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सभी स्कूल संचालकों से एक महत्वपूर्ण निवेदन किया गया है कि वे अपने उन कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दें जो स्कूल बसों में बच्चों को घर छोड़ने जाते हैं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी बच्चों को बस से उतारने के बाद सड़क सुरक्षित रूप से पार कराएं और उसके बाद ही वापस बस में बैठें। इस अपील में इस बात पर जोर दिया गया है कि बच्चे घर जाने की जल्दी में होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा सावधानी बरतना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
दैनिक राष्ट्रीय जगत न्यूज संपा
सभी स्कूल संचालकों से एक महत्वपूर्ण निवेदन किया गया है कि वे अपने उन कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दें जो स्कूल बसों में बच्चों को घर छोड़ने जाते हैं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी बच्चों को बस से उतारने के बाद सड़क सुरक्षित रूप से पार कराएं और उसके बाद ही वापस बस में बैठें। इस अपील में इस बात पर जोर दिया गया है कि बच्चे घर जाने की जल्दी में होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा सावधानी बरतना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
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- एक वायरल वीडियो में बनारस के एक 'लाल टोपी वाले नेता' को अखिलेश यादव के सामने दंड बैठक का टेस्ट देते हुए देखा गया है। बताया जा रहा है कि यह नेता फरवरी-मार्च में होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट हासिल करने के लिए अभी से प्रयास कर रहा है। हालांकि, इस वायरल वीडियो की फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है।1
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- प्रयागराज के जसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में मरीजों को मुफ्त दवा देने के सरकारी दावे केवल कागजों तक ही सीमित हैं। यहां तैनात डॉक्टरों पर गंभीर आरोप है कि वे कमीशन के लालच में सरकारी पर्चे पर भी बाहर की महंगी दवाएं लिखते हैं, जिसके कारण गरीब मरीज सरकारी अस्पताल आने के बावजूद उन्हें बाहर से खरीदने को मजबूर हैं। एक शिकायतकर्ता ने बताया कि 4 जुलाई को बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर वे CHC गए थे, जहां डॉक्टर ने सरकारी पर्चे पर पांच दवाएं लिखीं। मेडिकल स्टोर पर पता चला कि अस्पताल में इनमें से एक भी दवा उपलब्ध नहीं है और सभी प्राइवेट कंपनी की थीं, जिसके लिए उन्हें ₹680 खर्च कर बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं। यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि कई अन्य मरीजों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। पर्चे पर 'सरकारी अस्पताल जसरा' लिखा होने के बावजूद, नीचे लिखी दवाएं अस्पताल की सूची में शामिल ही नहीं होतीं। एक ANM ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जसरा CHC में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज आते हैं और इनमें से लगभग 70% पर्चों पर बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं, जिन्हें गरीब लोग मजबूरी में चुपचाप खरीद लेते हैं। सूत्रों के अनुसार, CHC के पास स्थित 10 से 15 निजी मेडिकल स्टोर के साथ डॉक्टरों की मिलीभभगत है। आरोप है कि जितनी महंगी और ब्रांडेड दवा लिखी जाती है, डॉक्टरों को उतना ही अधिक कमीशन मिलता है। मरीजों से अक्सर कह दिया जाता है कि 'सरकारी दवा खत्म है, बाहर से ले लीजिए'। इस कमीशनखोरी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है; मजदूरी करने वाले गरीब मरीज ₹500-₹800 की दवाएं खरीदने में असमर्थ होते हैं। उन्हें पहले लाइन लगाकर डॉक्टर को दिखाना पड़ता है और फिर बाहर जाकर दवा खरीदनी पड़ती है। इसके अलावा, अधिकांश ग्रामीण मरीजों को यह भी जानकारी नहीं होती कि कौन सी दवा सरकारी है और कौन सी प्राइवेट। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से जसरा CHC के पर्चों की गहन जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने और अस्पताल में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि सरकार भले ही 'आयुष्मान' और 'मुफ्त इलाज' का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन जसरा CHC में व्याप्त इस कमीशनखोरी के कारण मरीजों को आर्थिक और मानसिक, दोनों तरह से 'दोहरी मार' झेलनी पड़ रही है। कुल मिलाकर, कमीशन के इस खेल में जसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का पूरा सिस्टम दम तोड़ता नजर आ रहा है, जिससे मरीज लगातार परेशान हैं।1
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