झारखंड के लातेहार जिले में स्थित तेतरियाखाड़ कोल परियोजना में पिछले कई महीनों से कोयले के ढेर में लगातार आग लगी हुई है। इस गंभीर समस्या को लेकर हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त की है, जहाँ इसे प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत और लोगों की जान-माल के लिए खतरनाक माना गया है। इस परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय ने 18 विशिष्ट गाइडलाइन्स के साथ मंजूरी दी थी। इन शर्तों में फॉरेस्ट लैंड के लिए 80 एकड़ जमीन का प्रावधान, 52 हेक्टेयर फॉरेस्ट लैंड का मामला सुलझाना, और 25 MTPA पीक प्रोडक्शन को रेल के माध्यम से भेजना शामिल था। इसके अतिरिक्त, NHAI से क्लियरेंस लेना, भूडगा नाला से 100 मीटर की दूरी बनाए रखना, 15 मीटर ऊंची दीवार बनाना, कैच ड्रेन और सिल्टेशन पॉन्ड का निर्माण, तथा 45 ट्रक कोयले के लिए कॉर्ड करना भी इन गाइडलाइन्स का हिस्सा था। मंत्रालय ने यह भी अनिवार्य किया था कि इंटर्नल रोड, अप्रोच रोड, और कॉलोनी की सभी सड़कों को ब्लैक टॉप किया जाए, धूल वाले इलाकों में प्लांटेशन हो, सभी क्षेत्रों में वाटर स्प्रिंकलिंग की व्यवस्था की जाए, माइन क्लोजर प्लान और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन प्लान को लागू किया जाए। सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड्स और CCTV लगाना, लोडिंग के लिए केवल हाईवे का इस्तेमाल करना (ATV रोड नहीं), सैंडस्टोन टिप पर स्थानीय लोगों को पानी उपलब्ध कराना, भूजल का इस्तेमाल न करना, और एक साल के भीतर वाटर हार्वेस्टिंग व चेक डैम बनाना भी शर्तों में शामिल था। इन 18 बिंदुओं के साथ, CER असेसमेंट हर तीन साल पर, CSR से रिसेटलमेंट, रेगुलर हेल्थ चेकअप, वाइब्रेशन मॉनिटरिंग, प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट, और EC पब्लिक हियरिंग का विज्ञापन जैसी लगभग 10 और शर्तें भी परियोजना पर लागू थीं। इसके बावजूद, मूल प्रश्न यह उठता है कि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई विस्तृत 18 शर्तों और हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के उपरांत भी तेतरियाखाड़ कोल परियोजना में हालात जस के तस क्यों बने हुए हैं, और आग पर नियंत्रण क्यों नहीं पाया जा सका है?
झारखंड के लातेहार जिले में स्थित तेतरियाखाड़ कोल परियोजना में पिछले कई महीनों से कोयले के ढेर में लगातार आग लगी हुई है। इस गंभीर समस्या को लेकर हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त की है, जहाँ इसे प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत और लोगों की जान-माल के लिए खतरनाक माना गया है। इस परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय ने 18 विशिष्ट गाइडलाइन्स के साथ मंजूरी दी थी। इन शर्तों में फॉरेस्ट लैंड के लिए 80 एकड़ जमीन का प्रावधान, 52 हेक्टेयर फॉरेस्ट लैंड का मामला सुलझाना, और 25 MTPA पीक प्रोडक्शन को रेल के माध्यम से भेजना शामिल था। इसके अतिरिक्त, NHAI से क्लियरेंस लेना, भूडगा नाला से 100 मीटर की दूरी बनाए रखना, 15 मीटर ऊंची दीवार बनाना, कैच ड्रेन और सिल्टेशन पॉन्ड का निर्माण, तथा 45 ट्रक कोयले के लिए कॉर्ड करना भी इन गाइडलाइन्स का हिस्सा था। मंत्रालय ने यह भी अनिवार्य किया था कि इंटर्नल रोड, अप्रोच रोड, और कॉलोनी की सभी सड़कों को ब्लैक टॉप किया जाए, धूल वाले इलाकों में प्लांटेशन हो, सभी क्षेत्रों में वाटर स्प्रिंकलिंग की व्यवस्था की जाए, माइन क्लोजर प्लान और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन प्लान को लागू किया