झांसी में आज माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झांसी कमलेश कच्छल के कुशल निर्देशन और माननीय सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झांसी ईशा त्रिपाठी के नेतृत्व में एक दिवसीय विधिक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुलिस लाइन झांसी के सभागार में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ‘जागृति योजना’ के अंतर्गत “पोक्सो एक्ट संवेदीकरण: सुरक्षित बचपन–सुरक्षित भविष्य” विषय पर केंद्रित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा पीड़ित बच्चों को त्वरित एवं संवेदनशील न्याय सुनिश्चित करना था। इस कार्यशाला में जनपद के विभिन्न थानों में नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, महिला हेल्प डेस्क पर तैनात महिला उपनिरीक्षक, पोक्सो एक्ट से संबंधित मामलों की विवेचना कर रहे विवेचक तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल प्रतीक समाधिया ने मुख्य संदर्भ व्यक्ति के रूप में पुलिस अधिकारियों को पोक्सो एक्ट से जुड़े तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान, प्रतीक समाधिया ने पीड़ित बच्चे अथवा बच्ची का बयान दर्ज करते समय बरती जाने वाली संवेदनशीलता और सावधानियों, उनके अधिकारों की सुरक्षा, एफआईआर के पंजीकरण से लेकर विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल करने तक की वैधानिक समय-सीमा तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पीड़ित बच्चों को उपलब्ध अंतरिम एवं अंतिम वित्तीय सहायता/मुआवजा प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला के अंतिम सत्र में एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें फील्ड में तैनात विवेचकों एवं महिला उपनिरीक्षकों ने पोक्सो मामलों की विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक एवं कानूनी चुनौतियों, गवाहों के बयान तथा मेडिकल साक्ष्यों से संबंधित अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं। चीफ एलएडीसी प्रतीक समाधिया ने सरल एवं स्पष्ट कानूनी व्याख्या के माध्यम से सभी प्रश्नों का समाधान किया और उपस्थित पुलिसकर्मियों की विधिक शंकाओं को दूर किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से यह संदेश दिया गया कि पुलिस और न्यायपालिका की संवेदनशीलता ही बच्चों के लिए भयमुक्त एवं सुरक्षित समाज के निर्माण की आधारशिला है। उपस्थित पुलिस अधिकारियों ने इस प्रशिक्षण को विवेचना की गुणवत्ता में सुधार हेतु अत्यंत उपयोगी एवं प्रभावी बताया।
झांसी में आज माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झांसी कमलेश कच्छल के कुशल निर्देशन और माननीय सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झांसी ईशा त्रिपाठी के नेतृत्व में एक दिवसीय विधिक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुलिस लाइन झांसी के सभागार में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ‘जागृति योजना’ के अंतर्गत “पोक्सो एक्ट संवेदीकरण: सुरक्षित बचपन–सुरक्षित भविष्य” विषय पर केंद्रित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा पीड़ित बच्चों को त्वरित एवं संवेदनशील न्याय सुनिश्चित करना था। इस कार्यशाला में जनपद के विभिन्न थानों में नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, महिला हेल्प डेस्क पर तैनात महिला उपनिरीक्षक, पोक्सो एक्ट से संबंधित मामलों की विवेचना कर रहे विवेचक तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल प्रतीक समाधिया ने मुख्य संदर्भ व्यक्ति के रूप में पुलिस अधिकारियों को पोक्सो एक्ट से जुड़े तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान, प्रतीक समाधिया ने पीड़ित बच्चे अथवा बच्ची का बयान दर्ज करते समय बरती जाने वाली संवेदनशीलता और सावधानियों, उनके अधिकारों की सुरक्षा, एफआईआर के पंजीकरण से लेकर विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल करने तक की वैधानिक समय-सीमा तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पीड़ित बच्चों को उपलब्ध अंतरिम एवं अंतिम वित्तीय सहायता/मुआवजा प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला के अंतिम सत्र में एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें फील्ड में तैनात विवेचकों एवं महिला उपनिरीक्षकों ने पोक्सो मामलों की विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक एवं कानूनी चुनौतियों, गवाहों के बयान तथा मेडिकल साक्ष्यों से संबंधित अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं। चीफ एलएडीसी प्रतीक समाधिया ने सरल एवं स्पष्ट कानूनी व्याख्या के माध्यम से सभी प्रश्नों का समाधान किया और उपस्थित पुलिसकर्मियों की विधिक शंकाओं को दूर किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से यह संदेश दिया गया कि पुलिस और न्यायपालिका की संवेदनशीलता ही बच्चों के लिए भयमुक्त एवं सुरक्षित समाज के निर्माण की आधारशिला है। उपस्थित पुलिस अधिकारियों ने इस प्रशिक्षण को विवेचना की गुणवत्ता में सुधार हेतु अत्यंत उपयोगी एवं प्रभावी बताया।
