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मोटापा इंस्टेंट कैसे घटाएं? #BP #obesity #pain #patanjalinearme #thyroid

1 day ago
user_युवा भारत
युवा भारत
Doctor कोलेबिरा, सिमडेगा, झारखंड•
1 day ago

मोटापा इंस्टेंट कैसे घटाएं? #BP #obesity #pain #patanjalinearme #thyroid

More news from Ranchi and nearby areas
  • ओडिशा में इंडिया वन एयर का चार्टर्ड प्लेन क्रैश, पायलट को आई गंभीर चोट ओडिशा के राउरकेला से भुवनेश्वर जा रहा इंडिया वन एयर का 9-सीटर चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया. विमान में पायलट समेत कुल 6 लोग सवार थे. सभी को चोटें आई हैं और उन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
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    ओडिशा में इंडिया वन एयर का चार्टर्ड प्लेन क्रैश, पायलट को आई गंभीर चोट
ओडिशा के राउरकेला से भुवनेश्वर जा रहा इंडिया वन एयर का 9-सीटर चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया. विमान में पायलट समेत कुल 6 लोग सवार थे. सभी को चोटें आई हैं और उन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
    user_Mahavir Oraon
    Mahavir Oraon
    Tour operator Burmu, Ranchi•
    17 hrs ago
  • चाईबासा सदर अस्पताल में 'मुफ़्त' गर्म पानी पर विवाद: ₹5 के शुल्क ने खड़ा किया हंगामा, मरीज़ परेशान 11/01/2026 चाईबासा, झारखंड। आप लोग पिछले वीडियो में भी देख चुके हैं पार्ट 1 में पार्ट 2 में देखिए साफ-साफ दिख रहा है गर्म पानी के नाम पर पैसा वसूला जा रहा है मरीजों के परिजनों से पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल में मरीजों के लिए मुफ़्त गर्म पानी की सुविधा को लेकर उठे विवाद ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया, जिसमें अस्पताल के कर्मचारियों पर गर्म पानी के लिए कथित तौर पर ₹5 शुल्क लेने का आरोप लगाया गया था। क्या है मामला? अस्पताल परिसर में एक साइनबोर्ड लगा है, जिस पर स्पष्ट रूप से लिखा है: "सिर्फ मरीजों हेतु गर्म पानी के लिए रसोईघर में निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है।" हालांकि, एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को यह दावा करते हुए सुना जा सकता है कि मरीजों से इस मुफ्त सेवा के लिए ₹5 वसूले जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर अस्पताल के नियमों का उल्लंघन है। कैंटीन संचालक का स्पष्टीकरण विवाद बढ़ने पर, अस्पताल के कैंटीन संचालक ने अपनी सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्म पानी की सुविधा हमेशा से मुफ्त रही है। उनके अनुसार, कुछ लोगों द्वारा बार-बार हंगामा करने और डराने-धमकाने के कारण उन्हें यह सेवा अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी है। मरीजों की बढ़ी मुश्किलें इस घटना के बाद, गर्म पानी की सुविधा बंद हो जाने से अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिचारकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति अस्पताल प्रशासन की ढिलाई और व्यवस्था की कमी को उजागर करती है।
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    चाईबासा सदर अस्पताल में 'मुफ़्त' गर्म पानी पर विवाद: ₹5 के शुल्क ने खड़ा किया हंगामा, मरीज़ परेशान
11/01/2026
चाईबासा, झारखंड।
आप लोग पिछले वीडियो में भी देख चुके हैं पार्ट 1 में पार्ट 2 में देखिए साफ-साफ दिख रहा है गर्म पानी के नाम पर पैसा वसूला जा रहा है मरीजों के परिजनों से
पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल में मरीजों के लिए मुफ़्त गर्म पानी की सुविधा को लेकर उठे विवाद ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया, जिसमें अस्पताल के कर्मचारियों पर गर्म पानी के लिए कथित तौर पर ₹5 शुल्क लेने का आरोप लगाया गया था।
क्या है मामला?