जाए। सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड्स और CCTV लगाना, लोडिंग के लिए केवल हाईवे का इस्तेमाल करना (ATV रोड नहीं), सैंडस्टोन टिप पर स्थानीय लोगों को पानी उपलब्ध कराना, भूजल का इस्तेमाल न करना, और एक साल के भीतर वाटर हार्वेस्टिंग व चेक डैम बनाना भी शर्तों में शामिल था। इन 18 बिंदुओं के साथ, CER असेसमेंट हर तीन साल पर, CSR से रिसेटलमेंट, रेगुलर हेल्थ चेकअप, वाइब्रेशन मॉनिटरिंग, प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट, और EC पब्लिक हियरिंग का विज्ञापन जैसी लगभग 10 और शर्तें भी परियोजना पर लागू थीं। इसके बावजूद, मूल प्रश्न यह उठता है कि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई विस्तृत 18 शर्तों और हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के उपरांत भी तेतरियाखाड़ कोल परियोजना में हालात जस के तस क्यों बने हुए हैं, और आग पर नियंत्रण क्यों नहीं पाया जा सका है?
- रातू प्रखंड में गुरुवार को ईद उल अजहा (बकरीद) की नमाज़ विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में अदा की जाएगी। इस त्योहार के मद्देनज़र स्थानीय प्रशासन पूरी तरह चौकस है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए, बकरीद की पूर्व संध्या पर बुधवार को डीएसपी अजय आर्यन और रातू थाना प्रभारी आदिकांत महतो के नेतृत्व में पुलिस ने रातू काठीटांड से हुरहुरी, झखराटांड इतवार बाजार, सिमलिया, फुटकलटोली, बिजलिया और भोंडा टंगरा तक फ्लैग मार्च निकाला, जिसके ज़रिए क्षेत्र में शांति का संदेश दिया गया। इस फ्लैग मार्च में रातू थाने के अलावा नगड़ी और दलादिली ओपी की पुलिस भी मौजूद थी। थाना प्रभारी आदिकान्त महतो ने बताया कि हुड़दंग मचाने और माहौल खराब करने वालों पर पुलिस की पैनी निगाह है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भड़काऊ, आपत्तिजनक या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट डालने, लाइक करने या शेयर करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों को चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की भड़काऊ, अपमानजनक और धार्मिक/जातिगत भावनाओं को आहत करने वाली पोस्ट न करें। महतो ने यह भी दोहराया कि माहौल खराब करने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। त्योहार को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की भी कड़ी निगरानी है, जो क्षेत्र की हर गतिविधि का पल-पल का जायजा ले रहे हैं, ताकि शांति बनी रहे। प्रखंड स्तरीय शांति समिति के सदस्य भी काफी सजग हैं। बकरीद की नमाज़ गुरुवार को लगभग सुबह 7 बजे अदा की जाएगी, जिसमें हुरहुरी, परहेपाट, पुरियो, जाड़ी, बानापीड़ी, कन्नौज, मुरगु, पाली, चितरकोटा, ईदगाह टंगरा, सिमलिया, फुटकलटोली, रातू चट्टी और बड़काटोली समेत कई गांव शामिल हैं।1
- झारखंड के लातेहार जिले के मनिका में एक अवैध बालू लदा ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर एक छप्पर में जा घुसा। इस घटना में एक बड़ा हादसा टल गया, और उसमें मौजूद लोग बाल-बाल बच गए।1
- HF Deluxe गाड़ी के फुल इंजन के काम और HF Deluxe BS6 गाड़ी की पूरी रिपेयरिंग से संबंधित एक वीडियो साझा किया गया है। दर्शकों से इस वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए इसे लाइक, शेयर और कमेंट करने का आग्रह किया गया है।1
