समस्या आपकी पर्जन्य दर-दर भटक रहे न्याय की गुहार लगा रहे हैं पत्रकार भूपेंद्र सिंह परिहार [3/30, 11:10 PM] E72 विष्णु सोलंकी जी: *अजब सतना पुलिस* *अगर किसी शव का पीएम नहीं हुआ तो सतना पुलिस एक्सीडेंट के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करेगी।* मामला शहर में हुए एक एक्सीडेंट का है। जिसमें एक्सीडेंट होने पर संबंधित को जिला अस्पताल लाया जाता है। परिजन को डॉक्टर कोई बड़ी चोट नहीं बताते। इधर एक्सीडेंट करने वाले वाहन का मालिक भी परिजनों को नुकसान की भरपाई की बात करता है। *इधर सवाल ये है कि डॉक्टर ने एक्सीडेंट मामले की एमएलसी क्यों नहीं बनाई।* बहरहाल, होली की छुट्टी को देखते हुए डॉक्टरों ने मरीज को ठीक होने की बात कहते हुए छुट्टी दे दी। इधर घर पहुंचते ही फिर से तबियत बिगड़ी। जिसपर फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक,डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में मौत की वजह एक्सीडेंट बताया। इधर पुलिस ये कह रही पीएम नहीं हुआ इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। दूसरी सफाई ये भी दे रही कि घटना दिनांक को एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई। कुल मिला कर सतना में अब घटना की एफआईआर पुलिस की अपनी परिभाषा पर दर्ज होगी, भले किसी की जान चली गई हो। [3/30, 11:10 PM] E72 विष्णु सोलंकी जी: सफाई दी जा रही कि बीमा कम्पनियां अपना मजबूत वकील रखती है। जिससे उल्टा पुलिस की फजीहत होती है। सवाल ये है कि एफआईआर तो प्रारंभिक सूचना रिपोर्ट है। इसके बाद विवेचना में असली कहानी आएगी। लेकिन यहां पुलिस खुद ज्यूडिशियरी का रोल कर रही है। [3/30, 11:10 PM] E72 विष्णु सोलंकी जी: कानून के जानकारी के अनुसार इस मामले में यह स्थिति सामने आई है *पुलिस का यह कहना कि पोस्टमार्टम (PM) नहीं हुआ, इसलिए FIR दर्ज नहीं होगी” कानूनन सही नहीं है* कानूनी तरीके यह है: - FIR क्या है और कब दर्ज होती है? **FIR (First Information Report)** केवल *प्रारंभिक सूचना* होती है। यह दर्ज होती है जब किसी **संज्ञेय अपराध (cognizable offence)** की जानकारी पुलिस को मिलती है। •1. एक्सीडेंट में अगर **चोट या मौत** हुई है, तो यह संज्ञेय अपराध है (जैसे IPC की धारा 279, 337, 304A आदि) इसलिए **सिर्फ सूचना के आधार पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है** *पोस्टमार्टम इसका पूर्व शर्त नहीं है।* --- •2. पोस्टमार्टम (PM) की भूमिका क्या है? पोस्टमार्टम का काम है: * मौत का **सटीक कारण** पता करना * कोर्ट में **सबूत (evidence)** देना 👉 यह **जांच (investigation)** का हिस्सा है, 👉 **FIR दर्ज करने की शर्त नहीं है।** --- •3. सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन Lalita Kumari vs Government of Uttar Pradesh इस ऐतिहासिक फैसले में कहा गया: * अगर संज्ञेय अपराध की सूचना मिले → **FIR दर्ज करना अनिवार्य है** * पुलिस प्राथमिक जांच के बहाने FIR टाल नहीं सकती • यानी यहां भी पुलिस FIR दर्ज करने से बच नहीं सकती। --- •4. इस केस में क्या स्थिति बनती है? * एक्सीडेंट हुआ ✔️ * अस्पताल में भर्ती हुआ ✔️ * बाद में मौत हुई ✔️ * डॉक्टर ने मौत का कारण एक्सीडेंट बताया ✔️ 👉 ये सभी बातें **FIR दर्ज करने के लिए पर्याप्त हैं** --- • 5. सतना पुलिस तर्क दे रही है कि *(1) PM नहीं हुआ* कानून में कहीं नहीं लिखा कि PM के बिना FIR नहीं होगी *(2) उसी दिन रिपोर्ट क्यों नहीं दी* देरी (delay) FIR में हो सकती है यह सिर्फ जांच का विषय है, FIR रोकने का आधार नहीं --- असली समस्या ये है कि पुलिस *जांच शुरू करने से पहले ही निष्कर्ष निकाल रही है* * बीमा कंपनी और केस की जटिलता से बचने की कोशिश दिखती है * परिजनों को इधर-उधर भटकाया जा रहा है [3/30, 11:10 PM] E72 विष्णु सोलंकी जी: *सतना का धर्मेश चतुर्वेदी केस भी इसी प्रकृति का था। इसमें भी पीएम नहीं हुआ था, लेकिन FIR हुई थी।*