- गुरु श्री नियमित उस्ताद बेधड़क जी का 40वां कार्यक्रम आयोजित किया गया।1
- उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा 2026 को नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। प्रदेश के 72 जिलों में फैले 1011 परीक्षा केंद्रों पर 20,500 से अधिक AI आधारित CCTV कैमरों के ज़रिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इन सभी केंद्रों से परीक्षा की लाइव मॉनिटरिंग झांसी स्थित कंट्रोल कमांड सेंटर से की जाएगी। परीक्षा के सुचारु संचालन की जिम्मेदारी 37 हजार से ज़्यादा अधिकारी और कर्मचारी संभालेंगे। इस हाईटेक निगरानी व्यवस्था के तहत कुल 4.5 लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा देंगे, जिनकी हर गतिविधि पर इन AI कैमरों की पैनी नज़र रहेगी।1
- झांसी के बबीना थाना क्षेत्र में एक युवक को कार ओवरटेक करने पर एक दारोगा और एक कांस्टेबल द्वारा सरेआम पीटे जाने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह घटना तब हुई जब एक युवक अपनी कार चला रहा था और उसने बगल से गुजर रहे एक कांस्टेबल की कार को ओवरटेक कर दिया। कांस्टेबल को यह बात नागवार गुजरी और उसने युवक की कार रोककर उसे थप्पड़ मार दिया। इसके बाद बीच सड़क पर हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया और तू-तू मैं-मैं के कारण जाम लग गया। तभी बबीना थाने में तैनात दारोगा भगत सिंह भी मौके पर पहुँचे, लेकिन बीच-बचाव करने के बजाय उन्होंने भी युवक की पिटाई कर दी। इस पूरे घटनाक्रम का किसी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो तेजी से वायरल हो गया। झांसी के एसएसपी बीबीजी टी एस मूर्ति ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए सड़क पर "गुंडागर्दी" करने वाले दारोगा भगत सिंह और संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है। इस मामले की जाँच सी ओ सदर रामवीर सिंह को सौंपी गई है।1
- झांसी पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो गाय को राष्ट्र माता घोषित करेगा, वही शासन करेगा।1
- दतिया में पुलिस ने श्री पीताम्बरा पीठ के नाम पर श्रद्धालुओं से कथित तौर पर ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान आगर मालवा जिले के नलखेड़ा निवासी सुनील शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी सुनील शर्मा श्रद्धालुओं को मिर्ची हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बहाने झांसे में लेकर उनसे आर्थिक ठगी करता था। इस मामले की जांच के दौरान, साइबर सेल और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद, आरोपी सुनील शर्मा को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे, और रिमांड के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद उन लोगों में हड़कंप मच गया है, जो धार्मिक आस्था का दुरुपयोग करके श्रद्धालुओं को ठगने का काम कर रहे थे। पुलिस ने बताया है कि मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।2
- झाँसी के 2018 के चर्चित संजय वर्मा शूटआउट मामले में न्यायालय विशेष न्यायाधीश ई.सी. एक्ट की अदालत ने सभी दोषियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। इस प्रकरण में कुल आठ आरोपियों को आजीवन कारावास के साथ-साथ प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जिन दोषियों को सज़ा सुनाई गई है, उनमें उधम सिंह, भूपेंद्र, प्रहलाद, राजेंद्र, कमलेश, बॉबी, सोनू और रिंकू शामिल हैं। यह घटना नवाबाद थाना क्षेत्र के कचहरी चौराहे पर हुई फायरिंग से संबंधित है, जिसने 2018 में काफी सुर्खियाँ बटोरी थीं। सज़ा पर अदालत का फैसला आने के बाद, पुलिस सभी दोषियों को जेल ले गई। इस जानकारी को डीजीसी क्रिमिनल मृदुल कांत श्रीवास्तव ने साझा किया।2
- झांसी की बबीना पुलिस ने एक मुठभेड़ के दौरान सुकुवां गांव से चोरी हुए एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को बरामद किया है। बड़ौरा के जंगलों में हुई इस मुठभेड़ में पुलिस ने अनूप यादव दादा नामक चोर को गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से एक अवैध तमंचा और जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं।1