- लातेहार जिले के गारू प्रखंड अंतर्गत सरयू क्षेत्र में बुधवार को आगामी बकरीद पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा फ्लैग मार्च निकाला गया। यह फ्लैग मार्च सरयू उप स्वास्थ्य केंद्र से शुरू होकर सरयू चौक होते हुए तेतर टोला तक गया। फ्लैग मार्च के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्र के लोगों से आपसी भाईचारा, शांति और सौहार्द बनाए रखते हुए पर्व मनाने की अपील की। अधिकारियों ने बताया कि बकरीद पर्व को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई। इस दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया गया। इस अभियान में अंचलाधिकारी दिनेश कुमार मिश्रा, सरयू प्रखंड विकास पदाधिकारी आशा साहू, गारू थाना प्रभारी जय प्रकाश शर्मा सहित काफी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहे।2
- गुमला के सिसई प्रखंड स्थित संत तुलसीदास +2 उच्च विद्यालय के खेल मैदान में सात दिवसीय ग्रीष्मकालीन कबड्डी समर कैंप का विधिवत शुभारंभ किया गया है। इस कैंप का समापन 31 मई 2026 को किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देकर उनकी प्रतिभा को निखारना है। जिला परिषद सदस्य विजयलक्ष्मी कुमारी, सीता उरांव, लोहरा उरांव, विराज उरांव और सलोनी कुमारी ने इस समर कैंप का उद्घाटन किया। कैंप प्रभारी, खेल शिक्षक सह कबड्डी प्रशिक्षक बीरबल लोहरा ने बताया कि इसमें गुमला जिले से कुल 62 बालक एवं बालिका खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। अतिथियों ने खिलाड़ियों को अनुशासन में रहकर कड़ी मेहनत करने और खेल भावना के साथ अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षक बीरबल लोहरा के अनुसार, समर कैंप के दौरान खिलाड़ियों को कबड्डी के विभिन्न तकनीकी पहलुओं, फिटनेस और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण की जानकारी दी जाएगी। इसका लक्ष्य है कि खिलाड़ी आगामी जिला एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रखंड, जिला और राज्य का नाम रोशन कर सकें।1
- एक मंत्रालय बैठक के दौरान, हेमंत सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष विकास के मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।1
- लातेहार युवा कांग्रेस ने पेट्रोल, डीजल और गैस की लगातार बढ़ रही कीमतों के खिलाफ एक हस्ताक्षर अभियान चलाया।1
- उमेडण्डा पहाड़ी स्थल पर नायक (लोहड़िया) समाज द्वारा वनदेवी पूजा का कार्यक्रम विधिपूर्वक संपन्न किया गया है। यह आयोजन पुरातन परंपराओं के समागम का प्रतीक बना, जिसमें समाज के सदस्यों ने पूरी निष्ठा और रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की।1
- गुमला जिले के सिसई प्रखंड स्थित संत तुलसीदास +2 उच्च विद्यालय के खेल मैदान में सात दिवसीय ग्रीष्मकालीन कबड्डी समर कैंप का विधिवत शुभारंभ किया गया है, जिसका समापन 31 मई 2026 को किया जाएगा। कैंप प्रभारी और खेल शिक्षक सह कबड्डी प्रशिक्षक बीरबल लोहरा ने बताया कि इस समर कैंप में गुमला जिले से कुल 62 बालक एवं बालिका खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देकर उनकी प्रतिभा को निखारना है। इस समर कैंप का शुभारंभ जिला परिषद सदस्य विजयलक्ष्मी कुमारी, सीता उरांव, लोहरा उरांव, विराज उरांव और सलोनी कुमारी ने किया। अतिथियों ने खिलाड़ियों को अनुशासन में रहकर कड़ी मेहनत करने और खेल भावना के साथ अभ्यास करने की प्रेरणा दी। प्रशिक्षक बीरबल लोहरा ने जानकारी दी कि कैंप के दौरान खिलाड़ियों को कबड्डी के विभिन्न तकनीकी पहलुओं, फिटनेस और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण की पूरी जानकारी दी जाएगी, ताकि खिलाड़ी आगामी जिला एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रखंड, जिले और राज्य का नाम रोशन कर सकें।2