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नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला देश के 112 आकांक्षी जिलों में पहले स्थान पर आकर एक नया इतिहास रच चुका है। स्वास्थ्य, कृषि और पोषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर अंकों के आधार पर यह राष्ट्रीय पहचान मिली है, लेकिन सोनभद्र के ओबरा नगर पंचायत के मुख्य बाजार की जमीनी हकीकत इन सरकारी कागजों पर दर्ज ऐतिहासिक प्रमाण से काफी अलग है। यह रिपोर्ट व्यक्तिगत आक्षेपों से परे, लंबे समय से चली आ रही अव्यवस्था को रेखांकित करते हुए व्यवस्था में सुधार का आह्वान करती है। ओबरा के मुख्य बाजार की पूरी अर्थव्यवस्था नगर के व्यापारियों और पनारी, जुगल, परसोई, पत्थरकुआं, कोन, कचनारवा, दुद्धी सहित दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से आने वाले लोगों के आपसी सहयोग पर टिकी है। ग्रामीण और जनजातीय लोग अपनी कड़ी मेहनत से उगाई मौसमी सब्जियां बेचने शहर आते हैं, क्योंकि उनके गांवों में खपत नहीं है। वे ओबरा के स्थानीय बाजार की रीढ़ हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण अंचलों के छोटे दुकानदार और परिवार अपनी दैनिक जरूरतों, शादी-विवाह की सामग्री, कपड़ा, घरेलू राशन, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल और कॉस्मेटिक का सामान खरीदने ओबरा के थोक व खुदरा बाजार आते थे। यह दोतरफा आवागमन ही ओबरा नगर की पूरी दुकानदारी को सुचारू रूप से चलाता था। हालांकि, इस आर्थिक और सामाजिक जुड़ाव की जीवनरेखा कही जाने वाली 'पैसेंजर ट्रेनों' के बंद होने के बाद पूरे व्यापार पर गहरा विपरीत असर पड़ा है, जिससे ओबरा के कपड़ा, बर्तन, राशन, इलेक्ट्रॉनिक और मोबाइल सहित हर छोटी-बड़ी दुकान का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और बाजार मंदी की चपेट में है। सुलभ जन-परिवहन के सरकारी साधनों की कमी के कारण अब ग्रामीणों और छोटे दुकानदारों को खरीदारी के बाद सामान वापस ले जाने में भारी समस्या आती है। सुरक्षित साधनों के अभाव में उन्हें निजी कमर्शियल पिकअप वाहनों में क्षमता से अधिक, अत्यंत असुरक्षित तरीके से माल के साथ 'भेड़-बकरियों की तरह' सफर करना पड़ता है। अपनी सीमित खरीद क्षमता पर भी उन्हें भारी-भरकम निजी भाड़ा चुकाना पड़ता है, जो उनकी मजबूरी बन गई है। एक नागरिक को पैसे देने के बावजूद सुरक्षित यात्रा का अधिकार न मिलना और पूर्व में हुए कई सड़क हादसों में निर्दोष ग्रामीणों की मौत होना स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर आधुनिक शहरों में सुगम यातायात के लिए साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वहीं देश के नंबर-1 आकांक्षी जिले के इस जनजातीय अंचल में सुचारू आवागमन की बुनियादी रूपरेखा तक नहीं है। जानलेवा सफर तय कर जब ये जनजातीय माँ-बहनें ओबरा बाजार पहुँचती हैं, तो उन्हें खुले आसमान के नीचे, तेज धूप और धूल में बैठकर अपना सामान बेचना पड़ता है। केंद्रीय 'स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम, 2014' के स्पष्ट प्रावधानों और जिला खनिज कोष (DMF) में पर्याप्त बजट होने के बावजूद, वेंडिंग ज़ोन या छायादार शेड जैसी बुनियादी व्यवस्था का न होना प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। यदि यह स्थिति जारी रही और उन्हें सुरक्षा व सही मूल्य नहीं मिला, तो ओबरा शहर की दैनिक खाद्य आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे फल-सब्जियों की भारी किल्लत और महंगाई का संकट तय है। यह विषय इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इस क्षेत्र की भौगोलिक बनावट और जनजातीय समाज के दर्द से परिचित स्थानीय जनप्रतिनिधि स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण और जनजातीय कल्याण मंत्रालय जैसी सर्वोच्च जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। लगभग 8 वर्षों से अधिक के लंबे नीतिगत कार्यकाल के बावजूद, इस व्यावहारिक संकट को योजनाबद्ध तरीके से न सुलझाए जाने के कारण यह पूरा अंचल समाज की मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस करता है। जनपद स्तर पर कानून-व्यवस्था और स्थानीय नीतियां बनाने की शक्तियों को देखते हुए, इस गंभीर संकट के समाधान के लिए केवल केंद्रीय या राज्य स्तरीय योजनाओं पर निर्भर रहना उचित नहीं है; स्थानीय प्रशासन को अपनी शक्तियों का उपयोग करके इस विसंगति को दूर करना चाहिए। ओबरा के आर्थिक ढांचे को बचाने और सरकार की लोक-कल्याणकारी मंशा को साकार करने के लिए, प्रशासन के समक्ष कुछ व्यावहारिक और नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें 'विशेष जिला कॉपरेटिव समिति' का तत्काल गठन शामिल है, जिसमें कृषि, परिवहन, नगर पंचायत और स्थानीय व्यापारियों के प्रतिनिधि हों, ताकि क्रय-विक्रय का सुरक्षित पैटर्न बने। बंद पड़ी पैसेंजर ट्रेनों के विकल्प के रूप में, दैनिक आधार पर मुख्य ग्रामीण रूटों पर 'सुलभ कृषक व व्यापारी बस सेवा' या कॉपरेटिव परिवहन की सुचारू व्यवस्था की जानी चाहिए। 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (NRLM) के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर छोटे व्यापारिक क्लस्टर और संग्रहण केंद्र बनाने का सुझाव भी दिया गया है, जहाँ से कच्चे सौदे की आपूर्ति सीधे कॉपरेटिव वाहनों के जरिए व्यवस्थित रूप से हो सके। अंत में, ओबरा नगर पंचायत द्वारा जिला खनिज कोष (DMF) के बजट का उपयोग करते हुए एक निश्चित भूभाग पर छायादार 'किसान हाट शेड', पेयजल और बुनियादी स्वच्छता (शौचालय) की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि खुले आसमान के नीचे सड़कों पर बैठने की मजबूरी खत्म हो सके।

3 hrs ago
user_Abhishek agrahari संस्थापक सोन
Abhishek agrahari संस्थापक सोन
Student union ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago
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नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला देश के 112 आकांक्षी जिलों में पहले स्थान पर आकर एक नया इतिहास रच चुका है। स्वास्थ्य, कृषि और पोषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर अंकों के आधार पर यह राष्ट्रीय पहचान मिली है, लेकिन सोनभद्र के ओबरा नगर पंचायत के मुख्य बाजार की जमीनी हकीकत इन सरकारी कागजों पर दर्ज ऐतिहासिक प्रमाण से काफी अलग है। यह रिपोर्ट व्यक्तिगत आक्षेपों से परे, लंबे समय से चली आ रही अव्यवस्था को रेखांकित करते हुए व्यवस्था में सुधार का आह्वान करती है। ओबरा के मुख्य बाजार की पूरी अर्थव्यवस्था नगर के व्यापारियों और पनारी, जुगल, परसोई, पत्थरकुआं, कोन, कचनारवा, दुद्धी सहित दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से आने वाले लोगों के आपसी सहयोग पर टिकी है। ग्रामीण और जनजातीय लोग अपनी कड़ी मेहनत से उगाई मौसमी सब्जियां बेचने शहर आते हैं, क्योंकि उनके गांवों में खपत नहीं है। वे ओबरा के स्थानीय बाजार की रीढ़ हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण अंचलों के छोटे दुकानदार और परिवार अपनी दैनिक जरूरतों, शादी-विवाह की सामग्री, कपड़ा, घरेलू राशन, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल और कॉस्मेटिक का सामान खरीदने ओबरा के थोक व खुदरा बाजार आते थे। यह

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दोतरफा आवागमन ही ओबरा नगर की पूरी दुकानदारी को सुचारू रूप से चलाता था। हालांकि, इस आर्थिक और सामाजिक जुड़ाव की जीवनरेखा कही जाने वाली 'पैसेंजर ट्रेनों' के बंद होने के बाद पूरे व्यापार पर गहरा विपरीत असर पड़ा है, जिससे ओबरा के कपड़ा, बर्तन, राशन, इलेक्ट्रॉनिक और मोबाइल सहित हर छोटी-बड़ी दुकान का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और बाजार मंदी की चपेट में है। सुलभ जन-परिवहन के सरकारी साधनों की कमी के कारण अब ग्रामीणों और छोटे दुकानदारों को खरीदारी के बाद सामान वापस ले जाने में भारी समस्या आती है। सुरक्षित साधनों के अभाव में उन्हें निजी कमर्शियल पिकअप वाहनों में क्षमता से अधिक, अत्यंत असुरक्षित तरीके से माल के साथ 'भेड़-बकरियों की तरह' सफर करना पड़ता है। अपनी सीमित खरीद क्षमता पर भी उन्हें भारी-भरकम निजी भाड़ा चुकाना पड़ता है, जो उनकी मजबूरी बन गई है। एक नागरिक को पैसे देने के बावजूद सुरक्षित यात्रा का अधिकार न मिलना और पूर्व में हुए कई सड़क हादसों में निर्दोष ग्रामीणों की मौत होना स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर आधुनिक शहरों में सुगम यातायात के लिए साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वहीं देश के नंबर-1 आकांक्षी जिले के इस जनजातीय अंचल में

