कटनी जिले का मामला कटघरे में खाकी जमीन सऊदी से शुरू हुई कहानी अब भ्रष्टाचार की धाराओं तक पहुंची नेहा पच्चीसिया कटघरे में खाकी: जमीन सौदे से शुरू हुई कहानी अब भ्रष्टाचार की धाराओं तक पहुंची नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत पर 29 अगस्त की धाराओं तक पहुंची नेहा पच्चीसियाको फैसला; तीन घंटे की अदालती बहस के बाद मामला टला—SIT के हाथ लगे बयानों, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की कड़ियां खंगालने में जुटी; मारूफ अहमद की जमानत अर्जी अब तक क्यों नहीं, यह भी बना बड़ा सवाल कटघरे में खाकी: जमीन सौदे से शुरू हुई कहानी अब भ्रष्टाचार की धाराओं तक पहुंची नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत पर 29 अगस्त को फैसला; तीन घंटे की अदालती बहस के बाद मामला टला—SIT के हाथ लगे बयानों, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की कड़ियां खंगालने में जुटी; मारूफ अहमद की जमानत अर्जी अब तक क्यों नहीं, यह भी बना बड़ा सवाल कभी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस अधिकारी आज खुद कानून की कसौटी पर खड़ी हैं। कटनी का बहुचर्चित जमीन सौदा मामला अब महज एक विवादित रजिस्ट्री का प्रकरण नहीं रह गया है। इसकी परतें खुलते-खुलते कथित दबाव, करोड़ों की जमीन, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, पुलिस कार्रवाई, पद के कथित दुरुपयोग और अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं तक पहुंच चुकी हैं। मामले में निलंबित तत्कालीन CSP नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ती दिखाई दे रही हैं क्योंकि जिला न्यायालय में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को करीब तीन घंटे तक बहस हुई, लेकिन अदालत ने तत्काल कोई राहत नहीं दी। अब इस हाईप्रोफाइल प्रकरण में 29 अगस्त का दिन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुश्री लीला लोधी की अदालत में नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत याचिकाओं पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला टल गया। अब अगली सुनवाई पर अदालत का रुख इस मामले की आगे की कानूनी दिशा तय करेगा। कटनी। मध्यप्रदेश के कटनी से उठी जमीन सौदे की वह कहानी, जिसने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली, कथित पद के दुरुपयोग और करोड़ों की जमीन के लेनदेन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, अब अदालत और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर आकर टिक गई है। मामले में निलंबित तत्कालीन CSP नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुश्री लीला लोधी की अदालत में करीब तीन घंटे तक बहस चली, लेकिन तत्काल कोई फैसला नहीं हो सका। अब अगली सुनवाई 29 अगस्त को निर्धारित की गई है। यह महज किसी जमीन की रजिस्ट्री का विवाद नहीं रह गया है। FIR के बाद जिस तरह जांच का दायरा बढ़ा है, उससे प्रकरण अब कथित जमीन सौदे से आगे बढ़कर पद के कथित दुरुपयोग, पैसों के लेनदेन, पुलिस कार्रवाई और भ्रष्टाचार के आरोपों तक पहुंच गया है। पुलिस ने विवेचना के दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 12 और 13 भी प्रकरण में जोड़ी हैं। तीन घंटे की बहस, लेकिन फैसला नहीं मंगलवार को अदालत में नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे की ओर से पेश अग्रिम जमानत याचिकाओं पर दोनों पक्षों ने विस्तृत दलीलें रखीं। करीब तीन घंटे चली सुनवाई के बाद अदालत ने तत्काल आदेश नहीं दिया। अब 29 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यानी फिलहाल नेहा पच्चीसिया को अदालत से वह अंतरिम राहत नहीं मिली है, जिसकी उम्मीद गिरफ्तारी की आशंका के बीच की जा रही थी। हालांकि, अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। एक जमीन, तीन नाम और पैसों की उलझी कड़ी पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी कन्हवारा क्षेत्र की उस जमीन को माना जा रहा है, जिसकी सरकारी गाइडलाइन कीमत जांच रिपोर्टों में करीब 82.86 लाख रुपये बताई गई है, जबकि रजिस्ट्री करीब 18.20 लाख रुपये में होने का आरोप है। शिकायत में जमीन का सौदा करीब 1.07 करोड़ रुपये में तय होने का भी दावा किया गया है। इन आरोपों की जांच अभी जारी है। जांच में बैंक खातों के लेनदेन ने भी इस कहानी को और पेचीदा बनाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रजिस्ट्री के समय जमीन के खरीदार के खाते में रकम दूसरे खातों से पहुंची थी और क्षितिज राज बारापात्रे के खाते से भी राशि ट्रांसफर होने की बात जांच में सामने आई है। यही वह बिंदु है जहां जांच का सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जमीन जिसके नाम हुई, भुगतान किसके माध्यम से हुआ और इस पूरे सौदे में किसकी वास्तविक भूमिका थी। इस सवाल का अंतिम उत्तर जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मारूफ अहमद की जमानत अर्जी क्यों नहीं मामले में नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे की ओर से अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है। वहीं तीसरे आरोपी मारूफ अहमद हनफी की ओर से अब तक अग्रिम जमानत याचिका सामने नहीं आने का मुद्दा भी चर्चा में है। यह स्थिति अपने आप में कई सवाल खड़े करती है.क्या तीनों की कानूनी रणनीति अलग-अलग है. क्या मारूफ की भूमिका को लेकर कोई अलग परिस्थिति है. या फिर आने वाले दिनों में उसकी ओर से भी अदालत का रुख किया जाएगा। इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है। इसलिए इस पहलू पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय इसे जांच और आगामी न्यायिक कार्रवाई के संदर्भ में देखना जरूरी है। SIT ने खोली जांच की नई परतें FIR के बाद मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है और जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी को विवेचना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। SIT ने न्यायालय की अनुमति के बाद जेल में बंद आकाश लोधी और रमेश लोधी के बयान दर्ज किए हैं। अब इन बयानों का मिलान दस्तावेजों, बैंक लेनदेन, डिजिटल साक्ष्यों और पहले दर्ज बयानों से किया जा रहा है। जांच की दिशा अब सिर्फ यह पता लगाने तक सीमित नहीं है कि जमीन किसके नाम हुई। असली सवाल यह है कि सौदे की शुरुआत किसने की, दबाव किसने बनाया,रकम किसने उपलब्ध कराई, रजिस्ट्री किसके निर्देश या प्रभाव में हुई और पुलिस की कार्रवाई तथा जमीन सौदे के बीच कोई संबंध था या नहीं। यही सवाल इस पूरे प्रकरण की असली धुरी बन चुके हैं। सील कार्यालय भी जांच की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा तत्कालीन CSP कार्यालय को सील किए जाने के बाद वहां मौजूद फाइलों, रजिस्टरों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच SIT द्वारा की जानी है। जांच टीम यह भी देख रही है कि जमीन विवाद अथवा संबंधित आपराधिक प्रकरण से जुड़े कोई विभागीय पत्राचार, दस्तावेज या डिजिटल रिकॉर्ड वहां मौजूद हैं या नहीं। CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को आपस में जोड़कर घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार करना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया जा रहा है। जिस पुलिस अधिकारी के हाथ में कानून था, अब उसी मामले में कानून का फैसला बाकी इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है। जिस अधिकारी के पद और अधिकार को लेकर शिकायत में कथित दबाव के आरोप लगाए गए, वही अधिकारी आज स्वयं एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी हैं और गिरफ्तारी से राहत के लिए न्यायालय की शरण में हैं। सरकार पहले ही निलंबन की कार्रवाई कर चुकी है और FIR के बाद पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की थी। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर केवल तीन आरोपियों की कानूनी स्थिति तक सीमित नहीं है। यह सवाल सीधे उस व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ता है जिसमें पुलिस अधिकारी को आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा करनी होती है।  29 अगस्त अब सिर्फ जमानत का दिन नहीं 29 अगस्त को अदालत में क्या होता है, यह इस प्रकरण की अगली दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। क्या नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज को अग्रिम जमानत मिलेगी,क्या अदालत जांच की प्रकृति को देखते हुए राहत से इनकार करेगी, क्या SIT की जांच में और नाम सामने आएंगे, क्या बैंक लेनदेन और कथित जमीन सौदे के बीच की पूरी कड़ी सामने आएगी और सबसे अहम क्या जांच यह स्पष्ट कर पाएगी कि इस पूरे सौदे के पीछे वास्तविक रूप से कौन-कौन लोग थे। इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे। फिलहाल कटनी का यह प्रकरण एक ऐसी जांच में बदल चुका है, जिसमें जमीन की कीमत से कहीं बड़ा सवाल पुलिस की साख का है। और यही वजह है कि 29 अगस्त की सुनवाई पर सिर्फ कटनी ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की नजरें टिकी हैं।
कटनी जिले का मामला कटघरे में खाकी जमीन सऊदी से शुरू हुई कहानी अब भ्रष्टाचार की धाराओं तक पहुंची नेहा पच्चीसिया कटघरे में खाकी: जमीन सौदे से शुरू हुई कहानी अब भ्रष्टाचार की धाराओं तक पहुंची नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत पर 29 अगस्त की धाराओं तक पहुंची नेहा पच्चीसियाको फैसला; तीन घंटे की अदालती बहस के बाद मामला टला—SIT के हाथ लगे बयानों, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की कड़ियां खंगालने में जुटी; मारूफ अहमद की जमानत अर्जी अब तक क्यों नहीं, यह भी बना बड़ा सवाल कटघरे में खाकी: जमीन सौदे से शुरू हुई कहानी अब भ्रष्टाचार की धाराओं तक पहुंची नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत पर 29 अगस्त को फैसला; तीन घंटे की अदालती बहस के बाद मामला टला—SIT के हाथ लगे बयानों, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की कड़ियां खंगालने में जुटी; मारूफ अहमद की जमानत अर्जी अब तक क्यों नहीं, यह भी बना बड़ा सवाल कभी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस अधिकारी आज खुद कानून की कसौटी पर खड़ी हैं। कटनी का बहुचर्चित जमीन सौदा मामला अब महज एक विवादित रजिस्ट्री का प्रकरण नहीं रह गया है। इसकी परतें खुलते-खुलते कथित दबाव, करोड़ों की जमीन, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, पुलिस कार्रवाई, पद के कथित दुरुपयोग और अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं तक पहुंच चुकी हैं। मामले में निलंबित तत्कालीन CSP नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ती दिखाई दे रही हैं क्योंकि जिला न्यायालय में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को करीब तीन घंटे तक बहस हुई, लेकिन अदालत ने तत्काल कोई राहत नहीं दी। अब इस हाईप्रोफाइल प्रकरण में 29 अगस्त का दिन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुश्री लीला लोधी की अदालत में नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत याचिकाओं पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला टल गया। अब अगली सुनवाई पर अदालत का रुख इस मामले की आगे की कानूनी दिशा तय करेगा। कटनी। मध्यप्रदेश के कटनी से उठी जमीन सौदे की वह कहानी, जिसने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली, कथित पद के दुरुपयोग और करोड़ों की जमीन के लेनदेन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, अब अदालत और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर