बैतूल जिले के भैंसदेही में पेंशनभोगियों और उनके परिजनों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें मिलने वाले आर्थिक लाभों का भुगतान लगातार 4, 6, 8 महीने या कभी-कभी 1 वर्ष बाद किया जाता है। पेंशनर्स का आरोप है कि देय लाभों में यह विलंब उनके अधिकारों पर डाका डालने जैसा है और उन्हें समय पर एरियर न मिलना घोर अन्याय है। वे अपनी मेहनत का फल समय पर मिलने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि 6-8 महीने की देरी से उनके हक पर कुठाराघात हो रहा है। पेंशनभोगियों ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट और अन्य न्यायालयों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, मध्य प्रदेश के पेंशनरों को केंद्र की तिथि से लाभ नहीं दिया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिवों को कोरोनाकाल, छठवें वेतनमान का 32 माह और सातवें वेतनमान का 27 माह का एरियर 6 प्रतिशत ब्याज की दर से तत्काल भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद स्थानीय पेंशनर्स का कहना है कि इन निर्देशों पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हो रही है। पेंशनर्स ने तीन अतिरिक्त मांगें भी रखी हैं: 80 वर्ष पूरे होने पर मिलने वाला 20 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ अब 79 वर्ष पूर्ण होने पर ही लागू किया जाए; कर्मचारियों की तरह पेंशनर्स को भी उपादान राशि (ग्रेच्युटी/लंप-सम) का भुगतान सुनिश्चित किया जाए; और उनकी समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर त्वरित निवारण किया जाए। कई पेंशनभोगी राजस्व/वित्त विभाग के कार्यालयों में आवेदन देकर परेशान हो चुके हैं, वहीं कुछ सामाजिक कार्यकर्ता व पेंशनर संघ ने जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय अधिकारी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हुए या प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है। पेंशनरों को समय पर उनकी मेहनत का फल और आर्थिक सुरक्षा मिलना शासन-प्रशासन की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। न्यायालयीन आदेशों का अनुपालन न केवल कानूनी अपेक्षा है, बल्कि यह सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है। जिन वृद्धजनों ने राज्य की सेवा में अपना सबसे सुनहरा युग लगाया, उनके प्रति प्रशासन की नजर संवेदनशील होनी चाहिए।
बैतूल जिले के भैंसदेही में पेंशनभोगियों और उनके परिजनों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें मिलने वाले आर्थिक लाभों का भुगतान लगातार 4, 6, 8 महीने या कभी-कभी 1 वर्ष बाद किया जाता है। पेंशनर्स का आरोप है कि देय लाभों में यह विलंब उनके अधिकारों पर डाका डालने जैसा है और उन्हें समय पर एरियर न मिलना घोर अन्याय है। वे अपनी मेहनत का फल समय पर मिलने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि 6-8 महीने की देरी से उनके हक पर कुठाराघात हो रहा है। पेंशनभोगियों ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट और अन्य न्यायालयों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, मध्य प्रदेश के पेंशनरों को केंद्र की तिथि से लाभ नहीं दिया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिवों को कोरोनाकाल, छठवें वेतनमान का 32 माह और सातवें वेतनमान का 27 माह का एरियर 6 प्रतिशत ब्याज की दर से तत्काल भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद स्थानीय पेंशनर्स का कहना है कि इन निर्देशों पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हो रही है। पेंशनर्स ने तीन अतिरिक्त मांगें भी रखी हैं: 80 वर्ष पूरे होने पर मिलने वाला 20 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ अब 79 वर्ष पूर्ण होने पर ही लागू किया जाए; कर्मचारियों की तरह पेंशनर्स को भी उपादान राशि (ग्रेच्युटी/लंप-सम) का भुगतान सुनिश्चित किया जाए; और उनकी समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर त्वरित निवारण किया जाए। कई पेंशनभोगी राजस्व/वित्त विभाग के कार्यालयों में आवेदन देकर परेशान हो चुके हैं, वहीं कुछ सामाजिक कार्यकर्ता व पेंशनर संघ ने जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय अधिकारी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हुए या प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है। पेंशनरों को समय पर उनकी मेहनत का फल और आर्थिक सुरक्षा मिलना शासन-प्रशासन की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। न्यायालयीन आदेशों का अनुपालन न केवल कानूनी अपेक्षा है, बल्कि यह सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है। जिन वृद्धजनों ने राज्य की सेवा में अपना सबसे सुनहरा युग लगाया, उनके प्रति प्रशासन की नजर संवेदनशील होनी चाहिए।
- Sohan Lal Rathorबैतूल, बैतूल, मध्य प्रदेशजय हिन्द2 days ago