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सुचारू आवागमन की बुनियादी रूपरेखा तक नहीं है। जानलेवा सफर तय कर जब ये जनजातीय माँ-बहनें ओबरा बाजार पहुँचती हैं, तो उन्हें खुले आसमान के नीचे, तेज धूप और धूल में बैठकर अपना सामान बेचना पड़ता है। केंद्रीय 'स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम, 2014' के स्पष्ट प्रावधानों और जिला खनिज कोष (DMF) में पर्याप्त बजट होने के बावजूद, वेंडिंग ज़ोन या छायादार शेड जैसी बुनियादी व्यवस्था का न होना प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। यदि यह स्थिति जारी रही और उन्हें सुरक्षा व सही मूल्य नहीं मिला, तो ओबरा शहर की दैनिक खाद्य आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे फल-सब्जियों की भारी किल्लत और महंगाई का संकट तय है। यह विषय इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इस क्षेत्र की भौगोलिक बनावट और जनजातीय समाज के दर्द से परिचित स्थानीय जनप्रतिनिधि स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण और जनजातीय कल्याण मंत्रालय जैसी सर्वोच्च जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। लगभग 8 वर्षों से अधिक के लंबे नीतिगत कार्यकाल के बावजूद, इस व्यावहारिक संकट को योजनाबद्ध तरीके से न सुलझाए जाने के कारण यह पूरा अंचल समाज की मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस करता है। जनपद स्तर पर कानून-व्यवस्था और स्थानीय नीतियां बनाने की शक्तियों को देखते हुए, इस गंभीर संकट के समाधान के लिए केवल केंद्रीय

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या राज्य स्तरीय योजनाओं पर निर्भर रहना उचित नहीं है; स्थानीय प्रशासन को अपनी शक्तियों का उपयोग करके इस विसंगति को दूर करना चाहिए। ओबरा के आर्थिक ढांचे को बचाने और सरकार की लोक-कल्याणकारी मंशा को साकार करने के लिए, प्रशासन के समक्ष कुछ व्यावहारिक और नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें 'विशेष जिला कॉपरेटिव समिति' का तत्काल गठन शामिल है, जिसमें कृषि, परिवहन, नगर पंचायत और स्थानीय व्यापारियों के प्रतिनिधि हों, ताकि क्रय-विक्रय का सुरक्षित पैटर्न बने। बंद पड़ी पैसेंजर ट्रेनों के विकल्प के रूप में, दैनिक आधार पर मुख्य ग्रामीण रूटों पर 'सुलभ कृषक व व्यापारी बस सेवा' या कॉपरेटिव परिवहन की सुचारू व्यवस्था की जानी चाहिए। 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (NRLM) के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर छोटे व्यापारिक क्लस्टर और संग्रहण केंद्र बनाने का सुझाव भी दिया गया है, जहाँ से कच्चे सौदे की आपूर्ति सीधे कॉपरेटिव वाहनों के जरिए व्यवस्थित रूप से हो सके। अंत में, ओबरा नगर पंचायत द्वारा जिला खनिज कोष (DMF) के बजट का उपयोग करते हुए एक निश्चित भूभाग पर छायादार 'किसान हाट शेड', पेयजल और बुनियादी स्वच्छता (शौचालय) की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि खुले आसमान के नीचे सड़कों पर बैठने की मजबूरी खत्म हो सके।

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  • सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र की एलसी कॉलोनी में एक बंद कमरे से सीमेंट कंपनी के 40 वर्षीय कर्मचारी मिथिलेश कुमार का शव बरामद किया गया है। यह घटना तब सामने आई जब कमरे से तेज़ दुर्गंध आने लगी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना दी। जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और कमरे का दरवाज़ा तोड़कर शव को बाहर निकाला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस द्वारा इस मामले की गहन जांच जारी है।