आकर टिक गई है। मामले में निलंबित तत्कालीन CSP नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुश्री लीला लोधी की अदालत में करीब तीन घंटे तक बहस चली, लेकिन तत्काल कोई फैसला नहीं हो सका। अब अगली सुनवाई 29 अगस्त को निर्धारित की गई है। यह महज किसी जमीन की रजिस्ट्री का विवाद नहीं रह गया है। FIR के बाद जिस तरह जांच का दायरा बढ़ा है, उससे प्रकरण अब कथित जमीन सौदे से आगे बढ़कर पद के कथित दुरुपयोग, पैसों के लेनदेन, पुलिस कार्रवाई और भ्रष्टाचार के आरोपों तक पहुंच गया है। पुलिस ने विवेचना के दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 12 और 13 भी प्रकरण में जोड़ी हैं। तीन घंटे की बहस, लेकिन फैसला नहीं मंगलवार को अदालत में नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे की ओर से पेश अग्रिम जमानत याचिकाओं पर दोनों पक्षों ने विस्तृत दलीलें रखीं। करीब तीन घंटे चली सुनवाई के बाद अदालत ने तत्काल आदेश नहीं दिया। अब 29 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यानी फिलहाल नेहा पच्चीसिया को अदालत से वह अंतरिम राहत नहीं मिली है, जिसकी उम्मीद गिरफ्तारी की आशंका के बीच की जा रही थी। हालांकि, अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। एक जमीन, तीन नाम और पैसों की उलझी कड़ी पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी कन्हवारा क्षेत्र की उस जमीन को माना जा रहा है, जिसकी सरकारी गाइडलाइन कीमत जांच रिपोर्टों में करीब 82.86 लाख रुपये बताई गई है, जबकि रजिस्ट्री करीब 18.20 लाख रुपये में होने का आरोप है। शिकायत में जमीन का सौदा करीब 1.07 करोड़ रुपये में तय होने का भी दावा किया गया है। इन आरोपों की जांच अभी जारी है। जांच में बैंक खातों के लेनदेन ने भी इस कहानी को और पेचीदा बनाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रजिस्ट्री के समय जमीन के खरीदार के खाते में रकम दूसरे खातों से पहुंची थी और क्षितिज राज बारापात्रे के खाते से भी राशि ट्रांसफर होने की बात जांच में सामने आई है। यही वह बिंदु है जहां जांच का सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जमीन जिसके नाम हुई, भुगतान किसके माध्यम से हुआ और इस पूरे सौदे में किसकी वास्तविक भूमिका थी। इस सवाल का अंतिम उत्तर जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मारूफ अहमद की जमानत अर्जी क्यों नहीं मामले में नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापात्रे की ओर से अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है। वहीं तीसरे आरोपी मारूफ अहमद हनफी की ओर से अब तक अग्रिम जमानत याचिका सामने नहीं आने का मुद्दा भी चर्चा में है। यह स्थिति अपने आप में कई सवाल खड़े करती है.क्या तीनों की कानूनी रणनीति अलग-अलग है. क्या मारूफ की भूमिका को लेकर कोई अलग परिस्थिति है. या फिर आने वाले दिनों में उसकी ओर से भी अदालत का रुख किया जाएगा। इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है। इसलिए इस पहलू पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय इसे जांच और आगामी न्यायिक कार्रवाई के संदर्भ में देखना जरूरी है। SIT ने खोली जांच की नई परतें FIR के बाद मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है और जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी को विवेचना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। SIT ने न्यायालय की अनुमति के बाद जेल में बंद आकाश लोधी और रमेश लोधी के बयान दर्ज किए हैं। अब इन बयानों का मिलान दस्तावेजों, बैंक लेनदेन, डिजिटल साक्ष्यों और पहले दर्ज बयानों से किया जा रहा है। जांच की दिशा अब सिर्फ यह पता लगाने तक सीमित नहीं है कि जमीन किसके नाम हुई। असली सवाल यह है कि सौदे की शुरुआत किसने की, दबाव किसने बनाया,रकम किसने उपलब्ध