अस्पताल परिसर में एक साइनबोर्ड लगा है, जिस पर स्पष्ट रूप से लिखा है: "सिर्फ मरीजों हेतु गर्म पानी के लिए रसोईघर में निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है।" हालांकि, एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को यह दावा करते हुए सुना जा सकता है कि मरीजों से इस मुफ्त सेवा के लिए ₹5 वसूले जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर अस्पताल के नियमों का उल्लंघन है।
कैंटीन संचालक का स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने पर, अस्पताल के कैंटीन संचालक ने अपनी सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्म पानी की सुविधा हमेशा से मुफ्त रही है। उनके अनुसार, कुछ लोगों द्वारा बार-बार हंगामा करने और डराने-धमकाने के कारण उन्हें यह सेवा अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी है।
मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
इस घटना के बाद, गर्म पानी की सुविधा बंद हो जाने से अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिचारकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति अस्पताल प्रशासन की ढिलाई और व्यवस्था की कमी को उजागर करती है।
    user_Khandait G
    Khandait G
    Reporter Jhinkpani, West Singhbhum•
    6 hrs ago
  • मैं रवि गुप्ता शुरु अप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है। 14 तारीख मकर संक्रांति शुभ उपलक्ष पर झारखंड का प्रसिद्ध मेला टूसू मेला एवं माघे पर्व के रूप में मानते हैं। उस पर्व को मनाने के लिए लोग अपने घरों की साफ -सफाई रंगई पोताई एवं तरह-तरह के व्यंजन पकवान बनाते हैं जैसे की गुड पीठा चूड़ा लड्डू, तिल लड्डू , ककरा पीठा इत्यादि। इस पर्व को मनाने के लिए नए कपड़े अपने और अपने बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए जूते चप्पल आदि सामग्री की खरीदारी करते हैं। गांव देहात में टुसू मेला का आयोजन किया जाता है जहां टुसू नाच भी होता है, गाना भी गाते हैं। फुटबॉल खेल प्रतियोगिता एवं मुर्गापाड़ा किया जाता है
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    मैं रवि गुप्ता शुरु अप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है। 14 तारीख मकर संक्रांति शुभ उपलक्ष पर झारखंड का प्रसिद्ध मेला टूसू मेला एवं  माघे  पर्व के रूप में मानते हैं। उस पर्व को मनाने के लिए लोग अपने घरों की साफ -सफाई रंगई पोताई एवं तरह-तरह के व्यंजन पकवान बनाते हैं जैसे की गुड पीठा चूड़ा लड्डू, तिल लड्डू , ककरा पीठा इत्यादि। इस पर्व को मनाने के लिए नए कपड़े अपने और अपने बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए जूते चप्पल आदि सामग्री की खरीदारी करते हैं। गांव देहात में टुसू मेला का आयोजन किया जाता है जहां टुसू नाच भी होता है, गाना भी गाते हैं। फुटबॉल खेल प्रतियोगिता एवं मुर्गापाड़ा किया जाता है
    user_Ravi Gupta
    Ravi Gupta
    सरायकेला, सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    27 min ago
  • Post by Ranthi Kumari
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    Post by Ranthi Kumari
    user_Ranthi Kumari
    Ranthi Kumari
    पतरातू, रामगढ़, झारखंड•
    2 hrs ago
  • धोखे से ‘गोद’ लिया या ममता का सौदा ? मैनपाट के मजदूर दंपति ने पड़ोसी व कोलकाता के अग्रवाल परिवार पर लगाया बच्चा छीनने का आरोप, सरगुजा एसपी से शिकायत… ₹100 के स्टांप पर दस्तखत कराकर 2 माह के मासूम को ले जाने का दावा; 1 लाख रुपये के लेनदेन की भी चर्चा सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के जामढ़ोढ़ी निवासी एक मजदूर दंपत्ति ने पुलिस अधीक्षक (SP) और पुलिस महानिरीक्षक (IG) को लिखित शिकायत सौंपकर अपने दो माह के मासूम बच्चे को साज़िश के तहत ‘गायब’ करने का संगीन आरोप लगाया है। पीड़ितों का दावा है कि उनकी गरीबी और अशिक्षा का लाभ उठाकर पड़ोसी और कोलकाता के एक दंपत्ति ने मिलकर उनके बच्चे को उनसे दूर कर दिया है। हालांकि, सच्चाई क्या है यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। शिकायत