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    सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र की एलसी कॉलोनी में एक बंद कमरे से सीमेंट कंपनी के 40 वर्षीय कर्मचारी मिथिलेश कुमार का शव बरामद किया गया है। यह घटना तब सामने आई जब कमरे से तेज़ दुर्गंध आने लगी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना दी।

जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और कमरे का दरवाज़ा तोड़कर शव को बाहर निकाला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस द्वारा इस मामले की गहन जांच जारी है।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • सोनभद्र के रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के धर्मदासपुर गांव में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब शीतला माता मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में मिली। अराजक तत्वों ने प्रतिमा को तोड़कर नाले में फेंक दिया और मंदिर के शिखर, घंटे तथा धार्मिक ध्वज को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। जानकारी के अनुसार, गांव के समीप स्थित दुर्गा माता मंदिर में चल रहे यज्ञ कार्यक्रम के बाद शनिवार सुबह जब श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में पूजा के लिए पहुँचे तो मंदिर की बदहाली देखकर स्तब्ध रह गए। हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में थी, जबकि मंदिर के घंटे और झंडे पास के खेत में पड़े मिले। इस घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण तत्काल मंदिर परिसर में जमा हो गए। पुलिस प्रशासन भी तुरंत मौके पर पहुँचा और मामले की जाँच शुरू कर दी। पुलिस ने घटना के संबंध में चार लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ भी प्रारंभ कर दी है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अराजक तत्वों ने देर रात करीब 12 बजे के बाद लाठी-डंडों का प्रयोग कर हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की। सूचना मिलने पर विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुँचे। विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा कार्यकर्ता धर्मेंद्र पाण्डेय ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं से घटना की जाँच कर रही है, और क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मामले का खुलासा कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।
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    सोनभद्र के रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के धर्मदासपुर गांव में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब शीतला माता मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में मिली। अराजक तत्वों ने प्रतिमा को तोड़कर नाले में फेंक दिया और मंदिर के शिखर, घंटे तथा धार्मिक ध्वज को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया।

जानकारी के अनुसार, गांव के समीप स्थित दुर्गा माता मंदिर में चल रहे यज्ञ कार्यक्रम के बाद शनिवार सुबह जब श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में पूजा के लिए पहुँचे तो मंदिर की बदहाली देखकर स्तब्ध रह गए। हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में थी, जबकि मंदिर के घंटे और झंडे पास के खेत में पड़े मिले। इस घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण तत्काल मंदिर परिसर में जमा हो गए। पुलिस प्रशासन भी तुरंत मौके पर पहुँचा और मामले की जाँच शुरू कर दी। पुलिस ने घटना के संबंध में चार लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ भी प्रारंभ कर दी है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि अराजक तत्वों ने देर रात करीब 12 बजे के बाद लाठी-डंडों का प्रयोग कर हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की। सूचना मिलने पर विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुँचे। विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा कार्यकर्ता धर्मेंद्र पाण्डेय ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं से घटना की जाँच कर रही है, और क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मामले का खुलासा कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।