समस्या आपकी पर्जन्य दर-दर भटक रहे न्याय की गुहार लगा रहे हैं पत्रकार भूपेंद्र सिंह परिहार [3/30, 11:10 PM] E72 विष्णु सोलंकी जी: *अजब सतना पुलिस* *अगर किसी शव का पीएम नहीं हुआ तो सतना पुलिस एक्सीडेंट के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करेगी।* मामला शहर में हुए एक एक्सीडेंट का है। जिसमें एक्सीडेंट होने पर संबंधित को जिला अस्पताल लाया जाता है। परिजन को डॉक्टर कोई बड़ी चोट नहीं बताते। इधर एक्सीडेंट करने वाले वाहन का मालिक भी परिजनों को नुकसान की भरपाई की बात करता है। *इधर सवाल ये है कि डॉक्टर ने एक्सीडेंट मामले की एमएलसी क्यों नहीं बनाई।* बहरहाल, होली की छुट्टी को देखते हुए डॉक्टरों ने मरीज को ठीक होने की बात कहते हुए छुट्टी दे दी। इधर घर पहुंचते ही फिर से तबियत बिगड़ी। जिसपर फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक,डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में मौत की वजह एक्सीडेंट बताया। इधर पुलिस ये कह रही पीएम नहीं हुआ इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। दूसरी सफाई ये भी दे रही कि घटना दिनांक को एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई। कुल मिला कर सतना में अब घटना की एफआईआर पुलिस की अपनी परिभाषा पर दर्ज होगी, भले किसी की जान चली गई हो। [3/30, 11:10 PM] E72 विष्णु सोलंकी जी: सफाई दी जा रही कि बीमा कम्पनियां अपना मजबूत वकील रखती है। जिससे उल्टा पुलिस की फजीहत होती है। सवाल ये है कि एफआईआर तो प्रारंभिक सूचना रिपोर्ट है। इसके बाद विवेचना में असली कहानी आएगी। लेकिन यहां पुलिस खुद ज्यूडिशियरी का रोल कर रही है। [3/30, 11:10 PM] E72 विष्णु सोलंकी जी: कानून के जानकारी के अनुसार इस मामले में यह स्थिति सामने आई है *पुलिस का यह कहना कि पोस्टमार्टम (PM) नहीं हुआ, इसलिए FIR दर्ज नहीं होगी” कानूनन सही नहीं है* कानूनी तरीके यह है: - FIR क्या है और कब दर्ज होती है? **FIR (First Information Report)** केवल *प्रारंभिक सूचना* होती है। यह दर्ज होती है जब किसी **संज्ञेय अपराध (cognizable offence)** की जानकारी पुलिस को मिलती है। •1. एक्सीडेंट में अगर **चोट या मौत** हुई है, तो यह संज्ञेय अपराध है (जैसे IPC की धारा 279, 337, 304A आदि) इसलिए **सिर्फ सूचना के आधार पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है** *पोस्टमार्टम इसका पूर्व शर्त नहीं है।* --- •2. पोस्टमार्टम (PM) की भूमिका क्या है? पोस्टमार्टम का काम है: * मौत का **सटीक कारण** पता करना * कोर्ट में **सबूत (evidence)** देना 👉 यह **जांच (investigation)** का हिस्सा है, 👉 **FIR दर्ज करने की शर्त नहीं है।** --- •3. सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन Lalita Kumari vs Government of Uttar Pradesh इस ऐतिहासिक फैसले में कहा गया: * अगर संज्ञेय अपराध की सूचना मिले → **FIR दर्ज करना अनिवार्य है** * पुलिस प्राथमिक जांच के बहाने FIR टाल नहीं सकती • यानी यहां भी पुलिस FIR दर्ज करने से बच नहीं सकती। --- •4. इस केस में क्या स्थिति बनती है? * एक्सीडेंट हुआ ✔️ * अस्पताल में भर्ती हुआ ✔️ * बाद में मौत हुई ✔️ * डॉक्टर ने मौत का कारण एक्सीडेंट बताया ✔️ 👉 ये