के अनुसार: भविष्य का झांसा देकर विश्वास में लिया प्रार्थी विजय कुमार और उनकी पत्नी बसंती मरावी ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वे मजदूरी कर अपने पांच बच्चों का भरण-पोषण करते हैं। उनके पड़ोसी दालू ने उन्हें विश्वास दिलाया कि कोलकाता निवासी गौतम कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी श्वेता दीवान बहुत संपन्न परिवार से हैं। प्रार्थी का आरोप है कि पड़ोसी ने उन्हें लालच दिया कि यदि वे अपने सबसे छोटे बच्चे ‘अयांश’ को उक्त दंपत्ति को सौंप देते हैं, तो वे उसका पालन-पोषण अपने पुत्र की तरह करेंगे। बच्चे के बेहतर भविष्य की उम्मीद में माता-पिता इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हो गए। न्यायालय परिसर में गोदनामे का खेल शिकायती पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि 28 दिसंबर 2025 को आरोपियों ने पीड़ित दंपत्ति को अम्बिकापुर जिला न्यायालय परिसर बुलाया। यहाँ स्टाम्प वेंडर से 100 रुपए का स्टाम्प प्राप्त कर एक दस्तावेज तैयार कराया गया। पीड़ितों का आरोप है कि नोटरी के समक्ष उन पर विधि विरुद्ध तरीके से दबाव डाला गया और उनकी अनपढ़ता का फायदा उठाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान ले लिए गए। शिकायत के मुताबिक, इसी दौरान जच्चा-बच्चा कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र भी आरोपियों ने अपने कब्जे में ले लिए। 1 लाख रुपये के लेनदेन का आरोप और मानव तस्करी की आशंका पीड़िता बसंती मरावी ने आवेदन में दावा किया है कि आरोपी गौतम कुमार अग्रवाल और श्वेता दीवान ने इस कथित समझौते के एवज में पड़ोसी दालू को 1,00,000/- (एक लाख) रुपये का भुगतान किया है। प्रार्थी ने इसे मानव तस्करी से जोड़ते हुए आशंका जताई है कि उनके बच्चे को कहीं और विक्रय कर दिया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अब उन्हें बच्चे से मिलने भी नहीं दिया जा रहा है और डराया-धमकाया जा रहा है। मामले में राउरकेला निवासी एक महिला पुष्पा अग्रवाल की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगी हकीकत कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि गोद लेने की प्रक्रिया केवल ‘कारा’ (CARA) के नियमों के तहत ही मान्य होती है, स्टाम्प पेपर पर ऐसा कोई भी समझौता विधिक रूप से शून्य है। फिलहाल, यह पूरा मामला केवल पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत किए गए ₹100 के स्टांप पर हुए कथित गोदनामा पर आधारित है। सच्चाई की पुष्टि के लिए पुलिस को आरोपियों का पक्ष और दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच करनी होगी। पीड़ित परिवार ने तत्काल FIR दर्ज करने और बच्चे की सुरक्षित बरामदगी की मांग की है। स्टाम्प पर बच्चा गोद लेना या देना ‘सफेद झूठ’ और दंडनीय अपराध ​ इस मामले में ₹100 के स्टाम्प पर जिस ‘गोदनामा’ की बात सामने आई है, कानूनन उसकी कोई मान्यता नहीं है। देश में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया बेहद सख्त है: ​CARA ही एकमात्र रास्ता: भारत में बच्चा गोद लेने के लिए ‘सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी’ (CARA) के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण और अदालती आदेश अनिवार्य है। ​जेजे एक्ट का उल्लंघन: जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act), 2015 के अनुसार, बिना कानूनी प्रक्रिया के बच्चे का हस्तांतरण करना ‘चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ (मानव तस्करी) की श्रेणी में आ सकता है। इसमें दोषी को कड़ी जेल और जुर्माने का प्रावधान है। ​नोटरी की सीमा: कोई भी नोटरी या स्टाम्प वेंडर बच्चा गोद लेने का दस्तावेज प्रमाणित करने के लिए अधिकृत नहीं है। यदि ऐसा किया गया है, तो उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आती है। ​क्यों है यह अवैध?: बच्चे कोई वस्तु नहीं हैं जिनका सौदा स्टाम्प पेपर पर किया जा सके। बिना जिला बाल संरक्षण इकाई और सीडब्ल्यूसी (CWC) की जांच के किसी को भी बच्चा सौंपना बच्चे के जीवन को खतरे में डालना माना जाता है।