    user_पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार किरण गौड़ (ब्यूरो चीफ)
    Media company ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • winhamkange marnakchar kashmir hai Aaj sunday.ka hai ⛈️🌪🌫⚡️🌧 winhamkange marnakchar kashmir hai Aaj sunday.ka hai ❌️🌪🌫🌦
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    winhamkange marnakchar kashmir hai Aaj sunday.ka hai ⛈️🌪🌫⚡️🌧
winhamkange marnakchar kashmir hai Aaj sunday.ka hai ❌️🌪🌫🌦
    user_Sunil Bhai
    Sunil Bhai
    रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    17 min ago
  • Tv1 इंडिया न्यूज़ चैनल ने अपने सभी दर्शकों का स्वागत किया है। चैनल ने जानकारी दी है कि पत्रकारिता दिवस से जुड़ी पूरी और विस्तृत रिपोर्ट सोनभद्र से अशोक सिंह द्वारा प्रस्तुत की जाएगी, जिसे दर्शक चैनल पर देख सकते हैं।
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    Tv1 इंडिया न्यूज़ चैनल ने अपने सभी दर्शकों का स्वागत किया है। चैनल ने जानकारी दी है कि पत्रकारिता दिवस से जुड़ी पूरी और विस्तृत रिपोर्ट सोनभद्र से अशोक सिंह द्वारा प्रस्तुत की जाएगी, जिसे दर्शक चैनल पर देख सकते हैं।
    user_पत्रकार अशोक सिंह रेनुकूट
    पत्रकार अशोक सिंह रेनुकूट
    Robertsganj, Sonbhadra•
    2 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश में, योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गरीब व्यक्ति को विस्थापित नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई किसी गरीब को हटाने का प्रयास करता है, तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।
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    उत्तर प्रदेश में, योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गरीब व्यक्ति को विस्थापित नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई किसी गरीब को हटाने का प्रयास करता है, तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।
    user_Chandrma kumar Kumar
    Chandrma kumar Kumar
    Farmer Robertsganj, Sonbhadra•
    23 hrs ago
  • जनपद सोनभद्र के घोरावल तहसील के ग्राम पंचायत भैसवार में चकबंदी के विरोध में चल रहा धरना प्रदर्शन अपने 377वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस धरने का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के जिला अध्यक्ष बिरजू कुशवाहा कर रहे हैं। धरने में शामिल कुछ किसान हरिद्वार में आयोजित 'शिविर चिंतन' के लिए अपने निजी साधन से वहां जाएंगे। हरिद्वार में चौधरी चरण सिंह वीआईपी घाट पर 3, 4 और 5, 2026 को एक महापंचायत आयोजित की जाएगी।
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    जनपद सोनभद्र के घोरावल तहसील के ग्राम पंचायत भैसवार में चकबंदी के विरोध में चल रहा धरना प्रदर्शन अपने 377वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस धरने का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के जिला अध्यक्ष बिरजू कुशवाहा कर रहे हैं।

धरने में शामिल कुछ किसान हरिद्वार में आयोजित 'शिविर चिंतन' के लिए अपने निजी साधन से वहां जाएंगे। हरिद्वार में चौधरी चरण सिंह वीआईपी घाट पर 3, 4 और 5, 2026 को एक महापंचायत आयोजित की जाएगी।
    user_Brijesh kumar singh
    Brijesh kumar singh