कराई, रजिस्ट्री किसके निर्देश या प्रभाव में हुई और पुलिस की कार्रवाई तथा जमीन सौदे के बीच कोई संबंध था या नहीं। यही सवाल इस पूरे प्रकरण की असली धुरी बन चुके हैं। सील कार्यालय भी जांच की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा तत्कालीन CSP कार्यालय को सील किए जाने के बाद वहां मौजूद फाइलों, रजिस्टरों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच SIT द्वारा की जानी है। जांच टीम यह भी देख रही है कि जमीन विवाद अथवा संबंधित आपराधिक प्रकरण से जुड़े कोई विभागीय पत्राचार, दस्तावेज या डिजिटल रिकॉर्ड वहां मौजूद हैं या नहीं। CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को आपस में जोड़कर घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार करना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया जा रहा है। जिस पुलिस अधिकारी के हाथ में कानून था, अब उसी मामले में कानून का फैसला बाकी इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है। जिस अधिकारी के पद और अधिकार को लेकर शिकायत में कथित दबाव के आरोप लगाए गए, वही अधिकारी आज स्वयं एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी हैं और गिरफ्तारी से राहत के लिए न्यायालय की शरण में हैं। सरकार पहले ही निलंबन की कार्रवाई कर चुकी है और FIR के बाद पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की थी। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर केवल तीन आरोपियों की कानूनी स्थिति तक सीमित नहीं है। यह सवाल सीधे उस व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ता है जिसमें पुलिस अधिकारी को आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा करनी होती है।  29 अगस्त अब सिर्फ जमानत का दिन नहीं 29 अगस्त को अदालत में क्या होता है, यह इस प्रकरण की अगली दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। क्या नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज को अग्रिम जमानत मिलेगी,क्या अदालत जांच की प्रकृति को देखते हुए राहत से इनकार करेगी, क्या SIT की जांच में और नाम सामने आएंगे, क्या बैंक लेनदेन और कथित जमीन सौदे के बीच की पूरी कड़ी सामने आएगी और सबसे अहम क्या जांच यह स्पष्ट कर पाएगी कि इस पूरे सौदे के पीछे वास्तविक रूप से कौन-कौन लोग थे। इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे। फिलहाल कटनी का यह प्रकरण एक ऐसी जांच में बदल चुका है, जिसमें जमीन की कीमत से कहीं बड़ा सवाल पुलिस की साख का है। और यही वजह है कि 29 अगस्त की सुनवाई पर सिर्फ कटनी ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की नजरें टिकी हैं।
- मध्य प्रदेश जिला उमरिया जनपद पंचायत करकेली ग्राम पंचायत देवरी माजरा एवं महुरी दोनों पंचायत के बीच बनने वाला यह पुल कब और कब तक बनेगा इसका जिम्मेदार कौन क्या यह पुल बनने से पहले स्कूली बच्चे या ग्राम वासियों की बली चाहता है चाहता है मध्य प्रदेश का जिला उमरिया जनपद पंचायत करकेली ग्राम पंचायत देवरी माजरा और ग्राम पंचायत महुरी दोनों पंचायत और अन्य ग्राम पंचायत को जोड़ने वाला यह है पुल जो की तीन चार वर्षो से आधार में है क्या सेतु विभाग ऐसी कौन सी नींद सो रहा है जिसे यह 3 वर्षों से अधूरा पुल दिखाई नहीं दे रहा है यह ठेकेदार की लापरवाही है या जिलाप्रशासन की ग्राम वासियों को अब ऐसा प्रतीत होने लगा है कि प्रशासन इंतजार में है जब तक कोई बड़ी घटना या किसी मासूम की जान नहीं जाएगी तब तक यह पुल का काम पूरा नहीं होगा क्योंकि यह पॉल सभी गांव को जोड़ने वाला एकमात्र पुल है देवी माजरा की हायर सेकेंडरी स्कूल जहां की माहुरी ग्राम पंचायत के हादसा के बच्चे आते हैं अब वह कैसे आते होंगे यह तो वही जानते हैं और सभी जानते हैं कि जब पल में पानी हो तो कितने खतरे से पार करके आते हैं वही पल के जिस स्कूल में बच्चे