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    धोखे से ‘गोद’ लिया या ममता का सौदा ? मैनपाट के मजदूर दंपति ने पड़ोसी व कोलकाता के अग्रवाल परिवार पर लगाया बच्चा छीनने का आरोप, सरगुजा एसपी से शिकायत…
₹100 के स्टांप पर दस्तखत कराकर 2 माह के मासूम को ले जाने का दावा; 1 लाख रुपये के लेनदेन की भी चर्चा
सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के जामढ़ोढ़ी निवासी एक मजदूर दंपत्ति ने पुलिस अधीक्षक (SP) और पुलिस महानिरीक्षक (IG) को लिखित शिकायत सौंपकर अपने दो माह के मासूम बच्चे को साज़िश के तहत ‘गायब’ करने का संगीन आरोप लगाया है। पीड़ितों का दावा है कि उनकी गरीबी और अशिक्षा का लाभ उठाकर पड़ोसी और कोलकाता के एक दंपत्ति ने मिलकर उनके बच्चे को उनसे दूर कर दिया है। हालांकि, सच्चाई क्या है यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
शिकायत के अनुसार: भविष्य का झांसा देकर विश्वास में लिया
प्रार्थी विजय कुमार और उनकी पत्नी बसंती मरावी ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वे मजदूरी कर अपने पांच बच्चों का भरण-पोषण करते हैं। उनके पड़ोसी दालू ने उन्हें विश्वास दिलाया कि कोलकाता निवासी गौतम कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी श्वेता दीवान बहुत संपन्न परिवार से हैं। प्रार्थी का आरोप है कि पड़ोसी ने उन्हें लालच दिया कि यदि वे अपने सबसे छोटे बच्चे ‘अयांश’ को उक्त दंपत्ति को सौंप देते हैं, तो वे उसका पालन-पोषण अपने पुत्र की तरह करेंगे। बच्चे के बेहतर भविष्य की उम्मीद में माता-पिता इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हो गए।
न्यायालय परिसर में गोदनामे का खेल
शिकायती पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि 28 दिसंबर 2025 को आरोपियों ने पीड़ित दंपत्ति को अम्बिकापुर जिला न्यायालय परिसर बुलाया। यहाँ स्टाम्प वेंडर से 100 रुपए का स्टाम्प प्राप्त कर एक दस्तावेज तैयार कराया गया। पीड़ितों का आरोप है कि नोटरी के समक्ष उन पर विधि विरुद्ध तरीके से दबाव डाला गया और उनकी अनपढ़ता का फायदा उठाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान ले लिए गए। शिकायत के मुताबिक, इसी दौरान जच्चा-बच्चा कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र भी आरोपियों ने अपने कब्जे में ले लिए।
1 लाख रुपये के लेनदेन का आरोप और मानव तस्करी की आशंका
पीड़िता बसंती मरावी ने आवेदन में दावा किया है कि आरोपी गौतम कुमार अग्रवाल और श्वेता दीवान ने इस कथित समझौते के एवज में पड़ोसी दालू को 1,00,000/- (एक लाख) रुपये का भुगतान किया है। प्रार्थी ने इसे मानव तस्करी से जोड़ते हुए आशंका जताई है कि उनके बच्चे को कहीं और विक्रय कर दिया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अब उन्हें बच्चे से मिलने भी नहीं दिया जा रहा है और डराया-धमकाया जा रहा है। मामले में राउरकेला निवासी एक महिला पुष्पा अग्रवाल की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी हकीकत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि गोद लेने की प्रक्रिया केवल ‘कारा’ (CARA) के नियमों के तहत ही मान्य होती है, स्टाम्प पेपर पर ऐसा कोई भी समझौता विधिक रूप से शून्य है। फिलहाल, यह पूरा मामला केवल पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत किए गए ₹100 के स्टांप पर हुए कथित गोदनामा पर आधारित है। सच्चाई की पुष्टि के लिए पुलिस को आरोपियों का पक्ष और दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच करनी होगी। पीड़ित परिवार ने तत्काल FIR दर्ज करने और बच्चे की सुरक्षित बरामदगी की मांग की है।
स्टाम्प पर बच्चा गोद लेना या देना ‘सफेद झूठ’ और दंडनीय अपराध
​ इस मामले में ₹100 के स्टाम्प पर जिस ‘गोदनामा’ की बात सामने आई है, कानूनन उसकी कोई मान्यता नहीं है। देश में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया बेहद सख्त है:
​CARA ही एकमात्र रास्ता: भारत में बच्चा गोद लेने के लिए ‘सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी’ (CARA) के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण और अदालती आदेश अनिवार्य है।