सभी बातें **FIR दर्ज करने के लिए पर्याप्त हैं** --- • 5. सतना पुलिस तर्क दे रही है कि *(1) PM नहीं हुआ* कानून में कहीं नहीं लिखा कि PM के बिना FIR नहीं होगी *(2) उसी दिन रिपोर्ट क्यों नहीं दी* देरी (delay) FIR में हो सकती है यह सिर्फ जांच का विषय है, FIR रोकने का आधार नहीं --- असली समस्या ये है कि पुलिस *जांच शुरू करने से पहले ही निष्कर्ष निकाल रही है* * बीमा कंपनी और केस की जटिलता से बचने की कोशिश दिखती है * परिजनों को इधर-उधर भटकाया जा रहा है [3/30, 11:10 PM] E72 विष्णु सोलंकी जी: *सतना का धर्मेश चतुर्वेदी केस भी इसी प्रकृति का था। इसमें भी पीएम नहीं हुआ था, लेकिन FIR हुई थी।*
- रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, संजय गांधी अस्पताल (SGMH) से एक बार फिर अनुशासनहीनता का मामला सामने आया है। अस्पताल के वार्ड के भीतर एक युवती द्वारा भोजपुरी गाने पर रील बनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। क्या है पूरा मामला? वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवती अस्पताल के वार्ड के अंदर मशहूर भोजपुरी गीत 'उड़वा तारु गर्दा' पर डांस कर रही है। बताया जा रहा है कि उक्त युवती अस्पताल में कार्यरत किसी ठेका कंपनी की कर्मचारी है, क्योंकि वीडियो में उसने अस्पताल का आईडी कार्ड भी पहन रखा है। मरीज के इलाज के लिए बने संवेदनशील क्षेत्र (वार्ड) में इस तरह के मनोरंजन और रील बनाने की घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने नाराजगी जाहिर की है। लोगों का कहना है कि जहां मरीज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हैं, वहां कर्मचारियों द्वारा रील बनाना न केवल मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि ड्यूटी के प्रति लापरवाही को भी दर्शाता है। अधीक्षक ने लिया कड़ा संज्ञान मामला चर्चा में आने के बाद संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा: "अस्पताल परिसर और खासकर वार्डों के भीतर इस तरह की गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। मामले की जानकारी मिलते ही जांच शुरू कर दी गई है। युवती की पहचान की जा रही है, जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित कर्मचारी और ठेका कंपनी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।" अस्पताल की छवि पर असर संजय गांधी अस्पताल विंध्य क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है, जहां रीवा के अलावा आसपास के कई जिलों से मरीज आते हैं। इससे पहले भी सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर अस्पताल सुर्खियों में रहा है। अब वार्ड के अंदर रील बनाने की इस घटना ने प्रबंधन के अनुशासन के दावों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, मध्य भारत न्यूज़ (अमरपाटन/रीवा)1
- सतना जिला चित्रकूट रघुवीर मंदिर में 108 बटुकों का हुआ सामूहिक उपनयन संस्कार1
- नवरात्र मेला के दौरान देशभक्ति जन सेवा का फर्ज और कर्तव्य निष्ठा का पालन करने वाले जवानो के प्रति मैहर पुलिस अधीक्षक ने अपने ऑफिशियल वेबसाइट से विडिओ किया पोस्ट मैहर। आस्था का केंद्र मां शारदा मंदिर में नवरात्र के दौरान सेवा और समर्पण भाव से किये गए कार्य क़ो लेकर मैहर पुलिस अधीक्षक ने अपने ऑफिशियल वेबसाइट से एक विडिओ पोस्ट किया, जिसमे पुलिस जवानो द्वारा विकलांग बुजुर्ग और असहाय लोगो क़ो सुरक्षित दर्शन कराकर एवं जरुरतमंद लोगों की मदद करके अपनी ड्यूटी का फर्ज निभाते हुए मानवता की मिशाल पेश की, यह कदम न केवल पुलिस की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी प्रदर्शित करता है। धन्यवाद, नवरात्र ड्यूटी में तैनात प्रदेश के सभी जवान व मैहर पुलिस का1