छोटे-छोटे बच्चे पुल पार करके आते हैं क्या उन मासूमों की जान लेने में लगा है प्रशासन या अधूरा पुल मासूमों की बाली मांगता है आखिर यह किसकी लापरवाही है ये सामने का नजारा देखिए ये पानी नहीं पानी में डूबा बच्चों का भविष्य है। क्योंकि यह एकमात्र रास्ता है जो देवरी और महुरी सहित कई गांवों को जोड़ती है और उमरिया शहपुरा मुख्यमार्ग में जुड़ता है। सैकड़ों बच्चे इसी रास्ते देवदंडी महुरी जरहा मोड से हाई स्कूल देवरी नहीं पहुंच पा रहे है, क्योंकि 1 हफ्ते से नदी उफान में है, पुल डूब गया है। वही पुल के दूसरी तरफ सरस्वती विद्यालय है जो महुरी के रास्ते में है जहां देवरी, हड़हा आसपास के सैकड़ों बच्चे पढ़ने जाते हैं अब वो सभी हफ्ते भर से नदी का पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं। दोनों तरफ आने -जाने वाले यात्री भी भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। और यह पूरी परेशानी की जड़ 3 वर्षों से अधूरा पड़ा निर्माणाधीन पुल है। जो हर बीतते वर्ष में एक अधूरी आस दे जाता है1
- नगर पालिका की सफाई व्यवस्था पर फावड़े की चोट, पार्षद बोले- जब अमला नहीं जागा तो खुद संभाला मोर्चा पाली। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 2 में सफाई व्यवस्था को लेकर अब सियासत गरमाने लगी है। इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में वार्ड के पार्षद एवं नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश पटेल युवाओं और वार्डवासियों के साथ हाथों में फावड़ा लेकर खुद सफाई करते नजर आ रहे हैं। शिकायतों के बाद भी नहीं हुई सफाई बताया जा रहा है कि वार्ड क्रमांक 2 में कई दिनों से नियमित साफ-सफाई नहीं हुई थी। गंदगी और कचरे से परेशान वार्डवासियों ने नगर पालिका के जिम्मेदारों को कई बार इसकी जानकारी दी। इसके बावजूद जब सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो लोगों का धैर्य जवाब दे गया। इसके बाद वार्डवासियों ने खुद सफाई का जिम्मा उठाया। उनके साथ नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश पटेल भी फावड़ा लेकर मैदान में उतर गए। वीडियो में कई युवा भी उनके साथ सफाई करते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। उपाध्यक्ष ने नगर पालिका पर साधा निशाना नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश पटेल ने कहा कि वार्ड में सफाई को लेकर कई बार नगर पालिका से आग्रह किया गया, लेकिन जिम्मेदारों ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई। जब शिकायतों के बाद भी सफाई नहीं हुई तो वार्डवासियों के साथ खुद सफाई करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और आम लोगों को सफाई के लिए फावड़ा उठाना पड़े, यह नगर पालिका की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर पालिका की जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने भी खोला मोर्चा मामले में पाली ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रवि मिश्रा ने भी नगर पालिका पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वार्ड क्रमांक 2 नगर पालिका क्षेत्र का हिस्सा है और वहां सफाई की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। इसके लिए किसी राजनीतिक खींचतान की जरूरत नहीं होनी चाहिए। रवि मिश्रा ने कहा कि यदि नगर पालिका अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती है तो कांग्रेस कार्यकर्ता खुद वार्ड में जाकर सफाई करेंगे और इसकी जिम्मेदारी उठाएंगे। वायरल वीडियो ने अब सफाई व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि जब सफाई की जिम्मेदारी नगर पालिका की है, तो आखिर जनप्रतिनिधियों और वार्डवासियों को खुद फावड़ा क्यों उठाना पड़ा?4