​जेजे एक्ट का उल्लंघन: जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act), 2015 के अनुसार, बिना कानूनी प्रक्रिया के बच्चे का हस्तांतरण करना ‘चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ (मानव तस्करी) की श्रेणी में आ सकता है। इसमें दोषी को कड़ी जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
​नोटरी की सीमा: कोई भी नोटरी या स्टाम्प वेंडर बच्चा गोद लेने का दस्तावेज प्रमाणित करने के लिए अधिकृत नहीं है। यदि ऐसा किया गया है, तो उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आती है।
​क्यों है यह अवैध?: बच्चे कोई वस्तु नहीं हैं जिनका सौदा स्टाम्प पेपर पर किया जा सके। बिना जिला बाल संरक्षण इकाई और सीडब्ल्यूसी (CWC) की जांच के किसी को भी बच्चा सौंपना बच्चे के जीवन को खतरे में डालना माना जाता है।
    user_Jarif Khan
    Jarif Khan
    Journalist सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    18 hrs ago
  • नमस्कार, मैं हूं रिपोर्टर इम्तियाज फोनवेल। आप देख रहे हैं। आज की सच्ची खबर। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में गर्भवती महिलाओं को की गई जांच। बिहार नवादा जिले के हिस्सा प्रखंड के क्षेत्र के मंझवे के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रत्येक माह की भांति 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का सफल आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को विस्तृत प्रसव पूर्व जांच के साथ आवश्यक चिकित्सीय उपचार दवाइयां एवं परामर्श प्रदान किया गया। डॉक्टर अबू सहमा के नेतृत्व में कार्यक्रम के दौरान कुल 48 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। दो अबू सहमा ने कहा कि किसी तरह की तकलीफ बीमारी होने पर स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत संपर्क करें । जांच के क्रम में एएनएम द्वारा पेट की जांच वजन रक्तचाप हीमोग्लोबिन हाइट, हेपेटाइटिस एचआईवी डायबिटीज सहित आवश्यक जांच की गई। इस दरमियान डॉक्टरों ने महिलाओं को आवश्यक दवा और परामर्श दिया गया। इस मौके पर कंपाउंडर एएनएम आशा और सभी स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे
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    नमस्कार, मैं हूं रिपोर्टर इम्तियाज फोनवेल। आप देख रहे हैं। आज की सच्ची खबर।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में गर्भवती महिलाओं को की गई जांच। 
बिहार नवादा जिले के हिस्सा प्रखंड के क्षेत्र के मंझवे के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रत्येक माह की भांति 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का सफल आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को विस्तृत प्रसव पूर्व जांच के साथ आवश्यक चिकित्सीय उपचार दवाइयां एवं परामर्श प्रदान किया गया। डॉक्टर अबू सहमा के नेतृत्व में कार्यक्रम के दौरान कुल 48 गर्भवती महिलाओं  की जांच की गई। दो अबू सहमा ने कहा कि किसी तरह की तकलीफ बीमारी होने पर स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत संपर्क करें । जांच के क्रम में एएनएम द्वारा पेट की जांच वजन रक्तचाप हीमोग्लोबिन हाइट, हेपेटाइटिस एचआईवी डायबिटीज  सहित आवश्यक जांच की गई। इस दरमियान डॉक्टरों ने महिलाओं को आवश्यक दवा और परामर्श दिया गया। इस मौके पर कंपाउंडर एएनएम आशा और सभी स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे
    user_Sanjay Verma
    Sanjay Verma
    बिजनेस के साथ साथ पत्रकारिता Jharkhand•
    19 hrs ago