- Post by Unchehra news1
- बिजली एवं पानी की समस्याओ को लेकर पार्षद अमित अवस्थी ने घेरा.....1
- #आज_नागौद_विधान_सभा_के_ तहसील उचेहरा में #अखंड_भारत_के_निर्माता_ #प्रियदर्शी_चक्रवर्ती_दादा_सम्राट_अशोक_महान_ #जी_की_2330_वी जन्म जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुआ अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर आयोजक कमेटी द्वारा वा मंच संचालन महोदय द्वारा इस कार्यकम में मुझे भी अपनी विचार रखने का अवसर मिला आयोजक कमेटी वा आए हुए सभी सम्मानित प्रबुद्ध सामाजिक अतिथिगण वा युवा साथियों सभी को बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक स्वागत वंदन अभिनंदन सफ़ल आयोजन कमेटी वा सभी को बहुत बहुत साधुवाद 🙏🙏 #जिसकी_जितनी_संख्या_भारी_ #उसकी_उतनी_हिस्सेदारी_ #जातिगत_जनगणना_लागू_कराओ_ #ओबीसी_27_परसेंट_आरक्षण_लागू_करो_ #ओबीसी_13_परसेंट_होल्ड_हटाओ_ #ugc_bill_2026_लागू_करो_ #शिक्षा_स्वास्थ__बिजली_फ्री_करो_ _सादर_ ओबीसी दीपनारायण कुशवाहा नागौद ओबीसी महासभा विधान सभा अध्यक्ष नागौद वा चंद्रगुप्त सेना जिला उपाध्यक्ष सतना1
- *रामपुर बाघेलन थाना क्षेत्र के बेला चौकी क्षेत्र बेला सरकारी स्कूल के पास ऑटो और बाइक की सामने से टक्कर हुई। बाइक चालक शराब के नशे में थे और साथ में एक बोतल शराब भी थी। ऑटो रीवा की ओर से आ रही थी, जबकि बाइक बेला की ओर से आ रही थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऑटो में बैठे बुजुर्ग की नाक में चोट लग गई और वे घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने मदद की और उन्हें उपचार के लिए भेजा गया ।*1
- रीवा, मध्य प्रदेश रिपोर्टर: राहुल सोनी रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ एक 60 वर्षीय महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हत्यारों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए महिला का सिर धड़ से अलग कर दिया और हाथ भी तोड़ दिए। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। घटना का विवरण यह मामला रीवा जिले के बिछिया थाना क्षेत्र के लोही गांव का है। मृतक महिला की पहचान लीलावती पटेल (60 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, लीलावती घर में अकेली रहती थीं। सोमवार को जब काफी समय तक उनके घर में कोई हलचल नहीं हुई, तो ग्रामीणों को संदेह हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और तलाशी शुरू की। 2 घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद मिला शव मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 थानों की पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला। लगभग 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद, महिला का धड़ घर के पिछले हिस्से में क्षत-विक्षत हालत में मिला। हत्यारों ने महिला का सिर काटकर धड़ से दूर फेंक दिया था, जिसे पुलिस ने घर से कुछ दूरी पर बरामद किया। पुलिस की कार्रवाई घटनास्थल पर पहुँची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि इस नृशंस हत्याकांड के पीछे की वजह क्या थी—पुरानी रंजिश, लूटपाट या कोई अन्य पारिवारिक विवाद। मृतका: लीलावती पटेल (60) स्थान: लोही गांव, थाना बिछिया, जिला रीवा वर्तमान स्थिति: पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है और वे जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। मध्य भारत न्यूज़ के लिए रीवा से राहुल सोनी की रिपोर्ट।1