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बस्सी क्षेत्र के मोहनपुरा स्थित मनोहर दास जी की बगीची में चल रही कथा का हाल ही में सफलतापूर्वक समापन हो गया है। कथा के समापन के उपरांत एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ग्राम वासियों का सक्रिय सहयोग रहा। इस पूरे कार्यक्रम में मीडियाकर्मी योगेश कुमार गुप्ता भी शामिल रहे।
Yogesh Kumar Gupta
बस्सी क्षेत्र के मोहनपुरा स्थित मनोहर दास जी की बगीची में चल रही कथा का हाल ही में सफलतापूर्वक समापन हो गया है। कथा के समापन के उपरांत एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ग्राम वासियों का सक्रिय सहयोग रहा। इस पूरे कार्यक्रम में मीडियाकर्मी योगेश कुमार गुप्ता भी शामिल रहे।
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- चैनोत गांव के ग्रामीणों ने अपनी मांग पूरी न होने पर भाखड़ा वाली मुख्य पाइपलाइन को खेतों से उखाड़ फेंका है। इससे पहले, एक महापंचायत ने 1 जून तक का अल्टीमेटम दिया था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि यदि गांव को अलग से सीधा पाइपलाइन कनेक्शन नहीं दिया गया, तो वे इस मुख्य पाइपलाइन को उखाड़ देंगे। गांववासियों का कहना है कि यह पाइपलाइन उनके खेतों से गुजर रही है, लेकिन उन्हें पीने का पानी नहीं मिल रहा, जबकि हांसी शहर को इसी से पानी पहुंचाया जा रहा है। इस गंभीर समस्या के समाधान न होने पर, ग्रामीणों ने स्वयं ही कार्रवाई करते हुए पाइपलाइन को निकाल दिया है। उन्होंने अपनी कार्रवाई को "जनता भी हम, सरकार भी हम" के नारे के साथ दर्शाया है, जो उनकी इस दृढ़ भावना को दिखाता है कि वे अपनी समस्याओं का समाधान खुद ही करेंगे।1
- शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने श्रमिकों के अधिकारों को लेकर चल रहे आंदोलन के संबंध में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिक अपने वाजिब हक और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और उनकी मांगों को अत्यंत गंभीरता से सुना जाना चाहिए। विधायक भाटी ने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान केवल संवाद और सकारात्मक पहलों के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। उन्होंने आंदोलन में शामिल श्रमिकों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए चेताया कि उनकी मांगों को अनदेखा करना उचित नहीं होगा। इसी के साथ, उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से यह अपील भी की कि वे श्रमिकों के मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्रमिक वर्ग देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और उनके अधिकारों की रक्षा करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। मीडिया वार्ता के दौरान, आंदोलन की आगामी रणनीति और श्रमिकों की मांगों को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई।1
- मुख्यमंत्री बदलने के संबंध में राहुल गांधी द्वारा लिए गए फैसले को देशभर में एक संतुलित और सोच-समझकर लिया गया निर्णय माना जा रहा है। यह इसलिए भी खास है क्योंकि ऐसा दमदार फैसला खुलकर कहने का साहस हर किसी में नहीं होता, जिसके चलते राहुल गांधी को 'सियासत का जादूगर' कहा जा रहा है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा करके और सबका भरोसा जीतकर ही इस महत्वपूर्ण बदलाव को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।1
- रामेश्वर मीणा को जयपुर देहात दक्षिण ST मोर्चा का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस महत्वपूर्ण पद पर उनकी नियुक्ति के उपलक्ष्य में उनका सम्मान किया गया।1
- बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कुचामन की घटना पर बयान देते हुए कहा कि जब कुछ लोगों ने उनकी कार पर डंडे बरसाने शुरू किए, तो उन्हें लगा कि उनकी मंशा राठौड़ की हत्या करने की थी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वे गाड़ी से बाहर क्यों निकलते। राठौड़ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरएलपी कार्यकर्ता ज्ञापन देने के लिए आते, तो वे स्वयं गाड़ी से उतरकर उनका ज्ञापन लेने को तैयार थे।1
- क्रांतिकारी टैक्सी यूनियन जयपुर ने सभी टैक्सी, कैब, ऑटो और कमर्शियल वाहन चालकों से आगामी 3 जून को जयपुर के कलेक्ट्रेट सर्किल पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की बड़ी अपील की है। यह आह्वान ड्राइवरों की लगातार बढ़ती समस्याओं, महंगे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, कम किराए, प्लेटफॉर्म शुल्क और बढ़ते खर्चों जैसे विभिन्न मुद्दों के समाधान के लिए किया गया है। यूनियन ने जोर दिया है कि जब तक ड्राइवर एकजुट नहीं होंगे, तब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। सभी ड्राइवरों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी आवाज बुलंद करने और अपने अधिकारों के लिए समय पर पहुंचकर इस अभियान को सफल बनाएं। इसके साथ ही, सभी ड्राइवर भाइयों से इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा साझा करने और अपने साथियों तक पहुंचाने का निवेदन किया गया है।1
- बगरू टोल प्लाजा पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के कार्यकर्ताओं और टोल कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक और भिड़ंत की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद मौके पर तनावपूर्ण माहौल बन गया और बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता एकजुट हो गए। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के समर्थकों ने स्पष्ट किया है कि उनकी आवाज़ को किसी भी सूरत में दबाया नहीं जा सकता। कार्यकर्ताओं ने इस घटना के विरोध में अपनी गहरी नाराजगी जताते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन और पुलिस की टीमें भी मौके पर पहुंचीं और प्रयास किए। यह पूरा प्रकरण अब राजनीतिक बयानबाजी के बीच चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।1