    घोरावल, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र के पटवध ग्राम पंचायत में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ घाघर नदी में डूबने से 17 वर्षीय किशोरी चांदनी गोंड की मौत हो गई। बताया गया है कि चांदनी गुड़वा-गुड़िया बहाने के लिए नदी में उतरी थी और इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गई, जिससे यह हादसा हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर आगे की जाँच शुरू कर दी है। इस हृदय विदारक घटना के बाद से पीड़ित परिवार में गहरा मातम पसरा है और पूरे गाँव में शोक का माहौल है।
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    सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र के पटवध ग्राम पंचायत में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ घाघर नदी में डूबने से 17 वर्षीय किशोरी चांदनी गोंड की मौत हो गई। बताया गया है कि चांदनी गुड़वा-गुड़िया बहाने के लिए नदी में उतरी थी और इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गई, जिससे यह हादसा हुआ।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर आगे की जाँच शुरू कर दी है। इस हृदय विदारक घटना के बाद से पीड़ित परिवार में गहरा मातम पसरा है और पूरे गाँव में शोक का माहौल है।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • सोनभद्र के दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के मझौली गाँव में रविवार सुबह लगभग 8 बजे एक दंपती को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। मझौली निवासी राकेश पाल और उनकी पत्नी रेखा देवी (35) को गाँव के लोगों की सूचना पर पहुँची 108 एम्बुलेंस से सीएचसी दुद्धी भेजा गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। मारपीट में दंपती को काफी चोटें आई हैं। घटना के संबंध में राकेश पाल ने दुद्धी कोतवाली में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि उनका बेटा संदीप पाल अपने घर के पीछे आम के पेड़ के नीचे बैठा था, तभी गाँव निवासी एक पड़ोसी ने बेवजह गाली-गलौज करते हुए धमकी दी कि अगर वह आम के पेड़ के पास आया तो उसे जान से मार देंगे। जब संदीप की माता रेखा देवी बीच-बचाव करने आईं, तो पड़ोसी ने उन्हें भी गालियाँ दीं और अपने छोटे भाई को बुला लिया। इसके बाद, दोनों भाइयों ने मिलकर रेखा देवी और राकेश पाल पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। राकेश पाल ने पुलिस से अनुरोध किया है कि आरोपी भाइयों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने की मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
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    सोनभद्र के दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के मझौली गाँव में रविवार सुबह लगभग 8 बजे एक दंपती को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। मझौली निवासी राकेश पाल और उनकी पत्नी रेखा देवी (35) को गाँव के लोगों की सूचना पर पहुँची 108 एम्बुलेंस से सीएचसी दुद्धी भेजा गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। मारपीट में दंपती को काफी चोटें आई हैं।

घटना के संबंध में राकेश पाल ने दुद्धी कोतवाली में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि उनका बेटा संदीप पाल अपने घर के पीछे आम के पेड़ के नीचे बैठा था, तभी गाँव निवासी एक पड़ोसी ने बेवजह गाली-गलौज करते हुए धमकी दी कि अगर वह आम के पेड़ के पास आया तो उसे जान से मार देंगे। जब संदीप की माता रेखा देवी बीच-बचाव करने आईं, तो पड़ोसी ने उन्हें भी गालियाँ दीं और अपने छोटे भाई को बुला लिया। इसके बाद, दोनों भाइयों ने मिलकर रेखा देवी और राकेश पाल पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

राकेश पाल ने पुलिस से अनुरोध किया है कि आरोपी भाइयों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने की मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
    user_विवेक कुमार चन्द्रवंशी
    विवेक कुमार चन्द्रवंशी
    Local News Reporter दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    8 min ago
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