  • राउरकेला में बड़ा विमान हादसा टला: पायलटों की सूझबूझ से बचीं 6 जानें, DGCA ने दिए जांच के आदेश राउरकेला, 10 जनवरी 2026: ओडिशा के राउरकेला के जल्दा (Jalda) इलाके के पास एक बड़ा विमान हादसा टल गया, जब भुवनेश्वर से आ रहे 'इंडियावन एयर' (IndiaOne Air) के एक नौ सीटों वाले विमान को आपात स्थिति में खाली मैदान में उतारना पड़ा। पायलटों की सूझबूझ की वजह से विमान में सवार सभी छह लोग सुरक्षित बच गए हैं, हालांकि उन्हें मामूली चोटें आई हैं। मुख्य विवरण: घटनास्थल: यह घटना राउरकेला हवाई अड्डे से लगभग 8 से 10 नॉटिकल मील (लगभग 15-20 किलोमीटर) पहले कंसार/जल्दा (Kansor/Jalda) इलाके में हुई। विमान का प्रकार: यह 'इंडियावन एयर' द्वारा संचालित एक नौ सीटों वाला सेसना ग्रैंड C208B (Cessna Grand C208B) विमान था। यात्री और चालक दल: विमान में चार यात्री और दो पायलट सवार थे। स्थिति: सभी घायल यात्रियों और चालक दल को स्थानीय जेपी अस्पताल (J.P. Hospital) में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। बचने का कारण: स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने पायलटों की सराहना की, जिन्होंने तकनीकी खराबी (संभवतः इंजन फेल्योर या दबाव में अचानक गिरावट) के बाद विमान को आबादी वाले क्षेत्र से दूर एक खाली खेत में उतारा। जांच और प्रशासन की कार्रवाई: विमान के चालक दल ने आपातकालीन स्थिति की घोषणा करते हुए "मेडे" (Mayday) कॉल जारी किया था, जिसके बाद विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से टूट गया था। जांच: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को घटना की सूचना दे दी गई है, और विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रशासनिक निगरानी: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्थिति की समीक्षा की है और अधिकारियों को घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है。 इस घटना ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन पायलटों के त्वरित निर्णय ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया。
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    राउरकेला में बड़ा विमान हादसा टला: पायलटों की सूझबूझ से बचीं 6 जानें, DGCA ने दिए जांच के आदेश
राउरकेला, 10 जनवरी 2026: ओडिशा के राउरकेला के जल्दा (Jalda) इलाके के पास एक बड़ा विमान हादसा टल गया, जब भुवनेश्वर से आ रहे 'इंडियावन एयर' (IndiaOne Air) के एक नौ सीटों वाले विमान को आपात स्थिति में खाली मैदान में उतारना पड़ा। पायलटों की सूझबूझ की वजह से विमान में सवार सभी छह लोग सुरक्षित बच गए हैं, हालांकि उन्हें मामूली चोटें आई हैं।
मुख्य विवरण:
घटनास्थल: यह घटना राउरकेला हवाई अड्डे से लगभग 8 से 10 नॉटिकल मील (लगभग 15-20 किलोमीटर) पहले कंसार/जल्दा (Kansor/Jalda) इलाके में हुई।
विमान का प्रकार: यह 'इंडियावन एयर' द्वारा संचालित एक नौ सीटों वाला सेसना ग्रैंड C208B (Cessna Grand C208B) विमान था।
यात्री और चालक दल: विमान में चार यात्री और दो पायलट सवार थे।
स्थिति: सभी घायल यात्रियों और चालक दल को स्थानीय जेपी अस्पताल (J.P. Hospital) में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
बचने का कारण: स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने पायलटों की सराहना की, जिन्होंने तकनीकी खराबी (संभवतः इंजन फेल्योर या दबाव में अचानक गिरावट) के बाद विमान को आबादी वाले क्षेत्र से दूर एक खाली खेत में उतारा।
जांच और प्रशासन की कार्रवाई:
विमान के चालक दल ने आपातकालीन स्थिति की घोषणा करते हुए "मेडे" (Mayday) कॉल जारी किया था, जिसके बाद विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से टूट गया था।
जांच: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को घटना की सूचना दे दी गई है, और विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।
प्रशासनिक निगरानी: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्थिति की समीक्षा की है और अधिकारियों को घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है。
इस घटना ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन पायलटों के त्वरित निर्णय ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया。
    user_Khandait G
    Khandait G
    Reporter Jhinkpani, West Singhbhum•
    6 hrs ago
