की गंभीर खामियों और संवेदनहीनता को सामने लाता है। जानकारी के अनुसार करीब 70 वर्षीय हेमराज बैरवा पुत्र मोडूलाल बाटम बाजार स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के पास सड़क पर बेसुध अवस्था में पड़े मिले। मौके पर भीड़ जुटी रही, लेकिन मदद के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती रहीं। 108 एम्बुलेंस और अन्य माध्यमों से संपर्क के प्रयास हुए, लेकिन समय पर कोई राहत नहीं मिल सकी। इसी बीच एक पत्रकार ने मानवता का परिचय देते हुए अपने स्तर पर ऑटो की व्यवस्था कर बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या अस्पताल वास्तव में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार था? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ऑटो अस्पताल पहुंचने के बाद भी तत्काल उपचार या आपातकालीन सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। पत्रकार ने अपने सहयोगियों की मदद से स्ट्रेचर की व्यवस्था की, लेकिन तब तक बुजुर्ग की सांसें थम चुकी थीं। उन्हें वार्ड में ले जाकर बेड पर लिटाया गया और चिकित्सक के आने का इंतजार किया जाता रहा। कुछ देर बाद चिकित्सक पहुंचे और औपचारिक जांच की गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस बीच जब पत्रकार ने बुजुर्ग की स्थिति के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो स्थिति ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। अस्पताल परिसर में मौजूद एक वाहन चालक ने पत्रकार को बाहर निकालने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति पूर्व में भी विवादों में रहा है, फिर भी उसे पुनः जिम्मेदारी सौंपना कई सवाल खड़े करता है। स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब उसी चालक द्वारा पत्रकार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी गई। पुलिस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर मदद करने वाला ही क्यों कटघरे में खड़ा है? चिकित्सा प्रभारी शिशुपाल मीणा ने बताया कि वे उस समय अन्य कार्यों में व्यस्त थे और उन्हें घटना की तत्काल जानकारी नहीं थी। हालांकि, यह बयान भी व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठाता है कि आपातकालीन स्थिति में प्रभारी स्तर पर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्यों नहीं दिखी। यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है— क्या अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं केवल कागजों तक सीमित हैं? क्या जरूरत के समय चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित है? और सबसे बड़ा सवाल—यदि मददगारों को ही परेशान किया जाएगा, तो मानवता कैसे जीवित रहेगी? स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और अस्पतालों की आपातकालीन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जाए। यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि यदि अब भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो आमजन का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। मानवता और व्यवस्था के बीच खड़ी यह खाई जितनी जल्दी भरी जाए, उतना ही समाज के लिए बेहतर होगा।
- सोनकच्छ में हनुमान जयंती: रणजीत हनुमान दरबार में विशाल भंडारा, उमड़ी भीड़,#mp_updates #sonkatchnews1
- सवाई माधोपुर आज दिनांक 2 अप्रैल 2026 को ज्येष्ठा मैत्रयी पुलिस अधीक्षक ने होटल एसोसिएशन की मीटिंग ली गई ।जिसमें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई । रणथंबोर रोड स्थित मैरिज गार्डन वालों द्वारा लाउडस्पीकर द्वारा शोर प्रदूषण व आतिशबाजी को लेकर तथा एफसीआई गोदाम के आगे वाहनों की कतार को लेकर जाम जैसी स्थिति एवं चौपाटी के आसपास भीख मांगने वालों यात्रियों को परेशान करने को लेकर तथा पर्यटक थाना खोलने एवं कोई समस्या आने पर लेड लाइन नंबर चालू करने की तथा गणेश धाम एवं हेलीपैड पर लाइटिंग की व्यवस्था व नाईट गस्त पुलिस द्वारा की जाने व रणथंबोर रोड से बजरी पत्थर की ट्रैक्टर ट्रोलिया काफी तेज गति से जाने से पर्यटक को खतरा होने के संबंध में अन्य बातों पर विचार विमर्श किया गया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक द्वारा उचित समाधान करने का आश्वासन दिया गया।1
- Post by राजू काँकोरिया खण्डार1
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- रोटेदा निवासी साहित्यकार देवकी दर्पण को काव्य कलश सारस्वत सम्मान से किया विभूषित1
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- सवाई माधोपुर रणथम्भौर नेशनल पार्क में टाइग्रेस सुल्ताना का बेटा मलंग फिर से श्रद्धालुओं के सामने आ गया। इस दौरान झाड़ियों में बैठा मलंग (आरबीटी-2511) 20 मिनट तक श्रद्धालुओं के सामने बैठा रहा। अचानक झाड़ियों में दिखे बाघ को देख श्रद्धालु सहम गए। इस दौरान बुधवार सुबह त्रिनेत्र गणेश मंदिर के रास्ते पर अटल सागर के पास झाड़ियों में बाघ बैठा नजर आया। इस बार मलंग रास्ते में नहीं था। इस वजह से ट्रैफिक प्रभावित नहीं हुआ। 15 मिनट बैठे रहने के बाद मलंग आमाघाटी की तरफ निकल गया।1
- Post by राजू काँकोरिया खण्डार1