- जिले करकेली ब्लॉक के बड़ागाव विद्यालय की बढ़ी सस्मया"बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े इन सवालों पर प्रशासन की कार्रवाई अब सबसे बड़ा इंतजार है। मध्यप्रदेश उमरिया जिले में इन दिनों सरकार के सिस्ट्म का पोल खोलता नजर आ रहा है बता दे कि जिले के करकेली ब्लॉक के ग्राम पंचायत बड़ागांव में बदहाल सड़क स्कूल की टपकती छत और शिक्षकों की कथित लापरवाही के खिलाफ छात्र छात्राओं व ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। छात्र छात्राओं अभिभावकों सहित ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय में जोरदार रैली निकाली। हाथों में तख्तियां और जुबां पर नारे लेकर छात्र छात्राओं का हुजूम कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता कीचड़ के दलदल में बदल जाता है। बच्चों को इसी जोखिम भरे रास्ते से होकर स्कूल पहुंचने की मजबूरी बनी हुई है। वहीं स्कूल की छत से पानी टपकने के कारण कक्षाओं में पढ़ाई भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। शिक्षकों की कार्यप्रणाली को लेकर भी छात्र-छात्राओं और अभिभावकों ने गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से समस्याएं बताने के बावजूद जिम्मेदारों ने अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। आक्रोशित छात्रों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण स्कूल भवन की मरम्मत और शिक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग की। छात्र छात्राओं सहित ग्रामीणों ने दो टूक कहा अब आश्वासन नहीं समस्याओं का धरातल पर समाधान चाहिए। बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े इन सवालों पर प्रशासन की कार्रवाई अब सबसे बड़ा इंतजार है।2
- **उमरिया जिले में किसानों महाआंदोलन की तैयारी** **9 सितंबर से घेरा डालो डेरा डालो महाआंदोलन** भारतीय किसान संघ उमरिया द्वारा 21 जुलाई 2026 को जिला प्रशासन को विभिन्न समस्याओं को लेकर खासकर पाली क्षेत्र में खुलने वाली नई 9 प्राइवेट कॉलरी खदान खनिज खदानों की अनुमित्ताओं को लेकर जिला प्रशासन को कोयले की पोटली के साथ ज्ञापन प्रस्तुत किया गया था जिसमें 30 दोनों का समय किया गया था लेकिन 30 दिन पूर्व होने के उपरांत भी किसानों की समस्याओं की तरफ कोई पहल नहीं किया गया । **खनिज क्षेत्र बैठक की सूचना नहीं** विगत 25 अगस्त 2026 को कमिश्नर एवं कलेक्टर उमरिया में कई खदानों के साथ बैठक की किंतु दुर्भाग्यवश किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं किया और ना ही किसानों को सम्मिलित किया गया **9 सितंबर से घेरा डालो डेरा डालो महाआंदोलन** किसानों के द्वारा प्रशासन को 30 दोनों का समय दिया गया था जो की समाप्त हो चुका है और उसके उपरांत किसान संगठन ने 9 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन का ऐलान किया है, जिस क्रम में 9 सितंबर को घेरा डालो डेरा डालो आंदोलन के तहत शहडोल घुनघुटी नेशनल हाईवे राजमार्ग को पूर्णता बंद किया जाएगा, आंदोलन अनिश्चितकालीन बढ़ाने पर उमरिया जिले की सातों तहसील राजमार्गों पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा एवं उमरिया जिले के आने जाने वाले समस्त रास्ते रेल मार्ग में प्रदर्शन किया जाएगा, इसकी पूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी ।3
- सड़क-पुल की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे छात्र, कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर किया प्रदर्शन। उमरिया जिले के नौरोजाबाद क्षेत्र के ग्राम बड़ागांव से बड़ी खबर सामने आई है जहा सड़क और पुल की मांग को लेकर शासकीय हाई स्कूल के छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया।छात्र-छात्राएं नारेबाजी करते हुए उमरिया कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी।दरअसल, बड़ागांव के शासकीय हाई स्कूल पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में सड़क और पुल की सुविधा नहीं होने से बारिश के मौसम में आवागमन और भी मुश्किल हो जाता है।इसी समस्या को लेकर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़क पर उतरे और प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से जल्द सड़क और पुल निर्माण की मांग की।1