  • क्षेत्र की महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों के साथ सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने किया विधायक कार्यालय में बैठक ,, महिला समूहों को सशक्त बनाने के लिए कई विषयों पर की चर्चा,, आज सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो जी ने विधायक कार्यालय में विधानसभा क्षेत्र के महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों के साथ बैठक किया ,, और सभी समूहों के द्वारा किए जा रहे कार्यों के विषय में जानकारी लेते हुए उसके बारे मे विस्तार से चर्चा की ,, वहीं विधायक जी ने महिला समूहों के द्वारा बनाए जाने वाले सामग्रियों के क्वाल्टी , मात्रा,मार्केटिंग के विषय में जानकारी लिया ,, वहीं उन्होंने सभी से चर्चा करते हुए कहा कि आप के। समूहों द्वारा आय अर्जन हेतु किए जा रहे कार्यों को विस्तार देना अत्यंत आवश्यक है यदि आपके सामनों को लोगो के बीच पहुंचना है तो उसकी ब्रांडिग आवश्यक है जिससे उसकी खपत की मात्रा बढ़े और महिला समूहों के आय में भी वृद्धि हो,, हम अपने क्षेत्र की माता बहनों को आत्म निर्भर बनाना चाहते हैं, जिसके लिए हम योजना बना रहे हैं और इसी विषय को लेकर
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    क्षेत्र की महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों के साथ सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने किया विधायक कार्यालय में बैठक ,,
महिला समूहों को सशक्त बनाने के लिए कई विषयों पर की चर्चा,,
आज सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो जी ने 
विधायक कार्यालय में विधानसभा क्षेत्र के महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों के साथ बैठक किया ,,
और सभी समूहों के द्वारा किए जा रहे कार्यों के विषय में जानकारी लेते हुए उसके
बारे मे विस्तार से चर्चा की ,,
वहीं विधायक जी ने महिला समूहों के द्वारा बनाए जाने वाले सामग्रियों के क्वाल्टी , मात्रा,मार्केटिंग के विषय में जानकारी लिया ,,
वहीं उन्होंने सभी से चर्चा करते हुए कहा कि आप के। समूहों द्वारा आय अर्जन हेतु किए जा रहे कार्यों को विस्तार देना अत्यंत आवश्यक है यदि आपके सामनों को लोगो के बीच पहुंचना है तो उसकी ब्रांडिग आवश्यक है 
जिससे उसकी खपत की मात्रा बढ़े और महिला समूहों के आय में भी वृद्धि हो,,
हम अपने क्षेत्र की माता बहनों को आत्म निर्भर बनाना चाहते हैं,
जिसके लिए हम योजना बना रहे हैं 
और इसी विषय को लेकर
    user_Jarif Khan
    Jarif Khan
    Journalist सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
  • तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिसने कई पतियों के लिए नई सोच की शुरुआत की है। कोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी नौकरीपेशा है और घरेलू काम नहीं करती, तो इसे वैवाहिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। इस फैसले में पति के आरोप को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि खाना न बनाना और सास-ससुर के घरेलू कामों में मदद न करना दांपत्य जीवन की सामान्य परेशानियां हैं, न कि क्रूरता। कोर्ट ने यह भी कहा कि आज के सामाजिक संदर्भ में कामकाजी महिलाओं से यह उम्मीद करना कि वे ऑफिस, किचन और ससुराल—तीनों को पूरी तरह से संभालें, अब नहीं हो सकता।
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    तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिसने कई पतियों के लिए नई सोच की शुरुआत की है। कोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी नौकरीपेशा है और घरेलू काम नहीं करती, तो इसे वैवाहिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। इस फैसले में पति के आरोप को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि खाना न बनाना और सास-ससुर के घरेलू कामों में मदद न करना दांपत्य जीवन की सामान्य परेशानियां हैं, न कि क्रूरता। कोर्ट ने यह भी कहा कि आज के सामाजिक संदर्भ में कामकाजी महिलाओं से यह उम्मीद करना कि वे ऑफिस, किचन और ससुराल—तीनों को पूरी तरह से संभालें, अब नहीं हो सकता।
    user_Rajesh soni
    Rajesh soni
    Jharkhand•
    23 hrs ago
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