नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को एक छात्र प्रदर्शन के हिंसा में बदल जाने के बाद भारी टकराव पैदा हो गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग करती दिख रही है, वहीं कुछ छात्र भी वस्तुएं फेंककर और पुलिसकर्मियों से भिड़कर जवाबी कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, लेकिन जब पुलिस ने सभा को रोकने की कोशिश की तो तनाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने वहां मौजूद छात्रों और डॉक्टरों समेत सभी लोगों पर बल प्रयोग किया। पुलिस कार्रवाई से आक्रोशित कुछ प्रदर्शनकारियों के पलटवार करने से दोनों पक्षों में झड़प शुरू हो गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि अनधिकृत प्रदर्शनों पर रोक लागू थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई। इस घटना के पूरे क्रम और दोनों पक्षों के आरोपों की आगे समीक्षा किए जाने की बात कही जा रही है। इस वारदात ने एक बार फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर देशव्यापी बहस छेड़ दी है।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को एक छात्र प्रदर्शन के हिंसा में बदल जाने के बाद भारी टकराव पैदा हो गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग करती दिख रही है, वहीं कुछ छात्र भी वस्तुएं फेंककर और पुलिसकर्मियों से भिड़कर जवाबी कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, लेकिन जब पुलिस ने सभा को रोकने की कोशिश की तो तनाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने वहां मौजूद छात्रों और डॉक्टरों समेत सभी लोगों पर बल प्रयोग किया। पुलिस कार्रवाई से आक्रोशित कुछ प्रदर्शनकारियों के पलटवार करने से दोनों पक्षों में झड़प शुरू हो गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि अनधिकृत प्रदर्शनों पर रोक लागू थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई। इस घटना के पूरे क्रम और दोनों पक्षों के आरोपों की आगे समीक्षा किए जाने की बात कही जा रही है। इस वारदात ने एक बार फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर देशव्यापी बहस छेड़ दी है।
- गढ़वा में एक जमीनी विवाद ने गंभीर रूप लेते हुए काफी तूल पकड़ लिया है। इस मामले में दोनों ही पक्षों के बीच स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि दोनों ओर से एक-दूसरे पर हत्या के प्रयास के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।1
- गढ़वा जिले के रंका प्रखंड स्थित चुतरू पंचायत के उर्दू विद्यालय में खेल मैदान की जमीन पर अतिक्रमण कर खेती करने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बुधवार दोपहर करीब 3:00 बजे कुछ लोगों ने विद्यालय के लिए वर्षों पहले दान की गई जमीन को अपनी रैयती भूमि बताकर ट्रैक्टर से जुताई कर दी और उसमें तिल तथा अरहर की बुआई कर दी। इससे विद्यालय के बच्चों के खेलने के लिए उपलब्ध मैदान पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति में आ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, यह भूमि पहले कल्लू यादव, सोमारू यादव, राजमणि यादव, शिवपुर यादव सहित अन्य यादव परिवार की थी, जिन्होंने बच्चों के खेलकूद और विद्यालय के विकास के लिए इसे उपलब्ध कराया था और इसे राजपाल के नाम दर्ज भी कराया गया था। वहीं, जमीन दान देने वाले परिवार के लोगों का आरोप है कि विद्यालय की जमीन पर कुछ अन्य प्रभावशाली लोग भी खेती कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करके केवल कुछ ही लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। इस घटना से विद्यालय के छात्र-छात्राओं में निराशा है और ग्रामीणों ने बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास का हवाला देते हुए मैदान की सुरक्षा को जरूरी बताया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालय प्रबंधन समिति, प्रधानाध्यापक और संबंधित राजस्व विभाग संयुक्त रूप से भूमि की पैमाइश कराकर विधिवत सीमांकन करें तथा राजपाल के नाम दर्ज भूमि को विद्यालय के अभिलेखों में शामिल कर सुरक्षित कराएं, ताकि भविष्य में विवाद खत्म हो और प्रशासन के समय रहते हस्तक्षेप से बच्चों के खेलकूद का अधिकार सुरक्षित रहे।1
- पलामू जिले के विश्रामपुर स्थित डांकबंगला परिसर में मेदिनीनगर के लाइफलाइन हॉस्पिटल एवं न्यू लाइफ आईवीएफ सेंटर द्वारा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन विश्रामपुर थाना प्रभारी ऋषिकेश कुमार दुबे, एसआई शैलभ कुमार, डॉ. स्वीटी किसन पवार और डॉ. शमशाद आलम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।1
- गढ़वा के कांडी क्षेत्र में ग्रामीणों ने अपने गांव के पुराने बाजार की स्थिति को लेकर अपनी आपबीती साझा की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे किन परिस्थितियों में रह रहे हैं, यह सिर्फ वही जानते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे खुद आकर गांव के पुराने बाजार को देखें और बताएं कि वहां बाजार की क्या स्थिति बनी हुई है।1
- गढ़वा में विवाह का दावा करते हुए एक युवती अपने ससुराल पहुंची और उसने मामले में पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। दूसरी ओर, पति ने युवती द्वारा लगाए गए सभी आरोपों से साफ़ इनकार कर दिया है।1
- 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित 'संसद कूच' रैली के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई। संसद का मानसून सत्र शुरू होने के कारण नई दिल्ली इलाके में निषेधाज्ञा यानी धारा 163 (पहले की धारा 144) लागू थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर संसद की तरफ आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। भीड़ के बेकाबू होने पर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान प्रदर्शन में शामिल बेगुनाह बच्चियों पर भी पुलिस के डंडे पड़े और वे पिटाई का शिकार हुईं। दूसरी ओर, पुलिस के अनुसार उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की और बैरिकेड्स को उखाड़कर गिरा दिया।1