- डॉ मोहन यादव जी मध्य प्रदेश में जनवरी में होगा जीआईएस मीट पीएम मोदी होंगे सम्मिलित l डॉ मोहन यादव जी ने मध्य प्रदेश में जनवरी में होगा जी आई एस मीट पीएम मोदी होंगे सम्मिलित l1
- पुलिस को मिली सफलताः दो नकबजनी/चोरी के मामलों का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार, चोरी गया लाखों का मशरूका बरामद* • उमरिया *चंदिया थाना क्षेत्र में हुई 02 चोरी की घटनाओं का तत्परता से खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी गया मशरूका बरामद किया गया है* • *पुलिस अधीक्षक उमरिया श्री विजय भागवानी, अति. पुलिस अधीक्षक उमरिया श्री आलोक शर्मा के निर्देशन एवं एसडीओपी उमरिया श्री पी.एस.परस्ते के नेतृत्व में पुलिस टीम को मिली सफलता* दिनांक 11.08.2026 को फरियादी विकास चतुर्वेदी पिता रमाकांत चतुर्वेदी, उम्र 36 वर्ष, निवासी छाहर मोहल्ला चंदिया द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि दिनांक 09.08.2026 को अज्ञात चोर द्वारा घर के पीछे खेत में लगी कटीली तार काटकर घर में प्रवेश किया तथा अलमारी का लॉकर तोड़कर चांदी की बिछिया, पायल, सोने का मंगलसूत्र, एवं तांबे का लोटा चोरी कर लिया गया। रिपोर्ट पर थाना चंदिया में अपराध क्रमांक 241/2026, धारा 331(4), 305(ए) भा.न्या.सं. पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। इसी प्रकार दिनांक 21.08.2026 को फरियादिया शाहजहां खान पति मो. हारून खान, उम्र 38 वर्ष, निवासी ग्राम सोनारी थाना बड़वारा जिला कटनी, हाल वार्ड क्र. 07 चंदिया द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि दिनांक 18.08.2026 को अज्ञात चोर द्वारा घर का ताला खोलकर अलमारी में रखे सोने-चांदी के जेवरात एवं नगदी चोरी कर लिया गया। रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 256/2026, धारा 331(4), 305(ए) भा.न्या.सं. पंजीबद्ध किया गया। घटित दोनो मामलो में पुलिस अधीक्षक उमरिया श्री विजय भागवानी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमरिया श्री आलोक शर्मा के निर्देशन तथा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) अनुभाग उमरिया श्री पी.एस.परस्ते के नेतृत्व में थाना प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह पाटले सहित पुलिस टीम गठित कर मामले में संलिप्त आरोपी एवं चोरी गये मशरूका के पतासाजी के प्रयास शुरू किये गये । पुलिस टीम द्वारा सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन एवं विश्लेषण, तकनीकी सहयोग, आसूचना संकलन की मदद से संदेही की पहचान की गई। संदेही निवासी चंदिया को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी द्वारा चोरी की घटनाओं में संलिप्तता स्वीकार की गई। आरोपी के कब्जे से फरियादिया शाहजहां खान के प्रकरण में 01 नग सोने की पंचाली, 01 नग सोने की अंगूठी, 01 नग सोने का लौंग, 01 जोड़ी चांदी की पायल एवं 1,900/- नगदी, कुल करीब 1,00,000/- का मशरूका बरामद किया गया। वहीं फरियादी विकास चतुर्वेदी के घर हुई चोरी के मामले में आरोपी के कब्जे से 01 नग सोने का मंगलसूत्र एवं 01 जोड़ी चांदी की पायल, करीब 1,00,000/- कीमत का मशरूका बरामद किया गया। पुलिस टीम का योगदान उक्त कार्रवाई में निरीक्षक विजय सिंह पाटले, उनि भगत सिंह, सउनि शिवपाल सिंह, प्रआर. सूर्यप्रकाश शुक्ला, आर. गनेन्द्र परस्ते, आर.प्रदीप परते, आर. प्रदीप उईके, मआर. दिव्या कुशवाहा एवं मआर. प्रिया ओड की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- कबाड़ की झूठी शिकायत कर खाकी को बदनाम करने की साजिश कपड़ा व्यापारी गुलाम लेमन का षड्यंत्र जल्द होगा उजागर1