- मध्य प्रदेश के भैंसदेही विधानसभा अंतर्गत भीमपुर विकासखंड के ग्राम रिंगढाना में गत रात्रि भीषण आगजनी की घटना घट गई, जिसमें 15 परिवारों के घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए। इस घटना में इन परिवारों की जिंदगी भर की जमा पूंजी सहित उनका सारा सामान भी जल गया। आगजनी की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत कमान संभाल ली है और पूरी मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुट गया है। घटना की सूचना मिलने पर दमकल वाहनों को मौके पर भेजकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया, वहीं एसडीईआरएफ की टीम ने भी घटनास्थल पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे स्वयं मौके पर पहुँचे और उनके निर्देशानुसार प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उनके लिए तत्काल रात्रि भोजन की व्यवस्था की गई है, साथ ही राशन, कपड़े, बर्तन एवं अन्य आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। एक मेडिकल टीम को भी प्रभावितों की जांच और उपचार के लिए निर्देशित किया गया है। कलेक्टर के निर्देशों पर राजस्व विभाग की टीम प्रभावित परिवारों की क्षति का व्यवस्थित आकलन कर रही है, ताकि उन्हें नियमानुसार शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके। प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।3
- भीम आर्मी भारत एकता मिशन और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संगठन विस्तार अभियान के तहत मध्य प्रदेश में जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां की गई हैं। इसी क्रम में, संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर अधिवक्ता धीरज आठनेरे को भीम आर्मी का बैतूल जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति भीम आर्मी के संस्थापक और लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद, राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष सुनील बैरासिया के निर्देशानुसार हुई है। अपनी नियुक्ति के बाद, धीरज आठनेरे ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे भारतीय संविधान की भावना के अनुरूप संगठन के नियमों और सिद्धांतों का पालन करते हुए महापुरुषों की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करेंगे। आठनेरे ने यह भी प्रतिबद्धता जताई कि वे सामाजिक न्याय, समानता, भाईचारा और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने के लिए पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ काम करेंगे, साथ ही समाज के अधिकारों की रक्षा और प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान, अधिकार व न्याय के लिए बिना किसी भेदभाव के हमेशा तत्पर रहेंगे। संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने धीरज आठनेरे की नियुक्ति पर उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में बैतूल जिले में संगठन और अधिक मजबूत होगा। कार्यकर्ताओं ने "जय भीम, जय संविधान" और "सेवा जोहार" के नारों के साथ इस नियुक्ति का स्वागत किया।1
- मुलताई में जहाँ एक ओर नगर पालिका द्वारा बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विवेकानंद वार्ड के निवासियों को सार्वजनिक अस्थाई शौचालय के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्डवासी इस अस्थाई शौचालय से उत्पन्न समस्याओं को लेकर त्रस्त हैं, जिससे नगर पालिका के स्वच्छता प्रयासों और जमीनी हकीकत के बीच एक विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो गई है।1
- केंद्र और राज्य सरकार द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद, आमला नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 6 की स्थिति इन दावों पर गंभीर सवाल उठा रही है। वार्ड स्थित बेसिक स्कूल के पीछे पिछले कई दिनों से कचरे का बड़ा ढेर जमा है, जिसके कारण क्षेत्र में गंदगी, बदबू और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कचरे का नियमित उठाव नहीं होने के कारण यह स्थान धीरे-धीरे एक अस्थायी डंपिंग ग्राउंड में बदल गया है। चारों ओर फैली इस गंदगी ने रहवासियों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल कर दिया है। गर्मी और बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि कचरे से उठने वाली दुर्गंध लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन रही है। रहवासियों ने बताया कि कचरे के ढेर की वजह से मच्छर, मक्खियां और आवारा पशु बड़ी संख्या में जमा रहते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्कूल के आसपास रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने कई बार नगर पालिका प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है, और उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन और नगर पालिका के स्वच्छता अभियानों पर कई सवाल खड़े करती है, जैसे कि क्या सफाई व्यवस्था केवल कागजों में ही चल रही है, स्वच्छता के लिए मिलने वाला बजट कहाँ खर्च हो रहा है, और क्यों नियमित निगरानी व जवाबदेही नहीं दिखाई दे रही है। क्षेत्रवासियों ने नगर पालिका से तत्काल कचरे का उठाव करने, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।2
- भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र की रंभा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले रिंगढाना गांव में अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस अग्निकांड की चपेट में आकर आधा दर्जन से अधिक मकान जलकर खाक हो गए हैं। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और ग्रामीण अपने घरों से सामान बचाने की जद्दोजहद में जुट गए। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते उन्होंने कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने की सूचना मिलते ही भैंसदेही से दमकल वाहन को मौके पर रवाना कर दिया गया। स्थानीय ग्रामीण भी अपने स्तर पर आग बुझाने के प्रयासों में जुटे रहे।2
- बैतूल जिले के भीमपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत रम्भा के रिंगडाना गाँव में हवा धुंध के कारण एक भयानक आग लग गई। इस भयावह अग्नि कांड में कई आदिवासी परिवारों के मकान जलकर पूरी तरह से खाक हो गए।2